जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
@awesh29 Milord ko koi bataye ki Esh ke nagrik hi wo sabhi RTI karne wale bhi. Ucchadhikari hi nigrani kar sakta hai ye kaha likha hai? Nagrik ki duty and responsibilities nahi padha hai kya sahab ne ya Raja sahab ne.
दलित हिंदू नहीं हैं।
बांदा में ललित वर्मा और शिवानी चौहान ने लव मैरिज की थी, लेकिन फिर भी पुलिस ने उन पर FIR दर्ज की।
पुलिस उन्हें जबरन उठाकर थाने ले आई। यहां जातीय दंभ में लड़की के पिता ने थाने में ही उसकी जघन्य हत्या कर दी।
सवाल यह है कि कोई थाने में चाकू लेकर घुसा कैसे? थाने में SHO से लेकर SI, हेड कांस्टेबल सहित अनेक सिपाही मौजूद थे। सबकी मौजूदगी में बेटी बार-बार अपने मां-बाप से मुकदमा वापस लेने के लिए गिड़गिड़ाती रही। उसने कहा कि मैं बालिग हूं और इस लड़के से बहुत प्रेम करती हूं। मैं इसी लड़के के साथ रहना चाहती हूं और रहूंगी।
लेकिन दो कौड़ी का दरिंदा बाप अपने जातीय अहंकार में ग्रस्त था। वैसे उसकी आर्थिक हालत एकदम तंग थी, बमुश्किल घर वालों को पेट भर खाना दे सकता था, लेकिन वह समाज में अपनी जाति का अहंकार कमतर नहीं होने देना चाहता था। भला उसकी बेटी किसी दलित से शादी कैसे कर सकती थी? लड़का हिंदू है तो क्या हुआ? है तो निचले दर्जे का। "हिंदू-हिंदू एक हैं" वाली लफ्फाजी से जातीय अभिमान थोड़ी तय होता है।
जब उसके बाप को यह लग गया कि लड़की उसकी बात नहीं मानेगी, तो उसने जेब से चाकू निकाला और लड़की पर कई वार कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस तमाशबीन बनकर खड़ी देखती रही। सवाल यह है कि अगर दलित थाने में भी सुरक्षित नहीं है, तो पुलिस उन्हें थाने में उठाकर लाई ही क्यों? वे दोनों तो इसी भरोसे पर आए थे कि पुलिस की निगरानी में वे सुरक्षित रहेंगे। CO, SHO सहित सभी जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। BJP सरकार समाज को "लाइन हाजिर" वाली लफ्फाजी दिखाकर गुमराह न करे।
दूसरा बड़ा सवाल यह है कि इस घटना पर सारे हिंदू संगठन मौन क्यों हैं? हिंदू राष्ट्र में दलितों की स्थिति की झलक साफ दिखाई दे रही है। क्या यह आधिकारिक ऐलान हो चुका है कि दलित हिंदू नहीं हैं? अतः उनकी हत्या एवं जातीय अत्याचार पर कोई मुंह न खोले? हिंदू समाज स्वयं को डायनासोर क्यों समझ रहा है कि दूसरी जाति में विवाह हो गया तो उनकी प्रजाति संकटग्रत हो जाएगी?
MP के गुना जिले की राघोगढ़ #BSP प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव ने @yadavakhilesh की बेटी पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले बृजेश भानु शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।
सपा के 37 सांसद और 110 विधायक को अपने हाथों में चूड़ी पहन लेना चाहिए क्योंकि अभी तक यूपी में आरोपी के खिलाफ FIR नही कराई।
ये हॉस्पिटल है या हत्या का गिरोह?
