इतना अँधेरा तो पहले कभी नहीं था
कि मुँह खोलकर अँधेरे को कोई अँधेरा न कह सके
कि हाथ को हाथ भी न सूझे
कि आँख के सामने घटे अपराध की
कोई गवाही न दे सके
इतना अँधेरा तो पहले कभी नहीं था !
- राजेश जोशी । जन्मदिवस विशेष
#sonamwangchuk#सोनम_वांगचुक
"यदि राम केवल नारों में रहेंगे और मर्यादा व्यवहार से गायब रहेगी, तो मंदिरों में ताले बढ़ते चले जाएंगे" 💯🔥
राम मंदिर में चोरी के मुद्दे पर शेखर सुमन के ये 3 मिनट एकदम लाजवाब है। 🫡🫡
और अंत में जय श्री राम तो बहुत ही गजब। 🚩💯🔥🔥
देशगान / सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (पूरी कविता...)
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
बिन अदालत औ' मुवक्किल के मुक़दमा पेश है।
आँख में दरिया है सबके
दिल में है सबके पहाड़
आदमी भूगोल है, जी चाहा नक़्शा पेश है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
हैं सभी माहिर उगाने
में हथेली पर फ़सल
औ हथेली डोलती दर-दर बनी दरवेश है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
पेड़ हो या आदमी
कोई फ़र्क़ पड़ता नहीं
लाख काटे जाइए, जंगल हमेशा शेष है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
प्रश्न जितने बढ़ रहे
घट रहे उतने जवाब
होश में भी एक पूरा देश यह बेहोश है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
खूँटियों पर ही टँगा
र�� जाएगा क्या आदमी?
सोचता, उसका नहीं यह खूँटियों का दोष है।
क्या ग़ज़ब का देश है यह, क्या ग़ज़ब का देश है!
#sonamwangchuk #hungerstrike #cockroachjantaparty
जब भगवान के नाम पर कथा/प्रवचन करने वाले लोग चार्टर्ड विमान से घूमेंगे,आलीशान बंगलों में रहेंगे,ब्रांडेड कपड़े पहनेंगे और पूरी बेशर्मी से अपनी इस luxury lifestyle का दिखावा भी करेंगे तो धर्म के नाम पर लालच तो बढ़ेगा ही!आज धर्म के नाम पर हर तरफ व्यापार चल रहा है..और ये कथावाचक/प्रवचन करने वाले श्रोताओं को सादा जीव��� जीने के उपदेश देते हैं😀 कहां से ये आपको साधु,संत,सिद्ध,महान दिखाई देते हैं? ये सब बस बिज़नेसमैन हैं और इन्हें वैसे ही देखा जाए..पैसे,पद,प्रसिद्धि के लालच में धर्म को बेच रहे व्यापारी🙏
Rocket Lab 🤝 Iridium – a powerful combination.
Our founder and CEO @Peter_J_Beck is joined by @IridiumComm’s CEO Matt Desch @IridiumBoss and Rocket Lab CFO Adam Spice to discuss how this acquisition will unlock and accelerate our future in space applications.
Links in the comments.
What is Stanley Druckenmillers Biggest position?
It isn't a Tech, Space x or an AI co. It belongs to the Biotech sector.
Name of the company is :- Natera
What the company does:
Natera is a genetic and molecular diagnostics company. In plain terms, it runs blood and DNA tests that help doctors make decisions in three areas: cancer (oncology), pregnancy (women's health), and organ transplants (organ health).
Its older flagship products include Panorama, a non-invasive prenatal test screening for chromosomal abnormalities in a fetus, and Horizon, a carrier screening test for hereditary conditions. But the real growth engine now is oncology. The business narrative shifted in early 2026 when the company hit a major milestone by generating $107.6 million in positive cash inflow in 2025, removing the dilution risk that had made hedge funds wary of its high cash burn.
Signatera — the blockbuster product:
Signatera is a personalized blood test that detects traces of cancer DNA left in the body after treatment. It belongs to a category called MRD (molecular/minimal residual disease) testing. The idea is simple but powerful: after a tumor is surgically removed, tiny amounts of cancer DNA can linger in the bloodstream long before a tumor is visible on a scan.
Signatera tests for any evidence of cancer cell DNA in a patient's blood and is used to stratify patients and guide therapy decisions after surgery, monitor how patients respond to treatment, and detect early cancer recurrence. It is the leading test in the MRD category and has been proven to meaningfully affect patient outcomes in colorectal, breast, and bladder cancer.
