प्रिय @HemantSorenJMM जी,
आपके राज्य में तीन सर्वोत्कृष्ट विद्यालय हैं: सैनिक स्कूल तिलैया, हजारीबाग और नेतरहाट। मुझे आज मेरे विद्यालय के प्राचार्य के माध्यम से एक सूचना मिली।
एक प्रतिभाशाली बालक विशाल के, जो आपके ही राज्य के कोडरमा के ‘छोटकी धमराय’ ग्राम का निवासी है, पिता का निधन हो गया। पिता मुंबई में वेटर का कार्य करते थे। माता सुनीता देवी चिंतित हैं।
उसकी बकाया फीस कुल पौन दो लाख के लगभग है, जिसमें से लाख रुपए मैं दे रहा हूँ और बाकी के लिए भी हमारी मित्र मंडली लगी हुई है। अगले वर्ष भी हम लोग सँभाल लेंगे।
आपसे आग्रह है कि ऐसे छात्रों के लिए राज्य शिक्षा मंत्रालय कोई व्यवस्था बना दे ताकि यहाँ से ये वंचित समुदाय के बच्चे विद्यालय और शिक्षा दोनों ही न त्याग दें।
इसके साथ ही @JharkhandCMO से यह भी पूछना चाहता हूँ कि विगत दस वर्षों से सैनिक स्कूल तिलैया में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति तक नहीं हो पा रही थी जबकि बगल में तिलैया डैम है!
कुछ समय पूर्व वहाँ के कर्मचारियों ने हड़ताल कर दिया था और बच्चों को दो-तीन तक ठीक से भोजन आदि नहीं मिला। यह सब मेरे लिए अत्यंत पीड़ा का विषय है क्योंकि मैंने बिहार के तिलैया में तीन वर्ष और आपके राज्य के तिलैया में चार वर्ष पढ़ाई की।
कभी कोई समस्या नहीं हुई। हेमंत जी, आप यह अच्छे से जानते हैं कि शिक्षा की मुक्ति का मार्ग है। सैनिक स्कूल निर्धन और प्रतिभाशाली बच्चों के लिए उत्कृष्ट शिक्षा पाने का एक अच्छा मार्ग है। उसे फंड नहीं मिलेगा तो विद्यालय नष्ट हो जाएगा।
हालाँकि इसका प्रशासनिक दायित्व मूलतः @SpokespersonMoD का होता है, परंतु फंड आदि राज्य सरकार के हिस्से में है। आशा है आपका कार्यालय विद्यालय के संचालन हेतु उचित सहयोग देगा।
ठाकुर का कुआं तुम खुद रहे थे और अपना कुआं नहीं खुद पा रहे थे, ये सब फर्जी कहानियां फैलाई गई की दलितों के पीछे मटकी, झाड़ू बांध कर घुमाया जाता है।
इन बातों का कहीं कोई प्रमाण नहीं है।
— अजीत भारती
घोर कलयुग। प्रभु श्री राम की आसपास,रावण से घिरा हुआ है,। वो रावण इतना बुरा नहीं था, जितना कि आज का रावण । चंपत राय ने पूरे हिंदू धर्म को शर्मसार कर दिया।
Ajeet Bharti destroyed the fake Victimhood culture of Ambedkarites in a debate organised by Delhi Union on Reservation . 🔥 🔥
Dhanyawad
@ajeetbharti Bhaiya 🙏🙏
उत्तरप्रदेश, गाज़ियाबाद में विधवा चंचल के घर पर ताज मोहम्मद ने कर रखा था कब्जा।
जब सब करके चंचल हर गई तो DM रवींद्र कुमार से संपर्क किया DM ने टीम बनाई और मकान खाली करवाया।
DM ने खुद जाकर चंचल देवी को चाबी थमाई वह भावुक होकर रोने लगी।
आंख देखने से लगता है कि इसने दारू पी रखा है, और क्रिमिनल जैसा व्यवहार है इसका।
मुझे ये समझ नहीं आता कि इस देश में केवल हर चौराहे पर मोटरसाइकिल वाले का चेकिंग क्यों होता है??