जौनपुर के बदलापुर में दलित समाज की गर्भवती महिला शारदा देवी डिलीवरी हेतु "मां हॉस्पिटल" में भर्ती हुईं।
डॉक्टर प्रदीप यादव और हॉस्पिटल स्टाफ शुरू से ही अवैध वसूली के चक्कर में डिलीवरी में देरी करते रहे। इनके लूट एवं लापरवाही के चलते महिला की हालत गंभीर होती गई। डॉक्टर सुरक्षित रूप से डिलीवरी कराने में असमर्थ थे, लेकिन वे सिर्फ पैसा वसूलने के लिए हीलाहवाली करते रहे।
इधर शारदा देवी प्रसव पीड़ा से तड़पती रहीं, लेकिन डॉक्टरों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार मजबूरी में डॉक्टर प्रदीप यादव महिला को अपने परिचित के दूसरे अस्पताल, ईशा हॉस्पिटल, ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। यह देखकर डॉक्टर प्रदीप यादव मरीज का शव छोड़कर भाग गया। इस तरह डॉक्टरों और हॉस्पिटल की लापरवाही तथा धन वसूली की प्रवृत्ति के चलते जच्चा-बच्चा दोनों की जान चली गई।
पीड़ित परिवार 3 दिन से न्याय के लिए लड़ रहा है, लेकिन प्रशासन ने अभी तक हॉस्पिटल को सील नहीं किया है और न ही डॉक्टर प्रदीप यादव को गिरफ्तार किया है। हॉस्पिटल किसी भी मानक को पूरा नहीं करता, फिर भी वह धड़ल्ले से चल रहा है। बेहद शर्म और पीड़ा की बात है कि आज शाम महिला का शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा, लेकिन मौके पर न DM पहुंचे, न SDM, न SP, n CMO और न ही थानाध्यक्ष। सबने पीड़ित परिवार को तड़पने, रोने और बिलखने के लिए अकेला छोड़ रखा है।
हमारे मित्र रंजीत कुमार राजा घटनास्थल पर मौजूद हैं और परिजनों के न्याय की आवाज उठा रहे हैं। परिवार ने तय किया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। परिवार की ओर से हमारी मांग है;
1) दोषी डॉक्टर प्रदीप यादव को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
2) बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से संचालित मां हॉस्पिटल को तत्काल सील किया जाए तथा हॉस्पिटल मानकों के उल्लंघन के कारण उस पर वैधानिक कार्रवाई की जाए।
3) मुसीबत की इस घड़ी में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक एवं अन्य सक्षम अधिकारी पीड़ित परिवार से तुरंत मिलें और उन्हें कम से कम 20 लाख रुपये की सरकारी आर्थिक सहायता प्रदान करें।
4) सूचना है कि बदलापुर एवं जौनपुर में ऐसे अनेक अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो हॉस्पिटल रजिस्ट्रेशन के किसी भी मानक को पूरा नहीं करते और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं। जिलाधिकारी एवं CMO इस पर स्वतः संज्ञान लें, ऐसे सभी अस्पतालों को तत्काल सील करें तथा दोषी डॉक्टरों एवं मालिकों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इस गरीब दलित महिला की मौत पर स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री, राष्ट्रीय महिला आयोग, अनुसूचित जाति आयोग एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।
@jaunpurpolice@IgRangeVaranasi@brajeshpathakup@UPGovt@Mayawati
दलित युवक की भयावह हत्या। 💔
उत्तराखंड के टिहरी में एक दलित लड़का और द्विज हिंदू
लड़की आपस में प्रेम करते थे। लड़की के घरवालों ने धोखे से घर बुलाया और फिर पीट-पीटकर हत्या कर दी।
लड़का भी हिंदू था। फिर भी जाति की वजह से उसे दोयम दर्जे का हिंदू समझा गया। अतः उसकी हत्या कर दी गई।
यूपी के जिला मेरठ की सरधना विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चिरोड़ी की लगभग 17 वर्षीय बेटी एंव राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी अनुष्का पाल की बदमाशों द्वारा की गई हत्या की खबर अत्यंत दुःखद एंव चिंताजनक है। यह घटना समाज को झकझोर देने वाली है। सरकार इस जघन्य अपराध में शामिल सभी दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करे, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।
"मायावती अमित शाह के इशारे पर नाचती हैं..."
अभय दुबे जिस भाषा का प्रयोग बहन मायावती जी के लिए कर रहा है, क्या वह अपनी बेटी, पत्नी और घर की महिलाओं के लिए भी "नाचने" शब्द का प्रयोग करता है?
