बहुत कम लोग जानते होंगे कि शारदा सिन्हा का जन्म रांची से सटे माँडर के एक नर्सिंग होम में हुआ था। उनकी पढ़ाई रांची के उर्सलाइन कॉन्वेंट स्कूल में हुई थी। उनका नाम पहले विजया था बाद में वही शारदा सिन्हा हो गईं। उनके पिता रांची में ही स्कूल इंस्पेक्टर थे। उनका परिवार कोर्ट के पास रहता था। ये बातें उन्होंने खलारी के पत्रकार मुक्तिनाथ गिरी को दिये एक इंटरव्यू में बताई थी।
जहां बड़े-बड़े शैक्षणिक संस्थानों से फूहड़ डांस के वीडियो आ रहे हैं, वहीं हमारे बीएचयू में पारंपरिक सोहर हो रहा है। वही युवा प्रेम से सुन रहें हैं, मगन हो रहे हैं। हुड़दंगई की चर्चा तो हो जाती है लेकिन यूनिवर्सिटी कैंपस से निकलती अच्छी चीजों की सराहना भी होनी चाहिए। ❣️😇
पापा ने आज कहा , तो अब चुनाव लड़ रहे हो , हिम्मत चाहिए , पता नहीं कहां से तुम ये सब कर पाए हो , अब अच्छा लगता है जब कोई कहता है कि मनोज दा का पापा है , आज कोई शिकवा नहीं है जिस दिन नोकरी छोड़ी थी , तब मुझे ही गुस्सा आया था की क्या बेकार का काम कर रहे हो नेता बनना था तो मेरा पैसा क्यूं बर्बाद किया , पर अब सब ठीक है ।।
मैं क्या कहता ,मुस्कुरा रहा था ..
आपको शुक्रिया , जिन्होंने भी मेरा साथ दिया है ,मेरे बातों को समझा है मुझे आगे किया है ,उन सब का दिल से शुक्रिया, आप के बिना मैं इस जगह नहीं होता जहां आज हम सब मिलकर चुनाव लड़ रहें हैं , एक मामूली से इंसान जिनको राजनीति की समझ नहीं थी,पर मुझे अपने लोगों के दर्द का आभाष था ,धीरे धीरे आप सब ने सारठ ने मुझे दिल में जगह दी , आज मेरे बोलने ,लिखने से आप को बल मिलता है ,आपको लगता है कि कोई आपके लिए लड़ रहा है।
लेकिन सच ये भी है कि मेरे साथ आप थे , हमेशा से , मां के दुलार में बड़ो के दर्द में मैने खुद को देखा है, आज जब भी किसी से बात करता हूं तो उन्हें गैर जैसा नहीं पाता हूं ,वो दिल निकालकर रख देते हैं ये मेरे लिए अनमोल है ।
आज जहां सारठ में कुछ लोग सत्ता लोभ डर से कुछ नहीं बोल पाते हैं वो जानते हैं कि मनोज सच कह रहा है फिर भी किसी मजबूरी में मेरे साथ नहीं आते उनको भी शुक्रिया ,
जो साथ दिखते हैं उनको भी शुक्रिया ,जो विरोध करते हैं उनको भी शुक्रिया ।।
सारठ में जात पात , ओबीसी भूमिहार ये सब हमेशा से चलता है पर हमें ये बात नहीं भूलनी चाहिए कि सारठ में हमको ही रहना है सब हमारे हैं , सारठ में बदलाव की जरूरत है यहां की जनता को आज तक बेसिक सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है , एक बार लड़ लीजिए , एक अच्छे स्कूल के लिए , एक अच्छे अस्पताल के लिए , एक स्टार्टअप ( युवकों और किसानों ) के लिए , बस एक बार ।
बस पांच साल दे दीजिए ,आपको अपने निर्णय पर गर्व होगा ।
@_mansi__shukla_ Waise subah se ekmatra aapke message ka hi intezaar tha❤️
Abhi dekh paya🙂
Dhanyawad😌
Connaught Place Delhi me aapko party mil jayegi(I have arranged) Time & date aap fix kar den😊
