दिल्ली में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से सवाल पूछने की कोशिश करने पर पत्रकारों शाहीन और नफीसा को पुलिस द्वारा कथित रूप से मारते-पीटते थाने ले जाने, गाली-गलौज करने, धमकाने और उनके साथ दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप यह बताता है कि World Press Freedom Index में भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर क्यों है।
सबसे चिंताजनक यह है कि उनका कहना है कि उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद उनके साथ दुर्व्यवहार और बढ़ गया यह भाजपा की मुस्लिम विरोधी मानसिकता और प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल पूछना अपराध नहीं है। पत्रकार की पहचान देखकर उसके साथ भेदभाव करना लोकतंत्र और संविधान दोनों के खिलाफ है।
यह बेहद गंभीर और चिंताजनक है!
आज दिल्ली में 4PM की पत्रकार शाहीन के साथ दिल्ली पुलिस ने मारपीट की.
शाहीन दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही थीं. शाहीन का आरोप है कि इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और मारते-पीटते थाने ले गई.
उनका यह भी आरोप है कि जब पुलिसकर्मियों ने उनका नाम पूछा और नाम में ‘खान’ सुना, तो उनके साथ मारपीट और बढ़ गई.
23 जून को जंतर-मंतर की घटना पर पुलिस कहती है कि संजय कुमार की चोटें सामान्य थीं और खोपड़ी में दरार की बात निराधार है। लेकिन आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में वह खुद “7 टांके”, “मरने की स्थिति” और “307 बनता था” जैसी बातें कह रहा हैं।
वह यह भी दावा कर रहा हैं कि संजय कुमार की बेटी निशु, थाने के बाहर खड़े होकर कह रही थी कि “अगर मेरे बाप को इंसाफ नहीं मिला तो हम जहर खाकर मर जाएंगे।” साथ ही उनका दावा है कि वे जेल तक नहीं गए और “कपिल मिश्रा अपने बड़े भाई हैं”, “चिराग पासवान अपने बड़े भाई हैं” तथा “सबका सपोर्ट है।"
तो सवाल है कि अगर घायल की हालत इतनी गंभीर थी और 7 टांके लगे थे, तो पुलिस की MLC में चोटें सामान्य कैसे बताई गईं? अगर धारा 307 का मामला बनता था, तो आरोपी जेल क्यों नहीं गया?
“कपिल मिश्रा के फोन के बाद छोड़ने का दावा सच है या झूठ? क्या पुलिस इसकी निष्पक्ष जांच करेगी? जब राजनीतिक संरक्षण का इतना स्पष्ट दावा सामने आ रहा है, तो पुलिस यह क्यों नहीं स्पष्ट कर रही कि इस मामले में किसी अनुचित प्रभाव या हस्तक्षेप की कोई भूमिका थी या नहीं?”
आखिर पुलिस के रिकॉर्ड और आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज के बयान में इतना बड़ा अंतर क्यों है? हमें इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और अपने पीड़ित परिवार को न्याय दिला कर रहेंगे। जय भीम, जय भारत।।
देश के हर दलित व्यक्ति का जन्म से मृत्यु तक, हर जगह, हर कदम अपमान किया जाता है।
उनकी जितनी बुलंद आवाज़ होती है, उनपर उतना तेज़ हमला होता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी के साथ हल्द्वानी में जो भी हुआ वो "शुद्धिकरण" का नाम दे कर उनके खिलाफ़ छुआछूत है - और छुआछूत भारत के संविधान के अनुसार दंडनीय अपराध है।
इस बात को 20 दिन हो गए - मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, कोई FIR दर्ज नहीं हुई।
नरेंद्र मोदी जी, देश के हर दलित व्यक्ति को आपकी यह दलित विरोधी विचारधारा साफ़ दिखाई दे रही है।
अब गेंद BJP के पाले में है - जल्द से जल्द SC-ST क़ानून के तहत FIR दर्ज हो, कार्रवाई हो और न्याय हो - वरना कांग्रेस पार्टी न्याय हासिल करना अच्छे से जानती है।
सुभाष चंद्रा का 22 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ 6.5 करोड़ में निपटा दिया गया. सुभाष चंद्रा भाजपा के समर्थन से सांसद बने थे.
