रनियाँ थाना का बहुत बहुत धन्यवाद एसे ही फर्जी st,sc at के मुक़दमे दर्ज कीजिए, चंद पैसों के लिए बिका प्रशासन, ये हैं बीजेपी सरकार धन है योगी जी, धन्यावाद एसपी श्राद्ध नरेंद्र पाण्डेय जी कानपुर देहात, धन्यवाद co अकबरपुर कानपुर देहात, मोबाइल लोकेशन से कर रहे थे जांच
Co अकबरपुर मोबाइल फोन के लोकेशन से कर रहे थे जांच, रनियाँ थाना से फर्जी तरीके से लिख दिया मुकदमा, co साहब की विवेचना ही हो रही, फेंक केश, ये सब हो रहा कानपुर देहात में, ये हैं कानपुर का प्रशासन, चंद पैसों के लिए वर्दी को किया शर्मसार, युवाओं के भविष्य के साथ कर रहे खिलवाड़ , @
“कानपुर देहात: जमीनी विवाद से शुरू हुआ मामला फर्जी SC/ST केस तक पहुँचा, रनिया थाने के दरोगा पर गंभीर आरोप—पीड़िता का दावा: शिकायतें अनसुनी, बेटों पर झूठा मुकदमा, अब हाईकोर्ट से न्याय की उम्मीद” #NDNews
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कानपुर देहात में एससी/एसटी एक्ट के दुरुपयोग का गंभीर आरोप
“खाकी पर दाग?”चंद पैसों के लालच में दरोगा पर फर्जी SC/STकेस लिखने का आरोप
कानपुर देहात से एक ऐसी खबर जिसने पुलिस की वर्दी पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
आरोप है कि एक उपनिरीक्षक ने चंद पैसों के लालच में दबंगों से हाथ मिला लिया,और जमीन विवाद को SC/ST जैसी गंभीर धाराओं के फर्जी मुकदमे में बदल दिया।
पीड़िता महीनों से पुलिस,महिला आयोग और शासन के दरवाज़े खटखटाती रही…
लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
और अब?
पीड़िता के बेटों पर ही संगीन मुकदमा दर्ज।
सवाल बड़ा है—
👉क्या कानून अब इंसाफ का हथियार नहीं,सौदेबाज़ी का औज़ार बन रहा है?
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जनपद से कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है।रनियाँ थाना क्षेत्र के शिवाजी नगर मोहल्ले की रहने वाली पीड़िता शकुंतला पत्नी राम महेश ने आरोप लगाया है कि जमीनी विवाद में उन्हें और उनके परिवार को झूठे एससी/एसटी छेड़खानी जैसे संगीन मुकदमे में फंसाया गया,जबकि पहले से दी गई उनकी शिकायतों को लगातार नज़रअंदाज़ किया गया।
पीड़िता के अनुसार,पड़ोसी रेखा पत्नी नाथूराम,देवेंद्र पुत्र नाथूराम,चंचल उर्फ कंचन,नैन्सी व नाथूराम जबरन सहन रास्ते की जमीन पर कब्ज़ा करना चाहते हैं।विरोध करने पर उन्हें और उनके परिवार को फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की खुलेआम धमकियाँ दी गईं।
पहले शिकायतें,फिर चुप्पी,अंत में मुकदमा पीड़ित पर!
शकुंतला ने बताया कि 13 नवंबर 2025 को थाना रनियाँ में लिखित शिकायत दी गई
112 नंबर और मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई 05 दिसंबर 2025 को दोबारा मारपीट व धमकी दी गई,जिसकी सीसीटीवी फुटेज उनके पास मौजूद है
लेकिन इन तमाम शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।उल्टा,पीड़िता का आरोप है कि जांच की जिम्मेदारी जिस उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह को दी गई,वह लगातार विपक्षियों के घर आता-जाता रहा और निष्पक्ष जांच की जगह मामले को दबाने का प्रयास करता रहा।
क्षेत्राधिकारी के आदेश भी बेअसर!
24 दिसंबर 2025 को पीड़िता के पति ने क्षेत्राधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत दी।क्षेत्राधिकारी द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद,थाने में पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर धमकी वाले तथ्य हटवाए गए और केवल एनसीआर दर्ज कर मामले को हल्का कर दिया गया।
महिला आयोग तक पहुंची बात,फिर भी राहत नहीं
पीड़िता ने 17 दिसंबर 2025 को महिला आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई,29 दिसंबर 2025 को क्षेत्राधिकारी कार्यालय में बयान भी दर्ज हुए,जिसमें स्पष्ट कहा गया कि जमीनी रंजिश के चलते उन्हें और उनके बेटों को झूठे एससी/एसटी व अन्य गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
इसके बावजूद,03 जनवरी 2026 को पीड़िता के दोनों पुत्र जितेंद्र और धर्मेंद्र के खिलाफ थाना रनियाँ में एससी/एसटी छेड़खानी का मुकदमा दर्ज कर दिया गया,जबकि पीड़िता का दावा है कि घटना के समय दोनों पुत्र घर पर मौजूद ही नहीं थे।
पीड़िता की साफ चेतावनी
शकुंतला ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि
यदि मेरे पति या बच्चों के साथ कोई अनहोनी होती है,तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उपनिरीक्षक सुरेंद्र सिंह और मेरे विपक्षी लोगों की होगी।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण से उपनिरीक्षक को हटाकर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है।
🔴अपील-यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं,बल्कि कानून के दुरुपयोग और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा सवाल है।
यदि आपके साथ भी किसी फर्जी मुकदमे,दबाव,या पुलिसिया लापरवाही की घटना हुई है_डरिए मत,दस्तावेज़ जुटाइए और आवाज़ उठाइए।
कानून की ताकत तभी ज़िंदा रहती है,जब जनता सच के साथ खड़ी हो।
क्या कहता है कानून?