Unblock kar dijiye(Kal Shaam 5 baje call karunga)🐥
Otherwise you know best about me😄
You🧡
#मौत_की_दौड़ 😡😡 #पढ़िए_और_समझिए 👇
#मुफ्त की रेवड़ी बांट कर वोट लेने वाले युवाओं की मौत पर क्या मातम करेंगें। ये सरकार और इनकी सिस्टम पूरी तरह नाकाम है। नाकामी के बावजूद इनके लोग थेथर की तरह ये बताते फिर रहे है की ये नियम 2016 में #रघुबर_दास की सरकार ने बनाया था और कोविड वैक्सीन के कारण लोगों के फेफड़े कमज़ोर हो गए है इसलिए इतने लोगो की मृत्यु हो रही है।।समस्या ये है की ये लोग कभी तार्किक बात करना ही नही चाहते।हमेशा इनका प्रयास रहता है की लोगो को अपने आकाओं के छोड़े गए सिगूफे को प्रचारित करके लोगो को बेवकूफ बनाना है ,चुकी भैया जी से वफादारी भी तो निभानी है😑 ये भूल जाते है या बताना नही चाहते की पहले दौड़ की प्रक्रिया से पहले परीक्षा ली जाती थी और जो परीक्षा पास करते थे उतने ही छात्र(तकरीबन 10 से 20k) को दौड़ना होता था।।जब छात्र 10 से 20 हजार की संख्या में होते थे तो #मेडिकल और #रनिंग सेंटर पर अच्छे इंतजाम होते थे और यही कारण था की रघुवर काल में #दारोगा, #वनरक्षी,#सिपाही,IRB कांस्टेबल और भी कई फिजिकल टेस्ट वाली परीक्षाएं हुई पर किसी की मृत्यु नही हुई(अगर हुई भी होगी तो एकाद)।।और जब इतनी ही चिंता थी तो सारे उल जुलुल वाले #नियमावली तो बने ही थे लगे हाथ ये भी बना देते की ""जो पेड़ पर चढ़ जायेगा उसको पुलिस में बहाल कर दिया जाएगा"" और ऐसा में नही आदरणीय गुरु जी #शिबू सोरेन ने खुद ही कहा था।।पूरे 4.8 तो युवाओं को धोखा दिया आपने और जब चुनाव आया तो इस भयंकर उमस वाले मौसम में युवाओं की लाश पर अपनी राजनीति चमकाना चाहते है ताकि युवा आपको चुनाव में वोट करे और आप इस उपलब्धि को बताते फिरे की ""देखो हमने इस भयंकर गर्मी में अपने 15 यूवाओ की लाश पर राजनीति करके भर्ती की दौड़ को पूरा करा लिया अब तुमलोग मुझे वोट दो""
झारखण्ड के युवाओं को मूर्ख समझा है क्या आपने? अब युवा समझ चुका है और अब इसका हिसाब होकर रहेगा😡😡
सरकार से में माँग करता हु की इन मृत युवाओं के परिवार को एक करोड़ रुपए और परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दे सरकार।
#justice_for_excise_candidates
#shame_on_system
@dasraghubar@amarbauri@ChampaiSoren@yourBabulal@dprakashbjp@JMMKalpanaSoren@ExamsFighters@rravi_deo@ShahiPratap@shashankrajbjp@sunny_sharad@ANI@TV45BJ@RahulGandhi@WeAreRanchi@kharge@aajtak@sudhirchaudhary@anjanaomkashyap@TheLallantop@RajatSharmaLive
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Feeling sad, Sharing my feelingsfor the first time.
I am also an UPSC aspirants, residing nearby Karol Bagh. Heard about today's incident news of the ORN. Sources saying atleast 25 are there.
