A Pakistani reporter tries to disrupt EAM Jaishankar's presser over allegations concerning Gurpatwant Singh Pannun.
EAM Jaishankar responds: “A terrorist country is asking me that question?”
दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज मोदी एक्ट की धारा 18 और 18ए(2) के अंतर्गत वैधानिक रोक को देखते हुए मेरी अग्रिम जमानत याचिका को निरस्त कर दिया। हायकोर्ट का यह निर्णय अपनी जगह है, पर मैं इस से सम्मानपूर्वक असहमत हूँ।
साथ ही, यह भी स्पष्ट है कि न्यायालय ने कहा है कि इसकी टिप्पणियाँ केवल जमानत आवेदन तक सीमित हैं और मेरी आपराधिकता इससे सिद्ध नहीं हो जाती। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दूँगा और आशा करता हूँ कि देश की न्यायिक व्यवस्था में सर्वोच्च विश्वास बना रहे।
मुझे एक नीच, अधम, पतित ट्रोल के विरुद्ध अपने परिवार के सम्मान की रक्षा करने के लिए, इस घटिया और दमनकारी मोदी एक्ट (जिसे SC/ST एक्ट भी कहा जाता है) के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामले में झूठा फँसाया गया है।
मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा है जो किसी व्यक्ति या समुदाय का जाति के आधार पर जानबूझकर अपमान या अपमानजनक व्यवहार माना जा सके। मैं उन किसी भी निहित स्वार्थ वाली ताकतों से लड़ने के लिए तैयार हूँ जो इस देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्य कथन को दंडित करना चाहती हैं, भले ही इसके लिए मुझे जेल जाना पड़े।
एक नेता द्वारा अपनी राजनैतिक वोटबैंक को साधने के लिए, सामान्य जनता से बिना किसी सोच-विचार के, संशोधित किए गए इस पूरे कानून और इसके संशोधित नियमों का मैं तब तक विरोध करूँगा जब तक इसे पूरी तरह से निरस्त न किया जाए।
और हाँ, पुनः कहूँगा कि हमारी की माँ-बहनें सड़कों पर चलती-फिरती वस्तु नहीं है जिस पर कोई भी टिप्पणी करे और बच जाए। उनके सम्मान की रक्षा हेतु, सौ बार जेल जाना पड़े जाऊँगा और 101वीं बार वही करूँगा जो मैंने किया है।
PS: जो भी इस निरस्तीकरण पर स्खलित हो रहे हैं, तुम्हारी माँ-बहन पर भी हर दिन ऐसी टिप्पणी होती है। उस पर भी मैं ही स्टैंड लूँगा क्योंकि तुम अपनी कायरता में दो शब्द नहीं लिख पाओगे।
Vidyanand Bapat, an activist, had been constantly protesting in Pune and nearby cities, demanding a complete ban on DJs during Ganesh Utsav.
While giving an interview, he was confronted by a local Punekar and slapped.
But the question remains: Why demand a ban on DJs only during Hindu festivals?
रावण को लगता है बार-बार ये भीड़ की धमकी दे कर, देश में आग लगा कर ये जाटवों द्वारा अनुपात से अधिक आरक्षण लेने के बाद भी, अपनी राजनीति के लिए ब्लैकमेलिंग करता रहेगा और समाज होता रहेगा।
इस बार यदि हिंसा हुई तो इसकी सांसदी चली जाएगी। पर सरकार को अराजक और दंगाई लोग पसंद है, आयोजकों पर ये सरकार FIR ही नहीं करती। पिछली बार के जातवादी दंगों में 14 लोग मरे थे। उससे पहले इसने एक और जातिगत संघर्ष चालू कराया था, तब इसे जेल में NSA लगा कर रखा गया था।
बाल्मीकी, डोम और खटीक समुदाय में नेता नहीं हैं क्या? उनके अधिकार कब मिलेंगे? या इन जातियों को भी एक दंगाई भीड़ सेना में ही नेतृत्व दिख रहा है? उपवर्गीकरण से ही कम प्रतिनिधित्व वाली जातियों को आरक्षण मिल सकता है।
मायावती के समय से ही जाटवों ने SC आरक्षण का बहुत बड़ा हिस्सा लिया है। अब समय आ गया है कि समीक्षा हो और इन्हें SC के हिस्से से 4-5% ही आरक्षण मिले और बाकी में बाल्मीकि, खटीक, मुसहर, डोम, हेला, कंजर, नट, बहेलिया आदि को आगे किया जाए।
इन जातियों के नेता नहीं हैं तो बाबा साहेब का आशीर्वाद ले कर इनके युवाओं को नेतृत्व हाथ में लेना चाहिए। कोई अनपढ़ नेता आपके अधिकारों का हनन कर रहा है, जागो और छीन लो अपना अधिकार।
अपने ऊपर दर्ज SC/ST एक्ट के मामले और ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ को लेकर कैपिटल टीवी के एडिटर-इन-चीफ डॉ. मनीष कुमार से बातचीत में प्रातः स्मरणीय श्री अजीत भारती जी ब्रो ने अपना पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि यह मामला कैसे दर्ज हुआ, उनके बयान को किस संदर्भ में देखा गया और वे ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ का चेहरा क्यों बने। साथ ही आंदोलन के उद्देश्य और उसके पीछे की उनकी भूमिका पर भी विस्तार से बात की।
पूरी बातचीत वीडियो में।
Harsh Dubey has nothing to do with RHA.
Neither he understands reservation.
Stop this drama.
This is not called Positive step.
This is called Deception!!
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
—
मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
REPORTER : Was it announced beforehand that both Prime Ministers would be taking questions?
