महान समाज सुधारक, #संविधान निर्माता बाबा साहेब #डॉ.#भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।
उनके द्वारा शोषित व वंचित वर्ग के अधिकारों के लिए किया गया संघर्ष समस्त विश्व के लिए सदैव अनुकरणीय रहेगा।
अक्सर सबसे अंधकार भरे समय में ही इंसानियत की रोशनी सबसे ज़्यादा चमकती है।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ के दौरान कुली भाइयों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए कई यात्रियों की जान बचाई थी। इसके लिए मैंने देशवासियों की ओर से आज उनका धन्यवाद किया।
लेकिन ऐसे हादसों से सीख लेना ज़रूरी है। भीड़ नियंत्रण, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आपातकालीन व्यवस्थाओं को मजबूत करके इन्हें रोका जा सकता है।
आशा है सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी ताकि हर वर्ग के यात्री सुरक्षित यात्रा कर सकें।
I believe it is one of the foremost responsibilities of any government to guarantee quality education to its people. This cannot be achieved through privatisation and financial incentives.
We need to spend a lot more money on education and strengthening government institutions.
जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा में आर्मी वैन के एक्सीडेंट होने से हमारे कई जवानों के शहादत की ख़बर बेहद दुखद है।
शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की आशा करता हूं।
शोकाकुल परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।
The Central Election Committee has approved the candidature of Ms. Alka Lamba as Congress candidate to contest the forthcoming general election to the Legislative Assembly of Delhi from 51 - Kalkaji constituency.
आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, हम आशा करते हैं यह वर्ष आपके जीवन में नव उमंग, नव उल्लास और खुशियां लेकर आए।
Wishing everyone a very Happy New Year!
आज भारत मां के राष्ट्रभक्त कर्मयोगी, भारत के अर्थव्यवस्था के पुनरोधार के प्रणेता, हां करोड़ों दिलों के भारत रत्न डॉक्टर मनमोहन सिंह जी का अंतिम संस्कार होगा। बहुत दुखद है। जिस व्यक्ति ने देश को गौरवान्वित किया, ...1/2
बापू का प्रिय भजन गाने पर भाजपा नेताओं ने लोकगायिका देवी जी को माफी मांगने पर मजबूर किया। "रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम" उनसे नहीं सुना गया।
दुनिया को दिखाने के लिए बापू को फूल चढ़ाते हैं लेकिन असल में उनके प्रति कोई आदर नहीं है। दिखावे के लिए बाबासाहेब अंबेडकर का नाम लेते हैं, लेकिन असल में उनका अपमान करते हैं।
भाजपा को हमारी सहिष्णु और समावेशी संस्कृति-परंपरा से इतनी नफरत है कि वे हमारे महापुरुषों को बार-बार अपमानित करते हैं।
नव सत्याग्रह बैठक में मेरे शुरुवाती वक्तव्य के कुछ अंश -
आज कांग्रेस के इतिहास में बहुत सुनहरा दिन है। गांधीजी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के सौवें वर्ष पर बेलगांव में महात्मा गांधी नगर में ऐतिहासिक नव सत्याग्रह बैठक हो रही है।
100 साल पहले यहीं 26 दिसंबर 1924 को 3 बजे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले मौलाना मुहम्मद अली कांग्रेस अध्यक्ष थे।
इस मौके पर सेवादल के संस्थापक Dr. N S Hardikar को याद कर मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। यहीं से कांग्रेस के इतिहास में रोज सुबह राष्ट्रीय ध्वज समारोह पूर्वक फहराने और शाम को उतारने का सिलसिला आरंभ हुआ।
गांधीजी केवल एक बार एक साल के लिए ही कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। लेकिन उन्होंने इसके बाद इतनी लंबी लकीर खींची कि उसकी बराबरी कर पाना किसी भी राजनेता के लिए संभव नहीं है ।
गांधीजी ने कांग्रेस के संविधान को नया रूप दिया। गांव, गरीब, किसानों औऱ मजदूरों के दिलों में कांग्रेस के लिए मजबूत आधार बनाया। कांग्रेस संगठन को रचनात्मक कामों से जोड़ा। छुआछूत औऱ भेदभाव के खिलाफ मुहिम को कांग्रेस के मुख्य एजेंडे में शामिल किया।
आप सभी को गर्व होना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी के पास राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की विरासत है। हम लोग उनके उत्तराधिकारी है।
साथियों, उन दिनों कोहाट और गुलबर्गा जैसे शहरों में हो रहे सांप्रदायिक दंगों से आहत होकर उन्होंने चिंता व्यक्त की थी, और कहा था, “When quarrels become a normal thing of life, it is called civil war and parties must fight it out themselves”. मोतीलाल नेहरू जी ने दंगों की निंदा करते हुए Resolution move किया था। गुलबर्गा, जहाँ से मैं आता हूँ वहाँ दंगों से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना ज़ाहिर की गयी थी।
बहुत अफ़सोस की बात है कि 100 साल बाद भी आज का सत्ताधारी दल और उनके नेता खुलेआम भड़काऊ नारे देते हैं और उनके बड़े नेता ही समाज में सदभाव बिगाड़ रहे हैं, समुदायों के बीच नफ़रत फैला रहे हैं। लोगों को लड़ाने का काम कर रहे हैं।
महात्मा गांधी ने यहीं से कांग्रेस पार्टी में विभिन्न मत के लोगों के होने के बावजूद, एकता- Unity के महत्व का संदेश देते हुए कहा था कि “जब तक जगत में मस्तिष्क अलग है, तब तक मत भी अलग होगा। लेकिन हम हरेक को ह्रदय से लगाना चाहते हैं।”