Is there no value of students? Students are just a monetary items for capitalist?
इफ होप हैड ए फेस..
आठ साल हो गए। राजद्रोह के केस में छूटने के बाद कन्हैया ने, जेएनयू में स्पीच दी थी। मीडिया तब गुलामी की आदत में, इतनी रचा बसा न था।तो कई चैनलों ने उसका सीधा प्रसारण किया।
क्या स्पीच थी वो..
वक्तृत्व क्या है, विट क्या है, कॉन्सेप्ट का प्रस्तुति करण क्या होता है? बताने को पब्लिक स्पीकिंग की कक्षाओं में, वो सिलेबस का हिस्सा होनी चाहिए।
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बिहार के छोटे से गाँव में, एक छोटे परिवार में जन्मा लड़का.. जिसने अपने गंवई स्कूल और कस्बाई कॉलेज से ही, जेएनयू जैसे प्रीमियर इंसिटीट्यूशन का इंट्रान्स निकाला।
दिल्ली आया, पढ़ने।
पीएचडी की, इंटरनेशनल रिलेशन्स पर। शायद इंडियन फॉरेन सर्विस का अफसर बनना, "डॉ. कन्हैया कुमार" की कहानी का सुखांत होता।
लेकिन नियति नें कुछ और लिख रखा था।
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देश चला रहे अहंकारियो की टुच्ची राजनीति नें, विरोध की हर आवाज के गर्भपात की शुरुआत, जेएनयू से की।
तय किया, कैम्पस में हुए किसी समारोह के किसी स्पीच के डॉक्टर्ड वीडियो के बूते, वहां के छात्र संघ अध्यक्ष को राजद्रोह लगाकर जेल भेजा दिया जाए।
देश मे एक नजीर बना दी जाए।
कन्हैया जेल गए।
और छूटकर विजेता की तरह लौटे। भाषण के लिए खड़ा हुआ वो लड़का, मुझे अल्हड़ लगा, खिलंदड़ लगा।
भदेस, अशुद्धभाषी, जरा कच्चा लगा। लेकिन आधे घण्टे बाद जब उसने बात खत्म की, मेरी उम्मीदों को एक चेहरा मिल चुका था।
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एक यूनिवर्सिटी का लड़का बोल ररहा था, मगर लगा कि कोई मंजा हुआ लीडर है। भाषण में एबीवीपी की खिंचाई थी।
और फिर सरकार की, नरेंद्र मोदी की, व्यवस्था की, मीडिया की सीना ठोक खिंचाई थी।
उसने शिक्षा पर बात की, किसानों की बात की, जवानों की बात की, गरीबी की बात की, नीतियों की बात की।
उसने उस पुलिस कॉन्स्टेबल की बात की, जो गरीब का बेटा था.. जो मामूली भत्ते के लिए, सर्दी बरसात में, सत्ता का लिए डंडा सम्हाले खड़ा था।
उसने भुखमरी से, भ्रस्टाचार से, जातिवाद से आजादी की बात की। उसने फर्जी ट्वीट करने वाले संघियो दे भी आजादी की बात की।
आह कन्हैया, वाह कन्हैया.. !!
