कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा की कही गई बातें बहुत कुछ सोचने पर आपको मजबूर कर देगी।
पवन खेड़ा— हमारी पार्टी 140 साल पुरानी पार्टी है, जिसमे 54 साल 7 महीने हम सरकार में रहे हैं।
आज भी हर राज्य में हमारा ख़ुद का ऑफिस नहीं है। और जहाँ है भी वहाँ किराए पर है।
वहीं बीजेपी को सरकार में आए 11 साल हुए लेकिन कोई ऐसा राज्य बता दीजिए जहाँ संघ और बीजेपी का अपना ऑफिस ना बन गया हो।
7 स्टार की फैसिलिटी वहाँ मिलेगी , यूट्यूबर को वहाँ जाने की अनुमति नहीं मिलती है। ये पैसा कहाँ से आया ?
सावधान धोकादायक परिस्थती निर्माण होऊ शकते.. गव्हर्मेंट कडून व पोलीस स्टेशनकडून यावर बंदी आणली पाहिजे. बांधवानो आपल्या डोळ्यांची काळजी घ्या. आपल्या सर्व बंधू-भगिनींना जागृत करा.
Rajiv Gandhi lived five years under active death threats and still said this with a straight face:
“If it comes to die for what you believe in, I don’t hesitate.”
No chest-thumping. No victim card. Just a man who refused to let fear rewrite his politics.
Today’s ecosystem calls this “dynasty privilege.”
History calls it courage.
Remembering Rajiv Gandhi ji on his Birth Anniversary. 🙏
जावेद अख़्तर साहब को सुनिये:
1905 की महासभा, 1925 की RSS और 1906 की मुस्लिम लीग को ही देख लें, मुस्लिम लीग गाँधी से नफ़रत करती थी और RSS तथा महासभा भी गाँधी से नफ़रत करते थे. हिंदुस्तान की आज़ादी की लड़ाई से RSS- हिंदू महासभा, मुस्लिम लीग का कोई संबंध नहीं था. यानि ये बड़े हमख़याल लोग थे और इनकी विचारधारा तक़रीबन एक ही थी.
Quit India Movement के समय मुस्लिम लीग ने अपने सदस्यों को इससे दूर रहने को कहा और यही बात गोलवलकर ने RSS के लोगों से कही. दोनों अंग्रेज़ों के सहयोगी थे.
जिन्ना और सावरकर के उदाहरण से यह बात और साफ़ होती है. जिन्ना, जो कभी खिलाफ़त आंदोलन और धार्मिक राजनीति के ख़िलाफ़ थे, 7 बरस बाद उसी राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो गए. अंडमान में बंद सावरकर लगातार Mercy Petitions करते रहे और रिहा होने के बाद ‘हिंदुत्व’ का राजनीतिक विचार सामने रखा.
यानि जो लोग स्वतंत्रता आंदोलन से अलग थे, वे बाद में एक दूसरे रूप में सामने आए.
सबसे गहरी बात यह है कि अंग्रेज़ों की मदद करने वालों को अपनी वफ़ादारी का इनाम चाहिए था. जिन्ना को पाकिस्तान मिल गया, लेकिन इन्हें कुछ नहीं मिला. गाँधी और नेहरू ने इन्हें कुछ लेने नहीं दिया. शायद यही गुस्सा इनके भीतर आज तक ज़िंदा है!
धर्मनिरपेक्ष लोगों को “मैकाले के बेटे” कहने वालों पर जावेद साहब कहते हैं कि मैकाले का बेटा तो वह होगा जो Two-Nation Theory में विश्वास करे, जो माने कि हिंदू और मुसलमान 2 अलग-अलग राष्ट्र हैं. अगर यही विचार मुस्लिम लीग और पाकिस्तान का भी है, तो फिर अंतर क्या है?
हिंदुस्तानी समाज की एक और गहरी सच्चाई की ओर इशारा करते हुए वे कहते हैं कि कोई डॉक्टर हो, इंजीनियर हो, जज हो या आर्मी ऑफिसर, अपनी 8-10 पीढ़ियाँ पीछे जाकर देखिए, किसान ही मिलेगा. हम सब किसान की औलाद हैं. किसान एक्सट्रीमिस्ट नहीं होता.
शरीफ़ आदमी कभी-कभी अपनी शराफ़त से बोर होकर थोड़ी देर के लिए बहक सकता है, लेकिन फिर वापस आ जाता है.
(और इसलिये भारत का लोकतंत्र अब ख़ुद को दोबारा पाने की हिलोरें ले रहा है.)
हा scam सगळीकडेच सुरू आहे. यात सामान्य माणूस भरडला जातो
घरासाठी बिल्डर ला दिलेली रक्कम, घेतलेले लोन, व्याज मिळून 24 लाखांचं घर घ्यायच्या स्वप्नात करोडो रुपयांचे नुकसान होत
सरकारी अधिकारी यात सामील आहेत आणि सरकार सुद्धा!
क्राइम पेट्रोल मध्ये पोलिस अँक्टर
#maharashtra#SRASCAM