1951 मे नेहरू जी की सरकार 38 हजार मंदिरों की संपत्तियों को निजी मठाधीशों और स्थानीय चोरों से बचाने के लिए Hindu Religious and Charitable Endowments Act'( HRCE ) अर्थात हिन्दू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती अधिनियम "मद्रास 1951 को पूरी कड़ाई से लागू किया था....................
इस ऐतिहासिक कानून के तहत अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 38,00,000 (38 लाख) से अधिक मूल्य की संपत्तियों वाले 38,000 से अधिक मंदिरों को कड़े सरकारी ऑडिट के दायरे में लाकर सुरक्षित किया गया था।
इसके बाद 1979 में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में तिरुपति देवस्थानम (TTD) के लिए विशेष कानून बनाकर यह सुनिश्चित किया गया कि चढ़ावे का एक-एक पैसा सीधे सरकारी खजाने के नियमों के तहत ऑडिट हो।
कांग्रेस के इसी कड़े और ईमानदार संस्थागत ढांचे के कारण 70 सालों तक किसी भी बड़े नेता या कालनेमी की हिम्मत नहीं हुई कि वे जन-भावनाओं के पैसे और मंदिरों के दान-पात्रों पर डाका डाल सके।
2014 मे "ये नया भारत है" का नारा देने वाली अनपढ़ मदारी सरकार के दावों की हकीकत को गणितीय आंकड़ों के तराजू पर तौलकर देखिए तो इनका छलावा देखकर खून खौल उठेगा।
जो सरकार देश के आम नागरिकों से ₹10 के डिजिटल लेन-देन का हिसाब मांगती है, उसने राम मंदिर जैसे महा-अभियान में देश की गरीब जनता से आए ₹3,200 करोड़ से अधिक के भारी-भरकम चंदे का कैग (CAG) या किसी स्वतंत्र सरकारी एजेंसी से आज तक ऑडिट क्यों नहीं कराया....??????
राममंदिर संचालन के लिए बनी ट्रस्ट ने चढ़ावा मे मिले दान के रूप चांदी, सोने की ईंट, आभूषण, नकदी को लेकर कभी सार्वजनिक बयान नहीं दिया, ऑडिट की तो बात ही क्या किया जाए....???
आज "धार्मिक_राष्ट्रवाद" का बुर्का ओढ़े बीजेपी, RSS और VHP ने जिस तरह से राष्ट्रीय लुट को संस्थागत बना दिया है वो अकल्पनीय है, भारतीय इतिहास मे अंग्रेजों की लुट के बाद ये दूसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय संपत्ति की लुट हैं।
और इस राष्ट्रीय लूट प्रोग्राम की खासियत ये है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है..??? ढूंढते रह जाओगे क्योंकि इस समय RSS से बड़ा ईमानदार कौन है..???? VHP से बड़ा ईमानदार कौन है..??? अनपढ़ मदारी गैंग से बड़ा ईमानदार कौन है..??? देखो न अनपढ़ मदारी गैंग का एक मंत्री खीरा बेचकर 99.5लाख कैसे कमाया है.....???
अनपढ़ मदारी गैंग गोवंश के नाम पर घृणा फैलाते है लेकिन नॉर्थ ईस्ट मे गाय माता मिथुन बन जाती है, असम मे घर मे खा सकते है, बंगाल मे 14 साल से ज्यादा उम्र हैं तो कटाई हो सकती है।
गंगा जी के शुद्धिकरण के नाम पर 'नमामी गंगे' प्रोजेक्ट जिसका बजट 20000cr था, उस प्रोजेक्ट से गंगा मैया का जल शुद्ध हो गया, NGT के आंकड़े को नहीं मानते।
लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जैसे प्रधानमंत्रियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बजट में निरंतर बढ़ोतरी करके बिना किसी शोर-शराबे के देश के हजारों प्राचीन जर्जर मंदिरों का जीर्णोद्धार सरकारी पैसे से करवाया था।
धार्मिक स्थल का विकास, सुरक्षा राज्य का विषय माना और हमेशा दखल देने से बची पूर्ववर्ती सरकार।
लेकिन प्रभु राममंदिर के मामले मे तो अनपढ़ मदारी गैंग ने बकायदा ट्रस्ट बनाकर लुट की हैं, जमीन खरीदी मे हेरा फेरी, बुनियादी ढांचा निर्माण मे कमीशनखोरी, चढ़ावा मे हेराफेरी..... छोड़े क्या हो...???
