… वो बचपन की यादें, वो दादी के किस्से
वो औघड़ की बैठक, वो चुड़ैलों का पनघट.. वो भुतहा कुँआ,वो रातों का मंजर.
हमें याद आती हैं अब भी बचपन की बातें..!!
#बचपन
अब तो तलवार उठाया जाए,गद्दारों को ललकारा जाए।
नोच रहे बहन बेटियों की लाशे,अब तो सर उतारा जाए।
बहने दो कातिल का लहू ,जहां तक बहकर धारा जाए।
रुके नहीं तलवार हमारी , जबतक न सारे संहारा जाए।