सुभाष चंद्रा की जगह कोई गरीब किसान होता तो 2-4 लाख रूपयों के लिए उसे फाँसी लगानी पड़ जाती.
स्कूलों की बदहाली का ख़स्ताहाल दिखाने की कोशिश करेनवाले ‘जंतर-मंतर के युवा आंदोलनकारियों’ पर राजस्थान में भाजपाइयों पर द्वारा किया गया जानलेवा हिंसक हमला और गाड़ियों के शीशे तक तोड़ने का कुकृत्य बेहद निंदनीय है।
‘हिंसा’ हताशा का ही उग्र रूप होती है। शिक्षा विरोधी भाजपा और उनके संगी-साथी कभी नहीं चाहते हैं कि लोग जागरूक हों और उनकी दक़ियानूसी सोच पर आधारित रूढ़िवादी-सामंतवादी सत्ता के ख़िलाफ़ खड़े होकर उसे उखाड़ फेंकें। शिक्षा भाजपाइयों के लिए व्यापार है, ‘मानव संसाधन विकास’ का मुद्दा नहीं।
छात्र कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
2014 के बाद जनता की जनरल नॉलेज काफी अच्छी हो गई,ये झूठ बोलते हैं लोग सर्च करते हैं सच्चाई पता चल जाती है इसके लिए धन्यवाद मोदी जी बनता है
ये BJP का सरेआम झूठ बोलते हैं
क्योंकि उन्हें पता है टीवी चैनल का एंकर इस झूठ पर कुछ नहीं बोलेगा और अगर वहां किसी अन्य दल या पार्टी का नेता सच को उजागर करने की कोशिश करेगा तो एंकर उसे बोलने नहीं देगा 2014 के बाद से तो लगातार ऐसा ही हो रहा है तभी तो ये लोग लगातार झूठ पर झूठ बोले जा रही है❗
CJP की मुहिम से डरी सरकार
राजस्थान सरकार का फरमान
स्कूल के प्रधानाचार्य की पूर्व अनुमति के बिना स्कूल में कोई दाखिल नहीं होगा .
प्रधानाचार्य की लिखित अनुमति के बिना छात्रों , शिक्षकों और स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी , वीडियोग्राफी , साक्षात्कार या किसी तरह की रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी .
स्कूल के अधिकारी तय करेंगे कि स्कूली छात्रों के फोटो या वीडियो प्रसारित हों या नहीं .
बिना अनुमति अगर कोई स्कूल में दाखिल होता है या रिकॉर्डिंग करता है तो उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी
मतलब ये हुआ कि स्कूलों को ठीक करने की बजाय सरकार ने स्कूलों की दशा को छिपाने के लिए ये फरमान जारी कल दिया है .
#SchoolThikKaro
पीडित छात्रा:- एक पुलिस वाले ने मेरे पिछले हिस्से मे लाठी घुसेडी...💔
ठीक ऐसी ही घटना प्रोटेस्टर के दौरान जंतर-मंतर पर और भी छात्राओ के साथ भी हुई
हमें ₹@डी बोला गया है, हमे मारते वक्त ये बोल रहे थे कि और मारो इन बहन की लौ@डी को 💔
एक लडकी को ये तक बोला गया कि घर चली जा वर्ना थाने ले जा कर नं&गा करके मारूंगा
औरतो की छाती पर पैर रखे गए है और ये सब पुरूष पुलिस के द्वारा किया गया था और जो इनमे से तमाम बिना वर्दी के भी थे !!
इस पीडिता की आवाज प्रधानमंत्री के कानो तक जरूर पहुचनी चाहिए, उनको अपने ऊपर पडी गालियां तो सुनाई दे गई...
पर प्रधानमंत्री की पुलिस ने इन छात्राओ के साथ जो सुलूक किया उसके बारे मे प्रधानमंत्री के क्या विचार है ?
वाह! क्या संस्कार हैं!
प्रदर्शनकारियों की भाषा को अभद्र बताने वाला BJP IT सेल नाबालिग लड़कियों की निजी जानकारी लीक करके उन्हें रेप की धमकियां देने से बाज़ नहीं आ रही है।