Dept. of Philosophy, Univ. of Lucknow, with Sanskritiki, held a Debate & Quiz during pre convocation week.
Quiz winners: 🥇Anshika Singh 🥈Vivek Mishra & Roopa Singh (tie) 🥉Shiwank Tiwari
Debate winners: 🥇Shiwank Tiwari 🥈Naman Jain 🥉Ashok Bhaskar Srivastava
उन्होंने AI और मनुष्य की संकल्प की स्वतंत्रता के बारे में अंतर स्पष्ट करते हुए बताया कि मनुष्य के निर्णयन में फ्रीडम ऑफ विल का रोल तो दिखाई देता है परंतु मशीन ( AI) फिलहाल निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र नहीं है परन्तु समय ऐसा आएगा जब AI का परिमार्जित स्वरूप स्वयं निर्णय लेगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग में " मानवीय चेतना और कृत्रिम बुद्धिमत्ता " विषय पर विशेष व्याख्यान विभागाध्यक्ष प्रो o राजेश्वर प्रसाद यादव के निर्देशन में आयोजित हुआ l
जिसके वक्ता शिवम श्रीवास्तव थे। इन्होंने संगोष्ठी के दूसरे दिन मॉडर्न फिलोसॉफी ऑफ साइंस, पैराडाइम शिफ्ट, पार्टनरशिप ऑफ साइंस एंड फिलोसॉफी, डेविड ह्यूम एण्ड द लूपहोल इन द साइंटिफिक मैथड पर चर्चा की।
लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग में दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन कुलपति प्रो o आलोक कुमार राय के संरक्षण में विभागाध्यक्षा डॉ o रजनी श्रीवास्तव (संयोजक) के द्वारा किया गया। संगोष्ठी का शीर्षक " Into the Philosophical Minds of the Fathers of Modern Science" था ।
दर्शन शास्त्र , विभाग में आज 11-05-2025 को दो दिवसीय व्याख्यान का आरंभ हुआ जिसका विषय था “Into the Philosophical Minds of the Fathers of Modern Sciences”, जिसका आरंभ , प्रो राकेश चंद्रा ने इस विषय की भूमिका देकर किया.
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मुख्य वक्ता शिवम श्रीवास्तव जो कि पेशे से एक इंजीनियर हैं, उन्होंने विज्ञान और दर्शन शास्त्र के एक लंबे इतिहास का विवेचन किया और किस तरह से दर्शन ने विज्ञान के आविष्कारों के लिए भूमि प्रदान कि इस बात को रेखांकित किया।
उन्होंने ने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा दर्शन में किस प्रकार से विश्लेषणात्मक विधि को लागू कर सकते हैं । वह ऑस्टिन के के द्वारा मनुष्य के व्यवहार के दो रूपों की भी चर्चा करते हैं, जिसमें प्रथम रूप भाषात्मक है और दूसरा नैतिक है। वह भाषा के तीन कार्यों की भी चर्चा करते हैं l
उन्होंने अपने व्याख्यान का प्रारंभ ऑस्टिन के द्वारा दी गई भाषा की सामान्य परिभाषा देते हुए कहा कि भाषा में दिए गए कथनों का अर्थ परफोर्मेंस पर निर्भर करता है, लेकिन वे सत्य असत्य नहीं होते हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में चार दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन विभागाध्यक्षा डॉ ० रजनी श्रीवास्तव ने किया। विशेष व्याख्यान के अंतिम दिन दर्शनशास्त्र विभाग के प्रोफेसर ऑफ एमिनेंस प्रो० राकेश चंद्रा ने " Austin on Speech Acts" विषय पर चर्चा की ।
वह अपने व्याख्यान के माध्यम से ज्ञान एवं अर्थ के मध्य जो अंतर है, उसे भी व्यक्त करते हैं। जजमेंट, स्टेटमेंट, प्रीपोजीसन एवं सेंटेंस में जो अंतर है उसे व्यक्त किया।
जिसमें वह विश्लेषनात्मक एवं संश्लेषनात्मक कथनों की व्याख्या करते हैं। प्रायः यह स्वीकार किया जाता है कि विश्लेषनात्मक कथन हमें कोई नई जानकारी नहीं देता है और अनिवार्य होते हैं, जबकि संश्लेषनात्मक कथन नई जानकारी देते हैं और यह अनिवार्य नहीं होते हैं।
व्याख्यान पूर्व विभागाध्यक्ष एवं एमिनेंस प्राचार्य प्रोफेसर राकेश चंद्रा के द्वारा प्रस्तुत किया गया। व्याख्यान का विषय QUINE ON ANALYTIC AND SYNTHETIC DISTINCTION था। उनके द्वारा प्रस्तुत किया यह व्याख्यान QUINE के द्वारा लिखे गए एक शोध पत्र TWO DOGMA OF EMPERICISM के ऊपर था
दिनांक 8/2/2025 को लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग की तरफ चार दिन के विशेष व्याख्यान श्रृंखला के तृतीय दिन के व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के पैट्रान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार रॉय एवं संरक्षक विभाग की विभागाध्यक्षा डॉक्टर रजनी श्रीवास्तव ।