@RajputRanjanaa इनको जवाब देना ही बंद करो ना।
पढ़ाई करनी नहीं है, बस घृणा फैलाने वाली पोस्ट करके अपने जैसे अनपढ़ों के हीरो बनना है। घोर प्रतिस्पर्धी पढ़ाई से गुजरने वाले ही अपने ज्ञान और विवेक के आधार पर किसी विषय का सही विश्लेषण कर सकते हैं।🙏
@surysagarji_ आचार्यश्रेष्ठ🙏
वह विज्ञापन शायद उनके लिए कहीं अधिक प्रभावी है,जो स्त्री उसके लिंग के रूप में देखती है
जहाँ माँ,बहन,भाभी,फूफी,चाची और हर स्त्री रिश्ता औरत रह जाता है
जहां महिला को सुख और तृप्ति का एहसास कराने वाली सिर्फ भोग्या वस्तु मानी जाती हैं और यह भारतीय संस्कृति नहीं है🙏
@richaanirudh मेरे घर में कभी मनुस्मृति नहीं थी,जब इस ग्रंथ के नाम पर दुष्प्रचार कर मुझे मनुवादी गया,तो मैंने सोचा जिस वाद का मैं हूँ,उसका ग्रंथ तो घर में होना ही चाहिए।
अतः अब वह मेरे पूजागृह में शोभायमान है।
दुर्भाग्य मेरा! कि जिसका मैं अनुयायी हूं,
वह किताब मैं अब तक भी नहीं पढ पाया हूं🤔
@ObcCommunity यह दलील ठीक नहीं है,वेतनऔर कृषि आय चाहे करोड़ों हो वह क्रीमीलेयर में नहीं आयेगा,मां बाप डाइरेक्ट class-I डाइरेक्ट बने हो, या class-I के लिए 40 वर्ष की आयु से पहले प्रमोशन हुआ है।
ये प्रोफेसर ग्रुप-वन अधिकारी है तब भी इनके बच्चों को फयदा नहीं भी मिलेगा पर इन्हें मिलता रहेगा ।
@Lawyer_Kalpana यह हाल बना दिये है आरक्षण ने समाज के।
पुलिस के कारिंदे जिनसे उम्मीद होती है कि वह निष्पक्ष होंगे आज वह सवर्ण द्वारा छू लेने भर से गुस्से से लाल पीले हो रहे हैं
बच्चा भी अनुमान लगा सकता है कि पुलिस जी को उस वर्ग से घनघोर नफरत है जो आंदोलित है।
आरक्षण की समीक्षा इसीलिए जरूरी है
@jpsin1 जहां मैरिट की बात होगी वहां वही लोग पहली पंक्ति में होंगे जिन्होंने हर अत्याचार हर घृणा को अपनी जीवटता और संघर्ष से जीता है चाहे वह अंग्रेजों के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम हो या आज बेड़ियों में जकड़े होने के बाद भी हर दौड़ में फतह
कारण वही कि हमने संघर्ष को ही नियती मान लिया है।
@IMinakshiJoshi अब तक तो काक्रोचों के द्वारा इन पर किये गये दुर्व्यवहार पर क्षोभ और इनपर सहानुभूति हो रही थीं, पर इनको देख कर तो लग रहा हैं इन्हीं ने ज्यादती की होगी🤔
@yadavakhilesh आर्थिक आधार पर समर्थन होना चाहिए! फिर वो लोकप्रिय क्वोट
"जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी"
स्वतः ही फुलफिल हो जायेगी क्योंकि अनुपातिक रूप में वीकर सैक्शन की संख्या भी होगी, हो सकता हैं तुम्हारी थ्योरी से सवर्ण गरीब कम होंगे तब उसका फायदा भी यादव जी!आपको ही मिलेगा🤔
@AshwiniUpadhyay आर्थिक आधार पर समर्थन होना चाहिए! फिर वो लोकप्रिय क्वोट..
"जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी"
स्वतः ही फुलफिल हो जायेगी क्योंकि अनुपातिक रूप में वीकर सैक्शन की संख्या भी होगी।🤔
@NijiSachiv आर्थिक आधार पर समर्थन होना चाहिए! फिर वो लोकप्रिय क्वोट
"जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी"
स्वतः ही फुलफिल हो जायेगी क्योंकि अनुपातिक रूप में वीकर सैक्शन की संख्या भी होगी।🤔
@AbhayPaswan01 तो परेशानी क्यों हैं, आर्थिक आधार पर समर्थन करो ना! 90% हो तो 90% भागीदारी खुद ही हो जायेगी, फिर जिसकी जितनी संख्या होगी उसी हिसाब से न्याय होगा।
@help_delhivery This is the same sentence you repeat every single day. At this point, it has become your daily script rather than an actual response or solution.
@abhijeet_dipke@AshutoshRanka क्यों भई!कैसी लगी! हो गई तसल्ली? करा ली बेसस्ती? पड़ गई कलेजे में ठंडक? आ गया स्वाद?
Gen-Z शब्द तो ऐसा यूज कर खुश होते हो जैसे फाईटर जेट का इंजन बना लिये हो! 🤔