हमारा अपना एलिट क्लब भी है।
अभी तक हमें सिर्फ ज्ञात था - चंद्रवंशी डॉक्टर एसोसिएशन, चंद्रवंशी पुलिस एसोसिएशन और चंद्रवंशी रेलवे एसोसिएशन; अब मालूम चल रहा चंद्रवंशी ऑफिसर्स एण्ड एम्पलोइज़ एसोसिएशन भी है।
हमारी जनसंख्या कम है, आर्थिक और सामाजिक रूप से अभी भी प्राप्ति को बहुत कुछ है तो जरूरत है इसी तरह से साथ रहने की।
[लगता है पिछले पोस्ट का उद्देश्य सफल हुआ - प्रो० नवीन आर्य [चंद्रवंशी] सामाजिक आयोजनों में शामिल होने लगें।]
#चंद्रवंशी_क्षत्रिय
हाँ भाई! चंद्रवंशी और भूमिहार समाज।
ऑनलाइन बकैती करना और भूतकाल का धौंस दिखा किसको गुमराह करेंगे? वर्तमान में क्या हैं - ये ज्यादा जरूरी है।
शादी विवाह के उद्देश्य से अधिकारियों ने BSSC CGL में चयनित अभ्यर्थियों का डेटा निकलवाया था। इसलिए सभी जातियों का डेटा नहीं है। जिन जातियों का है वो अपने गिरेबान में झाँक लें।
हम तो EBC में होते हुए कहीं पीछे छूट से गए हैं। टोटल वेकेंसी थी 2187 तो बिहार कास्ट सर्वे का गलत ही सही पर
▪️कुल 2187*1.6490% होता है 36। आप हैं मात्र 1.23% यानी 27।। [ नालंदा 05; पटना 04; औरंगाबाद 03; लखीसराय 03; शेखपुरा 03; जहानाबाद 02; गया, मुंगेर, जमुई, भागलपुर, बक्सर, बेगूसराय, वैशाली-1]
▪️EBC की 448 सीटों में आना था 4.57% यानि 21। हुआ कितना 18 यानि मात्र 4%।।
नीतीश कुमार ने तेली, तमोली, दांगी को 2015 में EBC में जोड़ा था। तमोली और दांगी का तो अभी डेटा ही नहीं है। खुद टटोलिए और बताएं क्या ये सही निर्णय था?
[ @aaryandaksh31 भाई का धन्यवाद डेटा के लिए]
एक बात किसीको समझ में आई - आखिर रोहिणी आयोग की रिपोर्ट में ऐसा क्या है जो कभी सार्वजनिक नहीं हो सकी?
जहाँ दूसरा OBC/EBC भाजपा नेता सिर्फ निजी स्वार्थ तक सीमित रहते हैं; ये अक्सर सरकार से EBC के लिए कल्याणकारी योजनाओं की माँग करते नजर आते हैं।
अभी राज्यसभा सांसद डॉ भीम सिंह [चंद्रवंशी] को संसदीय OBC Statutory Body का सदस्य बनाए गया है।
ये उनकी पिछली कुछ माँगें थीं; जिनमें से कुछ भी लागू करवाने में सफल हो जाते हैं तो भूमिहीन, कामगार जो EBC जातियाँ हैं - उनमें सामाजिक सुरक्षा की भावना उत्पन्न होगी और मुख्यधारा में शामिल हो पाएँगे।
#EBC #OBC
एक बात किसीको समझ में आई - आखिर रोहिणी आयोग की रिपोर्ट में ऐसा क्या है जो कभी सार्वजनिक नहीं हो सकी?
जहाँ दूसरा OBC/EBC भाजपा नेता सिर्फ निजी स्वार्थ तक सीमित रहते हैं; ये अक्सर सरकार से EBC के लिए कल्याणकारी योजनाओं की माँग करते नजर आते हैं।
अभी राज्यसभा सांसद डॉ भीम सिंह [चंद्रवंशी] को संसदीय OBC Statutory Body का सदस्य बनाए गया है।
ये उनकी पिछली कुछ माँगें थीं; जिनमें से कुछ भी लागू करवाने में सफल हो जाते हैं तो भूमिहीन, कामगार जो EBC जातियाँ हैं - उनमें सामाजिक सुरक्षा की भावना उत्पन्न होगी और मुख्यधारा में शामिल हो पाएँगे।
#EBC #OBC
हम बिहार - झारखंड के ISRO [इसरो] हैं। कैसे?
