जयपुर के एसएमएस स्टेडियम में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री की सभा के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर भव्य इंतज़ाम किए गए, लेकिन बड़ी संख्या में कुर्सियाँ खाली दिखाई दीं। इन तस्वीरों से स्पष्ट है राजस्थान में मोदी का क्रेज खत्म हो चुका है और जनता बदलाव के लिए तैयार बैठी हैं।
मंदिरों में आने वाला चढ़ावा यदि पारदर्शी और जनहितकारी तरीके से शिक्षा व स्वास्थ्य पर खर्च हो, तो उससे उत्कृष्ट स्कूल, कॉलेज और आधुनिक अस्पताल बन सकते है!
हमारा देश इतना अमीर है, फिर भी हर तरफ़ गरीबी क्यों है?
इतना सारा पैसा आखिर जा कहाँ रहा है?
ज़रा सोचिए, अगर मंदिरों में आने वाला चढ़ावा पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के हित में शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया जाए, तो कितने अच्छे स्कूल, कॉलेज और आधुनिक अस्पताल बनाए जा सकते हैं।
आख़िर देश सिर्फ़ ज़मीन का टुकड़ा नहीं होता, देश उसके लोग होते हैं। और अगर लोग स्वस्थ हों, अच्छी शिक्षा पाएँ, तो हमें एक विकसित राष्ट्र बनने से कौन रोक सकता है?
21वीं सदी में दुनिया सीवर साफ़ करने के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन भारत में आज भी लोगों को ज़हरीली नालियों और सीवरों में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह केवल तकनीक की कमी नहीं, बल्कि सरकार की नीयत, प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।
मंदिरों में आने वाला चढ़ावा यदि पारदर्शी और जनहितकारी तरीके से शिक्षा व स्वास्थ्य पर भी खर्च हो, तो उससे उत्कृष्ट स्कूल, कॉलेज और आधुनिक अस्पताल बन सकते है!