19 दिन का अनशन लगभग 9 किलो वज़न कम फिर भी सोनम वांगचुक अपने संकल्प पर डटे हुए हैं,
सवाल सिर्फ़ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन मुद्दों का है जिनके लिए वह आवाज़ उठा रहे हैं।
अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेशालय का दायित्व होता है कि वह परिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं होती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत कर सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को आनन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशाषी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन माह अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित करना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
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उत्पीड़न की कार्यवाहियां वापस न होने पर गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की:15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी “जन-जागरण अभियान” का ऐलान : सभी डिस्कॉम मुख्यालय पर प्रदर्शन:उत्पीड़न होने पर सीधी कार्रवाई की चेतावानी
@ChairmanUppcl@UPPCLLKO
आज के ही दिन 09 अप्रैल 2025 को लखनऊ की धरती ने इतिहास रचा।
बिजली के निजीकरण के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजारों बिजली कर्मियों की वह विशाल रैली केवल एक प्रदर्शन नहीं थी,बल्कि यह संघर्ष,एकता और आत्मसम्मान की गूंज थी।
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निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन किये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
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आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन दुर्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
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*बिजली कर्मियों के विरोध को देखते हुए मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, विद्युत राज्य मंत्री श्री यशोपद नायक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस नहीं पहुंचे : डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान महा वितरण के सीएमडी और ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी नहीं आए : विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल के एजेंडा पर गम्भीर मतभेद के चलते कोई चर्चा नहीं: संघर्ष समिति ने कहा फ्लॉप रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट*
मुंबई में 04 एवं 05 नवंबर को हुई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के विरोध में नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्री को भेजे गए विरोध पत्र और विरोध प्रदर्शन की नोटिस का प्रभाव यह रहा कि बिजली कर्मियों के गुस्से को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री यशोपद नायक और यहां तक कि मेजबान प्रदेश महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी नहीं आए।
निजीकरण के पीपीपी मॉडल पर गम्भीर मतभेद के चलते महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण निगम महावितरण के सी एम डी लोकेश चन्द्र आई ए एस जो आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष भी है, ने भी इस मीट से दूरी बनाई और मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 में नहीं आए। महाराष्ट्र की प्रमुख सचिव ऊर्जा श्रीमती आभा शुक्ला आई ए एस भी मीट में नहीं आई। यह चर्चा रही कि निजीकरण के मुद्दे पर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश चंद्र आई ए एस और महामंत्री यूपीपीसीएल के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल आई ए एस के बीच मतभेद उभर कर सामने आ गए हैं जिसका परिणाम यह रहा कि बहु चर्चित मुम्बई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि सुधार के नाम पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण पर देशभर के विद्युत वितरण निगमों से मुहर लगवाने की मंशा से मुम्बई में आयोजित की गई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरह फ्लॉप रही है। मीट में मुख्य एजेंडा विद्युत वितरण निगमों में पीपीपी मॉडल लागू करना था जिस पर बात ही नहीं हुई।
संघर्ष समिति ने बताया की नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की ओर से केंद्रीय विद्युत मंत्री को एक माह पूर्व ही सूचित कर दिया गया था कि यदि निजीकरण के एजेंडा पर डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट की जा रही है तो बिजली कर्मी इसे स्वीकार नहीं करते। बिजली कर्मियों से पहले चर्चा की जाए और यदि केन्द्रीय विद्युत मंत्री नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी के पदाधिकारियों से मीट के पहले वार्ता नहीं करते और मीटिंग से निजीकरण का एजेंडा नहीं हटाया जाता तो बिजली कर्मी विद्युत मंत्री के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मियों के विरोध का परिणाम यह रहा कि केंद्रीय विद्युत मंत्री, केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव ऊर्जा और महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सी एम डी, इनमें से कोई भी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में नहीं आया।
