मन बागी हो तन त्यागी हो
पर फिर भी कुछ खलता है
जग के स्वार्थ चलन को देख
कुछ अंदर ही अंदर जलता है ।
कभी क्रोध करे कभी रोष भरे
पर झुंझला कर भी क्या करे
काल और कर्म के बीच फसें
किन किन बातो पे लड़े भीड़े।
अजय झा **चन्द्रम् **
@paradise_sahity@writerYogeshwar
ज़माने की जद्दोजहद में
हुं फंस गया मैं आदमी
कर दौड़ भाग धर पकड़
हुं थक गया मैं आदमी
चाहतें कब की मर चुकी
इक शाम बनके ढल चुकी
फिर भी न जाने बेवजह
क्यों सासें ले रहा मैं आदमी...
पूरी कविता ALT में ➡️
अजय झा *चन्द्रम् *
@Kavishala_Hindi@paradise_sahity
हां हसरतों के दर्द का, इल्जाम है वाजिब
कि हमने खुदगर्ज हो, इन्हें सताया जो है
ज़हन में झांक के देखूं, ये लहू-लुहान दिखते हैं
मुझे जिंदा रखने को, न जाने कितनी बार मरते हैं ।
अजय झा *चन्द्रम् *✨✨
जीवन के इस सफर में
मुश्किल भरे डगर में
आगे बढ़ा हु मैं निर्भय
देने को अपना परिचय।
कुछ लोग साथ में हैं
खिलाफ भी खड़े हैं
पर अपने पौरुष पर
मुझको नही है संशय।
सपनों का हाथ थामे
बेपरवाह चल पड़ा हुं
जीवन करू ये सार्थक
इसी धुन मे रम गया हूं ।
अजय झा *चन्द्रम्*
#Kavita250
अंतिम समय जब कोई नहीं जाएगा साथ
एक वृक्ष जाएगा
अपनी गौरैयों-गिलहरियों से बिछुड़कर
साथ जाएगा एक वृक्ष
अग्नि में प्रवेश करेगा वही मुझ से पहले
- नरेश सक्सेना
(पूरी कविता सुनिए 👇🏻)
#WorldEnvironmentDay
The vagus nerve is your body’s natural stress-relief switch.
It soothes your nervous system and releases “happy hormones”.
But most people don’t know it exists, and doctors don’t talk about it.
Here’s everything you should know (& how to “reset” your body and mind):
इंसानियत को तार तार कर
जो ओछे गर्व से हैं फूल रहे
उन हैवानो को मालूम नही
वो अपनी मौत को भूल रहे
वो ज़ोर लगा ले जी भर के
या वरदान कहीं से ले आये
पर चैन से मरना दुभर अब
स्वयं शीश काट भी ले आये ।
#pahalgamattack@paradise_sahity
चाहता हुं खुले रहे
किताबों के कुछ पन्ने
और मै लौट कर आऊं
उन्हे पढ़ने के लिए
पहचानी पर अधूरी रहे
कुछ बचकानी हसरते
ताकि जिंदादिली बनी रहे
उन्हे याद कर के ...
अजय झा **चन्द्रम्**
@paradise_sahity
वो जो कुछ छूटे हुए खेतों के कोने पर
धूल से सने, काले पड़े जो ताड़ के पेड़ हैं
वो कभी सैकड़ो में, क्या शानदार लगते थे
आंधी बारिश में झूमत़े, पत्ते सरसराते हुए
कड़कती बिजलियों से नीडर खिलखिलाते थे
आज ना वो मौसम, ना बचा इनका कुनबा ...
पूरी कविता पढे ALT ➡️में
अजय झा **चन्द्रम्**
भावों को स्वर देकर
जो गीत आपने गायें है
वो स्वतः स्मृति सार बने
हमे भावुक करने आयें है ।
कीर्ति गर्व से है फूली
सम्मान स्वयं नतमस्तक
हे अटल! आपकी राष्ट्रभक्ति
युहीं दीप्त रहेगी युगों तक ।
अजय झा **चन्द्रम्**
@retweet_sahity@paradise_sahity#अटल_बिहारी_वाजपेयी