झूठे मुकदमों का पर्दाफ़ाश
झालावाड़ पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में ऐसे चार मुकदमे जिसमे तीन एनडीपीएस और एक चाकूबाजी से संबंधित था उसमे असली रंजिश कर्ताओं तक पहुंची । किसी दूसरे को इतने बड़े संगीन मुकदमे में फँसा देने की चाल को बेनक़ाब किया और मुख्य साजिशकर्ताओं को झालावाड़ पुलिस ने गिरफ्तार किया ।
झालावाड़ पुलिस- आमजन में विश्वास, अपराधियों में भय
श्री राजीव कुमार शर्मा, महानिदेशक पुलिस, राजस्थान ने जारी किया आदेश।
अब ₹1 लाख या उससे अधिक की साइबर ठगी पर स्वत: होगी E-Zero F.I.R.
पहले ₹5 लाख थी यह सीमा।
राजस्थान में ई-जीरो एफ.आई.आर. की व्यवस्था 08 जनवरी 2026 से लागू।
श्री वी.के. सिंह, ए.डी.जी. साइबर क्राइम, राजस्थान ने बताया कि 1930 पर शिकायत करते ही E-Zero F.I.R. की प्रक्रिया होगी शुरू।
I4C के N.C.R.P. और C.C.T.N.S. के एकीकरण से शिकायत सीधे होगी दर्ज।
राजस्थान पुलिस साइबर सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
साइबर ठगी होते ही तुरंत डायल करें: 1930 या ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं: https://t.co/rXsEeqY0uF पर।
@RajCMO@Rajeev_ips@svoruganti1466
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जरूरी है अपराधी भी याद रखे !
अपराध से समाज में भय फैलाने वाले भी याद रखें कि कानून सबके लिए बराबर है। झालावाड़ पुलिस कटिबद्ध है अपराध से कमाई अवैध संपत्तियों पर कार्यवाही के लिए ।
अभियान निरंतर…
झालावाड़ पुलिस- आमजन में विश्वास, अपराधियों में भय
मैं समझता हूं कि यह बहुत ही बड़ी कार्रवाई है
यह इतनी बड़ी कार्रवाई है कि इसकी चर्चा देश भर में होगी।
SHO से ज्यादा बड़ा जिम्मेदार वैसे भी सरकार नहीं ढूंढ़ सकती। सारी की सारी जिम्मेदारी इस एक थाना अधिकारी की ही रही होगी। बाकी सब मौज में रहने चाहिए। थानेदार को सस्पेंड करने से लोग भी खुश हो जाते हैं और हादसे को भूल जाते हैं।
पानी भी क्या चीज हैं ….. ठंडा हो तो जमा कर मारता है गर्म-गर्म हो तो जला कर मारता है ज्यादा हो तो डूबा कर मारता है और ना हो तो प्यासा प्यासा मारता है !!!
ये कैसी क्रूरता ।
यदि कोई समुदाय गरीबी और अपराध के दलदल में फँस जाये तो क्या होता है? तो उस समाज में महिलाएँ और बच्चे सबसे कमज़ोर हो जाते है । बच्चे बाल मजदूरी और नशे के कीचड़ में कब फँस जाते है ,कोई नहीं जानता।कोई नहीं जानता कि वो कब नाबालिग अवस्था में अपराध करने लग जाते है । यह एक गहरा दुश्चक्र है, जिसका पहिया बड़ा क्रूर है । दिखने में जवान होते नौजवानों का अपराध की और बढ़ना एक प्रवृत्ति लग सकता है । कहने को उस समुदाय पर दोष मढ़ा जा सकता है । लेकिन एक अबोध बच्चा यदि बाहर से लाकर उस परिवेश में छोड़ दिया जाये तो भी क्या होगा । वो भी उस उसी दलदल में कुछ बरसों बाद फँसा मिलेगा । यानि परिवेश में बदलाव ही समाधान है । कल को इस बच्चे से यह सवाल पूछना ग़ैर वाजिब होगा कि वो क्यों दलदल में फँसा । वहाँ कोई भी होता तो उस दुश्चक्र में फँसने की गहरी संभावना होती ।
इस दुश्चक्र का सबसे घिनौना पक्ष जानते हो क्या है- वो है अबोध नाबालिग बच्चियों को बेच देना । बच्चियाँ इन डेरों में भी असुरक्षित है और बाहर के शहरों में भी । मानव दुर्व्यापार करने वाले इस फिराक में रहते हैं कि इन बच्चियों को उचित मोल में ख़रीदा जाये । बाहर से अपनी बच्चियों को बेचना भी अमानवीय और घृणित है लेकिन उससे भी स्याह है परिवेश की सच्चाई ।
ऐसे परिवेश का सबसे क्रूर मार इन अबोध बच्चियों पर पड़ती है । उन्हें इस शर्त पर बेचा गया कि अगर वो अपने माँ बाप के पास लौटी तो रकम सूद समेत देनी होगी । यानी बच्चियों का मन होता होगा माँ के आँचल में लौटने का , मन होता होगा बचपन में लौट आने का ।एक अंतिम शर्त जोड़ दी गई- लौटने पर रकम आवश्यक तौर पर वसूल होगी, छूट तभी मिलेगी जब लड़की मर जाये या आत्महत्या कर ले ।
गंदे दलदल की गहरी भद्दी सच्चाई, ऐसी लिखावट पढ़कर रूह काँप जाये, सोचिए कोई जी रहा है ऐसे ।
कोशिश रहेगी अपराधियों को कड़ा दंड मिले ।
कोशिश रहेगी परिवेश बदले।
कोशिश रहेगी की अगली पीढ़ी के बच्चों के लिए डेरें और सुरक्षित हो ।
ईश्वर से प्रार्थना है ऐसी लिखावट दुबारा देखने को ना मिले ।🙏
वैसे मंत्री जी की गाड़ी , सरकारी घर , और कमरे का एसी १ मिनट के लिए भी बंद नहीं होता होगा —लेकिन पुलिस कर्मी ने तपती गर्मी में गाड़ी में एसी चलाकर बैठ जाने का इतना बड़ा दुस्साहस किया है कि उसको ज़लील तो सबके सामने ही करना पड़ा !