संघर्ष समिति ने बताया कि मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 की सबसे चौंकाने वाली बात कह रही कि महाराष्ट्र के महावितरण के सी एम डी श्री लोकेश चंद्र आईएएस जो इस मीट के मेजबान भी थे और आयोजक भी वे मीट में नहीं आए। संघर्ष समिति ने कहा की महाराष्ट्र के विद्युत वितरण निगम के बड़े अधिकारियों ने बताया कि निजीकरण को लेकर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के अध्यक्ष श्री लोकेश चंद्र और महामंत्री श्री आशीष गोयल जो उप्र पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन है के बीच में गहरे मतभेद हो गए हैं। इसी के चलते मुंबई डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 पूरी तरफ फ्लॉप हो गई। उसमें केंद्रीय मंत्री से लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक आए और न ही अधिकांश प्रांतों के चेयरमैन और एम डी आए।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने एक साल पहले निजीकरण का निर्णय घोषित कर बिजली कर्मियों का गुस्सा बढ़ा दिया है। लगातार आंदोलन चल रहा है और कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ चुका है। समय की आवश्यकता यह है की पावर कारपोरेशन के प्रबंधन को निजीकरण का निर्णय निरस्त कर वास्तविक सुधार कार्यक्रम पर बिजली कर्मियों से वार्ता करनी चाहिए। बिजली कर्मी सुधार हेतु लगातार प्रयत्नशील है और उसके अच्छे परिणाम भी आ रहे हैं।
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निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में विद्युत अभियंता संघ ने दी आंदोलन की चेतावनी : अभियंताओं पर की गयी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गई तो 20 नवंबर के बाद होगा आंदोलन:
उ.प्र. राज्य विद्युत अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी ने पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन को चेतावनी दी है कि यदि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस न ली गयी और अभियंताओं की ज्वलंत समस्याओं का समय रहते समाधान न किया गया तो प्रदेश के तमाम विद्युत अभियंता 20 नवंबर के बाद आंदोलन प्रारंभ करने हेतु बाध्य होंगे।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में यह संकल्प दोहराया गया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का टेंडर होते ही तमाम अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगें जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी द्वारा पारित प्रस्ताव में मुख्यतः संयुक्त उपक्रम में बनाई जा रही ओबरा डी और अनपरा ई परियोजना को उत्पादन निगम को दिया जाए, उत्पादन निगम में सैकड़ों की संख्या में अधिशासी अभियंताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विगत 04 वर्षों से सहायक अभियंता से अधिशासी अभियंता के पद पर रुकी हुई पदोन्नति तत्काल की जाए, वर्टिकल रीस्ट्रचरिंग के नाम पर निजीकरण करने हेतु अभियंताओं के पदों को समाप्त करने की साजिश तत्काल बंद की जाए, मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान की गयी समस्त उत्पीड़नात्म कार्यवाहियां ऊर्जा मंत्री के 19 मार्च 2023 के निर्देश के अनुसार वापस ली जाए, वर्तमान आंदोलन के फलस्वरुप परामर्श व चार्जशीट के नाम पर अन्य कारणों से की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के तहत अभियंताओं की रोकी गयी प्रोन्नति, स्थायीकरण आदेश तत्काल जारी किये जाएं और आंदोलन के फलस्वरुप उत्पीड़न की दृष्टि से अभियंताओं के ट्रांसफर निरस्त किये जाएं, आईटी के नाम पर अभियंताओं के साथ लगातार किया जा रहा भेदभाव व उत्पीड़न बंद किया जाए।
उ.प्र. राज्य अभियंता संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी की आज लखनऊ में हुई बैठक में उक्त निर्णय लिया गया। बैठक के बाद अभियंता संघ के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान और महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि विद्युत अभियंताओं ने निजीकरण के विरोध में आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश को बेहतर बिजली आपूर्ति देने का सतत् प्रयास किया है और अभी भी विद्युत अभियंता इस कार्य में लगें हैं किंतु पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन इसके बदले में अभियंताओं का तरह-तरह से उत्पीड़न करने पर आमदा है। जिसके विरोध में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जबरदस्त आक्रोश व्यक्त किया गया।
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रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था बर्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियों से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग होंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
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निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया प्रांतव्यापी विरोध प्रदर्शन: लेसा में निजीकरण हेतु वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर 8000 पद कम किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों ने किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के आह्वान पर आज बिजली कर्मियों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने कहा कि निजीकरण के हर प्रारूप और हर कोशिश का किया जायेगा पुरजोर विरोध।
