ब्राह्मण दूध बेचने पर 3 दिन में ही शूद्र बन जाएगा (मनुस्मृति 10/92) लेकिन यज्ञ में अपने बेटा का बलि देकर भी ब्राह्मण, ब्राह्मण बना रहेगा(मनुस्मृति 10/105)।
यानी जो दूध का कारोबार करता है वो ब्राह्मण के लिये शूद्र ही है।
ब्राह्मण कुत्ते का मांस खा कर भी ब्राह्मण ही रहेगा (मनुस्मृति 10/106, 10,/108) लेकिन बाक़ी जनसमुदाय मांस खाने से पतित हो जाएगा और तो और इसी मनुस्मृति चैप्टर 10 के श्लोक 95, 96, 97,98 में ब्राह्मण यह लिखता है की ब्राह्मण से नीच वर्ण का कोई भी व्यक्ति ब्राह्मण का कार्य नहीं कर सकता हा ऊपर वाला वर्ण ज़रूरत पड़ने पर जीविका निर्वाह के लिए अपने से नीचे वाले का कार्य कर सकता है और जैसे ही शक्तिशाली हो फिर से नीच कर्म छोड़ अपने वर्ण का काम करे लेकिन किसी भी सूरत में अपने से उच्च वर्ण का काम नहीं कर सकता।
यानी जीवन निर्वाह के नाम पर अपने से नीचे वर्ण को लात मार कर उसके रोज़गार के तरीक़े छीनना है लेकिन ब्राह्मण का रोज़गार कोई नहीं छीन सकता।
कुल मिलाकर वर्ण व्यवस्था जन्मजात होता है और सिर्फ़ अपने स्वार्थ हेतु अपने से नीचे वर्ण के पेट पर लात मारने की भरपूर व्यवस्था का ही नाम ब्राह्मण संप्रदाय है।
आप ख़ुद पढ़ लीजिए
“फिल्म द केरला स्टोरी” की सहायक अभिनेत्री देवालिना भट्टाचार्य के पति का नाम शहनवाज शेख है… इस फ़िल्म को मैंने नही देखा है लेकिन हमारे कुछ मित्रों ने इसे देखा है जिनके मुताबिक़ फ़िल्म में कुछ आपत्तिजनक दृश्य ऐसे हैं जिसे अपनी बहू/बेटियों के साथ नहीं देखा जा सकता है..
फ़िल्म के नाम पर समाज में नफ़रतों के बीज बोने वालों से सावधान रहिए…
कुछ लोगों को कुछ समय तक बेवकूफ बनाया जा सकता है लेकिन लंबे समय तक नहीं।
लोकतंत्र की चक्की धीमे चलती है पर बारीक पीसती है - बीजेपी संस्थापक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी
दुनिया के वो महान नास्तिक लोग जिन्होंने मानव सभ्यता के विकास को गति दी..जाने उनके वारे में
1 - आचार्य चार्वाक का कहना था -"इश्वर एक रुग्ण विचार प्रणाली है , इससे मानवता का कोई कल्याण होने वाला नहीं है "
2 - अजित केशकम्बल ( 523 ई . पू )अजित केश्कंबल बुद्ध के समय कालीन विख्यात तीर्थंकर थे , त्रिपितिका में अजित के विचार कई जगह आये हैं , उनका कहना था -" दान, यज्ञ , हवन नहीं .. लोक परलोक नहीं "
3 - सुकरात ( 466-366 ई पू )"इश्वर केवल शोषण का नाम है "
4 - इब्न रोश्द ( 1126-1198 )इनका जन्म स्पेन के मुस्लिम परिवार में हुआ था , रोश्द के दादा जामा मस्जिद के इमाम थे , इन्हें कुरआन कंठस्थ थी । इन्होने अल्लाह के अस्तित्व को नकार दिया था और इस्लाम को राजनैतिक गिरोह कहाथा । जिस कारण मुस्लिम धर्मगुरु इनकी जान के पीछे पड़ गए थे ।रोश्द ने दर्शन के बुद्धि प्रधान हथियार से इस्लाम के मजहबी वादशास्त्रियों की खूब खबर ली ।
5 - कॉपरनिकस ( 1473-1543)इन्होने धर्म गुरुओं की पूल खोल थी इसमें धर्मगुरु ये कह कर को मुर्ख बना रहे थे की सूर्य प्रथ्वी के चक्कर लगता है । कॉपरनिकस ने अपने पप्रयोग से ये सिद्ध कर दिया की प्रथ्वी सहित सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते हैं, जिस कारण धर्म गुरु इतने नाराज हुए की कोपरनिकस के सभी सार्थक वैज्ञानिको को कठोर दंड देना प्रारंभ कर दिया.
