@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@dm_sitapur@SdmAero@ChiefSecyUP@yadavsaumitra
||सीतापुर||
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर तहसील 20 वर्षों से सरकारी तालाब पर दबंग का कब्जा तालाब पाटकर उगाई जा रही फसल|
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी जमीनों और तालाबों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के सख्त निर्देशों के बावजूद सिधौली तहसील में जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है सूत्रों के हवाले से एक बड़ा मामला सामने आया है जहां एक दबंग ने सरकारी तालाब को पाटकर उस पर अवैध कब्जा जमा रखा है और बेखौफ होकर खेती कर रहा है।
तहसील सिधौली क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर लोधपुरवा निवासी हनुमान प्रसाद पर सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है|
मिली जानकारी के अनुसार आरोपी ने पिछले लगभग 20 वर्षों से तालाब को पाटकर उसे खेत में बदल दिया है और उस पर लगातार फसलें उगाई जा रही हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने तहसील प्रशासन में भी अपनी अच्छी-खासी धाक जमा रखी है जिसके चलते इतने सालों से खुलेआम चल रहे इस अवैध कब्जे पर जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं स्थानीय प्रशासन की इस बेपरवाही और खामोशी पर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक तरफ जहां प्रदेश भर में जल संरक्षण और जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर सिधौली में इस तरह भू-माफिया का रवैया सरकारी प्रयासों को मुंह चिढ़ा रहा है तालाब पटने से क्षेत्र का जलस्तर प्रभावित हो रहा है और जलीय जीवों व
पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो गया है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन और राजस्व विभाग नींद से जागता है या फिर दबंग के प्रभाव के आगे बेबस बना रहता है ग्रामीणों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर तालाब को मुक्त कराने और आरोपी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है।
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||सीतापुर||
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर तहसील 20 वर्षों से सरकारी तालाब पर दबंग का कब्जा तालाब पाटकर उगाई जा रही फसल|
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी जमीनों और तालाबों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के सख्त निर्देशों के बावजूद सिधौली तहसील में जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है सूत्रों के हवाले से एक बड़ा मामला सामने आया है जहां एक दबंग ने सरकारी तालाब को पाटकर उस पर अवैध कब्जा जमा रखा है और बेखौफ होकर खेती कर रहा है।
तहसील सिधौली क्षेत्र के ग्राम बहादुरपुर लोधपुरवा निवासी हनुमान प्रसाद पर सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप है|
मिली जानकारी के अनुसार आरोपी ने पिछले लगभग 20 वर्षों से तालाब को पाटकर उसे खेत में बदल दिया है और उस पर लगातार फसलें उगाई जा रही हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने तहसील प्रशासन में भी अपनी अच्छी-खासी धाक जमा रखी है जिसके चलते इतने सालों से खुलेआम चल रहे इस अवैध कब्जे पर जिम्मेदार अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं स्थानीय प्रशासन की इस बेपरवाही और खामोशी पर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक तरफ जहां प्रदेश भर में जल संरक्षण और जलाशयों के पुनरुद्धार के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर सिधौली में इस तरह भू-माफिया का रवैया सरकारी प्रयासों को मुंह चिढ़ा रहा है तालाब पटने से क्षेत्र का जलस्तर प्रभावित हो रहा है और जलीय जीवों व
पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो गया है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद जिला प्रशासन और राजस्व विभाग नींद से जागता है या फिर दबंग के प्रभाव के आगे बेबस बना रहता है ग्रामीणों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर तालाब को मुक्त कराने और आरोपी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की मांग की है।
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लेसा अधिकारियों की सांठगांठ से नियमों की उड़ीं धज्जियां बकाया बिल वाले पते और खाली प्लॉट पर जारी हुआ नया बिजली कनेक्शन
||लखनऊ||
राजधानी के गोमती नगर ज़ोन अंतर्गत चिनहट उपखंड क्षेत्र से एक गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।
न्यू कनेक्शन के अवर अभियंता हरेन्द्र कुमार पर भारी बकाया बिल होने के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर नया बिजली कनेक्शन जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गोमती नगर विस्तार पावर हाउस सेक्टर 01 स्थित भैंसौरा क्षेत्र में एक खाली प्लॉट पर यह कनेक्शन निर्गत कर दिया गया। विभागीय नियमों के विपरीत यह पूरी प्रक्रिया एक संविदाकर्मी द्वारा तैयार की गई सर्वेक्षण आख्या के आधार पर पूरी की गई।
मामले के दस्तावेज से बड़ा खुलासा हुआ है
पुराना बकाया (Account No. 9665-339-988): उक्त परिसर/उपभोक्ता पर कुल ₹59,778 का पुराना बकाया दर्ज था जिसमें ₹55,914.90 का पिछला बकाया शामिल था|
बकाया जमा कराए बिना ही उसी परिसर/नाम से मात्र 1 किलोवाट का नया स्मार्ट पोस्टपेड कनेक्शन जारी कर दिया गया।
जैसे ही मामले की भनक अधिकारियों को लगी और खुलासा होने का डर हुआ आनन-फानन में बकाए का पार्ट पेमेंट जमा कराकर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की गई।
सरकारी राजस्व को चूना लगाने और खाली प्लॉट पर बिना उचित भौतिक सत्यापन के नियम विरुद्ध कनेक्शन निर्गत करने में अवर अभियंता हरेन्द्र कुमार व संबंधित संविदाकर्मी की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं|
सुदर्शन प्रवाह उच्चाधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त विभागीय कार्यवाही की मांग की जा रही है।
@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@aksharmaBharat@EMofficeUP@ChairmanUppcl@mduppcl@MVVNLmd@MVVNLHQ@Gomtinagarzone@ChiefSecyUP
लेसा अधिकारियों की सांठगांठ से नियमों की उड़ीं धज्जियां बकाया बिल वाले पते और खाली प्लॉट पर जारी हुआ नया बिजली कनेक्शन
||लखनऊ||
राजधानी के गोमती नगर ज़ोन अंतर्गत चिनहट उपखंड क्षेत्र से एक गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है।
न्यू कनेक्शन के अवर अभियंता हरेन्द्र कुमार पर भारी बकाया बिल होने के बावजूद नियमों को ताक पर रखकर नया बिजली कनेक्शन जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गोमती नगर विस्तार पावर हाउस सेक्टर 01 स्थित भैंसौरा क्षेत्र में एक खाली प्लॉट पर यह कनेक्शन निर्गत कर दिया गया। विभागीय नियमों के विपरीत यह पूरी प्रक्रिया एक संविदाकर्मी द्वारा तैयार की गई सर्वेक्षण आख्या के आधार पर पूरी की गई।
मामले के दस्तावेज से बड़ा खुलासा हुआ है
पुराना बकाया (Account No. 9665-339-988): उक्त परिसर/उपभोक्ता पर कुल ₹59,778 का पुराना बकाया दर्ज था जिसमें ₹55,914.90 का पिछला बकाया शामिल था|
बकाया जमा कराए बिना ही उसी परिसर/नाम से मात्र 1 किलोवाट का नया स्मार्ट पोस्टपेड कनेक्शन जारी कर दिया गया।
जैसे ही मामले की भनक अधिकारियों को लगी और खुलासा होने का डर हुआ आनन-फानन में बकाए का पार्ट पेमेंट जमा कराकर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की गई।
सरकारी राजस्व को चूना लगाने और खाली प्लॉट पर बिना उचित भौतिक सत्यापन के नियम विरुद्ध कनेक्शन निर्गत करने में अवर अभियंता हरेन्द्र कुमार व संबंधित संविदाकर्मी की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं|
सुदर्शन प्रवाह उच्चाधिकारियों से इस पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त विभागीय कार्यवाही की मांग की जा रही है।
@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@AdminLKO@LkoDevAuthority
