🎗️ रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🎗️
राख�� सिर्फ धागा नहीं, विश्वास और जिम्मेदारी का वचन है।
व्यावसायिक प्रशिक्षक भी वर्षों से शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन बदले में आज भी अस्थिर रोजगार, लंबित मानदेय और स्थायी नीति का इंतजार ��ै।
विभाग से बस इतना सवाल—राखी का बंधन निभाना आता है, तो प्रशिक्षकों से किया वादा निभाना कब आएगा?
— व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति, राजस्थान
#रक्षाबंधन #व्यावसायिकप्रशिक्षक #स्थायी_जॉब_पॉलिसी #Rajasthan
जागो राजस्थान सरकार
#स्थाई_जॉब_पालिसी_लागू_करो
#CSR_2022
@rajeduofficial @RajCMO @RajGovOfficial @BhajanlalBjp @madandilawar
व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य, फिर व्यावसायिक प्रशिक्षकों का भविष्य अंधकार में क्यों?
सरकार के फैसले का स्वागत, लेकिन वर्षों से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए ��्थायी जॉब पॉलिसी की मांग
राजस्थान में कक्षा 9 से व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य विषय बनाए जाने तथा आगामी शैक्षणिक सत्रों में व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान स्वागत करती है। दैनिक भास्कर में 21 अगस्त को प्रकाशित समाचार में भी कक्षा 9 से व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर किए गए ट्वीट एवं प्रचार से यह स्पष्ट है कि राजस्थान सरकार विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना चाहती है।
लेकिन इस निर्णय के साथ ही एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—
जब राजस्थान में व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य है, तो व्यावसायिक शिक्षण कराने वाले प्रशिक्षकों की नौकरी अनिवार्य और स्थायी क्यों नहीं?
राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में वर्षों से हजारों व्यावसायिक प्रशिक्षक (Vocational Trainers) विद्यार्थियों को विभिन्न ट्रेड���ं में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। इन प्रशिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि वास्तविक कौशल, प्रायोगिक प्रशिक्षण, औद्योगिक भ्रमण, ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग तथा रोजगार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
सरकार अब व्यावसायिक शिक्षा का दायरा और बढ़ाने जा रही है। ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षकों के भविष्य को लेकर अभी भी कोई स्���ष्ट एवं स्थायी नीति नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान का कहना है कि सरकार एक ओर विद्यार्थियों के लिए व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बने प्रशिक्षकों को वर्षों से अस्थायी व्यवस्था और प्लेसमेंट एजेंसियों के भरोसे छोड़ना उचित नहीं है।
सरकार से सीधे सवाल
1. जब व्यावसायिक शिक्षा को विद्यालयों मे��� अनिवार्य किया जा रहा है तो व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए स्थायी जॉब पॉलिसी कब बनाई जाएगी?
2. वर्षों से सरकारी विद्यालयों में सेवाएं दे रहे प्रशिक्षकों के अनुभव एवं सेवाकाल का लाभ उन्हें कब मिलेगा?
3. विद्यार्थियों को रोजगारपरक शिक्षा देने वाले प्रशिक्षकों का स्वयं का ��ोजगार अस्थायी क्यों रखा गया है?
4. यदि व्यावसायिक शिक्षा आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य हिस्सा बनने जा रही है, तो इसके लिए प्रशिक्षकों का स्थायी कैडर क्यों नहीं बनाया जा रहा?
5. क्या सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षकों को प्लेसमेंट एजेंसियों की व्यवस्था से बाहर निकालकर सीधे एवं सुरक्षित रोजगार देने की नीति बनाएगी?
