#BREAKING#SupremeCourt stays UGC Promotion of Equity Regulations 2026.
SC says the provisions are prima facie vague and capalbe of misuse.
SC asks Union to redraft the regulations, till then its operation kept in abeyance.
#UGCRegulations
पीड़ित दलित बेटी मेरठ को न्याय दिलाने की मांग करने वाले पर जिस तरह S S P और मेरठ पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्ण हाथापायी मार-पीट व लाठी चार्ज का नंगा नाच किया गया न केवल मेरठ पुलिस की संवेदनहीनता को दर्शाता है अपितु पुलिसिया गुंडागर्दी का भी एक जीवंत दुष्टान्त है। हद तो तब हो गई जब S S P के नेतृत्व में पुलिस ने गिरफ्तार कर पुलिस वैन में बैठाये गये लोगों की भी जमकर पिटाई की । पुलिस के इस गैर जिम्मेदाराना रवैया को देखते हुए मेरठ S S P के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग करता हूं।
@CMOfficeUP@ChiefSecyUP
#highcourt #supremeCourt
कल तक अविनाश पांडे को डिफेंड करने वाले निकम्मे बताएं कि दतिया की सड़के नरोत्तम मिश्रा के बाप की है
और किसने सड़के जाम करने के अधिकार दिए सड़कों पर उत्पात क्यों मचाया जा रहा है
दतिया पुलिस कहां है और ssp महोदय कहां है.?
Gandhi shedding his clothes was not revolutionary, but Babasaheb wearing a a suit was. The same goes for the CJP chief who bent on his knees in front of a officer, while Chandrashekhar spoke eye to eye. If you are from a marginalised community, never compromise with dignity.
चित्रा त्रिपाठी की शानदार रिपोर्टिंग!
मेरठ की घटना पर ABP News की चित्रा त्रिपाठी ने अपनी रिपोर्टिंग में SSP अविनाश पांडेय को जमकर धोया है।
उन्होंने अपनी रिपोर्टिंग में मुख्यमंत्री योगी और गृहमंत्री अमित शाह के करीबी अफसर अविनाश पांडेय को कई बार "वर्दी वाला गुंडा" कहकर संबोधित किया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। सच कहूँ तो दलित समुदाय से जुड़े मामलों पर आज पहली बार चित्रा त्रिपाठी की पत्रकारिता जातीय कुंठा से परे थी। पुलिसकर्मी किसी भी जाति के हों, लेकिन अगर वे संविधान और कानूनी प्रक्रिया को धता बताकर आम जनता पर अपनी लाठी और वर्दी का जोर दिखाकर गुंडागर्दी करते हैं, तो उसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
SSP अविनाश पांडेय द्वारा "पूरी रोड गंदी कर दी सालों ने", "रोड तुम्हारे बाप की नहीं है.." जैसी गालियों का प्रयोग करते हुए दलित समुदाय के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम युवाओं को भीड़ में और बंदी वाहन में घुसकर पीटना पूरे समाज का अपमान है। गृहमंत्री अमित शाह को इसका संज्ञान लेना ही होगा। ऐसे सनकी, अमानवीय, गालीबाज़ और हिंसक प्रवृत्ति के इंसान का SSP जैसे पद पर रहना कानून-व्यवस्था का मखौल उड़ाने जैसा है।
मेरठ की घटना को लेकर दलित वकील एसएसपी अविनाश पांडे को बड़ी चेतावनी दे डाली उन्होंने कहा कि यह एसएसपी नहीं गुंडा है जो गरीबों पर लाठी बरसा रहा है इस पर तुरंत FIR करके जेल में डाला जाए
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन भाजपा ने इसे RSS का स्लीपर सेल बना दिया है।
इसके चेयरपर्सन किशोर मकवाना केवल "मोदी की महिमा" गाने में व्यस्त रहते हैं। समाज के दुख से कोई सरोकार नहीं।
मेरठ की घटना में SSP अविनाश पांडेय की गुंडागर्दी के
खिलाफ अनेकों लोगों ने शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन आयोग ने आज तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। हर रोज दलित समाज का बेतहाशा दमन हो रहा है, सैकड़ों लोग प्रतिदिन आयोग को सोशल मीडिया पर टैग करते हैं, लेकिन इसके पदाधिकारी और सदस्य कानों में रुई डालकर ऐसे सोए हुए हैं मानो उनकी नज़र में दलित आज भी अछूत हैं। वे शायद इस डर से दलितों के उत्पीड़न पर संज्ञान नहीं लेते कि कहीं उन्हें RSS से डांट न पड़ जाए। जब जनता की अपीलों और शिकायतों पर कोई कार्रवाई ही नहीं करनी है, तो क्या इन सोशल मीडिया अकाउंट्स को सिर्फ सरकार के प्रचार में भजन गाने के लिए बनाया गया है?
जब ऐसे चाटुकार लोग संवैधानिक कुर्सियों पर बैठ जाएंगे, तो भला शोषित समाज को न्याय कैसे मिलेगा? मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से पूछना चाहता हूँ कि कब तक ऐसे निर्जीव लोगों की झूठी महिमा सुनकर सरकार इन्हें बड़े पदों से पुरस्कृत करती रहेगी? जमीनी स्तर पर समाज में इन्हें कोई जानता तक नहीं है।
आलम यह हो चुका है कि भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और उसके सदस्यों को इतना निकम्मा व निष्क्रिय बना दिया है कि पीड़ित समाज अब उत्पीड़न की घटनाओं में इन्हें शिकायत देना भी समय की बर्बादी समझने लगा है। चेयरपर्सन किशोर मकवाना सहित सभी कामचोर, चाटुकार और निष्क्रिय सदस्यों को तुरंत इन पदों से हटाया जाए और उनकी जगह अनुसूचित जाति समुदाय के अनुभवी, ईमानदार एवं संवेदनशील लोगों को नियुक्त किया जाए।
Being screamed at by an NDTV-reporter and an India Today host in May feels worth it today😂
Thank you to the reporters in NZ & Australia.
