I won’t pay even a single extra rupee in UPI charges, even for transactions above ₹2,000.
If the government can afford freebies, why not UPI charges? I’ll start using cash, and everyone should too.
Freebies and subsidies combined budget is around $100 billion.
India mein koi 5 minutes number Google kar le to doodh ka doodh paani ka paani ho jaye.
RBI surplus to Govt : ₹2.87 Lakh Crores (US$30 Bn)
Total listed bank profits : ₹4.11 Lakh Crores (US$42 Bn)
NPCI - which runs UPI pre tax ‘surplus’ : ₹ 1,888 crores (US$200 Mn)
To nuksaan kis ka ho raha hai UPI se aur kaunsi subsidy de rahi hai Govt UPI pe jo chubh rahi hai?
Cost of running ATMs and cash logistics in India is ₹30,500 crores (US$ 3.0 Bn). If you want to optimise shut ATMs and promote UPI instead.
Any levy on UPI is just tax collection. UPI is the one scientific achievement of India everyone acknowledges par ab tax ki bali chadhegi.
@chasing_highs Bhai theek hi hai..otherwise or chuti**pa faileya desh me hindi belt ke lalu mulayam and others or niklenge. Kam se kam south me jake accha to lagata hai ek do week.
मर गया दाभोलकर..
20 अगस्त 2013 की सुबह, नरेंद्र दाभोलकर मॉर्निंग वॉक को निकले। मोटरसाइकिल पर सवार दो हमलावरों ने उन पर गोली चलाई।
दाभोलकर की मौके पर ही मौत हो गई।
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डॉ. दाभोलकर, चिकित्सक हुआ करते थे। लेकिन कुछ बुरे काम भी करते थे। जैसे उन्होंने "अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति" की स्थापना की। वे प्रसिद्ध बाबाओं, नामचीन चमत्कारियों, तांत्रिकों की पोल खोलते। आलोचना करते।
और यह सनातन के विरुद्ध था।
तो तीन गोलियां उनके नाम लिख दी गईं।
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आप अंधविश्वास विरोधी हों, तो मॉर्निंग वॉक खतरनाक होता है। गोविंद पानसरे ने दाभोलकर की हत्या से सबक नही लिया। फरवरी 2015 में एक सुबह वह भी मॉर्निंग वॉक को निकले। तीन गोलियां वह भी खा गए। बाइक सवार दो लोगो ने उन्हें मार दिया।
फिर एम.एम. कलबुर्गी की हत्या 30 अगस्त 2015 को हुई। धारवाड़ में दो हमलावरों ने घर मे घुसकर मारा।
नया भारत है, घर मे घुसकर मारता है।
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तीनो हत्प्राण- सोशल वर्कर थे। सनातन के नाम पर चलने वाले व्यापार, अंधश्रद्धा और बाबागिरी के खिलाफ बोलते थे। उनका मारा जाना छोटा अपराध था।
बड़ा अपराध अदालतों मे��� हुआ। दाभोलकर केस में मामले में शूटरों को उम्रकैद की सजा हुई। लेकिन मास्टरमाइंड बताये गए वीरेंद्र तावड़े, संजीव पुनालेकर और विक्रम भवे सबूतों के अभाव में बरी हो गए।
पानसरे मामले में भी वीरेंद्र तावड़े, कलास्कर, अमोल काले आदि आरोपी हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने तावड़े समेत कई को जमानत दे दी। कुछ आरोपी अभी भी फरार दिखाए जाते हैं।
कलबुर्गी मामले में अमोल काले, गणेश मिस्किन, प्रवीण प्रकाश चतुर आदि आरोपी हैं। बैलिस्टिक रिपोर्ट में दाभोलकर-पानसरे हथियारों से लिंक मिला।
कई आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
ट्रायल चल रहा है।
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सभी षड़यंत्र कारियो और हत्यारों का, सनातन संस्था - हिंदू जनजागृति समिति जैसे संगठनों से लिंक बताए गए। ये संगठन इनकार करते हैं।
मगर इनकी गतिविधियों और पानसरे, कलबुर्गी, दाभोलकर के कामो में विरोध साफ दिखता है। 10 बरस से ऊपर हुए, इन मामलों को नतीजा मिला नही है।
और समाज मे सनातन, गौरक्षा, हिन्दू, राम के नाम पर व्यापार, धमकी, गालीबाजी करने वाले हथियारबन्द, गुंडातत्व हावी हैं। सरकारें मूकदर्शक हैं।
मीडिया सहायक, पुलिस बेबस है। शायद व्यवस्था की अनकही घोषणा है, कि घटनाएं होती रहें।
ज��ानत मिलती रहेगी।
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अंधश्रद्धा की गंगा शीर्ष से बह रही है। मंत्री, जज, नेता, अभिनेता- सब बड़े बड़े ज्योतिषियों, तांत्रिकों, आचार्यो, बाबाओं के सम्मुख शीश नवा रहे है। आईआईटी वाले बाबा बन रहे हैं, कुम्भ में 50 करोड़ नहा रहे हैं।
देश ने सनातन की नई परिभाषा देकर, अंधश्रद्धा को वैज्ञानिक चेतना के ऊपर सिद्ध कर दिया है। व्यवस्था और अदालतें मौन हैं।
और यह शनै शनै, हमारे परिवार को गढ़ रहा है।
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जब अद���लतें न्याय नही देती, प्रकृति का न्याय चक्र शुरू हो जाता है। सर नवाने वाले सनातनियो को पता ही न लगा कि कब नही उनकी अंधश्रद्धा की मारी बहनें, माताएं, और बेटियां- चुपचाप इन चमत्कारी बाबाओं को अंधश्रद्धा अपना धन, समय, अस्मत सौंपने लगी।
कुछ की सीडी आ गई है।
आपके घर की अभी नही आई है।
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याद रखियेगा जिस समाज मे दाभोलकर मारे जाते है। उसके घरों से..
चाकणकर निकलती है।
🙏
@Loveufren Exactly we were doomed around 500 AD when 4 varnas started to became 40 k castes. No unity no responsibility for each other. Pure selfishness
@atunheartmother@barandbench@RitwikinCourt It is an excuse to give them less punishment and probably make them free soon. Paise se decide ho gya sab. Yadi wo pachyo hai to phir to pakka hi hang karo na kya karega samaj jinda rakhke use
@NomadicVK@TiwariNivedita Bhai jab executive hi mut de tumhare muh pe or saath na de, wo bechara prof kya hi kar lega. AG ko defend karna chahiye tha. Bas desh ka pm etna darpok hoga socha nhi tha.