इस पुलिस ने इंसानियत की सारे हदे पार कर दी है
देखिए कैसे पुलिस लड़की के प्राइवेट पार्ट को निशाना बनाकर लाठी से अटैक कर रहा है
बेटी बचाओ पुलिस से, नेताओं से, भाजपा से
सिर्फ कार को छुकर चला गया, फिर गरीब पर बरसा दिए थप्पड़ ही थप्पड़।
इस देश में गरीबों के लिए कोई कानून है क्या जो इनकी सुरक्षा करता है?
दूसरा युवक कहने लगा मर जाएगा भाई साहब लेने के देने पड़ जाएंगे
लेकिन थप्पड़ देने वाला फिर भी नहीं माना वकील हु देख लूंगा।
अब Police के सामने भी लड़की Safe नहीं है क्या 😡
ये लड़की कोई कारण से Bhopal के Gautam Nagar थाने मैं आई थी,कंप्लेन लिखाने,
लेकिन यहां जो पुलिस था उसके सामने ही आरोपी इस लड़की को थप्पड़ मारता है।
ये इंस्पेक्टर Mohammed Gauri Khan है जो उस आरोपी को कुछ नहीं कहा बल्कि उल्टा लड़की को गाली दी और पूछा तुम्हारा पापा कहा का है,
तब लड़की ने कहा कानपुर का तो ये पुलिस कहती है कि चालेजाओ कानपुर 😡
उत्तर प्रदेश पुलिस ll रक्षक ही भक्षक?
आगरा (एत्मादपुर-कुबेरपुर रूट) में बिना नेमप्लेट वाले एक दरोगा ने रौब दिखाकर बस परिचालक से बदसलूकी की और टिकट लेने से मना कर दिया।
यूपी पुलिस की छवि खराब करने वाले ऐसे कर्मियों पर तुरंत एक्शन होना चाहिए।
@agrapolice@Uppolice@UPSRTCHQ @Igrangeagra @dgpup
पहली बार किसी रिपोर्टर को ' इंकलाब
ज़िंदाबाद ' जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.
ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है ?
टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी ?
या बस ऐसे ही ?
आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे . आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है - इंकलाब जिंदाबाद
मैं गंगा नदी को माँ नहीं मानती ।हम दलित कभी अपवित्र माने जाते थे? हाँ, लेकिन गंगा जल ने हमें शुद्ध नहीं किया!
बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने हमें अधिकार दिए, सम्मान दिया और इंसान बनाया! गंगा का पानी? बस पानी है! गंगा सिर्फ़ एक नदी है, देवी नहीं!
हम दलित तभी सच्चे शुद्ध होंगे, जब हर दलित संविधान पढ़ेगा, भीम राव अंबेडकर के रास्ते पर चलेगा न कि गंगा में डुबकी लगाएगा!
जो लोग आज भी गंगा-पूजा के नाम पर दलितों को अपमानित करते हैं, उनका समय खत्म हो चुका है!
आंबेडकर की विचारधारा और शिक्षा ही हमारी गंगा है!
संविधान की किताब ही हमारी धार्मिक किताब हैं!
जय भीम! जय संविधान! दलित एकता ज़िंदाबाद!
क्या देश में अब सच बोलने पर पाबंदी है?
झुंझुनूं में RSS पर सवाल उठाने वाले युवक के साथ जो बर्बरता हुई, वह इस सरकार की बौखलाहट और तानाशाही का जीता जागता सबूत है।
सत्ता के दलाल और वर्दी में छिपे गुंडे अब यह तय करेंगे कि हमें क्या बोलना है?
एक नागरिक को केवल सवाल पूछने के लिए पुलिस हिरासत में लेना और मारपीट करना अत्यंत निंदनीय है।
#FreedomOfSpeech #Democracy #Rajasthan
मध्यप्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा विनाशकारी परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का कई महीनों से बड़ा आंदोलन चल रहा है लेकिन अभी तक सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही हैं !
एक गरीब आदमी सड़क किनारे अपने घोड़े पर आम लादकर बेच रहा था।
तभी एक कार से उतरीं दो महिलाएं उसे घोड़े पर दया दिखाने का ज्ञान देने लगीं।
गरीब व्यक्ति ने शांत होकर कहा,
अगर घोड़े को खुला छोड़ दूं, तो वह सड़क पर भाग जाएगा। किसी वाहन से टकरा सकता है और किसी की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
मतलब इन्हें सिर्फ कंटेंट बनाना था, वो कंटेंट बना और फिर वहां से चली गईं।
अगर सच में उस गरीब की चिंता होती, तो उसे कोई बेहतर साधन दिलाने में मदद करतीं, सिर्फ कैमरा ऑन करके ज्ञान देने नहीं आतीं।
एक महिला मिठाई खरीदने उतरी, ट्रेन चल पड़ी तो चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश की।
बाल-बाल बची।
डिप्टी स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन रुकवाई।
तभी RPF जवान जितेंद्र पहुंचा और महिला के परिवार पर चेन पुलिंग का आरोप लगाया। डिप्टी SS ने विरोध किया तो दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, जो मारपीट में बदल गई।
RPF जवानों ने डिप्टी SS को पीटा और घसीटते हुए RPF थाने ले गये।
यात्री सुरक्षा जरूरी, लेकिन स्टेशन अधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव भी ठीक नहीं।
रेलवे प्रशासन को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
घटना आगरा रेलवे स्टेशन की है।