दिल्ली के उत्तर नगर में जिहादियों ने तुषार नाम के एक हिंदू युवक की हत्या कर दी। सिर्फ इसलिए कि होली पर एक बच्चे ने गुब्बारा फेंका था।
आज तुषार की बारी है, कल आपके बच्चे की भी हो सकती है अगर आप आवाज नहीं उठाएंगे।
3 टोल प्लाजा पर 25 लाख का लगा जुर्माना!
सड़क की घटिया गुणवत्ता पर परिवहन निरीक्षक ने किया चालान😳
झुंझुनूं #विधायक_राजेंद्र_भांभू की है मेंटिनेंस कम्पनी😲
एक जिम जाने वाला लड़का पार्क में लड़कियों के सामने तेवर दिखा रहा था,
मगर जब उसका सामना एक लड़की के पति से हुआ,
तो नज़ारा देखने लायक बन गया। 😅💪
अंत तक देखिए।
@ashokgehlot51 राजस्थान पुलिस के पास पर्याप्त संसाधन नही है, बजट घोषणाए कभी पूरी ही नहीं होती, तकनीकी रूप से पुलिस अपराधियों से बहुत पीछे है, अधिकारी नीचे वालो की सुनते नहीं है और ऐसी परिस्थियों में कोई पुलिसकर्मी अच्छे से काम भी करना चाहे तो राजनीतिक दखल इतना है की कर नहीं पाता..
@ashokgehlot51 राजस्थान पुलिस के पास पर्याप्त संसाधन नही है, बजट घोषणाए कभी पूरी ही नहीं होती, तकनीकी रूप से पुलिस अपराधियों से बहुत पीछे है, अधिकारी नीचे वालो की सुनते नहीं है और ऐसी परिस्थियों में कोई पुलिसकर्मी अच्छे से काम भी करना चाहे तो राजनीतिक दखल इतना है की कर नहीं पाता..
Hello @NirmlChoudhary आप एक साल में तीन लग्जरी घोड़े ख़रीद लिए थोड़ा सा करंट इस ग़रीब आदमी की मदद करके दिखा दो
वैसे काका उड़ता तीर नहीं लेता लेकिन इस भाई की आँखों में आँसू देखकर बहुत पीड़ा हो रही है
मदद बस आपके घोड़े का एक पहिया ही काफ़ी है 🙏
*स्मार्ट पुलिस नहीं, स्मार्ट शोषण: 2047 का विज़न नाम दिया गया— “स्मार्ट पुलिस विज़न 2047”।*
मंच पर चमकदार शब्द थे— आधुनिकरण, तकनीक, AI, ऐप, स्मार्ट थाने, डिजिटल ट्रेनिंग।
लेकिन उस पूरे सम्मेलन में एक चीज़ जानबूझकर गायब थी— सिपाही और दरोगा की ज़िंदगी।
यह सम्मेलन पुलिस सुधार का नहीं था, यह सम्मेलन पुलिस पर और ज़्यादा नियंत्रण का खाका था।
स्मार्ट किसके लिए?
सम्मेलन में तय किया गया कि—
थानों की इमारतें कॉरपोरेट ऑफिस जैसी होंगी
हर पुलिसकर्मी तकनीक से ट्रैक होगा
AI से निगरानी बढ़ेगी
डेटा से परफॉर्मेंस मापी जाएगी
लेकिन किसी ने यह पूछने की ज़रूरत नहीं समझी कि—
पुलिसकर्मी कब आराम करेगा?
उसे साप्ताहिक अवकाश क्यों नहीं?
24 घंटे की ड्यूटी किस कानून में जायज़ है?
उसके परिवार, स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति की जिम्मेदारी किसकी है?
स्पष्ट है— विज़न स्मार्ट पुलिस का नहीं, स्मार्ट शोषण का है।
1861 का पुलिस एक्ट: गुलामी की रीढ़
भारत की पुलिस आज भी पुलिस एक्ट 1861 से चल रही है—
एक ऐसा कानून जो अंग्रेजों ने जनता को दबाने और सिपाहियों को आज्ञाकारी बनाए रखने के लिए बनाया था।
आजादी के 75 साल बाद भी—
वही कानून
वही मानसिकता
वही संरचना
IAS–IPS तंत्र इस कानून को बदलना नहीं चाहता, क्योंकि—
1861 का कानून अफ़सर को मालिक और सिपाही को अधीन बनाता है।
जब जड़ ही गुलामी की हो, तो उस पर लगाया गया AI सिर्फ़ डिजिटल जंजीर है।
24 घंटे ड्यूटी: सेवा नहीं, संस्थागत अन्याय
पुलिस शायद देश की एकमात्र ऐसी व्यवस्था है जहाँ—
ड्यूटी के घंटे तय नहीं
वीकली ऑफ़ का अधिकार नहीं
छुट्टी माँगना अपराध जैसा
बीमारी और पारिवारिक संकट को “बहाना” माना जाता है
यह स्थिति किसी भी आधुनिक लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।
फिर भी सम्मेलन में इस पर एक मिनट की चर्चा नहीं।
क्यों? क्योंकि आराम करता हुआ सिपाही सवाल पूछ सकता है— और सिस्टम सवालों से डरता है।
वेतन और भत्ते: जोखिम अनंत, मुआवज़ा न्यूनतम
सिपाही और दरोगा—
दंगे में सबसे आगे
अपराधियों से सीधा सामना
वीआईपी ड्यूटी में सबसे ज़्यादा अपमान
जनता के गुस्से का पहला शिकार
लेकिन बदले में—
कम वेतन
नाममात्र के भत्ते
हर चूक की पूरी जिम्मेदारी
अगर पुलिसकर्मी की जान और सम्मान इतने सस्ते हैं, तो फिर
AI, ड्रोन और स्मार्ट सिस्टम पर अरबों क्यों खर्च किए जा रहे हैं?