जब इनकी परवरिश इतनी घटिया है तो सोचिए ये लोग अपने बच्चों को कैसी परवरिश देते होंगे? इनके घरों में शायद महिलाओं की इज्जत नाचने और कठपुतली बनने से ऊपर नहीं होगी।
अभय दुबे की इस बदतमीजी को सुनकर आशुतोष खूब ठहाके लगाकर हंस रहा है। दोनों सवर्ण पत्रकार मिलकर दलित समुदाय के महिला नेतृत्व के खिलाफ अपने पुरखों की जातीय कुंठा और मनुवादी स्त्रीद्वेष का सरेआम प्रदर्शन कर रहे हैं।
ये वही आशुतोष है, जिसकी बदतमीजी पर मान्यवर कांशीराम ने उसे ढंग से कूटा था। बसपा पदाधिकारियों को अभय दुबे पर त्वरित कानूनी कार्रवाई करानी चाहिए। या फिर दलित समुदाय इन्हें उसी तरह कूटे, जैसे मान्यवर कांशीराम ने आशुतोष को कूटा था।
अगर बसपा के पदाधिकारी इस पर कार्रवाई नहीं करवाते हैं, तो उन्हें अपनी पार्टी बंद कर देनी चाहिए। कम से कम रोज-रोज बहन जी को गालियां तो नहीं सुननी पड़ेंगी। दो महीने पहले TV9 भारतवर्ष वालों से भी अकेले लड़ा था और उन्हें सार्वजनिक माफी मांगने पर मजबूर किया था। पार्टी के लोग कभी साथ नहीं देते। मुझे समझ में नहीं आता कि पार्टी के लोग बहन जी का इतना अपमान आखिर सह कैसे लेते हैं? इनकी सुस्ती का नतीजा है कि कोई भी आंडू-पांडू आदमी बहन जी का अपमान करके चला जाता है।
1. यू.पी. के ग्रेटर नोएडा के जेवर में की गई लगभग 15 वर्ष के गोपाल शर्मा की हत्या अति दुःखद व चिन्ताजनक। सरकार इस घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराये और इसके सभी अभियुक्तों को कड़ी सजा दी जाये।
2. साथ ही कल हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने से कई मजदूरों की हुई मौत के प्रकरण को भी सरकार गम्भीरता से लेते हुये मृतकों के आश्रितों को उचित आर्थिक मदद दे तथा घायलों का भी विशेष ध्यान रखा जाये, बी.एस.पी. की यह भी मांग।
सुपरमार्केट की कैशियर की एक अजीब आदत थी !
हर रात दुकान बंद होने से पहले, वो अपनी जेब से एक ब्रेड खरीदती और चुपचाप पीछे वाले दरवाज़े से निकल जाती !
कई महीनों तक उसके साथ काम करने वालों ने ये बात नोटिस की !
कुछ लोगों को लगा वो चोरी करती है !
कुछ ने सोचा किसी छुपे हुए बॉयफ्रेंड को खाना खिलाती होगी !
बाक़ी उसका मज़ाक उड़ाते थे !
“खुद की तनख़्वाह मुश्किल से चलती है!”
“हर रोज़ पैसे क्यों बर्बाद करती है ?”
लेकिन उसने कभी सफ़ाई नहीं दी !
एक बारिश वाली शाम, स्टोर मैनेजर ने उसका पीछा करने का फैसला किया !
वो तंग गलियों से गुज़री, एक गंदे पुल को पार किया, फिर एक पुराने मैकेनिक शॉप के पास खड़ी छोड़ी हुई बस के सामने रुक गई !
उसने जंग लगे दरवाज़े पर दो बार दस्तक दी !
अंदर से बच्चों की खुश आवाज़ें गूंज उठीं !
मैनेजर ठिठक गया !
पाँच नंगे पाँव बच्चे दौड़ते हुए बाहर आए !
ब्रेड देखते ही उनके चेहरों पर मुस्कान आ गई !
कैशियर ने ब्रेड को बहुत एहतियात से बराबर हिस्सों में बाँटा, जैसे वो कोई कीमती चीज़ हो !
तभी एक छोटी बच्ची ने उसे गले लगाया और धीरे से पूछा:
“आपने आज खुद भी कुछ खाया ना ?”
मैनेजर खामोश खड़ा रहा !
बारिश उसके छाते से टपक रही थी, मगर उसके कदम जैसे जम गए थे !
कैशियर ने बच्ची की तरफ हल्की मुस्कान से देखा और सिर हिला दिया !