SC/STएक्ट समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए बना है,लेकिन इसका दुरुपयोग न सिर्फ निर्दोषों को फंसाता है,बल्कि असली पीड़ितों की लड़ाई को भी कमजोर करता है।ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
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रिश्वत नहीं मिली तो कानून बना हथियार!
नरवल थाने के दरोग़ा ने 90 हज़ार न देने पर 12 निर्दोषों को बनाया आरोपी
रनिया के दरोगा सुरेंद्र सिंह ने विरोधियों से पैसा लेकर बेगुनाह लोगों पर SC/ST एक्ट का लिखा मुकदमा
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कानपुर पुलिस के अजब-गजब कारनामे:
कहीं दरोगा की मौजूदगी में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म, तो कहीं रिश्वत न देने पर बेगुनाह बना दिए जाते हैं अपराधी
कानपुर | विशेष रिपोर्ट l अंजू शर्मा रनिया
कानपुर में इन दिनों अपराध पर लगाम नहीं, बल्कि अपराध गढ़ने का सिस्टम ज़्यादा सक्रिय नज़र आ रहा है। एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों ने पुलिस की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है और जनता के मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि—
“कानपुर में सुरक्षित रहना है तो कानून मानें या रिश्वत दें?”
दरोगाओं के कारनामे,सिस्टम की चुप्पी
कानपुर नगर से सामने आए एक मामले में आरोप है कि दरोगा अमित मौर्या की मौजूदगी में उसकी ही स्कॉर्पियो गाड़ी में नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ।यह घटना न सिर्फ़ मानवता को शर्मसार करती है,बल्कि वर्दी की साख पर भी गहरा धब्बा छोड़ती है।
वहीं कानपुर देहात के रनिया थाना क्षेत्र में तैनात दरोगा सुरेंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने विरोधियों से पैसा लेकर बेगुनाह लोगों पर SC/ST एक्ट का मुकदमा लिख दिया, जिससे कानून की सबसे संवेदनशील धाराओं के दुरुपयोग का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
ताज़ा मामला नरवल थाना क्षेत्र का है, जहाँ दरोगा संदीप कुमार पर आरोप है कि मात्र 90 हज़ार रुपये की रिश्वत न मिलने पर कई निर्दोष लोगों को अपराधी बना दिया गया।रिश्वत माँगने से जुड़ा ऑडियो वायरल होने के बाद यह मामला और भी संगीन हो गया है।
अपराधी बनो या रिश्वत दो—ये कैसा अभियान?
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि—
क्या कानपुर में अब “अपराधी बनो या रिश्वत दो” जैसा कोई अनकहा अभियान चल रहा है?
क्या पुलिस अपने फायदे के लिए आम,मासूम जनता को डर के साये में जीने पर मजबूर कर रही है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हर बेगुनाह को कभी न कभी ‘विकास दुबे’ बना दिए जाने का डर दिखाकर चुप कराया जाएगा?
और क्या ऐसे मामलों पर सख़्त कार्रवाई के बजाय सिर्फ़ जांच का भरोसा देकर समय निकाला जाता रहेगा?
जनता के भरोसे की असली परीक्षा
इन घटनाओं ने सिर्फ़ पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर ही नहीं,बल्कि न्याय व्यवस्था पर जनता के भरोसे को भी झकझोर दिया है।जब कानून के रखवाले ही कानून को सौदे का ज़रिया बना लें,तो लोकतंत्र सबसे पहले कमजोर होता है।
अपील:-NDNEWS | दैनिक निष्पक्ष धारा यह सवाल उठाता रहेगा—झूठे मुकदमों पर कब लगेगी लगाम?
रिश्वतखोरी में लिप्त अफसरों पर कब होगी निर्णायक कार्रवाई?
और निर्दोष जनता को कब मिलेगा न्याय का भरोसा?
उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी एक बार फिर सवालों के घेरे में है।कानपुर के नरवल थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला न सिर्फ़ कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा है,बल्कि यह भी दिखाता है कि अगर रिश्वत की “डील” फेल हो जाए,तो निर्दोषों को कैसे फँसाया जाता है।
आरोप है कि नरवल थाने में तैनात दरोग़ा संदीप कुमार ने एक मामले में 90 हज़ार रुपये की रिश्वत की माँग की। जब पीड़ित पक्ष ने रिश्वत देने से इनकार किया, तो दरोग़ा ने कानून की कलम को ज़ुल्म का औज़ार बनाते हुए 12 निर्दोष लोगों को आरोपी बना दिया।
मामला तब खुलकर सामने आया जब रिश्वत माँगने का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।वायरल ऑडियो में कथित तौर पर दरोग़ा संदीप कुमार खुलेआम पैसों की डिमांड करते सुने जा रहे हैं।ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑडियो वायरल,लेकिन कार्रवाई पर सन्नाटा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑडियो वायरल होने के बाद भी अब तक कोई ठोस और सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है।
सवाल यह है कि—
क्या वर्दी के अंदर बैठा भ्रष्टाचार यूँ ही चलता रहेगा?
क्या निर्दोषों को फँसाने वाले अफसरों पर कभी सख़्त कार्रवाई होगी?
और क्या पुलिस सुधार सिर्फ़ काग़ज़ों तक ही सीमित रहेंगे?
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