माo मुख्यमंत्री @pushkardhami जी @kamla_rawat_uk जी ने ग्राम ठेली को राजस्व गांव बनाने के संबंध में सभी जगह ज्ञापन दे दिए पर??
👉मुख्यमंत्री कार्यालय
👉सांसद जी
👉विधायक जी
👉राजस्व परिषद
👉जिलाधिकारी
👉उप जिलाधिकारी
👉जिला अध्यक्ष
👉ब्लाक प्रमुख
👉राजस्व उपनिषद
👉राजस्व विभाग
गोपेश्वर, चमोली में स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव की अनंत महिमा और आस्था का अद्भुत केंद्र है। हिमालय की सुरम्य वादियों और मनोहारी प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति एवं दिव्य अनुभूति प्रदान करता है।
आप भी चमोली जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
भारत के लोग कभी गुलाम नहीं हो सकते
भारत का इतिहास गुलामी का इतिहास नहीं रहा है। बल्की उन लोगों के साथ संघर्ष का रहा है, जिसने हमें गुलाम बनाने की कोशिश की थी।
संघ प्रमुख, मोहन भागवत
मेरठ के मोदीपुरम से ऋषिकेश के पास लक्ष्मणझूला तक हाई स्पीड नमो भारत ट्रेन (आरआरटीएस) का सपना सच होने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से, उत्तराखण्ड, यूपी और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) के बीच आरआरटीएस ट्रेन के मौजूदा नेटवर्क को मेरठ से ऋषिकेश तक विस्तार देने पर सहमति बन गई है। परियोजना की डीपीआर के लिए जल्द सर्वे होने जा रहा है।
इसी वर्ष फरवरी माह में दिल्ली से मेरठ के मोदीपुरम तक हाईस्पीड नमो भारत ट्रेन का संचालन शुरू हो चुका है। इस हाईस्पीड ट्रेन को मोदीपुरम से ऋषिकेश तक विस्तार देने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी लगातार प्रयासरत रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर प्रस्ताव भी सौंपा था। इसके बाद इस ट्रेन को मोदीपुरम से ऋषिकेश में लक्ष्मणझूला तक विस्तार देने पर सहमति बन गई है।
परियोजना को गति देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार अपर सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नियुक्त कर चुकी है, इसी तरह एनसीआरटीसी ने अपना नोडल नियुक्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार भी परियोजना पर सहमति दे चुकी है। इसके बाद अब कुल 150 किलोमीटर प्रस्तावित ट्रैक की डीपीआर तैयार करने के लिए सर्वे शुरु होने जा रहा है।
प्रस्तावित परियोजना के मुताबिक मेरठ के मोदीपुरम स्टेशन से नया ट्रैक शुरू होगा, जो मुजफ्फरनगर होते हुए, उत्तराखण्ड की सीमा में प्रवेश करेगा। इसके बाद ये ट्रैक रुड़की, हरिद्वार में हर की पैड़ी होते हुए, ऋषिकेश के अंतिम छोर लक्ष्मणझूला तक पहुंचेगा। इसका 72 किमी का हिस्सा उत्तर प्रदेश में और 78 किमी का हिस्सा उत्तराखण्ड में आएगा।
इससे उत्तराखण्ड आने वाले तीर्थयात्रियों सहित दिल्ली जाने वाले उत्तराखण्ड के लोगों का भी नया आधुनिक ट्रांसपोर्ट विकल्प मिल पाएगा। वर्तमान में दिल्ली से ऋषिकेश जाने में सड़क मार्ग से करीब पांच से छह घंटे का समय लगता है। नमो भारत ट्रेन (160 किमी/प्रति घंटे की रफ्तार) के शुरू होने के बाद यह सफर सिर्फ ढाई से तीन घंटे में पूरा हो जाएगा।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि मेरठ से ऋषिकेश तक नमो भारत ट्रेन सेवा का विस्तार उत्तराखण्ड की कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा। इससे तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और एनसीआरटीसी के साथ लगातार समन्वय कर रही है। हमारा प्रयास है कि उत्तराखण्ड में बेहतर रेल और परिवहन अवसंरचना के माध्यम से विकास तथा रोजगार के नए अवसर सृजित हों।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @pushkardhami जी, मालवीय नगर की यह दुखद घटना हम सभी के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। इस संवेदनशील विषय पर आपके द्वारा व्यक्त की गई चिंता स्वाभाविक एवं महत्वपूर्ण है।
मैं आपको विश्वास दिलाना चाहती हूँ कि इस प्रकरण की जांच पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है। दिल्ली सरकार की स्पष्ट प्रतिबद्धता है कि न तो कोई दोषी बचना चाहिए और न ही किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ किसी प्रकार का अन्याय होना चाहिए।