@ChhattisgarhCMO@CGPoliceDept
सोचा एक बार फिर याद दिला दूँ । आप सब भूल गए होंगे ।
डॉ मनमोहन सिंह ने नोबल पुरस्कार विजेता "डॉ अमर्त्यसेन" को असीमित अधिकारों के साथ नालंदा विश्वविद्यालय का प्रथम चांसलर नियुक्त किया। उन्हें इतनी स्वायत्तता दी गयी कि उन्हें विश्विद्यालय के नाम पर बिना किसी स्वीकृति और जवाबदेही के कितनी भी धनराशि अपने इच्छानुसार खर्च करने एवं नियुक्तियों आदि का अधिकार था । उनके द्वारा लिए गये निर्णयों एवं व्यय किये गये धन का कोई भी हिसाब-किताब सरकार को नहीं देना था ।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि छुपे रुस्तम मनमोहन सिंह और अमर्त्यसेन ने मिलकर किस तरह से जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों से भयंकर लूट मचाई ? वो भी तब जबकि अमर्त्यसेन अमेरिका में बैठे बैठे ही 5 लाख रुपये का मासिक वेतन ले रहे थे जितनी कि संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्य चुनाव आयुक्त, रक्षा सेनाओं के अध्यक्षों, कैबिनेट सचिव या किसी भी नौकरशाह को भी दिए जाने का कोई प्रावधान ही नहीं है ।
इतना ही नहीं अमर्त्यसेन को अनेक भत्तों के साथ साथ असीमित विदेश यात्राओं और उस पर असीमित खर्च करने का भी अधिकार था ।
कहानी का अंत यहीं पर नहीं हुआ बल्कि उन्होंने मनमोहनी कृपा से 2007 से 2014 की सात वर्षों की अवधि में कुल 2730 करोड बतौर चांसलर नालंदा विश्वविद्यालय खर्च किये.... आपकी आंखें फटी रह गयी न ... विश्वास नहीं हो रहा न कि मनमोहन सिंह ईमानदारी के चोंगे में कितने बड़े छुपे रुस्तम थे ?
चूंकि यूपीए सरकार द्वारा संसद में पारित कानून के तहत अमर्त्यसेन के द्वारा किये गये खर्चों की न तो कोई जवाबदेही थी और न ही कोई ऑडिट होना था और न ही कोई हिसाब उन्हें देना था इसलिए देश को कभी शायद पता ही न चले कि दो हज़ार सात सौ तीस करोड़ रुपये आखिर गये कहाँ ?
राफेल राफेल चिल्लाने वाले राहुल और रंक से राजा बने दर्जाप्राप्त भूमाफिया रॉबर्ट वाड्रा की धर्मपत्नी प्रियंका वाड्रा की पारिवारिक विरासत ही है कानूनी जामा पहना कर संगठित लूट की ताकि कानून के हाथ कितने भी लंबे हो जायँ पर उनका कुछ न बिगड़े ।
ऐसी ही संस्कृति में पलने बढ़ने के कारण दोनों भाई-बहनों में कोई आत्मग्लानि का भाव है ही नहीं बल्कि आंखों में बेशर्मी की चमक हो जैसे...किस मुंह से ये गरीब, दलित, किसान और पिछड़ों के हक की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं !! निपट ढोंग है ये ।
अभी कहानी खत्म नहीं हुई, पिक्चर अभी बाकी है -
अमर्त्यसेन सेन ने जो नियुक्तियां कीं उसपर भी कानूनन कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता । उन्होंने किन किन की नियुक्तियां कीं ... आइये ये भी जान लेते हैं -
प्रथम चार नियुक्तियां जो उन्होंने कीं वो थे -
1. डॉ उपिंदर सिंह
2. अंजना शर्मा
3. नवजोत लाहिरी
4. गोपा सब्बरवाल
..... कौन थे ये लोग
... ? ? जानेंगे तो मनमोहन सिंह के चेहरे से नकाब उतर जायेगा ।
डॉ उपिंदर सिंह मनमोहन सिंह की सबसे बड़ी पुत्री हैं और बाकी तीन उनकी करीबी दोस्त और सहयोगी ।
इन चार नियुक्तियों के तुरंत बाद अमर्त्यसेन ने जो अगली दो नियुक्तियां कीं वो गेस्ट फैकल्टी अर्थात अतिथि प्राध्यापक की थी और वो थे -
1. दामन सिंह
2. अमृत सिंह
.....गोया ये कौन थे ?