लेकिन प्रभु राम विनम्र होकर सब कुछ देख रहे है पापियों जैसे साधु वेश मे रावण को सीता हरण करते हुए देखा था, लेकिन दण्ड भयावह दिया था कुल नाश करके...
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष परम आदरणीय श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी लगभग 50 बरसों से देश की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने एक आम कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और आज पार्टी के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभालते हुए, कांग्रेस की विचारधारा और देश के लोकतंत्र को मजबूत करने में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं। उनका दशकों पुराना अनुभव, उनकी दूरदर्शिता और बेमिसाल जीवटता हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आदरणीय श्री खरगे जी ने आज एक बार फिर से राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली है। उन्हें हार्दिक बधाई एवं बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
@kharge
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RSS की ईमानदारी का भांडा फूट गया है
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बचपन से RSS को लेकर जो इमेज बनती देखी है वह यह कि इसके कार्यकर्ता बड़े ईमानदार लोग होते हैं। धोती-कुर्ता या सादे पैंट-शर्ट में साइकल या स्कूटर से चलने वाले लोग जो हिन्दू धर्म के लिए काम करते हैं।
जो लोग संघ को उसकी विचारधारा के लिए नहीं भी पसंद करते थे, वे भी इस इमेज को स्वीकार करते थे और भाजपा की सफलता के पीछे यह एक बड़ा कारक रहा है।
वैसे तो तहलका स्टिंग ऑपरेशन के समय ही इस इमेज पर पर्याप्त छींटे पड़े थे, लेकिन उसका प्रभाव बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन राम मंदिर चढ़ावा चोरी ने इस इमेज को तार-तार कर दिया है।
मंदिर ट्रस्ट में चंपतराय हों, अनिल मिश्रा हों, गोविंद गिरी हों या दूसरे महत्त्वपूर्ण लोग, सब संघ से जुड़े हुए हैं। असल में राम मंदिर आंदोलन से लेकर निर्माण का पूरा प्रोजेक्ट संघ का ही है। इसीलिए कथित पत्रकार का 'आस्था' वाला दर्द उभर रहा है। इन्हें भगवान राम की आस्था की चिंता नहीं, असल में संघ के प्रति दरकती आस्था की चिंता है। इसी चिंता के चलते बड़ों को बचाया जा रहा है- भाजपा राज में संघ नेता जेल में- की हेडिंग्स बहुत नुक़सानदायक होंगी।
चुनाव कौन जीतेगा, कौन हारेगा, यह एक अलग बात है लेकिन संघ के लोगों की यह छवि टूट रही है तो उसका असर दीर्घकालिक होगा। चढ़ावा अगर दस प्रतिशत रह गया है तो लोगों की आस्था कम नहीं हुई है, लोग उसी संख्या में जा रहे हैं, कम हुआ है मंदिर के संचालकों पर भरोसा, बल्कि फ़िलहाल तो टूट गया है।
ऐसे लोग जो संघ के समर्थक हैं, भाजपा के वोटर हैं, सपा-कांग्रेस को नापसंद करते हैं, वे भी दुखी हैं, बल्कि शॉक्ड हैं। वे भाजपा नेताओं के भ्रष्टाचार पर ध्यान नहीं देते, लेकिन मंदिर में भ्रष्टाचार उन्हें दुखी करता है।
सिवाय उनके जो इस गोरखधंधे के किसी तरह के लाभार्थी हैं या ऐसे पे रोल पर हैं कि समर्थन के अलावा कोई चारा नहीं, सब सवाल पूछ रहे हैं।
यही संघ-भाजपा के लिए चिंता का विषय है- संघ की ईमानदारी का भांडा फूट गया है।
Blud stood up during a rehearsed band match in Seychelles 🇸🇨 to show deshbhakti
But didn’t meet the families of the soldiers martyred during Operation Sindoor back home in India.
Make it make sense.
Indian Marxist historian and polymath, Damodar Dharmananda Kosambi died June 29, 1966. Known for contributions in statistics and genetics, his work, "An Introduction to the Study of Indian History" is considered foundational in the historiography of India. #OTD#India