And always, thank you to the Indian press: The Wire, NewsLaundry, Scroll, Peek TV, The Unedited Media, HQ English and many more working every day to report truthfully. The heavylifters.
🔺भाइयों, कॉलेजियम सिस्टम बंद क्यों होना चाहिए?
OBC, SC, ST, मुस्लिम - समुदाय पर इसका घातक असर!
🔹 दोस्तों, आज हम बात करेंगे उस सिस्टम की जो न्यायपालिका को "सवर्ण क्लब" बना रखा है। कॉलेजियम सिस्टम बंद होना चाहिए क्योंकि ये OBC-SC-ST बहुजन समाज के लिए सबसे बड़ा रोड़ा है। बाबा साहेब के Constitution को dilute कर रहा है। 🔥🇮🇳
🔺 कॉलेजियम क्या है?
1993 (Second Judges Case) और 1998 (Third Judges Case) में सुप्रीम कोर्ट ने खुद ये सिस्टम बना लिया। CJI + 4 सीनियर जज मिलकर जजों की नियुक्ति की सिफारिश करते हैं। राष्ट्रपति बस रबर स्टैंप!
🔹 कोई पब्लिक क्राइटेरिया नहीं, कोई इंटरव्यू नहीं, कोई अपील नहीं। Deliberations बंद कमरे में। "जज खुद को जज बनाते हैं" — NJAC को 2015 में 4:1 से रद्द कर दिया।
🔺 मुख्य समस्याएँ — अपारदर्शिता + नेपोटिज्म
🔹 पूरी तरह opaque! Merit, integrity सब subjective।
🔹 "अंकल जज" कल्चर: हाई कोर्ट जजों में 30-50% फैमिली कनेक्शन वाले। बच्चे-रिश्तेदार जज बन जाते हैं।
🔹 Self-perpetuating old boys' club — सवर्ण जज एलीट practicing lawyers (बड़े शहर, अंग्रेजी, कनेक्शन) को prefer करते हैं। Subordinate judiciary (जहाँ diversity ज्यादा) को साइडलाइन। ⚔️
🔺 कास्ट कंपोजिशन — आँखें खोलने वाले आंकड़े
सुप्रीम कोर्ट (~33 जज):
🔹 ब्राह्मण: 12 (36%) — जनसंख्या सिर्फ 4-5%
🔹 अन्य सवर्ण: मिलाकर 60%+
🔹 OBC: सिर्फ 5
🔹 SC: 1 (Gavai के बाद)
🔹ST: 0
🔹महिलाएँ: 1
🔺हाई कोर्ट (2018-2026): 593-650 जजों में
🔹SC 23-26
🔹ST 10-14
🔹OBC 76-80 → कुल ~17%
🔹Upper caste ~80%
🔹 ऐतिहासिक: सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 5 दलित जज ever! Balakrishnan CJI के बाद 9 साल गैप। Lower judiciary में आरक्षण से diversity, लेकिन Collegium रोकता है।
🔺 OBC-SC-ST के लिए क्यों घातक? (सूक्ष्म कारण)
🔹 क) प्रतिनिधित्व शून्य → Legitimacy का संकट
60%+ आबादी पर highest judiciary में न के बराबर। ये जनता का न्याय नहीं, सवर्ण वर्ग का न्याय है।
🔹 ख) Institutional Casteism + बंद चक्र
Upper caste judges उसी बैकग्राउंड के lawyers को merit मानते हैं। Subordinate (आरक्षण वाले) judges को "experience कम" बोलकर बाहर। Upper → Upper → Upper!
🔹 ग) Merit की सवर्ण परिभाषा
Chandrachud जी ने BK Pavitra में कहा — merit में social justice भी शामिल होनी चाहिए। Collegium ये पूरा नहीं करता।
🔹 घ) फैसलों पर असर
Lived experience की कमी → SC/ST Atrocities Act dilution, tribal issues पर "primitive" कमेंट, पुलिस excess/आरक्षण केस में empathy की कमी। In-group bias studies (50 लाख केस) में lower caste पर subtle bias के संकेत।
🔹 ङ) Constitution का उल्लंघन
Anu 15,16,46,335 — सामाजिक न्याय। Ambedkar का transformative Constitution representative institutions चाहता था। Collegium hierarchy perpetuate करता है।
9/ 🔹 च) बहुजन युवा हतोत्साहित
Qualified OBC/SC/ST lawyers को closed door लगता है।
10/ 🔺 निष्कर्ष — बंद करो या Radical Reform
Transparent Commission (NJAC जैसा लेकिन मजबूत), diversity mandate, subordinate judiciary से promotions, public criteria
🔹 बहुजन एकता से लड़ो! Satyagraha, awareness, pressure बनाओ। Constitution हमारा है — इसे सवर्ण monopoly से बचाओ।
🔥 शेयर करो, चर्चा करो। #CollegiumBandi #BahujanNyay #OBC_SC_ST #SocialJustice #Ambedkarite
The accused in the Ram Mandir donation scam have been seen arriving at the temple in a Toyota Vellfire worth around ₹1.5 crore. The images have fueled public anger.
Dear SC/ST/OBCs, you understand why the dominant caste Hindus want to Free Temples from the control of govt?