In response to today’s SGPC delegation meeting with the Pakistan High Commission, the MEA spokesperson said Sikh Jathas have continued to visit Pakistan under the bilateral protocol governing visits to religious shrines. The MEA also clarified that the Kartarpur Corridor remains suspended.
जिसे हम सदियों से आस्था की आँखों से देखते आए थे, अब विज्ञान ने उसकी पुष्टि कर दी है।
प्रयागराज के संगम को हमेशा से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन का स्थान माना गया है। एक त्रिवेणी, जिसमें दो नदियाँ दिखती थीं, और तीसरी सिर्फ़ श्रद्धा में बहती थी।
अब हैदराबाद के CSIR-नेशनल जियोफ़िज़िकल रिसर्च इंस्टिट्यूट (NGRI) के वैज्ञानिकों ने इस पौराणिक मान्यता को एक ठोस वैज्ञानिक आधार दे दिया है। हेलीकॉप्टर से किए गए एयरबोर्न सर्वे और ज़मीन पर की गई कन्फ़र्मेटरी ड्रिलिंग के बाद, डॉ. सुभाष चंद्र की टीम ने पुष्टि की है कि गंगा और यमुना के बीच, ज़मीन से 10 से 15 मीटर नीचे, एक विशाल प्राचीन नदी दबी हुई है। इसकी चौड़ाई, गहराई और आधार स्तर, तीनों गंगा और यमुना के बराबर हैं।
यानी यह कोई छोटी सहायक धारा नहीं थी। यह स्वयं एक मुख्य नदी थी।
विज्ञान इसे "पेलियो रिवर" कहता है। आस्था इसे सरस्वती कहती है। दोनों एक ही सच की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्रयागराज अब सिर्फ़ आस्था का संगम नहीं रहा, यह विज्ञान और परंपरा का भी संगम बन गया है। जहाँ हज़ारों वर्षों की स्मृति, और आज की तकनीक, एक ही कहानी कहती हैं।
माँ सरस्वती कभी सूखी नहीं थीं। बस छिप गई थीं। और आज, फिर से सामने आ रही हैं।
पूरी खबर : https://t.co/fGAJa2XC1l
पेपर लीक, कोचिंग माफ़िया और शिक्षा की बर्बादी पर कांग्रेस के सीनियर नेता संयम लोढ़ा का यह विधानसभा में दिया गया भाषण यादगार है और मील का पत्थर है। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। यह गंभीर चिंता का विषय है। @SanyamLodha66
ECI must announce how many voters were in the que at 6 pm. Exact numbers are known, polling station wise, as numbered chits are distributed at the end of polling. The last person in Q is numbered 1 so that no new person can join. @ECISVEEP
मैं एक दक्षिण भारतीय हूँ। तेलुगु मेरी मातृभाषा है। मैंने अपना पूरा जीवन तेलुगु भाषा और तेलुगु टेलीविजन के लिए काम करते हुए बिताया है।
लेकिन आज जीवन में पहली बार मैंने हिंदी में एक वीडियो बनाया।
क्यों?
क्योंकि मैं अपने उत्तर भारतीय भाइयों और बहनों से दिल से बात करना चाहता था।
आज जिस परिसीमन की बात हो रही है, उससे दक्षिण भारत के राज्यों को कितना नुकसान हो सकता है, यह समझाना जरूरी लगा। यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं है, यह हमारे देश के संतुलन और न्याय का सवाल है।
मैं आपसे सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि
यह महान भारतवर्ष हम सबका है।
जितना अधिकार उत्तर भारत का है, उतना ही अधिकार दक्षिण भारत का भी है। और अगर दक्षिण भारत के साथ कोई नाइंसाफी होती है, तो यह सिर्फ दक्षिण की नहीं, पूरे भारत की चिंता होनी चाहिए।
इसलिए मैंने आज पहली बार हिंदी में बात करने की कोशिश की, ताकि हम एक-दूसरे को बेहतर समझ सकें और एक-दूसरे के साथ खड़े हो सकें।
उम्मीद है आपको मेरी हिंदी समझ आई होगी, और अगर कहीं कोई त्रुटि रह गई हो तो दिल से क्षमा चाहता हूँ।
आइए, भाषा से नहीं, भावना से जुड़ें।
क्योंकि हम सब मिलकर ही भारत हैं। 🇮🇳❤️
मैं एक उत्तर भारतीय हूं। हिंदी मेरी मातृभाषा है। लेकिन मैं नहीं चाहता दक्षिण भारतीय राज्यों की शक्ति लोकसभा में कम हो। दक्षिण के राज्य भी हमारे देश के राज्य हैं, उन्हें उनका अधिकार मिलना चाहिए।
मैं हिन्दी पट्टी का हूं,यहां की राजनीतिक वास्तविकता जानता हूं इसलिए कह रहा हूं हिंदी पट्टी को देश हांकने का अधिकार मिलने से देश का नुकसान होगा।
लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं लेकिन अगर संख्या बढ़ाई जाती है तो ये सुनिश्चित किया जाए कि दक्षिण के राज्यों की केंद्र में शक्ति कम न हो।
इस देश का आधुनिक भारत के रूप में एकीकरण एक लंबी प्रक्रिया, कष्टों और तपस्या के बाद हुआ है। जिन आशाओं पर स्वतंत्र भारत की नींव रखी है है उसके साथ धोखा करने की इजाजत विभाजनकारी राजनीति को नहीं दी जा सकती।
रवि जी आप हिंदी में विचार साझा करते रहें, हर उत्तर भारतीय न तो सांप्रदायिक है और न फासिस्ट।
राष्ट्रीय एकता जिंदाबाद।
🇮🇳 PFBR Attains First Criticality: A historic milestone in India's nuclear energy journey
The indigenously designed and built Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam starts sustained nuclear chain reaction. 1/2
@PMOIndia@narendramodi@DrJitendraSingh@iaeaorg@PIB_India
India's Prototype Fast Breeder Reactor at Kalpakkam achieved criticality today. Criticality means the nuclear chain reaction inside the reactor has become steady and self-sustaining.