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तब हंसाते, गुदगुदाते, गाते बजाते कन्हैया का एक एक शब्द, दिल मे लगा। और याद रही एक बात-
"जब मैं जेल में था। एक थाली में खाना आया। उसमे दो कटोरी थी। एक लाल थी, एक नीली थी। मुझे लगा जब की नीला और लाल साथ है, तो देश मे कुछ अच्छा होने वाला है"
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वो कन्हैया, जो उस पुलिसवाले के दर्द से व्यथित है, जिसे जेनएयू नही मिला।
जो देश की व्यवस्था को समझकर, लड़ाई लड़ना चाहता था। जिसके पास राजनीतिक लोकतन्त्र के पायदान से आगे, सामाजिक लोकतन्त्र तक जाने का रोडमैप है, इरादा है।
जो सम्वाद के माध्यम से देश को एक नई आजादी की तरफ ले जाने का सपना संजोए है।
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दरअसल कन्हैया वैसी लीडरशिप है, जो कभी छात्र संघों की राजनीति और छात्र आंदोलनों से पनपा करती थी। जो फ्री थिंकिंग और स्वप्नजीविता से उपजती थी।
डीयू- जेएनयू के अलावे देश भर में ऐसी लीडरशिप की नर्सरी कबकी बन्द कर की जा चुकी हैं।
तो मुझे लगा कि यह लड़का, लाखो में एक है।
मैंने उसी समय चाहा था, कि वो सन्सद में घुस जाए।
स्टालिन और ख्रुश्चेव की बात करते मोदी जी का सूट पकड़ कहे-"मोदी जी.. जरा हिटलर की भी बात कर दीजिए"
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सन्सद को इलेक्टेड आटोक्रेसी से बचाने के लिए, हत्याकामी दक्षिणपंथ की तरफ बढ़ती दुनिया की गति थामने के लिए, भविष्य की कोई रोशनी बचाने के लिए, इस लड़के का सन्सद में होना जरूरी है।
और मैं दिल्ली का नही हूँ।
होता, तो भी एक वोट के सिवाय क्या ही देता। हां, लेकिन दुआएं दे सकता हूँ, प्रार्थना कर सकता हूँ।
कन्हैया के पक्ष में बोल सकता हूँ।
बता सकता हूँ कि दस साल से सन्सद में भेजे जा रहे भांड ने दिल्ली वालों के लिए अश्लील गाने खूब दिये, लेकिन कोई विजन नही दिया।
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कहना चाहता हूँ कि सांसद मनोरंजन के लिए नही चुना जाता। वो चुना जाता है विजन के लिए, स्वप्न के लिए, उम्मीदों के लिए..
किसान के लिए, जवान के लिए, छात्र के लिए, महिलाओं, बच्चो, मजदूरों, और पुलिसवालों के अधिकारों के लिए, उनकी जिंदगी में इंच भर ही सही..
राहत लाने के लिए चुना जाता है।
कन्हैया, वो चेहरा है, जिस पर दिल्ली वाले, यह उम्मीदों का दांव खेलने वाले हैं। कन्हैया की जीत, सिर्फ जीत नही...
अप्रत्याशित जीत होगी।
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लेकिन, मेरा डर अलग है। रास्ते मे ईवीएम है, चुनाव के दस दिन तक बढ़ता वोटिंग परसेंटेज है। स्कूलों में बम की अफवाह है, सैकड़ो प्रपंच हैं।
इस चक्रव्यूह से अभिमन्यु को निकाल ले जाने के लिए हर पांडव कमर कसे। हर श्रीकृष्ण अपना सुदर्शन निकाले।
उम्मीदें जिंदा रहें, इसलिए उम्मीद के इस दीपक की रक्षा करे।
ही इज, योर फेस ऑफ होप।
❤️
@kanhaiyakumar
गुलाब, ख़्वाब, दवा, ज़हर, जाम !!
क्या-क्या है.. ??
मैं आ गया हूँ, बता..
इन्तज़ाम क्या-क्या है ??
राहुल- अमेठी से !!