Adoption is the key bull signal: in early 2026, over 50% of all US oncologists had ordered a Signatera test in the previous quarter, and oncology test volumes grew 55% year-over-year in Q4 2025. Natera and bulls believe MRD testing can be a $20 billion market as oncologists keep adopting these tests and clinical utility is proven in more settings. Because cancer patients need repeated monitoring over time, each adopted patient becomes a recurring revenue stream and the feature that makes the long-term economics so attractive.
Razor Blade business model in Biotech, always fascinating to study unique companies.
Disclaimer: no recommendation to buy or sell.
हर साल लाखों युवा UPSC, NEET, JEE जैसी परीक्षाओं के लिए अपनी ज़िंदगी के सबसे कीमती साल दांव पर लगा देते हैं। लेकिन आज उनकी सबसे बड़ी लड़ाई सिर्फ़ सिलेबस से नहीं है।Paper Leak, अनिश्चितता, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, परिवार और समाज की अपेक्षाएँ, बार-बार होने वाला Self-Doubt और लगातार बढ़ता मानसिक दबाव, ये सब मिलकर तैयारी को सिर्फ़ एक परीक्षा नहीं, बल्कि मानसिक संघर्ष बना देते हैं।
जब किसी परीक्षा की तैयारी युवाओं की Mental Health पर भारी पड़ने लगे, तो सवाल सिर्फ छात्रों से नहीं, उस व्यवस्था से भी पूछा जाना चाहिए जो उनसे लगातार धैर्य और त्याग की उम्मीद तो करती है, लेकिन उन्हें भरोसा और स्थिरता नहीं दे पाती।
इसी विषय पर हमने विस्तार से बात की है। अगर आप तैयारी कर रहे हैं, किसी Aspirant को जानते हैं, या शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं, तो यह वीडियो जरूर देखें।
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क्या हमारा Exam System प्रतिभा को निखार रहा है या युवाओं को मानसिक रूप से थका रही है? अपनी राय कमेंट में बताइए।
#UPSC #NEET #JEE #MentalHealth #PaperLeak #ExamStress #EducationSystem
राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में पहुँचे बड़े बड़े लोगों..राम कथा के नाम पर करोड़ों कमाने वाले कथावाचकों..खुद को सबसे बड़ा राम भक्त साबित करने की होड़ में लगे लोगों में से किसी की भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है अभी तक..राम मंदिर में हुई डकैती को लेकर(चोरी तो अब छोटा शब्द है)..इन सबका हिसाब भी राम ही करेंगे एक दिन 🙏 दरअसल राम के नाम पर कमाए हुए पैसे,जीवन की महत्वाकांक्षाओं ने इस तरह से मूंह बंद कर दिया है सबका कि अब राम नाम पर हु�� लूट पर बोल नहीं पा रहे हैं बेचारे..
#rammandirayodhya
Indian politicians never learn how to live out of power. They keep yearning for more till the very last.
The two term limit of US Presidents is a good thing.
Dear Godi media, instead of focusing on the language of Sanjay Raut, you should focus on how democracy is being killed everyday, how you all are justifying everything in the name of "Operation Tiger" and how you are creating an image of Uddhav Thackeray is responsible for everything. You are not reporting the death of democracy, you are giving platform and justifying horse trading and insult of voters vote
विपक्ष को तोड़ कर चुनौती जनता को दी जा रही है कि आपकी कोई औक़ात नहीं है। ऐसा कर लोकतंत्र का उत्साह ख़त्म किया जा रहा है। अगर कोर्ट केस माफ़ कराने के लिए सांसद पार्टी छोड़ रहे हैं तो सवाल उठेगा कि क्��ा कोर्ट ने ED की जगह ले ली है? अदालत की साख को दाँव पर लगाने से नुक़सान भरोसे का होगा। वकील प्रतिस्पर्धा में निखरते हैं।उनके पेशे को AI से ज़्यादा ख़तरा न्याय व्यवस्था को पार्टी व्यवस्था में बदल देने से होगा। इसके बाद क्या बचेगा? हताशा का लंबा दौर और नतीजा? एक शब्द में - दुर्दशा। हताशा से केवल दुर्दशा पैदा होती है। राष्ट्र के लोक जीवन का उत्साह ख़त्म हो जाता है। उसकी आर्थिक प्रगति भी कुंठित हो जाती है। अभी सत्ता के दम पर कुछ भी कर लीजिए लेकिन सबके सामने सांसदों को गुलाम की तरह पेश कर राजनीति के महत्व को भी समाप्त ���िया जा रहा है। अगर यह जीत है तो बीजेपी जश्न क्यों नहीं मना रही? क्या इस देश में किसी को पार्टी चलाने नहीं आती? फिर जब सारा बहुमत आ ही गया तब चुनाव बंद कर दीजिए।