प्रशिक्षकों का कहना—नीति स्वागत योग्य, लेकिन प्र��िक्षकों का भविष्य भी सुनिश्चित हो
समिति का कहना है कि व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य करने का निर्णय विद्यार्थियों के भविष्य के लिए सकारात्मक कदम है। लेकिन किसी भी शिक्षा नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है और उसके क्रियान्वयन की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी शिक्षक एवं प्रशिक्षक होते हैं।
यदि सरकार वास्तव में राजस्थान के युवाओं को कौशलयुक्त बनाकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना चाहती है, तो सबसे पहले उन प्रशिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करना होगा जो वर्षों से विद्यालयों में इस व्यवस्था को जमीन पर लागू कर रहे हैं।
व्यावसायिक प्रशिक्षक संघर्ष समिति राजस्थान सरकार से मांग करती है कि व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने के साथ-साथ राजस्थान में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों के लिए सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा एवं स्थायी जॉब पॉलिसी लागू की जाए तथा वर्षों से सेवाएं दे रहे प्रशिक्षकों के अनुभव का उचित लाभ दिया जाए।
हमारा स्पष्ट सं��ेश है—
“जब व्यावसायिक शिक्षा अनिवार्य है, तो व्यावसायिक शिक्षण कराने वाले प्रशिक्षकों का भविष्य भी सुरक्षित होना चाहिए।”
सरकार विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर रही है, यह स्वागत योग्य कदम है। अब सरकार को उसी गंभीरता से व्यावसायिक प्रशिक्षकों के भविष्य को भी सुरक्षित करने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लेना चाहिए।
जागो राजस्थान सरकार
#ह���ियाणा_मॉडल_लागू_करो @rajeduofficial @RajCMO @RajGovOfficial @BhajanlalBjp @madandilawar
स्थाई होंगे राजस्थान के 5000 से ज्यादा वोकेशनल शिक्षक
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार अनिवार्य होगी व्यावसायिक शिक्षा
वर्तमान में ठेके पर लगे हुए वोकेशनल शिक्षकों द्वारा स्थाई पॉलिसी की मांग उठाई जा रही है
वर्तमान में स्थाई पॉलिसी का मामला कोर्ट में भी विचाराधीन
@RajCMO
राजथान के 5000 से ज्यादा वोकेशनल शिक्षक प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से सरकारी विद्यालय में लगे हुए है जो स्टूडेंट्स को कौशल शिक्षा देते हैं
राजस्���ान की डबल इंजन सरकार को संविदा नियम 2022 या हरियाणा मॉडल की तर्ज पर ��्थाई पॉलिसी लागू कर स्थाई करना चाहिए
@Bhajanlalofc
व्यावसायिक शिक्षा की राजस्थान में वर्तमान स्थिति
जिला टोंक से आज का आदेश
देखिए शिक्षकों को कब से वेतन मिला हैं
विषय अनिवार्य किया हैं स्वागत
लेकिन शिक्षकों को वेतन कब मिलेगा कोई गारंटी नहीं
12 वर्षों से ठेके पर,न कोर्ट के आदेश की पालना,न कोई सुधार
@sharatjpr@pantlp@NSDCIndia
सांसद राजकुमार रोत @roat_mla से मिले व्यावसायिक शिक्षक, समस्याओं के समाधान की मांग
व्यावसायिक शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं एवं लंबे समय से चली आ रही मांगों को लेकर व्यावसायिक शिक्षकों ने लोकसभा क्षेत्र बांसवाड़ा-डूंग���पुर के सांसद माननीय राजकुमार रोत से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
शिक्षकों ने सांसद को बताया कि वे पिछले 12 वर्षों से राजकीय विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक विद्यार्थियों को कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा प्रदान क��� रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवाएं आज भी ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से संचालित हो रही हैं। शिक्षकों ने कहा कि वर्षों का अनुभव होने के बाद भी उन्हें स्थायी रोजगार सुरक्षा नहीं मिल पाई है।
5 से 14 माह तक वेतन बकाया होने का मुद्दा उठाया
मुलाकात के दौरान शिक्षकों ने सबसे गंभीर समस्या वेतन भुगतान में देरी की रखी। शिक्षकों के अनुसार कई व्यावसायिक शिक्षकों को 5 से 14 माह तक का वेतन नहीं ���िला है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से कौशल शिक्षा देने के बावजूद स्वयं शिक्षक आर्थिक असुरक्षा में जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार एवं विभाग से बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराने की मांग की।
ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी जॉब पॉलिसी की मांग
व्यावसायिक शिक्षकों ने सांसद के सामने ठेका प्रथा समाप्त करने, स्थायी जॉ�� पॉलिसी लागू करने, समान कार्य के लिए समान वेतन, सामाजिक सुरक्षा तथा रोजगार की स्थिरता सहित विभिन्न मांगें रखीं।
मुख्य मांगें: बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, ठेका प्रथा समाप्त करना, स्थायी जॉब पॉलिसी लागू करना, समान कार्य के लिए समान वेतन और व्यावसायिक शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा एवं रोजगार की ��ारंटी देना।@pantlp
@sharatjpr @educationnagari
#व्यावसायिक_शिक्षकों_को_न्याय_दो
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
#SaveVT
एक तरफ व्यावसायिक शिक्षा के विषय को अनिवार्य किया जा रहा है दूसरी तरफ सरकार शिक्षकों का शोषण करने पर उतरी है ... शिक्षकों को 5 से 14माह हुए वेतन नहीं मिला हैं 12 वर्षों से ठेके पर दे रखी है 21 से ज्यादा कंपनियां
@sharatjpr@pantlp@AshutoshRanka@Cockroachisback@manojpehul
@BJP4Rajasthan@madanrrathore बीजेपी की एक बड़ी #खासियत है वह संगठन में कभी भी ST,SC और OBC को कभी भी पद नहीं देती है। उनकी संकटनात्मक लिस्ट में केवल सवर्ण (ब्राह्मण,बणिया और राजपूत) समाज का ही वर्चस्व रहता है।
#कांग्रेस यह काम कब स्टार्ट करेगी कि उनकी #संगठनात्मक लिस्ट में केवल ST,SC और OBC ही रहना चाहिए।
इस नोटिस में विभाग ने स्वयं VTPs क�� मानदेय की लंबित अवधि का उल्लेख किया है और 7 दिन में मानदेय भुगतान सुनिश्चित करने के लिए जवाब/प्रस्ताव मांगा है। इसके बावजूद यदि इन्हीं एजेंसियों को फिर से कार्यादेश देने की तैयारी है, तो इस पर तीखा सवाल उठाया जा सकता है:
विभाग से सीधा सवाल❗
जब विभाग के अपने रिकॉर्ड में 14 VTPs के मानदेय की लंबित अवधि सामने आ चुकी है, कई महीनों का भुगतान अटका हुआ है और विभाग स्वयं 7 दिवस में भुगतान सुनिश्चित करने ��े लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर रहा है, तो फिर इन्हीं VTPs को पुनः कार्यादेश देने की तैयारी क्यों?