HELLE (smiling) : No, no. I was well aware that it was a press briefing and that neither leader would be taking questions. 🤯
ASI has employed a Muslim women to Explain Hindu History
She wears slippers in Temples, to which a tourist objected
Why does ASI act so secular and employe Muslims at Hindu Heritage Sites?
''आरक्षण नहीं, समान अवसर चाहिए!
मंडल आयोग से सिर्फ कुछ लोगों का भला हुआ, वास्तविक हकदारों का भला नहीं हुआ! लोग अगड़ा से पिछड़ा बन गए और उनका ही भला हुआ''
बृजभूषण शरण सिंह 🔥🔥🔥🔥
I was ordered by @Lenskart_com to cut my shikha and remove my tilak. When I refused to do so, I was fired. - Zeel Soghasia
This is blatant discrimination and bigotry that goes beyond adhering to some internal memo. Mr Soghasia must be recalled and reinstated. @peyushbansal
Received Instagram DM of girl employee: At Tech Mahindra office, pantry declared “Footwear-Free Zone” till Ramzan for prayers & iftar.
Colleagues asked to follow it in the name of “unity”.
Question is simple: Is workplace policy now religion-based, or should it remain neutral for all?
14 अप्रैल को आर्यभट्ट जी की जयंती हैं 🚩
19 अप्रैल को भगवान परशुराम जन्मोत्सव है
21 अप्रैल को आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती है
सभी सनातनियों तक यह संदेश पहुंचा दो। 🙏
मोदी से समस्या उनके द्वारा किए जा रहे तुष्टिकरण से नहीं है। वो तो हम बारह वर्षों से झेल रहे हैं। मोदी से जो समस्या है, वह आज और कल में @narendramodi हैंडल से किए गए पोस्ट में दिखता है।
ज्योतिबा फूले पर सात पोस्ट हुए हैं आज, पर मंगल पांडे के बलिदान दिवस को बिलकुल नकार दिया गया।
फुले स्वघोषित रूप से हिन्दू-घृणा करने वाला व्यक्ति था जो उसकी पुस्तक गुलामगीरी के पन्नों पर दिखती है। 1857 की क्रांति को ले कर उसके विचार क्या हैं, वह क्या PM को नहीं पता?
और मंगल पांडे का 1857 में योगदान, क्या नरेन्द्र मोदी केवल इस कारण से नकार गए क्योंकि उनके हिन्दू-विरोधी दलित नायकों की शृंखला में एक ब्राह्मण फिट नहीं होता?
हमारी समस्या यही है कि सवर्णों का योगदान मिटाया जा रहा है, ब्राह्मण विरोधियों को सरकारी प्लेटफॉर्म से वह सब बनाया जा रहा था जो वो कभी थे ही नहीं। ब्राह्मण यूनिवर्सिटी की दीवारों पर गाली सुनता है, नारों में लिंच होता है और सरकारी योजनाओं को फायनेंस करने में पिसता रहता है।
@PMOIndia@BJP4India और @RSSorg स्पष्ट तौर पर राष्ट्र में विभाजनकारी नीतियों को बढ़ा रहे हैं। आलोचना की डींगे मारने वाले नरेन्द्र का सत्य यह है कि वो पत्रकारों को हाउस अरेस्ट करवाते हैं। उनके निर्देश पर उन्मुक्त सोशल मीडिया को बाँधने के लिए मूर्खों से भरी संसदीय समिति अपनी अनभिज्ञता की विष्ठा सार्वजनिक करती है।
नरेन्द्र मोदी को निशिकांत दूबे जैसे चाटुकार ही चाहिए। वही उनको उचित उन्माद देते हैं। बाकी, साक्षात्कारों में ‘आलोचना होती रहनी चाहिए’ का धनिया छिड़कते रहिए।
Near total silence on the TCS Nashik case on LinkedIn. My network of advertising & marketing folks are usually vocal on political issues on that platform speaking up for 'minorities'. Strategic 'ignore' has been activated now. Even if someone posts on the topic I could see comments like 'why are you posting such on LinkedIn?'
UGC सचिव हटाने के बाद मोदी जी ने उस कंप्यूटर का मदरबोर्ड फोड़ दिया जिस पर UGC नियमावली टाइप हुई थी। ये नवयुवक 👇 बता रहे हैं कि कल UGC कार्यालय में मोदी जी ने क्या किया!
Hindu women were blackmailed, fed beef, coerced to convert, and sexually assaulted by their Muslim team leads. For four years. Their complaints were ignored. The women worked in @TCS, that just reported a revenue of 2.6 lac crores.
TCS is yet to issue a statement or an apology.
कल ब्लिंकिट से कुछ ऑर्डर किया था। 50-55 साल के अंकल आए डिलीवरी देने। बातों ही बातों में इनका नाम पूछा! अंकल ने अपना नाम राकेश शर्मा बताया
बातचीत के दौरान मैंने पूछा कि इतनी उम्र में ये सब। अंकल ने शालीनता के साथ जो बोला वो दिल को छू गया, इन्होंने कहा कि
- डबल ड्यूटी करता हूँ। ये सब नहीं करूँगा तो बच्चों को पढ़ाऊँगा कैसे? सरकार के लिए हम सरकारी अछूत जैसे हैं। सरकार ना हमारे बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कालरशिप देती ना ही ऐसी कोई योजना है जिसका लाभ लेकर बच्चे पढ़ाई कर सकें। इसलिए मैं भी कमाता हूँ और बच्चा भी पढ़ाई के साथ जॉब करता है
मुझे आज तक नहीं समझ आया कि जब हर वर्ग-समाज यहाँ तक कि मुस्लिम-ईसाई-बौद्ध तक के बच्चों को सरकार स्कालरशिप देती है तो फिर सामान्य वर्ग के गरीब बच्चों के लिए ये योजना क्यों नहीं?