पार्टी तोड़ने वाले खेल का नया नाम है ऑपरेशन टाइगर। संजय राउत 50 करोड़ की कीमत बता रहे हैं।मॉड्यूल भी नया है - अपनी पार्टी की बजाय सहयोगी पार्टी में मर्ज़ कराना। जैसे TMC वालों को NCPI में और ठाकरे के MPs को शिंदे गुट में। आगे अनुप्रिया पटेल को भी खुशखबरी मिल सकती है। उनके यहां एक साथ 25+ MPs की आमद हो सकती है। जीत�� राम मांझी की पार्टी में JDU या RJD वाले भेजे जा सकते हैं। कुल मिलाकर लोकतंत्र की मंडी में रेट अच्छा मिल रहा है।
पहले AAP, फिर TMC और अब खबर है कि उद्धव ठाकरे के शिवसेना के सांसद शिंदे से जुड़ेंगे.. कल यह सांसद ओम बिरला से मिल सकते हैं.. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस देश में चुनाव ही क्यों करवाया जा रहा है? पत्रकार इसे ऑपरेशन ऑपरेशन कहकर जस्टिफाई कर रहे हैं, लेकिन सही मायने में यह आपक�� वोटों की चोरी है.. सरकार को अब फर्क नहीं पड़ता आप बेरोज़गारी या महंगाई पर नाराज़ हो सकते हैं, सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं, लेकिन अब आपके सांसदों को ही खरीदा जाएगा! क्या आपको अब भी लगता है कि भारत में लोकतंत्र मौजूद है? अब ना ही इन्हें EVM हैक करना है, ना ही SIR करना है.. सबकुछ पैसों और डर के दम पर चल रहा है..
25–30 साल के कई UPSC अभ्यर्थियों के चेहरों पर जो मुस्कान दिखती है, व��� अक्सर संघर्षों और दबावों को छिपा देती है। सालों की तैयारी, अनिश्चित भविष्य और लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा ��े उन्हें भीतर से थका दिया है।
हालत यह है कि पढ़ाई के तनाव से बचने के लिए लोग घंटों कॉमेडी वीडियो और रील्स में खुद को उलझाए रखते हैं, मानो कुछ समय के लिए वास्तविक समस्याओं को भूल जाना ही समाधान हो। बाहर से सब सामान्य दिखता है, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की इस दौड़ ने युवाओं पर भारी मानसिक और भावनात्मक दबाव डाल रखा है।
चेहरों पर मुस्कान है, लेकिन संघर्ष की कहानी कोई नहीं सुनता। सालों की तैयारी ने युवाओं को इस मोड़ पर ला खड़ा किया है कि वे हंस तो रहे हैं, मगर व्यवस्था, अनिश्चितता और लगातार बढ़ते दबाव के बोझ को भीतर ही भीतर ढो रहे हैं।
#upscaspirants
जिसने वर्षों तक पत्रकारिता को TRP, प्रोपेगेंडा और सत्ता के पक्ष-विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया हो, उसे शिक्षकों को 'धंधेबाज' कहने से पहले आत्ममंथन करना चाहिए।
शिक्षा में गलत लोग भी हैं।
लेकिन पत्रकारिता में भी हैं।
राजनीति में भी हैं।
व्यापार में भी हैं।
तो क्या कुछ गलत लोगों के कारण पूरे शिक्षक समाज को "दो कौड़ी का" कह दिया जाएगा?
anjana शिक्षक का सम्मान कमाने में वर्षों लगते हैं।
भर्तियाँ अटक रही थीं,
लाखों युवाओं की उम्र निकल रही थी,
तब आपके स्टूडियो की आवाज़ कहाँ थी?
शिक्षकों ने पैसे लेकर शिक्षा दी है।
��ेकिन पैसे लेकर किसी राजनीतिक दल का प्रवक्ता बन जाना,
व्यवस्था की हर गलती पर पर्दा डालना,
और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाना...
यह सिर्फ पत्रकारिता का पतन नहीं,
बल्कि अपने पेशे के साथ गद्दारी है।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है,
मेहनत करवाता है,
बच्चे का भविष्य बनाता है
शिक्षकों ने पैसे लेकर पढ़ाया है,
देश के लाखों युवाओं को रोजगार तक पहुँचाया है।
लेकिन गलत को सही और सही को गलत साबित करने ���ी कीमत लेकर काम करना,
समाज और लोकतंत्र दोनों के साथ विश्वासघात किसने किया ?