“हाँ बेटा!”
लेकिन वो झूठ था !
मैनेजर उसकी आँखों में भूख साफ़ देख सकता था !
उस पुरानी बस के अंदर फटे कंबल, टूटी लालटेन और पाँच मासूम बच्चे थे, जो बिना माँ-बाप के ज़िंदगी काट रहे थे !
हर रात वो अपनी छोटी सी तनख़्वाह में से कुछ पैसे बचाकर उनके लिए खाना लाती थी !
ना किसी शोहरत के लिए !
ना किसी तारीफ़ के लिए !
बस इसलिए… क्योंकि वो खुद भूख का दर्द जानती थी !
अगली सुबह मैनेजर ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया !
कैशियर ने सिर झुका लिया ! उसे लगा आज नौकरी चली जाएगी !
लेकिन मैनेजर ने उसके सामने एक लिफाफा रखा !
उसमें तनख़्वाह बढ़ाने का लेटर था… और राशन के कुछ वाउचर भी !
मैनेजर ने धीमे से कहा:
“मैंने तुम्हें बिना जाने जज किया !
ऐसी इंसानियत को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए!”
धीरे-धीरे पूरी स्टाफ को सच्चाई पता चल गई !
जो लोग पहले उसका मज़ाक उड़ाते थे, अब वही चावल, दूध, कपड़े और जूते लेकर आने लगे !
और कई महीनों बाद, उस छोटी बच्ची ने उससे एक नया सवाल पूछा:
“आज आप हमारे साथ खाना खाएँगी ना ?
एक महिला मुंबई की लोकल ट्रेन में सफर कर रही थी?
तभी एक छोटी लड़की कुछ सामान बेचते हुए वहाँ आई?
महिला ने उसे बुलाया और पूछा - “ये कितने का है”
लड़की बोली - “₹20”
महिला ने बातों-बातों में पूछा - “तुम स्कूल जाती हो?”
लड़की ने तुरंत मुस्कुराकर कहा - “हाँ”
महिला ने ₹100 का नोट दिया तो लड़की बोली- “मेरे पास छुट्टे नहीं हैं”
फिर महिला ने पूछा - “घर में क्या करते हैं?”
लड़की बोली - “पापा मजदूरी करते हैं और मम्मी लोगों के घर काम करती हैं”
फिर उसने एक बात और कही - “मैं काम करती हूँ ताकि अपनी स्कूल की फीस खुद दे सकूं”
महिला ने पूछा - “फीस कितनी है?” और जवाब मिला - “₹260 महीना”
महिला कुछ सेकंड चुप रही फिर पूछा - “तुम्हारी मम्मी का नंबर है?”
लड़की ने सिर हिलाकर मना कर दिया?
तब महिला ने अपना नंबर दिया और बोली - “घर जाकर मम्मी से बात करवाना”
फिर उसने पूछा - “नाम क्या है और कौन सी class में हो?”
लड़की बोली - “नाम सुरेखा है और मैं 7वीं में हूँ”
महिला ने जाते-जाते कहा - “अब अच्छे से पढ़ाई करना और कोशिश करेंगे कि फीस की वजह से पढ़ाई ना रुके
I protested against the RSS a few days back.
That made the Principal and his staff so rattled that they now want my 60+ year-old father, who lives in Chhattisgarh, to come to Delhi and meet them.
The college did not inform me before writing to my parents, nor did they have any conversation with me regarding any wrongdoing on my part.
This is clear-cut mental harassment and torture of my father and my family.
I lost my mother in January. The Principal knows this very well, yet now he is intimidating my only parent -my father.
They wrote the letter on 28th April, sent it on 13th May, and my father received it on 25th May.
I come from a Dalit family from a small village in Chhattisgarh, and I have faced several other discriminatory issues from this college administration as well.
I never knew that exercising my rights could create such a big problem for my family.
Despite all this, I am not intimidated. I do not fear the administration.
I am the elected President of the Shivaji College Students’ Union. If they are intimidating me, imagine the situation of ordinary students in Delhi University.
Babasaheb Ambedkar and his Constitution stand by me.
I will not bow down.
The RSS has destroyed academic institutions, and I will continue fighting against it.
Jai Hind. Jai Samvidhaan.
महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला।
पेट्रोल-डीज़ल के दाम किश्तों में बढ़ाते हैं - ताकि चुपके-चुपके आपकी जेब कटती रहे।
मैं महीनों से आर्थिक तूफान आने की बात कह रहा था। पर मोदी जी तब हमेशा की तरह चुनाव में व्यस्त थे - और चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल ₹8 महंगा कर दिया।
और, ये बढ़त होती ही जाएगी।
महंगाई मानव मोदी का एक ही काम है - चुनाव में वादे, और बाक़ी समय जनता की जेब पर वार।
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ज़बरदस्त आंधी-तूफान से हुई जान-माल की भारी तबाही से प्रभावित लोगों/परिवारों की मदद के लिए राज्य सरकार को अपनी पूरी उदारता बरतते हुये हर प्रकार से उनके सहयोग के लिये आगे आना चाहिये ताकि वे लोग अपने उजड़े/बिखरे हुये पारिवारिक जीवन को समेट कर दोबारा से अपनी ज़िन्दगी शुरू कर सकें।
इसके साथ ही, ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि, इन आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में अनवरत वृद्धि को जारी रखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीज़ल आदि की क़ीमत में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करोड़ों ग़रीबों व मेहनतकश परिवारों, खेती-किसानी आदि के साथ-साथ मिडिल क्लास के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा, अर्थात् इस महंगाई का सीधा असर इन सबके परिवार के पालन-पोषण पर पड़ेगा।
इसीलिये सरकार को महंगाई व जीवन दुष्कर करने वाली इस प्रकार की नियमित वृद्धि को कम करने के लिए ज़रूरी सार्थक क़दम उठाने चाहिये, यही समय की माँग है।
2 पार्ट
दरवाजा खुलते ही ऑफिस में ऐसा सन्नाटा छा गया, जैसे किसी ने अचानक सारी आवाजें बंद कर दी हों।
मेरी पुरानी टीम की निगाहें पहले मेरे चेहरे पर गईं… फिर धीरे-धीरे उस नए ID कार्ड पर टिक गईं।
“Tara Infra Group — Project Audit Head”
सिया की उंगलियाँ कीबोर्ड पर रुक गईं।
नेहा मैम के हाथ से कॉफी मग लगभग छूट गया।
और राघव भाटिया…
उनके चेहरे का रंग पहली बार उड़ता हुआ मैंने देखा।
उन्होंने जबरदस्ती मुस्कुराकर कहा—
—ओह… तो आखिर तुमने नई नौकरी जॉइन कर ही ली।
मैंने शांत नजरों से उन्हें देखा।
—जी सर। आज ऑडिट के लिए आई हूँ।
उनकी मुस्कान थोड़ी और खिंच गई।
—अच्छा… अच्छा… बैठो। वैसे रिपोर्ट लगभग तैयार है।
मैंने कॉन्फ्रेंस रूम की तरफ कदम बढ़ाए।
वही कमरा…
जहाँ 7 साल तक मैं सबसे आखिर में बैठती थी।
जहाँ मेरे आइडिया राघव अपने नाम से क्लाइंट को बेचते थे।
जहाँ मेरी तारीफ कभी मेरे हिस्से नहीं आई।
लेकिन आज पहली बार उस कमरे में मेरे लिए बीच वाली कुर्सी रखी गई थी।
तारा ग्रुप की लीगल टीम पहले से बैठी थी।
क्लाइंट के दो विदेशी प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
अर्जुन सर वीडियो कॉल पर जुड़ गए।
उन्होंने सीधे कहा—
—आर्या, you lead the audit.
राघव सर तुरंत बोले—
—Actually, this campaign was executed under my supervision…
अर्जुन ने उन्हें बीच में रोक दिया।
—Mr. Bhatia, हम जानते हैं supervision किसका था। हमें execution देखने में ज्यादा दिलचस्पी है।
कमरे का तापमान जैसे अचानक बदल गया।
मैंने लैपटॉप खोला।
पहली स्लाइड सामने आई।
Campaign Architecture & Backend Execution — Prepared by Arya Mehra
राघव का चेहरा जम गया।
मैंने एक-एक फाइल खोली।
हर रिपोर्ट…
हर डेटा शीट…
हर क्लाइंट मेल…
सबमें “Prepared by Arya” लिखा था।
सिया घबराकर बोली—
—सर… ये फाइल्स तो…
राघव ने उसे घूरकर चुप करा दिया।
मैंने अगली स्लाइड खोली।
—यहाँ पिछले 18 महीनों की टाइमलाइन है। रात 2:47 AM पर भेजी गई रिपोर्ट्स, emergency fixes, vendor negotiations… सब documented हैं।
क्लाइंट प्रतिनिधि ने पूछा—
—So basically, she handled the core execution alone?