पहले पुराने बकाया ��ा भुगतान सुनिश्चित हो, प्रशिक्षकों के हितों की रक्षा हो और VTPs की जवाबदेही तय हो—उसके बाद ही नए कार्यादेश की बात होनी चाहिए।
एक तरफ कारण बताओ नोटिस, दूसरी तरफ कार्यादेश की तैयारी—यह दोहरा रवैया आखिर क्यों?
जागो राजस्थान सरकार
#हरियाणा_मॉडल_लागू_करो
@rajeduofficial @RajCMO @RajGovOfficial @BhajanlalBjp @madandilawar
युवा मित्रों की नौकरी बहाली के लिए आज जयपुर में प्रदर्शन!
7 संभाग मुख्यालयों पर हल्ला बोल रैली के तहत जयपुर में प्रदर्शन कर संभागीय आयुक्त को CM साहाब के नाम ज्ञापन सौंपा।
युवा मित्रों की नौकरी तत्काल बहाल की जाए। अन्यथा निर्णायक आंदोलन होगा।
#युवा_मित्रों_का_जयपुर_में_प्रदर्शन
युवा मित्रों की नौकरी बहाली के लिए आज जयपुर में प्रदर्��न!
7 संभाग मुख्यालयों पर हल्ला बोल रैली के तहत जयपुर में प्रदर्शन कर संभागीय आयुक्त को CM साहाब के नाम ज्ञापन सौंपा।
युवा मित्रों की नौकरी तत्काल बहाल की जाए।
#युवा_मित्रों_का_जयपुर_में_प्रदर्शन
@BhajanlalBjp
जयपुर की सड़कों पर युवा मित्रों का हल्ला बोल प्रदर्शन।
कलेक्टर सर्किल से संभागीय आयुक्त तक पैदल मार्च कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन।
जल्द मिलेगी सबको खुश खबरी।
#जयपुर_में_युवामित्रों_का_प्रदर्शन@sanjay_hingwa
कोरबा में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की आवाज़ बुलंद—कलेक्टर को सौंपा 16 सूत्रीय ज्ञापन, सम्मानजनक मानदेय व सेवा सु���क्षा की मांग। ✊
एकजुटता ही ताकत है, अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी!
#व्यावसायिकप्रशिक्षक #सेवासुरक्षा #मानदेयवृद्धि #कोरबा #छत्तीसगढ़
जांजगीर-चांपा के 45 VT साथियों ने एकजुट होकर DEO एवं कलेक्टर महोदय को 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। ✊
साथ ही जिला कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए 3 नए VT साथियों को नई जिम्मेदारी स���ंपी गई—एकता हमारी ताकत, अधिकार हमारा हक! 🔥
#व्यावसायिकप्रशिक्षक #जांजगीरचांपा #सेवासुरक्षा
व्यावसायिक प्रशिक्षकों के भविष्य पर मंडरा रही नौकरी जाने की आशंका और महीनों से लंबित मानदेय ने प्रदेशभर के प्रशिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकार से मांग है कि प्रशिक्षकों की सेवा-सुरक्षा सुनिश���चित कर शोषणकारी थर्ड पार्टी सिस्टम समाप्त किया जाए |
#व्यावसायिकप्रशिक्षक
महासमुंद सहित छत्तीसगढ़ के 1,285 स्कूलों में 1,029 व्यावसायिक प्रशिक्षकों का मानदेय लंबित—16 सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज़ बुलंद। ✊
समय पर मानदेय, सेवा सुरक्षा और सम्मान—व्यावसायिक प्रशिक्षकों का अधिकार सुनिश्चित हो!
#व्यावसायिकप्रशिक्षक#महासमुंद#मानदेय#सेवासुरक्षा#छत्तीसगढ़