राजधानी लखनऊ में लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में आज बिजली कर्मियों ने दफ्तरों के बाहर आकर जोरदार प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली लागू कर बिजली कर्मियों के लगभग 8000 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था लड़खड़ाने की पूरी संभावना है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि वर्टिकल प्रणाली केवल निजीकरण के लिए लागू की जा रही है और निजी कंपनियों का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि टीजी 2 के लगभग 1350 पद, जूनियर इंजीनियर्स के 287 पद और अभियंताओं के 45 पद समाप्त किए जाने से लेसा में अफरातफरी का माहौल उत्पन्न हो गया है और त्यौहार के समय हर स्तर के कर्मचारी में लखनऊ से हटाए जाने का भय व्याप्त हो गया है जिसका कार्यप्रणाली पर भारी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर पश्चिमांचल और मध्यांचल विद्युत वितरण निगमों के अंतर्गत आने वाले सभी बड़े शहरों में वर्टिकल प्रणाली लागू कर इन शहरों की बिजली व्यवस्था अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के अन्तर्गत देने की तैयारी है। संघर्ष समिति ने कहा कि देश के जिन शहरों में निजी कंपनियां अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी के तहत काम कर रही हैं उन शहरों में इसी प्रकार की प्रणाली लागू है जिससे कम कर्मचारियों से अधिक काम लिया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि लेसा में वर्टिकल प्रणाली के नाम पर अत्यधिक अल्प वेतन भोगी लगभग 6000 संविदा कर्मियों को हटाया जा रहा है जिससे बिजली व्यवस्था तो चरमरा जाएगी ही साथ ही इतनी बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को हटाना अमानवीय कृत्य भी है।
दीपावाली के पर्व के दौरान उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के बाद आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। बिजली कर्मियों ने आज विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में सामूहिक जेल भरो आंदोलन चलाया जाएगा तथा निजीकरण के विरोध में चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में आज रेजिडेंसी पर विरोध प्रदर्शन किया गया।
आज वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
राजधानी लखनऊ सहित समस्त जनपदों में सभा के अन्त में वरिष्ठ बिजली मजदूर नेता गिरीश पांडे जी की धर्मपत्नी के निधन पर शोक व्यक्त किया गया और दो मिनट मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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दीपावाली पर निर्बाध बिजली आपूर्ति कर बिजली कर्मियों ने अपना संकल्प पूरा किया : निजीकरण के लिए उत्पीड़न कर रहा प्रबंधन बिगाड़ रहा है कार्य का वातावरण: निजीकरण का निर्णय वापस न लिया गया तो छठ पूजा के बाद होगा बड़े आंदोलन का निर्णय
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में कहा कि निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों से उद्वेलित होने के बावजूद उप्र के बिजली कर्मियों ने दीपावली के दिन लगभग 395 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दीपावाली के पर्व पर निर्बाध रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने के अपने संकल्प को पूरा कर दिखाया है। दीपावली के दिन अधिकतम 18981मेगावॉट बिजली की मांग पूरी की गई और पूरे प्रदेश को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। संघर्ष समिति ने इस हेतु बिजली उत्पादन, पारेषण, और वितरण में लगे बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं को बधाई दी है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस न लिया गया तो छठ पूजा के बाद बिजली कर्मी बड़े आंदोलन का कार्यक्रम घोषित करने के लिए मजबूर होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
संघर्ष समिति ने कहा है कि उप्र के बिजली कर्मी सदैव उपभोक्ता सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हैं और निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत रहते हुए भी उप्र के बिजली कर्मियों ने भीषण गर्मी में 11 जून को 31486 मेगावॉट बिजली आपूर्ति कर देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति का कीर्तिमान स्थापित किया है। उप्र के बिजली कर्मियों ने दीपावली पर पूरे प्रदेश में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर एक बार पुनः उपभोक्ताओं के प्रति सेवा भाव की उत्कृष्ट भावना का परिचय दिया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उप्र के बिजली कर्मी मुख्यमंत्री मा योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में बिजली के मामले में उप्र को देश में सर्वश्रेष्ठ प्रान्त बनाने के लिए कृत संकल्प हैं किन्तु उप्र पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन ने 25 नवम्बर 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की एक तरफा घोषणा कर कार्य का वातावरण बिगाड़ दिया है और निजीकरण के इस उपभोक्ता एवं कर्मचारी विरोधी निर्णय के विरोध में बिजली कर्मी आन्दोलन की राह अपनाने को विवश हो गए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन से क्षुब्ध प्रबंधन ने विगत 11 माह में बिजली कर्मियों का हर प्रकार से हर स्तर पर उत्पीड़न जारी रखा है जिससे कार्य का वातावरण पूरी तरह खराब हो गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत बिजली कर्मियों ने दीपावली पर्व के दौरान 18 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक आंदोलन प्रदर्शन का कार्यक्रम स्थगित कर रखा है। 24 अक्टूबर से पूर्ववत आंदोलन पुनः प्रारंभ होगा।
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निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितंबर 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रदेश में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