6 - मार्टिन लूथर ( 1483-1546)इन्होने जर्मनी में अन्धविश्वास, पाखंड और धर्गुरुओं के अत्याचारों के खिलाफ आन्दोलन किया इन्होने कहा था " व्रत , तीर्थयात्रा , जप , दान अदि सब निर्थक है "
7- सर फ्रेंसिस बेकन ( 1561-1626)अंग्रेजी के सारगर्भित निबंधो के लिए प्रसिद्ध, तेइस साल की उम्र में ही पार्लियामेंट के सदस्य बने , बाद में लार्ड चांसलर भी बने । उनका कहना था"नास्तिकता व्यक्ति को विचार . दर्शन , स्वभाविक निष्ठां , नियम पालन की और ले जाती है , ये सभीचीजे सतही नैतिक गुणों की पथ दर्शिका हो सकती हैं ।
8 - बेंजामिन फ्रेंकलिन (1706-1790)इनका कहना था " सांसारिक प्रपंचो में मनुष्य धर्म से नहीं बल्कि इनके न होने से सुरक्षित है "
9- चार्ल्स डार्विन (1809-1882)इन्होने ईश्वरवाद और धार्मिक गुटों पर सर्वधिक चोट पहुचाई , इनका कहना था " मैं किसी ईश्वरवाद में विश्वास नहीं रखता और न ही आगमी जीवन के बारे में "
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10- कार्ल मार्क्स ( 1818-1883)कार्ल मार्क्स का कहना था " इश्वर का जन्म एक गहरी साजिश से हुआ है " और " धर्म एक अफीम है " उनकी नजर में धर्म विज्ञानं विरोधी , प्रगति विरोधी , प्रतिगामी , अनुपयोगी और अनर्थकारी है , इसका त्याग ही जनहित में है ।
11- पेरियार (1879-1973)इनका जन्म तमिलनाडु में हुआ और इन्होने जातिवाद , ईश्वरवाद , पाखंड , अन्धविश्वास पर जम के प्रहार किया l
12- अल्बर्ट आइन्स्टीन ( 1879-1955)विश्वविख्यात वैज्ञानिक का कहना था " व्यक्ति का नैतिक आचरण मुख्य रूप से सहानभूति , शिक्षा और सामाजिक बंधन पर निर्भर होना चाहिए , इसके लिए धार्मिक आधार की कोई आवश्यकता नहीं है . मृत्यु के बाद दंड का भय और पुरस्कार की आशा से नियंत्रित करने पर मनुष्य की हालत दयनीय हो जाती है"
13-भगत सिंह (1907-1931)प्रमुख स्वतन्त्रता सैनानी भगत सिंह ने अपनी पुस्तक " मैं नास्तिक क्यों हूँ?" में कहा है " मनुष्य ने जब अपनी कमियों और कमजोरियों पर विचार करते हुए अपनी सीमाओं का अहसास किया तो मनुष्य को तमाम कठिनाईयों का साहस पूर्ण सामना करने और तमाम खतरों के साथ वीरतापूर्ण जुझने की प्रेरणा देने वाली तथा सुख दिनों में उच्छखल न हो जाये इसके लिए रोकने और नियंत्रित करने के लिए इश्वर की कल्पना की गयी है
"
14- लेनिन– लेनिन के अनुसार " जो लोग जीवन भर मेहनत मशक्कत करते है और आभाव में जीते हैं उन्हें धर्म इहलौकिक जीवन में विनम्रता और धैर्य रखने की तथा परलोक में सुख की आशा से सांत्वना प्राप्त करने की शिक्षा देता है , परन्तु जो लोग दुसरो के श्रम पर जीवित रहते हैं उन्हें इहजीवनमें दयालुता की शिक्षा देता है , इस प्रकार उन्हें शोषक के रूप में अपने सम्पूर्ण अस्तित्व का औचित्य सिद्ध करने का एक सस्ता नुस्खा बता देता है"
15- गौतम बुद्ध – बुद्ध कहते है की भगवान नाम की कोई चीज नही है! भगवान कि लिये अपना समय नष्ट मत करो केवल सत्य ही सबकुछ है l
16-रामस्वरूप वर्मा (संस्थापक- अर्जक संघ)-अर्जक समाज का शोषण करने के लिए ईश्वर, आत्मा, पुनर्जन्म, भाग्यवाद ,जाति-पाति छुआछूत आदि ब्राह्मणों ने बनाया है।
16- चौधरी महाराज सिंह भारती (प्रणेता-अर्जक संघ)-ब्राह्मणवाद शोषण का हथियार है।
17 -जगदेव प्रसाद (पूर्व मंत्री-बिहार सरकार)-ईश्वर, आत्मा आदि की कल्पना तमाम पिछङे, दलितों को बेवकूफ बनाकर ब्रहा्मणों ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए बनाया है।
DrParmod Pahwa
मोदी घांची तेली जाती का है..
1..घांची तेली जाती का इतिहास बोलता है कि ये लोग indian नही है..अहमद शाह अब्दाली के साथ आये थे..
