प्रश्न१- क्या ये अघोषित गृह युद्ध की तैयारी है?
प्रश्न२- अगर हिन्दुओं के घर पर आक्रमण हुआ तो क्या उनके घर मे शस्त्र है आत्मरक्षा के लिए और शस्त्र है भी तो क्या वे पारंगत है प्रतिघात के लिए।
अपनी आत्म रक्षा के लिए सशक्त बने शस्त्र रखे।
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भरत तिवारी के घर की तस्वीरें देखोगे तो आपको समझ आएगा कि वे कितने गरीब परिवार से आते थे।
ये सारे नेता बेशर्मों की तरह सबको बताते फिरते हैं कि ब्राह्मणों के पास बहुत पैसा है।
हकीकत ये है कि आज की तारीख में अधिकांश ब्राह्मण गरीबी में जीवन जी रहे हैं, और गरीबी में रहने के बावजूद भी वे अपने सामाजिक और धार्मिक कार्य करना नहीं छोड़ते।
3 मुस्लिम लड़के
3 हिंदू लड़कियां
एक किराये का कमरा..
कमरे में 7ब्रांड्स के कंडोम
आर्टिफिसियल सेक्स टॉयज..
सेक्स वर्धक दवाएं व शराब
लड़कों के मोबाइल में हज़ारों
लड़कियों के अश्लील फोटो व वीडियो
लोकेशन - देहरादून.. देवभूमि
कैसे बचेगी देवभूमि.. जवाब दो पहाड़ी भाइयों ?
जिसका हम दूध पीते हे वो हमारी मां हे गौमाता
और उसकी रक्षा करना हमारा धर्म
मुस्लिम जज द्वारा 14 हिंदू गौरक्षकों को उम्र कैद सजा
ऐसा लगा फ़ैसला भारत में नहीं पाकिस्तान में हो रहा
हिंदुओं आज शांत रहे तो इतिहास में कायर कहलाएंगे या अगला नंबर हमारा होगा आवाज रुकनी नहीं चाहिए
हर महिला अगर अपनी जुबान पर थोड़ा ताला लगा ले तो मैं गारंटी है कि दहेज और तलाक जैसी कभी नौबत ही ना आएगी....
आज दिल्ली का ही मामला देख लीजिए शिखा सिंह की शादी 2020 में हुई थी, इन्होंने पति से स्वयं झगड़ा किया और खुद ही दहेज का केस डाल दिया, केस में पैसा लगाते-लगाते लड़की के पिता सड़क पर आ गए. उनकी हालत ऐसी हो गई कि वह स्वयं का इलाज तक नहीं करा पा रहे थे. यही टेंशन करते-करते अभी 10 दिन पहले इनके पिता जी को अटैक आ गया, जिन्हे गंभीर हालत में सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जब इसकी सूचना महिला के पति सौरभ को मिली तो वह सरकारी अस्पताल पहुंचा और वहां से अपने ससुर साहब को निकालकर गुड़गांव के सबसे बड़े हॉस्पिटल मेदांता ग्रुप में भर्ती कराया, अब लड़की के पिता पूरी तरह स्वस्थ हैं, आज दिल्ली कोर्ट में लड़की की तारीख थी, पति के सामने पहुंचते ही लड़की ने तलाक के सारे कागज फाड़ दिए और पति को गले लगा लिया....(copy-paste)
भाई साहब इतना चिल्लाने की जरूरत नहीं थी आपको, न ही कोई कागज दिखाने की जरूरत थी,
सिर्फ 5000 रुपए दे देते तो आपको मस्त लस्सी पिलाके के जाते ये साहब।
खैर ईमानदार हो तो किसी का बाप भी कुछ नहीं उखाड़ सकता है।
हम 5 साल पहले बांग्लादेश से आए थे,
लेकिन अब भाजपा सरकार बनने के बाद हम परेशान हैं।
हमने वोटर कार्ड भी बनवाया था लेकिन चुनाव आयोग ने SIR कर के उसे रद्द कर दिया।
अब हम वापस बांग्लादेश जा रहे हैं।
: अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिया