Former Delhi Chief Minister @ArvindKejriwal joined in solidarity with our ongoing hunger strike on its 19th day at Jantar Mantar.
@dpradhanbjp must go!
नेहा शानदार बोलती हैं, ये सब जानते हैं, अक्सर सुनते हैं।
नेहा छात्रों के मुद्दे पर हर बार डटी रहती हैं, सभी छात्र जानते हैं।
नेहा मृदुभाषी हैं, शालीन, सभ्य, सेंसटिव हैं, हम फ्रेंड्स जानते हैं।
मगर नेहा दृढ़ निश्चयी और जुझारू हैं; पूरा देश देख रहा है, पूरी दुनिया मानेगी।✊।
इंसाफ दो, वरना जान से मार दो
चिता आंदोलन मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में आदिवासी समुदायों द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध प्रदर्शन है।
लोग अपनी जान जोखिम में डालकर लेटकर या बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों की ज़मीन, घर, संस्कृति और आजीविका का डूबना उनके लिए मौत से बदतर है।
केन-बेतवा परियोजना के तहत दौधन बांध बनने से लगभग 22 गांव प्रभावित, 7,000+ परिवारों का गांव डूब जाएगा
दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक जी का आमरण अनशन हो या मध्यप्रदेश के छतरपुर का फांसी सत्याग्रह, हर मोर्चे पर आदिवासी समाज लोकतंत्र, संविधान, जल-जंगल-जमीन, शिक्षा और देश के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।
जंतर-मंतर पर चल रहे युवाओं के आंदोलन और सोनम वांगचुक के समर्थन में पहुँचे किसान नेता राकेश टिकैत ने साफ़ संदेश दिया कि किसान और युवा अन्याय के ख़िलाफ़ एकजुट हैं।
उन्होंने कहा - "ट्रैक्टर-ट्रॉली तैयारी खड़ी हैं, चिंता मत करो... तानाशाह बादशाह का अंत होगा।"
जब शिक्षा, रोजगार, किसानों के अधिकार और लोकतांत्रिक आवाज़ें एक साथ खड़ी होती हैं, तो यह केवल किसी एक आंदोलन की नहीं, बल्कि जनहित और जवाबदेही की लड़ाई बन जाती है। सत्ता को विरोध की आवाज़ सुननी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र संवाद से चलता है, दमन से नहीं।
जब नागरिकों को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए दिनों तक भूखे रहने पर मजबूर होना पड़े, तो यह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय होना चाहिए।
पहली बार किसी रिपोर्टर को ' इंकलाब
ज़िंदाबाद ' जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.
ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है ?
टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी ?
या बस ऐसे ही ?
आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे . आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है - इंकलाब जिंदाबाद
हर ज़ोर ज़ुल्म के टक्कर में / संघर्ष हमारा नारा है
बीते दिन गया के मुहल्ले, सड़कें और चौराहे ज़ुल्म के खिलाफ इंसाफ के नारे से गूंजते रहे। मरहूम इश्तियाक अहमद हत्याकांड के खिलाफ हाथों में कैंडल, पोस्टर लिए उनके घर से निकले तो टावर चौक पहुंचते पहुंचते कारवां बन गया।
Yesterday on the 10th Day of our hunger strike, we had the opportunity to meet Raghu Ram and Sanjay Rajoura at Jantar Mantar on their Solidarity Visit.
Comrade Hrishikesh of AISA, one of the six AISA leaders who had launched an indefinite hunger strike at Jantar Mantar along with Sonam Wangchuk on 28 June, had to be hospitalised today on the 11th day of fast. Meanwhile, the Modi government is busy protecting the corrupt everywhere, be it Dharmendra Pradhan or Champat Rai.