कमरे में कोई जवाब नहीं दे पाया।
मैंने शांत आवाज में कहा—
—टीम थी सर। लेकिन responsibility mostly मेरे पास थी।
राघव अचानक ऊँची आवाज में बोले—
—देखिए, corporate में ऐसा चलता है। एक इंसान सब नहीं करता।
मैंने पहली बार उनकी आँखों में देखकर कहा—
—सही कहा आपने सर।
लेकिन एक इंसान का श्रेय दूसरा इंसान जरूर ले सकता है।
कमरा पूरी तरह खामोश हो गया।
नेहा मैम पसीना पोंछने लगीं।
तभी अर्जुन सर बोले—
—आर्या, final financial discrepancy वाली रिपोर्ट भी दिखाइए।
मैंने फाइल खोली।
उसमें vendor payments और inflated billing का पूरा रिकॉर्ड था।
राघव की आवाज काँपी—
—ये… ये confidential documents हैं!
मैंने उनकी तरफ देखा।
—नहीं सर। ये वही documents हैं जिन पर आपने मेरे digital signatures लगवाए थे बिना मुझे पूरी जानकारी दिए।
लीगल टीम तुरंत सतर्क हो गई।
एक वकील बोला—
—Mr. Bhatia, these entries need explanation.
अब पहली बार राघव की अकड़ टूटती दिख रही थी।
उन्होंने धीरे से कहा—
—आर्या हम बैठकर बात कर सकते हैं…
मैं मुस्कुराई।
7 साल बाद पहली सच्ची मुस्कान।
—सर, 7 साल मैं बात करना चाहती थी।
आपको सिर्फ आदेश देना आता था।
सिया अचानक रो पड़ी।
—मैम.मुझे नहीं पता था कि आपके साथ इतना…
मैंने उसे रोका।
—गलती तुम्हारी नहीं थी।
ऑफिस में सबसे आसान काम होता है… मेहनती इंसान को available समझ लेना।
ऑडिट खत्म होने में 3 घंटे लगे।
जब मैं बाहर निकली, पूरा ऑफिस मुझे उसी तरह देख रहा था
लेकिन फर्क सिर्फ इतना था—
पहले लोग मुझे नजरअंदाज करते थे।
आज कोई आँख मिलाने की हिम्मत नहीं कर रहा था।
लिफ्ट के पास राघव अकेले खड़े मिले।
उनकी आवाज पहली बार धीमी थी।
आर्या अगर मैंने कभी तुम्हें hurt किया हो तो…
मैंने बात पूरी नहीं होने दी।
सर, hurt तो तब होता जब इंसान की उम्मीद बाकी हो।
मैंने तो बहुत पहले समझ लिया था इस ऑफिस में मेरी मेहनत चाहिए थी, मेरी इज्जत नहीं।
उन्होंने नजरें झुका लीं
मैंने अपना ID कार्ड सीधा किया और कहा
वैसे एक बात बताऊँ?
उस दिन आपने कहा था—तुम्हारा करियर खत्म कर दूँगा।
मैं हल्का सा मुस्कुराई
शायद आपको अंदाजा नहीं था
कि जिस लड़की को आप 500 रुपये का voucher देकर चुप कराना चाहते थे, वही एक दिन आपकी 12 करोड़ की डील का ऑडिट करेगी
इतना कहकर मैं लिफ्ट में चली गई
दरवाजे बंद होने से पहले मैंने आखिरी बार उस ऑफिस को देखा।
वही कुर्सियाँ.वही लोग वही दीवारें।
बस फर्क इतना था
पहले मैं वहाँ काम करती थी।
आज मेरी पहचान वहाँ डर बनकर खड़ी थी।