@askbhupi इसका सीवर व अन्य गन्दगी सब पवित्र नदियों मे बहेगा। लोग बाहर से आकर उत्तराखंड को अपवित्र करने में लगे है। पर्यटन से जुड़ने के कारण बाहर लोग पनप रहे है उत्तराखंड वासियो के हिस्से में बाघ भालु व खस्ता हाल शिक्षा स्वास्थ्य, बेरोजगारी है।
आज के समय में...
आदमी पैसे कमा रहा है कि औरत के साथ रह सके और घर गृहस्थी बने...
औरत पैसे कमा रही ताकि आदमी के साथ न रहना पड़े, स्वतंत्र जी सके...
अब इन दोनो में कौन सही है और कौन गलत आप ही बता सकते हैं...!!
@Maasoom_Baalak@khanumarfa जिनको जिल्लत महसूस हो रही हो खाड़ी देशो व दुबई चले जाओ वहा इनके पीछे कोई नही आयेगा बुलाने।
कुछ दिन चाईना मे रहकर गुजारो फिर पता चलेगी भारत देश की अहमियत, नमक हराम।
@pankaj245 भाई साहब ऐसा भी नही है, आजकल के बच्चो में तनाव झेलने की शक्ति नही है छोटी छोटी बातो में आवेश मे आ जाते है। आज की भागदौड़ भरी जिन्दगी मे माँ बाप तुम्हे अच्छी शिक्षा व सुविधाए दे रहे है बच्चो का ये हाल है।
हमारा समय देखो माँ बाप अलग कूटते थे मास्टर अलग से और घर के काम के साथ पढाई।
@TheBPnova@aajtak सही बात है, प्रजातंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरुरी है ये बिडम्बना कहिये कि हमारे देश में विपक्ष है ही नही जो है भी उसे मीडिया ने दुश्मन की तरह पेश किया है। जबकि मीडिया को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए।
@prakashbahuguna@UkAnjul@MaggiIndia मैगी वैसे भी स्वास्थ्य के लिए ठीक नही है, इसे बैन होना ही चाहिए।
दुसरा मंदिरो के आसपास होटल, रेस्टोरेंट नही होने चाहिए, ताकि लोग मौजमस्ती के लिए न जा पाये, आजकल मंदिरो धार्मिक स्थलो का व्यवसायिकरण से भगवान भी तंग आ गये है। चारधाम, कैंची धाम व अन्य जगहो की दुरदशा सभी देख रहे है।
@Balamnegiuk01 सही बात है। अगर सरकार को ग्रामीणो की चिन्ता होती तो जंगली जानवरो को मारने का हक ग्रामीणो को मिल गया होता। जब तक ये बाघ मारे नही जायेंगे ऐसे ही ग्रामीणो को नुकसान पहुचाते रहेंगे।
एक बार में ही चार पाँच बच्चे होते है बाघ के। बहुत बढ गये उत्तराखंड में।
@Dr_KD_MS सर पेपर लीक रास्ते में या सेंटर पर थोड़े होता है पेपर लीक तो जहाँ से छपता है और जो बनाते है वो लोग जिम्मेदार हैं।
इसका उपाय है पेपर बनाने वाले और प्रिटिंग प्रेस दोंनो को पेपर हो जाने तक निगरानी में रखा जाय तथा उनसे कोई संम्पर्क न कर पाये। सुना है चीन में पेपर जेल मे छपता है।
सरकार का कहना है बिना डाक्टर की पर्ची के खाँसी की दवा नही मिलेगी।
अब ₹500 डाक्टर का पर्चा बनाओ फिर ₹100 का कफ सिरप लो। अब डाक्टर सिर्फ कफ सिरप लिखेगा नही उसके साथ अन्य दवा और चाँजें कराओ,जेब खाली।
आने जाने का खर्चा अलग से तथा डाक्टर के यहाँ वेटिंग में पूरा दिन बर्बाद अलग से।