❤️
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जिस दिन राहुल ने कन्याकुमारी से चलना शुरू किया था, कफ़न उसी दिन सर पर बांध लिया था।
और जब से कफ़न सर पर बांधा, उसकी जिंदगी शुरू हुई है।
ये असल गांधी की जिंदगी है।
सड़कें-सँघर्ष, जनता- जेल और चारों दिशाओं से होते हमलों के सामने, खुला सीना अड़ाने का दम। इसकी राह के कांटे, फूल बन जाने मुकद्दर लिखवा कर आते हैं।
ये नया राहुल है।
एक निडर गांधी है।
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गाँधीयो के साथ खूबसूरती यह, कि इनपे हमारी ताकत चलती है।
कि हम खुश होते है, तो सर पे चढ़ा लेते है।
नाराज होते है, तो कान पकड़कर, राजमहल से बेदखल कर देते हैं। कुर्सी से उतार, इन्हें सड़को पर चलवा देते हैं।
और हर फैसला ये सर झुकाकर स्वीकार कर लेते हैं।
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इनसे किसी को डर नही लगता। इनके सामने मीडिया बोलता है, जनता बोलती है। इन्हें विपक्ष घेरता है, ये हंसकर घिर जाते हैं।
इनके सामने हम बड़े है..
जनता बड़ी है, वोट बड़ा है। गांधी छोटा हो जाने से नही डरते। वो जानते हैं, कि सत्ता की अथाह ताकत के बावजूद भी झुकना, मिलना, सुनना, मुस्कुराना, मानना-
यही लोकतन्त्र है।
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देश को यह लोकतन्त्र वापस चाहिए। उसका सिंहद्वार अमेठी को बनना है।
सबक तुमने राहुल को सिखाया था।
और सबक तुमने भी सीख लिया है।
वो सबक याद रखो। उसके कदम पड़े बगैर, अमेठी का फूल उसकी झोली में डालो।
बंदनवार सजाओ, दिए जलाओ।
क्योकि.?
फक़ीर, शेख, कलन्दर, इमाम..
क्या-क्या है
तुझे पता नहीं,
तेरा गुलाम क्या क्या है।
🙏❤️🤩🇭🇺🇭🇺🇭🇺🇭🇺
WhatsApp University : भारत की पहली #WhatsAppUniversity का पता चल गया है। महंगी फी, पांच सितारा होटलनुमा बिल्डिंग और छात्रों की शिक्षा स्तर ऐसा कि आप अपना माथा पकड़ लेंगे। किसी भी विश्वविद्यालय का मूल काम स्वतंत्र सोच वाले स्किल व नॉलेज से लैस नागरिक तैयार करना होता है, न कि भेड़ों का समूह, जो कि किसी के हांकने पर, बिना यह जाने चल निकले कि वह सही है या गलत! वीडियो में दिख रहे छात्र भारत के बड़े प्राइवेट यूनिवर्सिटी गलगोटिया के ग्रेटर नोएडा कैंपस के छात्र हैं। बाकी, विशेष जानकारी के लिए वीडियो देख लीजिए।
वीडियो स्रोत : AajTak Digital
#GalgotiaUniversity
नरेंद्र मोदी के सपनों के भारत में JNU, JAMIA, BHU, DU नहीं है। Galgotia यूनिवर्सिटी है।
यहाँ के बच्चे क्लास रूम में पढ़ने के बजाए, व्हाट्सएप पर पढ़ाई कर रहें हैं।
ABVP के छात्र नेताओं का ब्रह्म ज्ञान देखिए।
एक हताश, निराश और हारे हुए प्रधानमंत्री की बातें सुनिए:
- कांग्रेस आपके घर का कमरा छीन लेगी
- कांग्रेस आपके गले का मंगलसूत्र छीन लेगी
- कांग्रेस आपकी भैंस छीन लेगी
नरेंद्र मोदी ऐसी बहकी बहकी और झूठी बातें इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कांग्रेस उनकी 300 में से 150 से ज्यादा सीटें छीन कर सरकार बना रही है।
इस डर में मोदी, प्रधानमंत्री की गरिमा भूल ‘झूठ की मशीन’ बन गए हैं।
INDIA की सरकार जनता से लेगी नहीं, उन्हें देगी - उतना ही पैसा जितना मोदी ने अपने अरबपति मित्रों पर लुटाया है।
हमारी सरकार ‘अडानियों’ की नहीं ‘हिंदुस्तानियों’ की होगी।