हाथों में जो किताब होनी थी,
वहाँ आज निशान गहरे हैं,
शिक्षा की गुहार लगाने वालों पर,
व्यवस्था के कड़े पहरे हैं।
कलम मांगी थी सुनहरे कल के लिए,
बदले में लाठियां बरसाईं,पूछ रहा है आज देश का युवा, क्या यही है लोकतंत्र की दुहाई?
ज्ञान के मंदिर की चौखट पर, क्यों लहू बहाया जाता है,
हक मांगने वाले छात्र को, क्यों अपराधी बनाया जाता है?
निराशा में आँख का पानी
जब समुंदर बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
कोई अपनी ताक़त पर
जब सर उठा इठलाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
हुक़ूमतों का घमंड-गुरूर
जब पर्वत सा बन जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
दौर जब नाइंसाफ़ी का
हद ही पार कर जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!
जब-जब देश का भविष्य
पूरा दांव पर लग जाता है
‘इंक़लाब’ तब आता है!!!
लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है
जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है
सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है
~ राहत इंदौरी
(ज़द: चपेट, साहिबे मनसद: सिंहासन पर बैठने वाला)
तोड़ दो ज़ंजीर-ए-बातिल तोड़ दो,
रूख़ हवाओं का उधर को मोड़ दो।
तुम ज़माने की नई तक़दीर हो,
तुम ही उठती मौज हो, शमशीर हो।
ज़ुल्म के आगे कभी झुकना नहीं,
राह में आँधी हो पर रुकना नहीं।
तुम सफ़ीर-ए-अमन हो,
तुम हो इंक़लाब,तुम से ही चमकेगा कल का आफ़ताब
~ अली सरदार जाफ़री
इतना अँधेरा तो पहले कभी नहीं था
कि मुँह खोलकर अँधेरे को कोई अँधेरा न कह सके
कि हाथ को हाथ भी न सूझे
कि आँख के सामने घटे अपराध की
कोई गवाही न दे सके
इतना अँधेरा तो पहले कभी नहीं था !
- राजेश जोशी । जन्मदिवस विशेष
#sonamwangchuk#सोनम_वांगचुक
"यदि राम केवल नारों में रहेंगे और मर्यादा व्यवहार से गायब रहेगी, तो मंदिरों में ताले बढ़ते चले जाएंगे" 💯🔥
राम मंदिर में चोरी के मुद्दे पर शेखर सुमन के ये 3 मिनट एकदम लाजवाब है। 🫡🫡
और अंत में जय श्री राम तो बहुत ही गजब। 🚩💯🔥🔥
देशगान / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (पूरी कविता...)
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
बिन अदालत औ' मुवक्किल के मुक़दमा पेश है।
आँख में दरिया है सबके
दिल में है सबके पहाड़
आदमी भूगोल है, जी चाहा नक़्शा पेश है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
हैं सभी माहिर उगाने
में हथेली पर फ़सल
औ हथेली डोलती दर-दर बनी दरवेश है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
पेड़ हो या आदमी
कोई फ़र्क़ पड़ता नहीं
लाख काटे जाइए, जंगल हमेशा शेष है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
प्रश्न जितने बढ़ रहे
घट रहे उतने जवाब
होश में भी एक पूरा देश यह बेहोश है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
खूँटियों पर ही टँगा
रह जाएगा क्या आदमी?
सोचता, उसका नहीं यह खूँटियों का दोष है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
#sonamwangchuk #hungerstrike #cockroachjantaparty
जब भगवान के नाम पर कथा/प्रवचन करने वाले लोग चार्टर्ड विमान से घूमेंगे,आलीशान बंगलों में रहेंगे,ब्रांडेड कपड़े पहनेंगे और पूरी बेशर्मी से अपनी इस luxury lifestyle का दिखावा भी करेंगे तो धर्म के नाम पर लालच तो बढ़ेगा ही!आज धर्म के नाम पर हर तरफ व्यापार चल रहा है..और ये कथावाचक/प्रवचन करने वाले श्रोताओं को सादा जीवन जीने के उपदेश देते हैं😀 कहां से ये आपको साधु,संत,सिद्ध,महान दिखाई देते हैं? ये सब बस बिज़नेसमैन हैं और इन्हें वैसे ही देखा जाए..पैसे,पद,प्रसिद्धि के लालच में धर्म को बेच रहे व्यापारी🙏