||लखनऊ||
लखनऊ विकास प्राधिकरण लखनऊ विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले गोमती नगर विस्तार सेक्टर 06 में विकास कार्यों की पोल खुलती नजर आ रही है। ठेकेदार की गैर-जिम्मेदारी और प्रशासन की अनदेखी के चलते मलेशियामऊ और आसपास के ग्रामीण एक-एक बूंद साफ हवा और सफाई के लिए तरस रहे हैं|
पीली कॉलोनी से मलेशियामऊ होते हुए एम.आई. रसल कोर्ट तक जाने वाले नाले का निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है। नाले का निकास पूरा न होने के कारण पूरे गांव का गंदा पानी सड़कों और आवसीय क्षेत्रों में जमा हो रहा है। जल निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से पूरा इलाका बदबूदार माहौल में तब्दील हो चुका है।
अधूरा पड़ा नाला इस समय कूड़े-कचरे और बजबजाते पानी का डंपिंग यार्ड बन गया है। नाले में पानी ठहरा होने के कारण भयानक स्तर पर मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि स्थानीय लोग डेंगू,मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार इस नरकीय स्थिति की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सुध नहीं ली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई करते हुए नाले का निर्माण जल्द पूरा नहीं कराया गया तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
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||लखनऊ||
लखनऊ विकास प्राधिकरण लखनऊ विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले गोमती नगर विस्तार सेक्टर 06 में विकास कार्यों की पोल खुलती नजर आ रही है। ठेकेदार की गैर-जिम्मेदारी और प्रशासन की अनदेखी के चलते मलेशियामऊ और आसपास के ग्रामीण एक-एक बूंद साफ हवा और सफाई के लिए तरस रहे हैं|
पीली कॉलोनी से मलेशियामऊ होते हुए एम.आई. रसल कोर्ट तक जाने वाले नाले का निर्माण कार्य ठेकेदार द्वारा बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया है। नाले का निकास पूरा न होने के कारण पूरे गांव का गंदा पानी सड़कों और आवसीय क्षेत्रों में जमा हो रहा है। जल निकासी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था न होने से पूरा इलाका बदबूदार माहौल में तब्दील हो चुका है।
अधूरा पड़ा नाला इस समय कूड़े-कचरे और बजबजाते पानी का डंपिंग यार्ड बन गया है। नाले में पानी ठहरा होने के कारण भयानक स्तर पर मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि स्थानीय लोग डेंगू,मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे कई बार इस नरकीय स्थिति की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सुध नहीं ली जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई करते हुए नाले का निर्माण जल्द पूरा नहीं कराया गया तो वे उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे।
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सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर बिजली विभाग के अवर अभियंता का कारनामा उजागर भारी बकाये के बावजूद जारी किया नया कनेक्शन
लखनऊ।
राजधानी के गोमती नगर ज़ोन अंतर्गत आने वाले लौलाई पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग का एक बड़ा खेल सामने आया है नियमों को ताक पर रखकर न्यू कनेक्शन विभाग के अवर अभियंता द्वारा भारी बकायेदारी वाले परिसर पर नया बिजली कनेक्शन निर्गत कर दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार संबंधित उपभोक्ता रामचंद्र सिंह पर लगभग ₹70,471 का बकाया दर्ज है।
विभाग के कड़े नियमों के मुताबिक जब तक पुराना बकाया चुकता नहीं होता नया कनेक्शन जारी नहीं किया जा सकता लेकिन लौलाई पावर हाउस के अवर अभियंता न्यू कनेक्शन ने विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नया कनेक्शन चालू करवा दिया।
सूत्रों के मुताबिक महीनों तक यह खेल चलता रहा जब यह मामला उच्च अधिकारियों और मीडिया की संज्ञान में आने लगा तथा भनक लगते ही भेद खुलने का डर सताने लगा तो आनन-फानन में लीपापोती की कोशिश शुरू कर दी गई साक्ष्य छिपाने और खुद को बचाने के लिए दबाव बनाकर उपभोक्ता से ₹20,000 की राशि जमा कराई गई|
इस पूरे घटनाक्रम ने लेसा के सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारियों की साठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं अब देखना यह होगा कि मामले का खुलासा होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी संबंधित अवर अभियंता पर क्या अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हैं।
@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@aksharmaBharat@EMofficeUP@ChairmanUppcl@mduppcl@Dircompvvnl@Gomtinagarzone
सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर बिजली विभाग के अवर अभियंता का कारनामा उजागर भारी बकाये के बावजूद जारी किया नया कनेक्शन
लखनऊ।
राजधानी के गोमती नगर ज़ोन अंतर्गत आने वाले लौलाई पावर हाउस क्षेत्र में बिजली विभाग का एक बड़ा खेल सामने आया है नियमों को ताक पर रखकर न्यू कनेक्शन विभाग के अवर अभियंता द्वारा भारी बकायेदारी वाले परिसर पर नया बिजली कनेक्शन निर्गत कर दिया गया।
मिली जानकारी के अनुसार संबंधित उपभोक्ता रामचंद्र सिंह पर लगभग ₹70,471 का बकाया दर्ज है।
विभाग के कड़े नियमों के मुताबिक जब तक पुराना बकाया चुकता नहीं होता नया कनेक्शन जारी नहीं किया जा सकता लेकिन लौलाई पावर हाउस के अवर अभियंता न्यू कनेक्शन ने विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नया कनेक्शन चालू करवा दिया।
सूत्रों के मुताबिक महीनों तक यह खेल चलता रहा जब यह मामला उच्च अधिकारियों और मीडिया की संज्ञान में आने लगा तथा भनक लगते ही भेद खुलने का डर सताने लगा तो आनन-फानन में लीपापोती की कोशिश शुरू कर दी गई साक्ष्य छिपाने और खुद को बचाने के लिए दबाव बनाकर उपभोक्ता से ₹20,000 की राशि जमा कराई गई|
इस पूरे घटनाक्रम ने लेसा के सिस्टम और जिम्मेदार अधिकारियों की साठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं अब देखना यह होगा कि मामले का खुलासा होने के बाद वरिष्ठ अधिकारी संबंधित अवर अभियंता पर क्या अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हैं।
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वाह रे विजली विभाग 5 महीनों से दौड़ रहा किसान नहीं पसीजा अधिकारियों का दिल
पावर कारपोरेशन के दावों की खुली पोल 5 महीने से एस्टीमेट के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा किसान नहीं मिला ट्यूबवेल कनेक्शन|
||लखनऊ||
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को सुचारू सिंचाई सुविधा देने के लिए चलाए जा रहे निजी नलकूप योजना पर विभागीय लापरवाही भारी पड़ रही है। जानकीपुरम क्षेत्र लेसा लखनऊ में विद्युत विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण किसान महीनों से ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए भटकने को मजबूर हैं।
मामला बक्शी का तालाब के ग्राम मजोरिया का है पीड़ित किसान राजीव कुमार शर्मा खसरा नंबर 14 ने पोर्टल के माध्यम से 8 हॉर्स पावर के ट्यूबवेल कनेक्शन हेतु आवेदन संख्या: 1008615030 किया था।
अधिशासी अभियंता कलेक्शन जानकीपुरम द्वारा दिनांक 26 मई 2026 को पत्रांक 2983 जारी कर अधिशासी अभियंता (11 KV/LT जानकीपुरम को स्थलीय निरीक्षण कर प्राक्कलन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश के साढ़े तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा एस्टीमेट जारी नहीं किया गया।
पीड़ित किसान का कहना है कि एस्टीमेट न मिलने से ट्यूबवेल कनेक्शन लटका हुआ है जिससे फसलों की सिंचाई पूरी तरह बाधित हो रही है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
