शौर्य की प्रतिमूर्ति छत्रपति शिवाजी महाराज जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन।
शिवाजी महाराज वीरता, दूरदर्शिता और न्यायप्रिय नेतृत्व के अद्वितीय प्रतीक हैं।
उनका जीवन दर्शन और साहस हमें आज भी अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा देता है।
Saddened by the passing of Dr. Ricky AJ Syngkon, Lok Sabha MP from Shillong, Meghalaya.
His commitment to public service and the people of Meghalaya will be remembered with respect.
My condolences to his family, friends, and supporters.
Best wishes to the people of Arunachal Pradesh and Mizoram on their Statehood Day.
Rich in vibrant culture, enduring traditions, and natural beauty, these states are an integral part of India’s diverse heritage.
May they continue to prosper and move forward with strength, unity, and a progressive spirit.
Why did I use a Jiu-Jitsu analogy in my Parliament speech on the trade deal?
Why were our farmers sacrificed to please the Americans?
Why was India’s energy security compromised by allowing the US to dictate our oil supplies?
Why agree to increase US imports by $100 billion a year without a reciprocal promise?
Why did I say this deal could turn India into a data colony?
Why would Modi ji agree to a deal where India gives so much and appears to get so little?
The answer to this abject surrender lies in the “grips” and “chokes” placed on the PM.
व्यापार समझौते पर संसद में अपने भाषण में मैंने Jiu-Jitsu का उदाहरण क्यों इस्तेमाल किया?
अमेरिकियों को खुश करने के लिए हमारे किसानों की कुर्बानी क्यों दी गई?
अमेरिका को हमारे तेल आयात तय करने देकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता क्यों किया गया?
बिना किसी पारस्परिक वादे के, हर साल $100 बिलियन का अमेरिकी आयात बढ़ाने पर सहमति क्यों दी गई?
मैंने यह क्यों कहा कि यह समझौता भारत को एक data colony बना सकता है?
मोदी जी ऐसा समझौता क्यों मानेंगे, जिसमें भारत इतना कुछ दे रहा और बदले में बहुत कम मिलता दिख रहा है?
इस शर्मनाक आत्मसमर्पण का जवाब प्रधानमंत्री पर डाले गए “grips” और “chokes” में छिपा है।
ओम बिरला की गाड़ी रुकती है फिर राहुल गांधी को गोली मारने की धमकी देने वाला राज सिंह आमेरा उन्हें माला पहनाता है
बड़े नेता जान पहचान वालों को देख कर गाड़ी ज़रूर रोक देते हैं
अच्छी जान पहचान मालूम पड़ती है दोनों की
इसकी धमकी पर भी कुछ बोल दीजिए बिरला जी
यह देखिए
ओम बिरला जी खाना खा रहे हैं
और उनके बगल में आत्मीयता से खड़ा हुआ यह आदमी राज सिंह आमेरा है
वही राज सिंह आमेरा जिसने राहुल गांधी और 25 कांग्रेस सांसदों को गोली मारने की धमकी दी है
आपकी चुप्पी नाकाबिले बर्दाश्त है बिरला जी
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18% टैरिफ बनाम 0% - आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं। और, किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।
बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है - शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें।
भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया - “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी।”
आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई?
और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल?
अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा।
और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।
भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।
एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स - दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती।
लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।
#FarmersFirst 🇮🇳
आज देशभर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर हैं।
मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएँ उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी।
किसानों को आशंका है कि व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।
और मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आख़िरी सहारा भी छिन सकता है।
जब उनके भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, उनकी आवाज़ को नज़रअंदाज़ किया गया।
क्या मोदीजी अब सुनेंगे? या उन पर किसी “grip” की पकड़ बहुत मज़बूत है? मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूँ।
FIR हो,
मुकदमा दर्ज हो या
Privilege प्रस्ताव लाएं - मैं किसानों के लिए लड़ूंगा।
जो भी ट्रेड डील किसानों की रोज़ी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे, वह किसान-विरोधी है।
अन्नदाताओं के हितों से किसान-विरोधी मोदी सरकार को समझौता नहीं करने देंगे।
इतिहास में पहली बार हमारे किसान ऐसे भूचाल का सामना कर रहे हैं
मक्का, सोयाबीन, लाल ज्वार, कपास
हमने अमेरिका के बड़े बड़े खेत जो मशीनों से चलते हैं उनके लिए दरवाज़ा खोल दिया है. यह हमारे किसानों को कुचल देंगे
किसी भी प्रधानमंत्री ने पहले ऐसा कभी नहीं किया
और आपके बाद कोई भी प्रधानमंत्री ऐसा कभी नहीं करेगा