छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती समारोह के मौक़े पर नागपुर, महाराष्ट्र में दिये गये भाषण के बहाने प्रजाहितैषी, स्वराजधर्मी, सांप्रदायिक सौहार���द के हिमायती, कमेरा राजा को याद कर रहे हैं.
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किसान-कमेरे जनों की आन-बान-शान,
प्रजा के हितैषी, इंसाफ़ को राजधर्म मानने वाले,
स्वराज को जनाधिकार बनाने वाले
शेरदिल छत्रपति शिवाजी महाराज को क्रांतिकारी सलाम।
आज जब हम शिवाजी को याद करते हैं, तो एक ऐसे कमेरा राजा को स्मरण करते हैं जिसने सत्ता को प्रजा की सेवा का माध्यम बनाया। उनका स्वराज किसी एक धर्म या जाति का नहीं, बल्कि बहुजन समाज के सम्मान और सुरक्षा का स्वराज था। वे न्यायप्रिय, प्रशासनिक रूप से जवाबदेह और सांप्रदायिक सौहार्द के हिमायती शासक थे।
इसलिए ज़रूरी है कि शिवाजी के नाम का उपयोग नफ़���त फैलाने के लिए न होने दिया जाए। वे सांप्रदायिक राजनीति के प्रतीक नहीं थे; वे प्रजाहितैषी और न्यायधर्मी शासक थे।
आज PDA की समाजवादी-संविधानवादी सियासत में शिवाजी को याद करना सामाजिक न्याय, समान अधिकार और सौहार्दपूर्ण स्वराज की परंपरा को आगे बढ़ाना है।
छत्रपति शिवाजी महाराज को पुनः क्रांतिकारी सलाम।