अपने चंद्रवंशी क्षत्रिय समाज की बात करूँ तो स्पष्ट पहचान के रूप में मात्र 1.64% जनसंख्या और आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद मगध में
1. सुपर -30 आनंद कुमार। विदेशों में भी सभी जानते हैं।
2. बिहार - झारखंड में ज्ञात मात्र 4 जातियों के साथ मेडिकल कॉलेज में स्थान- लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज।
3. बिहार विधानसभा अध्यक्ष, मंत्री पद
4. BPSC में सही संख्या में अधिकारियों का चयन
5. UPSC में औसत प्रदर्शन
6. राजगीर में अपने पूर्वज जरासंध की मूर्ति की स्थापना जो बिहार झारखंड में सबसे ऊँची किसी राजा की है -21 फीट; पेडस्टल के साथ 32 फीट।
7. गंगा के दक्षिण में करीब करीब हरेक शहरों में टॉप वार्ड पार्षद जातियों में । प्रखण्ड प्रमुख ठीक पर मुखिया कम हैं अनुपात में।
8. गंगा के दक्षिण हरेक जिला मुख्यालय में जरासंध भवन।
9. बिहार पुलिस, पैरामिलिट्री, NSG, SPG, आर्मी में अच्छी खासी संख्या।
10. बिहार-झारखंड की सबसे ज्यादा कैंपस एरिया 100+ एकड़ वाली प्राइवेट यूनिवर्सिटी हमारे समाज के पास- RC यूनिवर्सिटी।
बहुत सारी बातें हैं और ये सारे वर्तमान में हैं; भूत में क्या था इससे न फर्क पड़ता- वर्तमान सही होनी चाहिए।
हमारा वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन बहुत गंदा है हम इससे इन्कार नहीं करते और गरीबी अभी भी बहुत है जिसपर काम करने की आवश्यकता है। जिला परिषद, विधायक और सांसद पर काम करना होगा। पर सतत् प्रयास से हम बेहतर होते रहेंगे।
[सोशल मीडिया पर गोंड/धुरिया (कोड -49 ST), धीवर/धीमर (कोड-92 EBC), बाथम (कोड-122 OBC), खरवार (कोड -41 ST), भुर्जी (EBC - कोड 19 कानू में) इत्यादि जातियां जो चंद्रवंशी लगा वीडियो बनाते हैं जबकि स्पष्ट रूप से अलग जातियाँ हैं उनसे छुटकारा पाने की भी कोशिश भी करनी होगी]
#चंद्रवंशी_क्षत्रिय
रोहतास के दिनारा में जो चौधरी/नोनिया/चौहान समाज के साथ घटना घटित हुई उसपर लिखने का मन नहीं हुआ - कारण है विभिन्न जातियों का राजपूत बनने का शौक।
बनिए।
शादी का रिश्ता लेकर भी पहुँच जाएगा। बताइएगा कि पत्नी भी चौहान राजपुत है, माँ भी चौहान राजपुत है। कोई दूसरा clan नहीं है जैसा कि राजपुत करते हैं। बाकि DNA पर तो हम कुछ नहीं बोलते - पर खुद को आईने में देखना चाहिए। समाज में व्याप्त असमानताओं और गरीबी के जंजाल से निकालने का इनके पास यही उपाय है।
[हम किसी के तरफ से नहीं हैं पर हमारे तरफ मगध में तो पृथ्वीराज चौहान को राजपुत ही माना जाता है और उनकी मूर्ति सह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी राजपुत ही करवाते हैं]
ये हुए कुछ समाज से जुड़े कार्य।
मंत्री प्रमोद कुमार [चंद्रवंशी] और EBC आयोग अध्यक्ष नवीन आर्य [चंद्रवंशी] ने समाज के BPSC में चयनित युवाओं के लिए सम्मान समारोह आयोजित करवाया।
हमलोगों ने सुनिश्चित लिस्ट बनाई थी उसमें मात्र 13 थें। इस सम्मान समारोह में तो ज्यादा ही होने चाहिए थें। हमें जो फोटो प्राप्त हुई उसमें स्पष्ट अधिकारियों की संख्या नहीं ज्ञात हुआ।
बिहार कास्ट सर्वे [गलत ही सही] के अनुसार भी 2017*1.649%= 34 होता है। जाति सिर्फ राजनैतिक भागीदारी के लिए नहीं होता; हरेक क्षेत्र के लिए होता है। पटना में छात्रावास इसमें वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है।
यह एक अच्छी पहल है। इसके आगे चयनित अभ्यर्थियों की लिस्ट बढ़ाने हेतु समाज के नेताओं के पास क्या विजन है?