सभी संबंधित एजेंसियों को तथ्यों, साक्ष्यों और विधि के अनुरूप निष्पक्ष एवं गहन जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। हमारा उद्देश्य केवल सत्य को सामने लाना और न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
जय माँ गंगे! 🙏
आज लगभग 24 लाख 52 हजार श्रद्धालुओं ने हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर पावन स्नान किया। आरती दर्शन के बाद श्रद्धालुओं का सुगम प्रस्थान जारी है। यातायात व सुरक्षा व्यवस्था सुचारू बनाए रखने हेतु पुलिस बल तैनात है।
#UttarakhandPolice#Haridwar
चमोली जनपद की सुरम्य वादियों में स्थित माँ अनुसूया मंदिर आस्था, तप और आध्यात्मिक ऊर्जा का पावन केंद्र है। यह प्राचीन मंदिर देवी अनुसूया को समर्पित है, जहाँ प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती के अवसर पर भव्य मेले एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया जाता है।
आप भी चमोली जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल
चमोली जनपद में स्थित श्री हेमकुंड साहिब अनेकों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का पावन केंद्र है। हिमालय की शांत वादियों में स्थित यह पवित्र धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आत्मिक ऊर्जा, मन की शांति और अध्यात्म की दिव्य अनुभूति का स्थान है।
चमोली जनपद आगमन पर इस पावन स्थल के दर्शन अवश्य करें।
गंगा का अविरल प्रवाह
उत्तराखंड में गंगा पर अब कोई नई पनबिजली परियोजना प्रारंभ नहीं होगी
केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
पहले 28 परियोजनाओं को प्रारंभ करने का प्रस्ताव था
अब केवल वर्तमान में चल रही सात परियोजनाओं पर ही काम होगा
अन्य परियोजनाओं पर काम नहीं होगा
जल शक्ति, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालयों का साझा निर्णय
सर्वोच्च न्यायालय को दी जानकारी
श्रद्धांजलि संदेश...
आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं..
मैंने केवल अपने पिता को नहीं खोया, बल्कि अपने जीवन के सबसे बड़े संबल, मार्गदर्शक और उस व्यक्तित्व को विदा किया है जिसकी छाया में मैंने कर्तव्य, अनुशासन और सेवा का अर्थ समझा।
मेजर जनरल (रि.) भुवन चंद्र खण्डूरी जी का जीवन किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्पूर्ण समर्पण की एक जीवंत गाथा था। 1 अक्टूबर 1934 को प्रारम्भ हुई उनकी जीवन यात्रा भारतीय सेना के रणक्षेत्रों से लेकर लोकतंत्र के सर्वोच्च मंचों और उत्तराखंड की जनसेवा तक पहुँची, लेकिन हर भूमिका में उनकी पहचान एक ही रही—राष्ट्र प्रथम।
1954 में भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में कमीशन प्राप्त करने के साथ उन्होंने मातृभूमि की सेवा का जो संकल्प लिया, उसे जीवन भर निभाया। उन्होंने 1962 के भारत–चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत–पाक युद्धों में देश के लिए अपना कर्तव्य निभाया। सीमाओं पर बिताए वे वर्ष केवल एक सैनिक के साहस की कहानी नहीं थे, बल्कि उन अनगिनत त्यागों की भी कहानी थे जो एक सैनिक का परिवार मौन रहकर करता है।
जब वे सीमा पर राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात रहते थे, तब परिवार ने भी उनके साथ एक अलग युद्ध जिया—प्रतीक्षा का, अनिश्चितता का और मौन चिंता का। हमारे बचपन के अनेक क्षण ऐसे रहे जब पिता का स्नेह पत्रों में मिलता था, उनकी उपस्थिति स्मृतियों और प्रतीक्षा में महसूस होती थी। लेकिन उन्होंने हमें कभी शिकायत नहीं, बल्कि गर्व करना सिखाया—कि राष्ट्रसेवा केवल सैनिक नहीं करता, उसका परिवार भी उस संकल्प का सहभागी होता है।
सेना में लगभग छत्तीस वर्षों की गौरवपूर्ण सेवा के दौरान उन्होंने नेतृत्व, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की ऐसी मिसाल स्थापित की कि 26 जनवरी 1982 को उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया गया। मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम का मार्ग नहीं चुना। 1991 में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश कर उन्होंने जनसेवा को अपना नया दायित्व बनाया।
गढ़वाल की जनता ने उन्हें बार-बार संसद भेजा और उन्होंने सांसद, केंद्रीय मंत्री तथा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। भारत सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए उन्होंने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना और गोल्डन क्वाड्रिलेटरल जैसी ऐतिहासिक योजनाओं को गति दी, जिसने आधुनिक भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल सादगी, पारदर्शिता और सुशासन का पर्याय बना। मजबूत लोकायुक्त कानून, प्रशासनिक सुधार और जनहित को सर्वोच्च रखने का उनका आग्रह सदैव याद रखा जाएगा।
लेकिन मेरे लिए उनकी सबसे बड़ी पहचान किसी पद या सम्मान से नहीं थी।
वे मेरे पिता थे—कम बोलने वाले, लेकिन मूल्यों पर अडिग; कठोर दिखने वाले, लेकिन भीतर से अत्यंत संवेदनशील। उन्होंने हमें सिखाया कि जीवन में ईमानदारी सबसे बड़ी पूँजी है, और पद की गरिमा व्यक्ति के आचरण से बनती है। उनसे मैंने सीखा कि सार्वजनिक जीवन में निर्णय लोकप्रिय होने के लिए नहीं, सही होने के लिए लिए जाते हैं।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो समझ पाती हूँ कि राष्ट्र ने जिन उपलब्धियों और सेवाओं के लिए उन्हें सम्मान दिया, उनके पीछे एक ऐसा जीवन था जिसने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से अधिक कर्तव्य को चुना। परिवार ने भी उनका समय, उनकी उपस्थिति और जीवन के अनेक निजी क्षण राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित होते देखे, और यही त्याग हमारे लिए गर्व का आधार बना।
उनका जाना मेरे और हमारे पूरे परिवार के लिए एक ऐसी रिक्तता है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। फिर भी यह संतोष रहेगा कि उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के प्रति ईमानदार दायित्व निभाते हुए जिया।
पिताजी, आपने हमें केवल जीवन नहीं दिया—जीवन जीने के मूल्य दिए। आपका अनुशासन, आपका साहस, आपकी सत्यनिष्ठा और आपकी सीख सदैव हमारा मार्गदर्शन करती रहेगी।
ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
ॐ शान्तिः।
— ऋतु खण्डूडी भूषण
पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के भूतपूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत) श्री भुवन चन्द्र खंडूरी जी के निधन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गहरा शोक व्यक्त करते हुए, उनकी दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करता है। सैन्य जीवन से सार्वजनिक जीवन में मुख्यमंत्री के रूप में उनकी सेवा में उनका अनुशासन तथा कार्यनिष्ठा यथावत बनी रही।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शान्ति।
- दत्तात्रेय होसबाले
सरकार्यवाह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूडी (सेवानिवृत्त) जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक जगत में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। उत्तराखंड के विकास के लिए वे हमेशा समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में भी साफ तौर पर दिखा। केंद्रीय मंत्री के रूप में भी उनका कार्यकाल हर किसी को प्रेरित करने वाला है। देशभर में कनेक्टिविटी की बेहतरी के लिए उन्होंने निरंतर अथक प्रयास किए। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और समर्थकों के साथ हैं। ओम शांति!
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) बी. सी. खंडूरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवा देने के बाद उन्होंने जन सेवा के लिए ईमानदारी, सादगी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का उदाहरण प्रस्तुत किया। देश के तथा उत्तराखंड के विकास, सुशासन और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी। मैं उनके शोकसंतप्त परिवारजनों और शुभचिंतकों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त करती हूं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।
श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।