साफ़ है— निवेश इंसान पर नहीं, निगरानी पर है।
मानसिक स्वास्थ्य: सिस्टम का सुनियोजित इनकार
लगातार दबाव, नींद की कमी, अपमान और डर—
यह सब पुलिसकर्मियों को अंदर से तोड़ता है।
डिप्रेशन, गुस्सा, आत्महत्या—
इन सबको सिस्टम “निजी समस्या” कहकर टाल देता है।
लेकिन जब समस्या हजारों कर्मचारियों में एक जैसी हो,
तो वह निजी नहीं, संस्थागत अपराध होती है।
सम्मेलन में मानसिक स्वास्थ्य पर चुप्पी इस बात का सबूत है कि
सिस्टम थके हुए पुलिसकर्मी से भी काम लेना चाहता है।
परिवार: जिसकी कोई कीमत नहीं
पुलिसकर्मी का परिवार—
अनियमित जीवन
बार-बार स्थानांतरण
बच्चों की पढ़ाई में अस्थिरता
स्वास्थ्य और आवास की अनदेखी
लेकिन नीति निर्धारण में परिवार का कोई अस्तित्व नहीं।
क्योंकि परिवार खुश होगा, तो सिपाही सवाल करेगा।
कॉरपोरेट थाना: बाहर चमक, अंदर सन्नाटा
थाने कॉरपोरेट बनेंगे—
चमकदार
हाईटेक
कैमरों से भरे
लेकिन अंदर काम करने वाला पुलिसकर्मी—
थका हुआ
डरा हुआ
चुप कराया हुआ
यह सुधार नहीं, रीब्रांडिंग है।
असली सच्चाई
नेताओं, अफ़सरों और नीति निर्माताओं की सोच साफ़ है—
पुलिसकर्मी मशीन है
मशीन को अपग्रेड करना है
मशीन की हालत नहीं पूछनी
लेकिन पुलिस मशीन नहीं, इंसान है।
निष्कर्ष
स्मार्ट पुलिस विज़न 2047
दरअसल—
मानवविरोधी
कर्मचारीविरोधी
और लोकतंत्रविरोधी सोच का दस्तावेज़ है।
जब तक—
1861 का पुलिस एक्ट खत्म नहीं होगा
ड्यूटी, छुट्टी और वेलफेयर तय नहीं होगा
सिपाही–दरोगा को इंसान नहीं माना जाएगा
तब तक हर सम्मेलन सिर्फ़ एसी हॉल में बोला गया झूठ रहेगा।
थका हुआ सिपाही
लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा नहीं,
बल्कि सिस्टम के अपराध का सबसे बड़ा सबूत होता है।
#पुलिस_मंथन
#पुलिस_रिफॉर्म्स @ipsvijrk@narendramodi@AmitShah
बाड़मेर शिव विधानसभा का सड़क घोटाला कई सवाल खड़े करता है।
अगर निष्पक्ष जांच हुई,
तो 40% कमीशन का मामला
रविंद्र सिंह भाटी तक भी पहुँच सकता है।
ठेकेदार का साफ़ कहना कि
“विधायक कोटे से सड़क बना रहा हूँ, विधायक मेरा खास है”
अपने आप में बहुत कुछ कह देता है।
बिना कमीशन विदेश यात्राएँ और शानो-शौकत
संयोग नहीं हो सकती।
उदयपुर व उदयपुर के आसपास के जिलों मे अरावली पहाड़िओ को रसूकदार लोगो द्वारा दिन रात काटा जा रहा है कोई सुनने देखने वाला नहीं उपर से नीचे तक सभी अधिकारि कर्मचारी मिले हुए है । @RajCMO@BhajanlalBjp@namitmehta_1
माननीय राज्यपाल गुजरात, श्री @ADevvrat जी अपने आचरण से यह प्रतिपादित करते हैं कि सच्चा नेतृत्व वही है जो श्रम, स्वच्छता, प्रकृति-सम्मान और लोक-कल्याण को लोकतांत्रिक मूल्यों की नैतिक मर्यादा के अनुरूप निभाता है
उनके जैसा उच्च चिंतन अपनाकर हम समाज को समृद्ध और राष्ट्र के उज्जवल भविष्य की नींव खुद रख सकते हैं।
All GC Hindus jumping up and down over BJPee win in #BiharElection2025 , remember this Hindu boy Ujjwal Rana , humiliated and insulted died in a BJP ruled state .
Because he did not have Rs 7000 to pay for his fees.