लापरवाही से तंग आकर किसान राजीव शर्मा ने अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन शक्ति भवन प्रबंध निदेशक एमवीवीएनएल सहित लेसा के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर त्वरित कार्यवाही की मांग की है किसान ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द एस्टीमेट जारी कर कनेक्शन नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन हेतु बाध्य होंगे।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री व पावर कारपोरेशन की प्राथमिकता वाली इस योजना पर विभागीय अधिकारी कब चेतते हैं या किसानों को यूं ही दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
@myogiadityanath@myogioffice@CMOfficeUP@EMofficeUP@aksharmaBharat@mvvnllesatrans@ChairmanUppcl@mduppcl@Dircompvvnl
वाह रे विजली विभाग 5 महीनों से दौड़ रहा किसान नहीं पसीजा अधिकारियों का दिल
पावर कारपोरेशन के दावों की खुली पोल 5 महीने से एस्टीमेट के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा किसान नहीं मिला ट्यूबवेल कनेक्शन|
||लखनऊ||
प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को सुचारू सिंचाई सुविधा देने के लिए चलाए जा रहे निजी नलकूप योजना पर विभागीय लापरवाही भारी पड़ रही है। जानकीपुरम क्षेत्र लेसा लखनऊ में विद्युत विभाग के अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण किसान महीनों से ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए भटकने को मजबूर हैं।
मामला बक्शी का तालाब के ग्राम मजोरिया का है पीड़ित किसान राजीव कुमार शर्मा खसरा नंबर 14 ने पोर्टल के माध्यम से 8 हॉर्स पावर के ट्यूबवेल कनेक्शन हेतु आवेदन संख्या: 1008615030 किया था।
अधिशासी अभियंता कलेक्शन जानकीपुरम द्वारा दिनांक 26 मई 2026 को पत्रांक 2983 जारी कर अधिशासी अभियंता (11 KV/LT जानकीपुरम को स्थलीय निरीक्षण कर प्राक्कलन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।
आदेश के साढ़े तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा एस्टीमेट जारी नहीं किया गया।
पीड़ित किसान का कहना है कि एस्टीमेट न मिलने से ट्यूबवेल कनेक्शन लटका हुआ है जिससे फसलों की सिंचाई पूरी तरह बाधित हो रही है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
लापरवाही से तंग आकर किसान राजीव शर्मा ने अध्यक्ष उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन शक्ति भवन प्रबंध निदेशक एमवीवीएनएल सहित लेसा के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर त्वरित कार्यवाही की मांग की है किसान ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द एस्टीमेट जारी कर कनेक्शन नहीं दिया गया तो वे उग्र आंदोलन हेतु बाध्य होंगे।
अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री व पावर कारपोरेशन की प्राथमिकता वाली इस योजना पर विभागीय अधिकारी कब चेतते हैं या किसानों को यूं ही दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
@myogiadityanath@CMOfficeUP@aksharmaBharat@EMofficeUP@ChairmanUppcl@Dircompvvnl@mduppcl@Gomtinagarzone@ChiefSecyUP विद्युत कर्मियों का दुर्भाग्य लगातार 4 माह से 16 घंटे की ड्यूटी बीमार पत्नी और नवजात बच्चे के साथ उपकेंद्र में काम करने को मजबूर SSO अधिकारियों की अनदेखी से रोष|
||लखनऊ||
राजधानी लखनऊ के अंतर्गत विद्युत उपकेंद्र लौलाई से विभागीय लापरवाही और कर्मचारियों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों की उदासीनता के कारण उपकेंद्र की व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रही हैं।
लगातार चार महीनों से बिना किसी अवकाश के 16-16 घंटे की कठिन रात्रि पाली में ड्यूटी करते-करते सब-स्टेशन ऑपरेटर (SSO) अभिषेक कुमार गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं।
विद्युत उपकेंद्र लौलाई में रिलीवर और पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
संविदा पर तैनात तीन सब-स्टेशन ऑपरेटर—अभिषेक कुमार अमरीश कुमार और विवेक सिंह—पिछले 4 महीनों से बिना किसी छुट्टी के लगातार ओवरटाइम और कठिन पालियों में काम करने को मजबूर हैं।