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विधान सभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का किया विरोध : निजीकरण के उद्देश्य से हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
उत्तर प्रदेश के चार शहरों में विद्युत वितरण प्रणाली की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग करने से आए दुष्परिणामों को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र ने 01 नवंबर से लेसा में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर हजारों पदों को समाप्त किए जाने का विरोध किया है।
आज संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने इस संबंध में विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष और मेरठ के माननीय विधायक श्री अमित अग्रवाल जी से फोन पर बात की। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद मेरठ की बिजली व्यवस्था पहले से खराब हो गई है। श्री अमित अग्रवाल ने बताया कि 12 सितंबर 2025 को हुई प्राक्कलन समिति की बैठक में भी प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष के पद से उन्होंने वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रबल विरोध किया था। श्री अमित अग्रवाल ने कहा कि विद्युत वितरण की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग आम उपभोक्ताओं के हित में नहीं है अतः इसे वापस लिया जाय।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि पावर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्पोरेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि प्रबन्धन यह सब तब कर रहा है जब बिजली कर्मी और अभियन्ता दीपावाली के पर्व पर रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति करने हेतु योजनाबद्ध ढंग से काम कर रहे हैं। अभियंता संघ ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जनपदों में 16 अक्टूबर को अभियंताओं की सभा भी बुलाई है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
निजीकरण के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने लगातार 320 वें दिन जोरदार प्रदर्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
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विजया दशमी के पहले बोनस देने के बजाय पॉवर कॉरपोरेशन की बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी : निजीकरण के लिये उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां करने का आरोप
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश के अनुसार नवरात्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति में लगे बिजली अभियंताओं और कर्मियों को विजया दशमी के पूर्व बोनस देने के बजाय पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन ने बड़े पैमाने पर अभियंताओं और कर्मचारियों को जबरन सेवा निवृत्ति देने और अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की तैयारी शुरू कर दी है जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो गया है।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता की पूरी सूची जारी कर इनके विरुद्ध चल रही अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति तत्काल मांगी गई है जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर अभियंताओं को जबरन सेवा निवृत्त करना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 24 सितंबर को जारी किए गए पत्र में तीन दिन के अंदर 27 सितंबर तक अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की अद्यतन स्थित मांगी गई है। संघर्ष समिति ने कहा कि अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता पदों की पदोन्नतियां के लिये चयन पहले ही हो चुका है। ऐसे में सभी अधीक्षण अभियंताओं और सभी मुख्य अभियंताओं की सूची जारी कर उनके बारे में अनुशासनामक कार्यवाहियों की अद्यतन स्थिति मांगने के पीछे जबरन सेवा निवृत्ति देना ही एकमात्र उद्देश्य दिखाई देता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि शक्ति भवन के कॉरिडोर से मिल रहे समाचारों के अनुसार निजी घरानों को सहूलियत देने के लिए अभियंताओं और कर्मचारियों की बड़ी पैमाने पर जबरन सेवा निवृत्ति कर छटनी की जानी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन प्रबन्धन विगत कई महीनों से लगातार बिजली कर्मियों का अलग-अलग तरह से उत्पीड़न कर रहा है। अभी भी हजारों बिजली कर्मचारियों को फेशियल अटेंडेंस के नाम पर 3 माह से रुका वेतन नहीं दिया गया। बड़े पैमाने पर बिजली कर्मियों को दूर दराज स्थानों पर स्थानांतरित किया गया, हजारों संविदा कर्मियों को डाउनसाइजिंग के नाम पर निकाला गया और अब जबरन सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा की बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत हैं किंतु वह आम जनता को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होने दे रहे हैं बिजली कर्मी नवरात्र, दशहरा और दीपावली पर जनता को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे, यह संघर्ष समिति का निर्णय है ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की निजीकरण हेतु की जा रही दमनकारी नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज करने का फैसला दशहरे के बाद लिया जाएगा जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी ।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 307 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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