मै जब फुर्सत रहता हूं वीकेंड पर तब ड्राइविंग भी करता हूं और अपने खुद के लिरिक्स पर गीत बनाकर अपनी बेसुरी आवाज में गाता भी हूं।
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भारत में एक ऐसी जगह है जहां धरती के नीचे 100 साल से भी ज्यादा समय से आग जल रही है। और हैरानी की बात यह है कि उसी जगह को भारत की कोयला राजधानी कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं झारखंड के धनबाद और झरिया क्षेत्र की।
जब लोग पहली बार यहां आते हैं तो उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं होता। कहीं जमीन से धुआं निकलता दिखाई देता है, कहीं धरती में दरारें पड़ चुकी हैं और कहीं-कहीं जमीन के नीचे आज भी आग सुलग रही है। ऐसा लगता है जैसे धरती के भीतर कोई विशाल भट्ठी जल रही हो।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह आग लगी कैसे?
माना जाता है कि लगभग 1916 के आसपास खदानों में मौजूद कोयला हवा के संपर्क में आया और धीरे-धीरे सुलगने लगा। शुरुआत में किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह छोटी सी आग एक दिन इतनी बड़ी समस्या बन जाएगी। लेकिन समय के साथ आग जमीन के नीचे मौजूद कोयले की परतों में फैलती चली गई।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह आग एक-दो साल नहीं बल्कि एक सदी से भी ज्यादा समय से जल रही है। कई पीढ़ियां पैदा हुईं, बड़ी हुईं और बूढ़ी हो गईं, लेकिन झरिया की आग आज भी पूरी तरह नहीं बुझी।
अब आप सोच रहे होंगे कि अगर यहां इतनी बड़ी आग लगी है तो इसे बुझाया क्यों नहीं जाता?
असल समस्या यह है कि आग जमीन के बहुत नीचे फैली हुई है। नीचे कोयले की विशाल परतें हैं और कई जगहों पर ऑक्सीजन पहुंचती रहती है। इसलिए इसे पूरी तरह बुझाना बेहद कठिन और महंगा काम माना जाता है। दुनिया के कई विशेषज्ञों ने इस समस्या पर काम किया, लेकिन आग आज भी कई हिस्सों में मौजूद है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
धनबाद सिर्फ आग के लिए प्रसिद्ध नहीं है। इसे भारत की कोयला राजधानी भी कहा जाता है। देश के इस्पात उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले कोकिंग कोल का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से निकलता है। यही कोयला बड़े-बड़े इस्पात संयंत्रों में इस्तेमाल होता है, जिनसे देश के पुल, रेल लाइनें, इमारतें और उद्योग खड़े होते हैं।
यानी एक तरफ धरती के नीचे आग जल रही है और दूसरी तरफ वही धरती भारत के विकास को ऊर्जा भी दे रही है। यही विरोधाभास धनबाद को दुनिया की सबसे अनोखी जगहों में से एक बनाता है।
कल्पना कीजिए, जिस जमीन के नीचे आग लगी हो, उसी क्षेत्र से निकलने वाला कोयला देश के उद्योगों को चला रहा हो। यह किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन धनबाद में यह हकीकत है।
कई जगहों पर लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा क्योंकि जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया था। फिर भी हजारों लोग आज भी इस क्षेत्र में रहते हैं और अपना जीवन जी रहे हैं।
धनबाद की कहानी सिर्फ कोयले की कहानी नहीं है। यह संघर्ष, उद्योग, ऊर्जा और प्रकृति की शक्ति की कहानी है। यह हमें दिखाती है कि इंसान धरती के भीतर छिपे संसाधनों का उपयोग तो कर सकता है, लेकिन कभी-कभी उसकी कीमत भी चुकानी पड़ती है।
शायद यही कारण है कि धनबाद को सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि भारत के औद्योगिक इतिहास का एक जीवित अध्याय माना जाता है। एक ऐसा शहर जहां धरती के नीचे आग है, लेकिन वही आग किसी न किसी रूप में पूरे देश की तरक्की को भी ऊर्जा देती रही है।
और सोचिए, अगर यह कोयला क्षेत्र कभी अस्तित्व में ही न होता, तो भारत के उद्योगों और इस्पात उत्पादन की कहानी शायद बिल्कुल अलग होती।
मिर्जापुर का प्रथम सीजन ही सबसे बढ़िया था।
खैर अब तो सीधी फिल्म आ रही है।
ऐसा पहली बार है किसी वेब सीरीज पर फिल्म बन रही है,अब तक पहले फिल्म आती थी फिर उसके ऊपर वेब सीरीज।।
उल्टी गंगा बहना इसे ही कहते है।