पहला नाम डॉ मनमोहन सिंह की मझली पुत्री और दूसरा नाम उनकी सबसे छोटी पुत्री का है ।
और सबसे अद्वितीय बात जो दामन सिंह और अमृत सिंह के बारे है वो ये कि ये दोनों "मेहमान प्राध्यापक" अपने सात वर्षों के कार्यकाल में कभी भी नालंदा विश्वविद्यालय नहीं आयी ... पर बतौर प्राध्यापक ये अमेरिका में बैठे बैठे ही लगातार सात सालों तक भारी-भरकम वेतन लेती रहीं ।
उस दौर में नालंदा विश्वविद्यालय की संक्षिप्त विशेषता ये थी कि -
विश्विद्यालय का एक ही भवन था, इसके कुल 7 फैकल्टी मेम्बर और कुछ गेस्ट फैकल्टी मेम्बर (जो कभी नालंदा आये ही नहीं ) ही नियुक्त किये गये जो अमर्त्यसेन और मनमोहन सिंह के करीबी और रिश्तेदार थे । विश्विद्यालय में बमुश्किल 100 छात्र भी नहीं थे और न ही कोई वहां कोई बड़ा वैज्ञानिक शोध कार्य ही होता था जिसमे भारी भरकम उपकरण या केमिकल आदि का प्रयोग होता हो ।
फिर वो 2730 करोड़ रुपये गये कहाँ आखिर ?
मोदी जब सत्ता में आये और उन्हें जब इस कानूनी लूट की जानकारी हुई तो अमर्त्यसेन के साथ साथ मनमोहनी पुत्रियों को भी तत्काल बाहर का रास्ता दिखा दिया ।
कहाँ गए वो राफेल राफेल चिल्लाने वाले... लौट आये बैंकॉक से ? कहाँ गयी गरीब किसान की पत्नी जिनके साथ अत्याचार हो रहा है ....अभी गरीब गुरबा के साथ सेल्फी में ही जुटी हैं क्या ? कहाँ गये वो 49 मॉब लिंचिंग के स्वयम्भू चिंतक जिनके पीठ पर लदा पुरस्कारों का अहसान अभी उतरा नहीं है तो आंखों में बेहयाई अभी बाकी है ?
A Bengali Muslim woman living in Gurugram was arrested by the Nayab Saini govt for posting a video in which she said she had cooked cow meat and tauntingly offered it to West Bengal’s Hindu CM Suvendu, thereby hurting Hindu sentiments
Play stupid games and win stupid prizes.
समस्या सबको पता है... पर कोई समाधान बताए??
ज्यादातर बुकिंग काउंटर पर पहला रिजर्वेशन फॉर्म #ब्रोकर का भरा जाता है और बाद में लाइन में लगे यात्री का। रेलवे इस #भ्रष्टाचार को रोकने के लिए उचित कदम उठाए तो जनता को तत्काल टिकट मिल सकता है।
@AshwiniVaishnaw@RailwaySeva@RailMinIndia
बंगाल की ग़रीब महिलाओं के लिये ममता बनर्जी ने जो लक्ष्मी भंडार योजना चलाई थी, उसके लाभार्थी देख लीजिए
ममता राज में सरकार नहीं थी, सिर्फ़ पार्टी थी और उसका वोट बैंक था