स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि SSO अभिषेक कुमार की पत्नी पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार हैं घर पर देखभाल करने वाला कोई न होने और ड्यूटी से छुट्टी न मिलने के कारण वे अपने मासूम नवजात बच्चे को उपकेंद्र में साथ रखकर ड्यूटी निभाने पर विवश हैं अत्यधिक मानसिक व शारीरिक तनाव के कारण अब अभिषेक की तबीयत खुद बिगड़ चुकी है।
पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और उपकेंद्र पर स्टाफ की कमी को लेकर 33 केवी के जूनियर इंजीनियर को बार-बार अवगत कराया और गुहार लगाई इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के सिर पर जूं तक नहीं रेंग रही है 33 केवी जैसे संवेदनशील और हाई-वोल्टेज उपकेंद्र पर बिना आराम के लगातार ड्यूटी कराना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है।
कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी अप्रिय घटना या तकनीकी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यदि बिजली विभाग के आला अधिकारियों ने जल्द ही मामले का संज्ञान लेकर रिलीवर की तैनाती नहीं की और कर्मचारियों को राहत नहीं दी तो सभी संविदा कर्मी ड्यूटी छोड़कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
@myogiadityanath@CMOfficeUP@aksharmaBharat@EMofficeUP@ChairmanUppcl@Dircompvvnl@mduppcl@Gomtinagarzone@ChiefSecyUP विद्युत कर्मियों का दुर्भाग्य लगातार 4 माह से 16 घंटे की ड्यूटी बीमार पत्नी और नवजात बच्चे के साथ उपकेंद्र में काम करने को मजबूर SSO अधिकारियों की अनदेखी से रोष|
||लखनऊ||
राजधानी लखनऊ के अंतर्गत विद्युत उपकेंद्र लौलाई से विभागीय लापरवाही और कर्मचारियों के शोषण का एक गंभीर मामला सामने आया है बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों की उदासीनता के कारण उपकेंद्र की व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रही हैं।
लगातार चार महीनों से बिना किसी अवकाश के 16-16 घंटे की कठिन रात्रि पाली में ड्यूटी करते-करते सब-स्टेशन ऑपरेटर (SSO) अभिषेक कुमार गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं।
विद्युत उपकेंद्र लौलाई में रिलीवर और पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
संविदा पर तैनात तीन सब-स्टेशन ऑपरेटर—अभिषेक कुमार अमरीश कुमार और विवेक सिंह—पिछले 4 महीनों से बिना किसी छुट्टी के लगातार ओवरटाइम और कठिन पालियों में काम करने को मजबूर हैं।
स्थिति की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि SSO अभिषेक कुमार की पत्नी पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार हैं घर पर देखभाल करने वाला कोई न होने और ड्यूटी से छुट्टी न मिलने के कारण वे अपने मासूम नवजात बच्चे को उपकेंद्र में साथ रखकर ड्यूटी निभाने पर विवश हैं अत्यधिक मानसिक व शारीरिक तनाव के कारण अब अभिषेक की तबीयत खुद बिगड़ चुकी है।
पीड़ित कर्मचारियों का आरोप है कि उन्होंने अपनी समस्याओं और उपकेंद्र पर स्टाफ की कमी को लेकर 33 केवी के जूनियर इंजीनियर को बार-बार अवगत कराया और गुहार लगाई इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के सिर पर जूं तक नहीं रेंग रही है 33 केवी जैसे संवेदनशील और हाई-वोल्टेज उपकेंद्र पर बिना आराम के लगातार ड्यूटी कराना किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है।
कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे सवाल उठा रहे हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी अप्रिय घटना या तकनीकी हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यदि बिजली विभाग के आला अधिकारियों ने जल्द ही मामले का संज्ञान लेकर रिलीवर की तैनाती नहीं की और कर्मचारियों को राहत नहीं दी तो सभी संविदा कर्मी ड्यूटी छोड़कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।
@myogiadityanath@EMofficeUP@aksharmaBharat@CMOfficeUP@mduppcl@ChairmanUppcl@MDTransmissions
ऊर्जा विभाग में नियम-कानून ताक पर 12 साल से एक ही कारपोरेशन में जमे अफ़सर को प्रमोशन के बाद फिर वहीं तैनाती
दस साल के ट्रांसफर नियम का उल्लंघन बीजेपी विधायक ने लिखा पत्र कार्यवाही दबाने का आरोप
||लखनऊ||
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग में नियमों को दरकिनार कर चहेते अधिकारियों को मनचाही तैनाती देने का गंभीर मामला सामने आया है विद्युत पारेषण खंड-प्रथम लखनऊ में तैनात अधिशासी अभियंता आलोक आनंद गुप्ता को अधीक्षण अभियंता पद पर पदोन्नति देने के बाद नियम विरुद्ध तरीके से पुनः उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड में ही तैनात कर दिया गया है। विभाग के स्थानांतरण नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए की गई इस तैनाती पर अब बिजली महकमे में सवाल उठने लगे हैं।
ऊर्जा विभाग के नियमानुसार, किसी भी अधिकारी के एक ही कारपोरेशन में 10 वर्ष पूर्ण हो जाने के बाद कंपनी स्थानांतरण जैसे ट्रांसमिशन से वितरण कंपनियों में किया जाना अनिवार्य है।
रिकॉर्ड्स के अनुसार आलोक आनंद गुप्ता पिछले 12 वर्ष 8 माह और 25 दिनों से लगातार उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड में ही कार्यरत हैं इसके बावजूद पदोन्नति के बाद उन्हें वितरण कंपनी में न भेजकर पुनः ट्रांसमिशन में ही अधीक्षण अभियंता बना दिया गया।
143-कस्ता लखीमपुर-खीरी से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सौरभ सिंह सोनू ने इस गंभीर अनियमितता पर कड़ा संज्ञान लिया है।
उन्होंने दिनांक 22 अगस्त 2026 पत्रांक संदर्भ 180 दिनांक 20/अगस्त 26 को निदेशक कार्मिक प्रशासन एवं प्रबन्धन शक्ति भवन लखनऊ को पत्र लिखकर नियमों की अनदेखी पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है विधायक ने इस पत्र की प्रतियां अध्यक्ष यूपीपीसीएल एवं प्रबन्ध निदेशक ट्रांसमिशन को भी कार्यवाही हेतु प्रेषित की हैं।
विधायक सौरभ सिंह सोनू द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि मुख्य अभियंता पारेषण मध्य लखनऊ संजय गुप्ता और पदोन्नत अधीक्षण अभियंता आलोक आनंद दोनों गोरखपुर के निवासी हैं पूर्व में दोनों अधिकारी ई.टी.आई. सरोजनी नगर लखनऊ में सरकारी आवास में अगल-बगल रहते थे तथा दोनों के बीच गहरे ताल्लुकात हैं।
जब संजय गुप्ता उन्नाव में अधिशासी अभियंता थे तब आलोक आनंद सरोजनी नगर में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत थे आरोप है कि इसी साठगांठ और सरपरस्ती के कारण नियम विरुद्ध तैनाती को हरी झंडी दी गई।
सूत्रों का दावा है कि आलोक आनंद के कार्यकाल के दौरान लापरवाही के कारण कई बिजली घर ब्लैकआउट हो चुके हैं तथा जेहटा में 500 एमवीए का पावर ट्रांसफॉर्मर भी फुक चुका है।
इसके बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा उन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई करने के बजाय उनकी कार्यशैली की तारीफों के पुल बांधे गए ताकि चेयरमैन और एमडी ट्रांसमिशन को अंधेरे में रखा जा सके।
आरोप यह भी है कि डीपी अनुभाग और एमडी ट्रांसमिशन के स्टाफ अफसर के रूप में तैनात 2014 बैच के इनके जूनियर अधिशासी अभियंता लगातार इनके 'संकटमोचक' बने हुए हैं।
मामले में शक्ति भवन स्थित निदेशक कार्मिक ट्रांसमिशन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं आरोप है कि जन प्रतिनिधियों विधायकों द्वारा भेजे गए पत्रों पर त्वरित कार्यवाही करने के बजाय उन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।
चर्चा है कि आलोक आनंद ने लखनऊ या सुल्तानपुर में अपनी तैनाती बनाए रखने के लिए भारी प्रभाव का इस्तेमाल किया जिसके बाद नियमों को ताक पर रखकर यह आदेश जारी कराया गया।
10 साल की समयावधि 12 वर्ष 8 माह 25 दिन बीतने के बाद भी वितरण कंपनी में ट्रांसफर क्यों नहीं किया गया?
क्या चेयरमैन यूपीपीसीएल की आंखों में धूल झोंककर यह आदेश कराया गया?
क्या यूपीपीसीएल चेयरमैन और एमडी ट्रांसमिशन मामले का संज्ञान लेकर नियम विरुद्ध तैनाती आदेश को निरस्त करेंगे?
अब देखना यह होगा कि ऊर्जा विभाग के उच्चाधिकारी इस नियम विरुद्ध आदेश को संशोधित कर निष्पक्ष कार्यवाही करते हैं या फिर यह मामला विभाग में भ्रष्टाचार और मनमानी की एक नई नज़ीर बनेगा।