सब आँखों के आँसू उजले सबके सपनों में सत्य पला!
जिसने उसको ज्वाला सौंपी
उसने इसमें मकरंद भरा,
आलोक लुटाता वह घुल-घुल
देता झर यह सौरभ बिखरा!
दोनों संगी पथ एक किंतु कब दीप खिला कब फूल जला?
जार्ज बर्नाड शॉ कहता था दुनिया में दो ही तरह के दुःख हैं।
- तुम जो चाहो वह न मिले।
- तुम जो चाहो वह मिल जाए।
जिनके पास धन है, उनकी ऑंखों में ज़रा झाँको। जिनके पास पद है, प्रतिष्ठा है, ज़रा उनके हृदय में टटोलो।
पूछो और तुम पाओगे हारे हुए तो हारे हुए हैं ही, जीते हुए भी हारे हुए हैं।
असफल तो असफल हैं ही, सफल भी असफल हैं। असफल की असफलता में तो थोड़ी आशा भी होती है, सफल की असफलता में आशा भी बुझ जाती है।
जिनके पास पद नहीं हैं, वे तो अभी दौड़ सकते हैं, उमंग से, लेकिन जिनके पास पद है, वे कहाँ जाएँ? आगे कोई सीढ़ियाँ न रहीं; आगे कोई सोपान न रहे, अब ढलान ही ढलान है, अब कोई चढ़ाव न रहा। और चढ़ाव के शिखर पर बैठकर कुछ हाथ आया नहीं।
मंज़िलें पाने की दौड़ में मनुष्य यह मानकर चलता है कि शिखर पर पहुँचते ही शांति मिल जाएगी, लेकिन शिखर शांति नहीं, शून्य देता है।
जीवन यात्रा... 🚶🏻♂️