मिथिला नहीं दिख रहा। और जब पुनः वज्जिसंघ बनाना है तो राजधानी वैशाली बनेगी। राजा विशाल की मूर्ति लगेगी।
अंग राज्य बनेगा जहाँ एक विशाल मूर्ति कर्ण की बनेगी।
हमेशा महाराज जरासंध को खींच लाते हैं ये बाँटने की राजनीति करने वाले उसका कारण भी इसी नोट्स में मिल गया।
80 साल का वृद्ध "जरासंध" 30 वर्षीय "भीम" से मल्ल युद्ध लड़ा मतलब मगध वीरों को जन्म देती थी। वैसे तो सब ये रिश्तेदार ही थें। जरासंध का दामाद कंस था और कंस का भगिना कृष्ण। लड़ाई तो पारिवारिक ही थी।
जिस बात को ले हमें टारगेट किया जाता है पिता - पुत्र गतिरोध। रोमन, ग्रीक, डच, ऑस्ट्रियन, जर्मन, सैक्सन से लेकर जो भी महान साम्राज्य बना वो पारिवारिक लड़ाई और हत्याओं से अछूता न रहा। बाद में मुगल इतिहास में भी हमने यही देखा। हाँ जमींदारी/एस्टेट [उदाहरणार्थ दरभंगा] में आपको ऐसा देखने को दुर्लभ मिलेगा- कारण आप जानते हैं।
#मिथिला #मगध
EBC [आबादी - 36%; आरक्षण -18% गरीबी 33.58%]और EWS [आबादी - 15.52%; आरक्षण -10%; गरीबी 25.09%] में अंतर समझना है?
दो आयोग है बिहार में दोनों पक्ष के लिए।
EWS आयोग:- अध्यक्ष- महाचन्द्र सिंह [भूमिहार], राजीव रंजन प्रसाद [कायस्थ], दयानंद राय [भूमिहार], जयकृष्ण झा [ब्राह्मण] एवम् राजकुमार सिंह [राजपुत]
▪️प्रमुख सिफारिशें सरकार से:- भूमिहीन EWS के लिए 5 डिसमिल जमीन, भूमिहार-ब्राह्मण के लिए कोशिश, भूमिहार बैठकी में शामिल, EWS बनवाने को और सरल करना और अब बिहार के हरेक जिले में 1 नोडल अधिकारी की तैनाती जो EWS और उत्पीड़न जैसे मामलों को देखेगा।
EBC आयोग:- अध्यक्ष - नवीन आर्य [चंद्रवंशी]; सदस्य- केदार नाथ भंडारी [मालाकार] एवम् अमित कुमार [दांगी]-- 2 सीट खाली
▪️प्रमुख सिफारिशें:- मेरे बेटे- बेटी की शादी में जदयू/भाजपा के सभी प्रमुख पहुँचे, मेरे जाति से कोई दूसरा आ मेरी सीट न हड़प ले, घूमने के लिए सरकारी गाड़ी मिले, टोल टैक्स न भरना पड़े, किसी सोशल मीडिया पर एक्टिव न रहो ताकि कोई सवाल न पूछ सके।
मानसिक गुलाम।।
क्या होता होगा जब राजा/जमींदार/सामंत [जो शब्द आपको सही लगे] बाहर निकले और गुलाम प्रजा सिर झुका सलाम कर रही हो।
राजा/जमींदार/सामंत तो 1 ही रहता होगा; जनता उनसे संख्या में कहीं ज्यादा।
क्या आरक्षण ने मानसिक बीमारी को दूर किया?
लीजिए ड्राइवर कबूल कर लिया था जुर्म; सब कुछ ठीक था मगध रेंज के IG विकाश वैभव के अनुसार तो फिर जाँच रिपोर्ट डॉक्टरों ने गलत बना दी होगी?
