@Tahkeek_KSA सुनो ना प्रेंक शूट कर रहे हैं आप नेचुरल बिहेवियर रखो।
ये सब हो क्या रहा है भारत में
कृष्ण बिहारी नूर साहब का एक शेर है
सच घटे या बढ़े तो सच नहीं रहता
झूठ की कोई इंतहा ही नहीं
@santoshtrivedi_ अगर ज़िद नहीं है तेरी जवानी में,
तो किरदार हल्का है तेरी कहानी में।
कुछ कसमों ने दबा़ रक्खा है मुझको,
वरना तो आग लगा दूं मियां पानी में।
✍️ दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@SirAbdullahSidd मैं मौत से अड़ा हूं मेरा हौंसला तो देख,
बहुत से ताज बिखरें मिलेंगे मेरा घौसला तो देख।
मैं अपनी ज़िद में आसमां को चीर दूं मगर,
नहीं खला तो नहीं खला और खला तो देख।
✍️ दशरथ रांकावत 'शक्ति'
वैसे जीने के लिए सब कुछ होने पर भी कुछ कमी लगती है मगर यूं सोचा जाए तो महज तंदुरुस्त शरीर और सामान्य बुद्धि भी बहुत होती है।
जो है उसे जो नहीं है उसके लिए बेकार नहीं करना चाहिए।
✍️ दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@hindisopan इतना भी आसान नहीं है चरण रोप कर अड़ना,
देख मृत्यु प्रत्यक्ष और फिर निर्भय होकर लड़ना।
डरना कोई पाप नहीं है सहज प्रवृत्ति मानव की,
वीर वही कहलाते जिनको स्वीकार नहीं है सड़ना।
दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@iamarjun99 अब किसी से कोई ना दिल की बात कहें,
दौर-ए-बेवफाई में इतना एहतियात रहें।
कल तुम दुनियां से कहोगे उसका सिला,
क्यों न आज ही काबू में जज़्बात रहें।
दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@ChhotiKavita दिन भर तो सूरज तम को हर डाला,
शाम ढले ढल जाना भी मजबूरी है।
धूप कहां तक जीने की उम्मीदें दे,
खुद पर भी विश्वास बहुत ज़रूरी है।
✍️ दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@ChhotiKavita शाम होते होते छोड़ गया साया भी,
समझता था साया तो अपना होगा।
अगर तुम समझते हो तुम अलग हो,
वहम न पालो वो सब सपना होगा।
✍️दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@SPandey114362 @Anshika_in समभाव हे मगर गलती पर दंड एक समान नहीं था चाण्डाल अशिक्षित थे धर्म के जानकार नहीं थे इस लिए उनके द्वारा किये पाप कुछ दंड के साथ क्षम्य थे ।ज्ञानी से धर्म की अवहेलना स्वीकार्य नहीं हो सकती अतः उसका दंड अधिक है आज भी यदि आपके विचारों से पूरी सभ्यता प्रभावित होती है तो आप अपराधी है।
@ManishJaiky@ocjain4 वो रावण था मगर भगवा पहन के आया था,
सो हमने सनातनी समझ के सर झुकाया था।
कितना अरे कितना गिरेगा इंसान की औलाद,
जो सबको कहा है मां बाप को भी बताया था ?
✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'
@ocjain4 वो रावण था मगर भगवा पहन के आया था,
सो हमने सनातनी समझ के सर झुकाया था।
कितना अरे कितना गिरेगा इंसान की औलाद,
जो सबको कहा है मां बाप को भी बताया था ?
✍🏻 दशरथ रांकावत 'शक्ति'