जब तक मेरे शरीर में रक्त की एक बूंद भी शेष है , मैं किसी भी किसान , जवान, पीड़ित , दलित और शोषित के हकों पर कुठाराघात नहीं होने दूंगा - हनुमान बेनीवाल जी
@hanumanbeniwal
दिखाना है और बताना है उन लोगों को कि भरतपुर के राजा कौन थे और कौन है..जो बोल रहे थे कि हनुमान बेनीवाल को घुसने नहीं देंगे भरतपुर में....
इसलिए अधिक अधिक संख्या में 5 मिनट बाद इस हैशटैग पर पोस्ट करनी है.......
#भरतपुर_चलो@HanumanKiSaina@hanumanbeniwal
हनुमान सेना में योद्धाओं.....
जो लोग बोल रहे थे कि हनुमान को भरतपुर में घुसने नहीं देंगे उन लोगों को जवाब लाखों की तादाद में पहुंचकर देना है, ताकि उनको भी पता लगे कि भरतपुर के राजा कौन थे और कौन है.......
#भरतपुर_चलो@hanumanbeniwal
कल कोई बोल रहा था बेनीवाल जी और मील साहब के राजीनामा हो गया...
भाई वो हनुमान बेनीवाल है जिसे कोई छेड़ेगा उसे वो ऐसे सस्ते में छोड़ने वाला नहीं है... 😂✌🏻
जय हनुमान ✊🏻❤️
SMS जयपुर की वो रात…
मशीनें बीप करती रहीं, इंसानियत खामोश रही।
8 मौतें… 8 परिवार उजड़ गए।
और सिस्टम कहता है — “जांच होगी”।
क्या गरीब की जान सिर्फ एक आंकड़ा है?
प्रदेश जवाब मांग रहा है। ⚠️
#मोदी_पर्ची_वापिस_लो#हनुमान_सेना
चेहरे पर सख्ती दिखती है लेकिन भीतर पूरा राजस्थान बसता है। मंच पर इनके शब्द सिर्फ भाषण नहीं होते, वो उन लोगों की आवाज होते हैं जिनके पास खुद की आवाज नहीं होती। थकान इनके कदमों तक आती होगी पर हिम्मत इनके इरादों तक कभी नहीं पहुँचती।
#मोदी_पर्ची_वापिस_लो#मोदी_पर्ची_वापिस_लो
सोशल मीडिया पर RLP का अपना जलवा है
जब भजनलाल शर्मा विधानसभा में घोषणाएँ कर रहे थे, उसी समय “X” पर #मोदी_पर्ची_वापिस_लो ट्रेंड करने लगा। आज नरेंद्र मोदी का अजमेर दौरा है, उससे ठीक पहले यह माहौल बनना अपने-आप में बड़ी बात है।
यह पहली बार नहीं है। हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की सोशल मीडिया टीम पहले भी #भजनलाल_हटाओ_राजस्थान_बचाओ जैसे बड़े ट्रेंड चला चुकी है, जिसमें करीब 10 लाख से ज्यादा ट्वीट हुए थे। बिना बड़े PR या पेड एजेंसियों के इतनी मजबूती से ट्रेंड खड़ा करना आसान नहीं होता। यह उनकी टीम की मेहनत और तालमेल दिखाता है।
दूसरी तरफ भाजपा राजस्थान और मुख्यमंत्री की सोशल मीडिया टीम इस ट्रेंड का बराबरी से जवाब नहीं दे पाई।
साफ है, सोशल मीडिया की लड़ाई में अभी बेनीवाल की टीम बहुत तेज और मजबूत दिख रही है। अब देखना होगा कि भाजपा और सरकार की टीम इसका जवाब कैसे देती है। राजस्थान की राजनीति अब सिर्फ धरातल में नहीं, सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है।
राजस्थान की राजनीति में कई बड़े नाम आए और गए, कई चेहरे सत्ता के साथ चमके और समय के साथ धुंधले भी पड़े… लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो कुर्सी से नहीं, लोगों की धड़कनों से अपनी पहचान बनाते हैं। हनुमान बेनीवाल उन्हीं नामों में शामिल हो चुके हैं। यह ताकत पद की नहीं, पद से लड़ने की ताकत है… यह प्रभाव सत्ता का नहीं, जनता के भरोसे का है।
जब सदन में अकेली आवाज़ भी पूरी व्यवस्था को सुनने पर मजबूर कर दे, जब गाँव की चौपाल से उठी बात संसद की दीवारों तक गूंज जाए, जब किसान, युवा और आम आदमी अपनी लड़ाई किसी नेता की नहीं बल्कि अपने आदमी की लड़ाई समझकर लड़ने लगे — तब समझ आता है कि ताकत क्या होती है। ताकत भीड़ की नहीं होती, विश्वास की होती है… और यही विश्वास बेनीवाल को अलग खड़ा करता है।
राजनीति में बहुत लोग जीतते हैं, लेकिन बहुत कम लोग दिलों में बसते हैं। हनुमान बेनीवाल की पहचान यही है कि लोग उन्हें नेता कम, अपनी तरफ खड़ा इंसान ज्यादा मानते हैं। शायद इसलिए सवाल अब यह नहीं रहा कि वे कितने बड़े नेता हैं… सवाल यह है कि क्या आज राजस्थान की राजनीति में उनके जितनी सीधी और निर्भीक आवाज़ कोई और है?
@hanumanbeniwal