आरोपित ड्राइवर की पत्नी भी कहीं और इशारा कर रही - बता रही पति को फंसाया जा रहा।
पिछली बार विकाश वैभव के खिलाफ लिखें थें तो कुछ अकाउंट डिफेंड करने लगें थें। इस मामले में भी कर लीजिए अगर हकीकत बदल जाएगी। कैसे ड्राइवर को सिर्फ मौत का जिम्मेदार बना फाइल क्लोज कर रहे थें।
विधायक को कोई भी सपोर्ट नहीं कर रहा। यहाँ तक कि विधायक के स्वजातीय पत्रकार भी जाँच की माँग कर रहें। जाँच की आँच से क्या डर? पर इतनी जल्दी IG साहब फाइल बंद करने में लगें थें कि....
[मृतक अधिकारी वैश्य शायद तेली या माहुरी समाज से हैं यादव नहीं पर कोई भी जाति रहे चाहे स्वजातीय ही क्यूँ न; इन जन प्रतिनिधियों के आगे कीड़े मकोड़े हैं हम]
हम से ज्यादा SC जातियाँ आज खुद के अधिकारों को ले सजग्ग हैं। हत्या होने पर उनका प्रदर्शन हत्यारों के मन में खौफ पैदा करता है।
हमलोग तो कैंडल मार्च वाली जातियाँ हैं; जिनके पास ढंग का वकील भी नहीं है। अब पुलिस ने आरोपित को भी गिरफ्तार कर लिया है।
नया मियाँ ज्यादा प्याज खाता है।
असल से ज्यादा नकल शोर मचाते हैं।
नया हिजड़ा ज्यादा मटक कर चलते हैं।
बहुत कहावतें हैं। अभी कहावतों का क्या महत्व?
जब मंडल आयोग बना और OBC रिजर्वेशन लागू हुआ तो एक OBC का लड़का गोस्वामी जाति से ने खुद को आग लगा मार डाला विरोध में। उसे लगा ऐसा कर वो क्रांतिकारी बन जाएगा। खुद को सामान्य वर्ग के ज्यादा नजदीक दिखाने के लिए या कहें अत्यंत चापलूसी में उसने ये कदम उठाया।
अभी UGC विरोध में एक और OBC ने प्राण त्यागा। UGC जिसका कोई जमीन पर औचित्य भी नहीं है।
कभी सुना है EWS के विरोध में किसी सामान्य वर्ग ने प्राण त्यागा?
अभी हिंदू बनते हुए अधिकतर आपको अत्यंत पिछड़ी जातियों के बच्चे मिलेंगे। इन्हें लगता है ऐसा कर वो सामान्य जातियों के ज्यादा नजदीक पहुँच पाएंगे जबकि आपको सम्मुख खड़ा होना है तो शिक्षा, स्वरोजगार और आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए।
ये नए हिंदू मुस्लिमों/ईसाइयों को गाली देंगे जबकि सामान्य वर्ग स्थापित मुस्लिमों/ईसाइयों के साथ व्यापार के दरवाजें खोलते हैं और समृद्धि के रास्ते पर अग्रसर रहते हैं। कभी विदेश में रह रहे बड़े समूहों की जातियां पता लगाएं।
OBC जगाना मेरा काम नहीं है; मेरी खुद की जाति सही रास्ते पर चलें और खुद की जाति पर गर्व करना सीखें। औरंगाबाद, जहानाबाद और गया के शहरी पार्षदों का डेटा ये दिखाता है कि जाति से जुड़ बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
बुद्ध की धरती और हमारी स्वीकार्यता। औरंगाबाद, जहानाबाद के बाद बोधगया की शहरी आबादी का रुझान देखिए।
*बोधगया में शायद मुस्लिम आबादी नहीं है।*
युवाओं से अनुरोध रहता है ऑनलाइन गाली गलौज न करें। और कोई क्षद्म अकाउंट बना करता भी है तो दूरी बनाए, रिपोर्ट मारे।
हमारी जाति की इमेज साफ सुथरी है नहीं तो सभी जाति के लोग मिलकर हमें वोट नहीं करते। विधायक, सांसद जनसंख्या के अनुपात में नहीं बनते क्यूंकि आर्थिक और ग्रामीण परिवेश में समाज अभी भी समृद्ध नहीं हैं। रही बात बोधगया विधानसभा की तो होश सम्हालने से अभी तक आरक्षित है।
[कमेंट में औरंगाबाद और जहानाबाद साथ में गया कि कुल सीट]
#चंद्रवंशी_क्षत्रिय