सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की इमेज खराब है पर क्यों है...?
बोला जाता है मास्टर पढ़ाते नहीं, बल्कि मैंने जाना है सरकारी स्कूल आने वाले बच्चों के माता-पिता के जब काम होता है तब वह बच्चे को ड्र���प कर लेते हैं बहुत बार ऐसा होता है, समझाने के बाद निरंतरता का नियम नहीं अपनाएंगे🙄
सरकारी में पैसा नहीं लगता इस कारण सीरियस नहीं लेते, प्राइवेट में पैसे लगते हैं इस कारण ड्रॉप नहीं करते, क्योंकि मानव का स्वभाव है फ्री की कद्र नहीं होती, अब ऐसे बोला जाता है कि रेगुलर आने के लिए मोटिवेशन का दायित्व अध्यापक का बनता है, बहुत नजदीकी से देखा है मोटिवेशन के बाद भी बच्चे रेगुलर नहीं आते, पारिवारिक आर्���िक स्थिति के कारण माता-पिता पूरी साल रेगुलर नहीं भेजते बल्कि उनको बीजारी, निनाण, लावणी जैसे कार्य करवाते हैं, आप किसी भी स्कूल में जाकर देख सकते हो जो बच्चा हमेशा आता है वह पढ़ाई में कहीं कमजोर नहीं मिलेगा, हमारे जमाने में अध्यापक के पास गंगाराम होता था जिसके डर से आप ��र हम रेगुलर जाते थे। अब किसी को कुछ बोल नहीं सकते, सरकार ने भी पाबंदियां लगा दी, थोड़ा कुछ बोले तो परिजन लट्ठ लेकर आ जाते हैं,,,,
कुछ लोग बोलते हैं अध्यापक कंजूस होता है तो हर साल मुख्यमंत्री जी हजारों अध्यापकों को भामाशाह सम्मान से सम्मानित करते हैं इसलिए ऐसा कुछ नहीं है, खैर हर डिपार्टमेंट में पैसे सेविंग करने वाले मिल जाएंगे और सामाजिक कार्यों में भी लगाने वाले मिल जाएंगे। और हां, सरकारी महक���ों में पहला ऐसा डिपार्टमेंट है जिसमें भ्रष्टाचार नाम की चीज जमीनी स्तर पर ना के बराबर मिलेगी।
खैर मुद्दा यह है कि सरकारी स्कूलों की हालत कैसे सुधार सकते हैं बच्चों को रेगुलर कैसे बुला सकते हैं,,, सरकार मिड डे मील के अलावा किसी अन्य योजना को धरातल पर कैसे उतार सकती है स्कूलों में, क्योंकि इसके अलावा बहुत कम योजनाएं धरातल पर नजर आती है, इस सबका जवाब 🙌 सब पढ़े लिखे युवा साथी जुड़े हैं अपने सुझाव जरूर लिखें 💘🙏
आपका @JATbera1