बेलगांव अधिवेशन की एक और खास बात ये थी कि पहली बार महात्मा गाँधी ने छुआछूत (untouchability) के ख़िलाफ़ एक देशव्यापी अभियान की शुरुआत की। इसे कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि अस्पृश्यता स्वराज की राह की सबसे बड़ी बाधाओं में है। जितना जल्दी हम यह काम करें हमारे हित में है।
1925 में गांधीजी केरल जाकर Viacom सत्याग्रहियों से मिले और उनकी मांग का समर्थन किया था ।
पिछले 140 वर्षों की यात्रा में पार्टी ने बहुत उतार चढाव देखे। पर कांग्रेस आज भी गांधीजी के विचारों की रोशनी में उनके सिद्धांतों को समर्पित और उसूलों पर कायम है।
कर्नाटक मेरा गृह राज्य है। यहीं से मेरी लंबी राजनीतक यात्रा का आरंभ हुआ। आज मुझे बहुत गर्व होता है कि 100 साल पहले महात्मा गांधी ने जिस महान दायित्व को संभाला था उसकी स्मृतियों में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मुझे शामिल होने का मौका मिला है।
आज हम जब 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक क्षण को पुनर्जीवित कर रहे हैं तो कर्नाटक में गांधीजी के विचारों की सरकार चल रही है। संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढाते हुए महात्मा बसेश्वर, महात्मा फुले औऱ बाबा साहेब डॉ अंबेडकर जैसे महापुरुषों के दिखाए विचारों पर आगे बढ़ रही है।
[1/3]
मैंने संसद में कहा था कि जिस तरह एकलव्य का अंगूठा कटवाया गया था उसी तरह पेपर लीक करवाकर युवाओं का अंगूठा काटा जाता है।
इसका ताज़ा उदाहरण बिहार है। BPSC अभ्यार्थी पेपर लीक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं और एग्जाम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
लेकिन NDA की सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए उल्टा छात्रों पर ही लाठी चार्ज करवा रही है।
यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम उनके साथ हैं और उन्हें न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे।
पिछले दिनों दिल्ली के एक किराना स्टोर का दौरा किया। किराना स्टोर्स सिर्फ़ सामान बेचने के माध्यम भर नहीं हैं। इनके कस्टमर्स के साथ इमोशनल और कल्चरल कनेक्शन्स होते हैं, लेकिन क्विक कॉमर्स बिजनेस के तेज़ी से बढ़ने के कारण हज़ारों किराना स्टोर बंद हो रहे हैं, जो कि चिंताजनक है।
ऐसे में हमें एक बैलेंस बनाने की आवश्यकता है - एक ऐसा सिस्टम जो टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को प्रोत्साहित करे लेकिन उनके कारण जो गंभीर रूप से प्रभावित हों, उन्हें सुरक्षा जाल भी प्रदान करे।
जब हमारी अर्थव्यवस्था में बदलाव हो रहा हो और हम ग्लोबल ट्रेंड्स के हिसाब से आगे बढ़ रहे हों तब यह सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है कि छोटे कारोबारियों का नुक़सान न हो।
यदि आपके पास कोई सुझाव है या आप कोई कहानी हमारे साथ शेयर करना करना चाहते हैं, तो कृपया यहां भेजें।
https://t.co/YOBJ3mhZZW
सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर को केंद्र सरकार के मुफ्त राशन बांटने पर सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा- कब तक ऐसे मुफ्त राशन बांटा जाएगा. सरकार रोजगार के अवसर क्यों नहीं पैदा कर रही?
Thrilled to see Team India clinch its first-ever Gold Medal in the Open Section at the Chess Olympiad 🏆
Huge congratulations to Gukesh Dommaraju, Arjun Erigaisi, Vidit Gujrathi, Praggnanandhaa Rameshbabu, Pentala Harikrishna, Srinath Narayanan, and their teams. Your remarkable talent, brilliant strategies, and dedication have paid off.
Wishing you all continued excellence. Your golden victory has made the country immensely proud.
Jai Hind! 🇮🇳
ओडिशा में घटित भयंकर घटना ने देश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस से मदद मांगने गए एक सेना अधिकारी को बेरहमी से पीटा गया और उनकी मंगेतर को कस्टडी में उत्पीड़ित किया गया। यह घृणित घटना पूरी मानवता को शर्मसार करने वाली है।
भाजपा सरकार में महिलाओं के विरुद्ध अपराध पूरी तरह से बेकाबू और निरंकुश हो चुका है। जब सरकारी तंत्र के ही भीतर अन्याय पनपता और शरण पाता है तो आम नागरिक सहायता की आस किससे लगाए?
इस घटना के सभी दोषी सख्त से सख्त कानूनी सजा के पात्र हैं - उनके खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई कर आज भारत की जनता, खास कर महिलाओं के समक्ष न्याय और सुरक्षा की मिसाल पेश करने की दरकार है।
मध्य प्रदेश में सेना के दो जवानों के साथ हिंसा और उनकी महिला साथी के साथ दुष्कर्म पूरे समाज को शर्मसार करने के लिए काफी है।
भाजपा शासित राज्यों की कानून व्यवस्था लगभग अस्तित्वहीन है - और, महिलाओं के खिलाफ़ दिन प्रतिदिन बढ़ते अपराधों पर भाजपा सरकार का नकारात्मक रवैया अत्यंत चिंताजनक।
अपराधियों की ये निर्भीकता प्रशासन की पूर्ण नाकामी का परिणाम है और इस कारण देश में पनपता असुरक्षित वातावरण भारत की बेटियों की स्वतंत्रता, उनकी आकांक्षाओं पर बंदिश है।
समाज और सरकार दोनों शर्मिंदा हों और गंभीरता से विचार करें - देश की आधी आबादी की रक्षा की ज़िम्मेदारी से कब तक आंख चुराएंगे!