2. अब्दाली की सेना के मशालों में तेल भरने का काम था इनका..अफ्रीकन हब्शी थे ये लोग इसीलिये होठ मोटे है..
3. गुजरात मे आज भी एक अफ्रीकन हब्शियों का गांव है..
4. इन हब्शियों की औरते या तो सुल्तान की रखैल थी या वेश्या थी..
5. Anthropology के अनुसार मोटे होठ और घांची तेली का शरीर अफ्रीका का है...
वैसे भी मोदी के परदादा का नाम फखरुद्दीन मोदी था..ये मोदी किसकी औलाद है ये समझ लीजिए अभी भी..
जानते है!
जब " टाईटेनिक " समुन्द्र मे डूब रहा था, तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे, जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा सकते थे!
सबसे करीब जो जहाज़ मौजूद था उसका नाम "SAMSON " था और वो हादसे के वक्त टाईटेनिक से सिर्फ 7 मील की दुरी पर था !
सैमसन के कैप्टन ने न सिर्फ टाईटेनिक की ओर से फायर किए गए सफेद शोले (जोकि इन्तेहाई खतरे की हालत मे हवा मे फायर किया जाता है) देखे थे, बल्कि टाईटेनिक के मुसाफिरो के चिल्लाने के आवाज़ को भी सुना भी था, लेकिन सैमसन के लोग गैर कानूनी तौर पर बहुत कीमती समुन्द्री जीव का शिकार कर रहे थे और नही चाहते थे कि पकडे जाए, लिहाजा वो टाईटेनिक की हालात को देखते हुए भी मदद न करके, अपनी जहाज़ को दूसरे तरफ़ मोड़ कर चले गए!
"ये जहाज़ हम मे से उनलोगों की तरह है, जो अपनी गुनाहों भरी जिन्दगी मे इतने मग़न हो जाते हैं कि उनके अंदर से इन्सानियत का एहसास खत्म हो जाता है और फिर वो सारी जिन्दगी अपने गुनाहो को छिपाते गुजार देते हैं...."
दूसरा जहाज़ जो करीब मौजूद था, उसका नाम "CALIFORNIAN " था जो हादसे के वक्त, टाईटेनिक से 14 मील दूर था. उस जहाज़ के कैप्टन ने भी टाईटेनिक की तरफ़ से मदद की पुकार को सुना और बाहर निकल कर सफेद शोले अपनी आखो से देखा, लेकिन क्योकि टाईटेनिक उस वक्त बर्फ़ की चट्टानो से घिरा हुआ था, उसे उन चट्टानों के चक्कर काट कर जाना पड़ता, इसलिए वो कैप्टन मदद को ना जा कर, अपने बिस्तर मे चला गया और सुबह होने का इन्तेजार करने लगा!
सुबह को जब वो टाईटेनिक के लोकेशन पर पहुँचा तो टाईटेनिक को समुन्द्र की तह में पहुँचे हुए, 4 घंटे गुज़र चुके थे और टाईटेनिक के कैप्टन Adword Smith समेत 1569 मुसाफिर डूब चुके थे......!
"ये जहाज़ हमलोगो मे से उनकी तरह है जो किसी की मदद करने अपनी सहूलत और असानी देखते है और अगर हालात सही ना हो तो किसी की मदद करना अपना फ़र्ज़ भूल जाते है!"
तीसरा जहाज़ "CARPHATHIYA" था जो टाईटेनिक से 68 मील दूर था. उस जहाज़ के कैप्टन ने रेडियो पर टाईटेनिक के मुसाफारो की चीख पूकार सुनी, जबकि उसका जहाज़ दूसरी तरफ़ जा रहा था. उसने फौरन अपने जहाज़ का रुख मोड़ा और बर्फ़ की चट्टानों और खतरनाक़ मौसम की परवाह किए बेगैर, मदद के लिए रवाना हो गया. अगरचे वो दूर होने की वजह से टाईटेनिक के डूबने के दो घंटे बाद लोकेशन पर पहुँच सका, लेकिन यही वो जहाज़ था जिसने लाईफ बोट्स की मदद से टाईटेनिक के बाकी 710 मुसाफिरो को जिन्दा बचाया था और उसे हिफाज़त के साथ न्यूयार्क पहुँचा दिया था!
उस जहाज़ के कैप्टन "आर्थो रोसट्रन" को ब्रिटेन के तारीख के चंद बहादुर कैप्टनों में शूमार किया जाता है और उनको कई समाजिक और सरकारी आवार्ड से भी नवाजा गया था...!
याद रखिए!---
हमारी जिन्दगी मे हमेशा मुश्किलात रहती हैं, चैलेंज रहते हैं, लेकिन जो इस मुश्किलात और चैलेंज का सामना करते हुए भी इन्सानियत की भलाई के लिए कुछ कर जाए, उन्हे ही इन्सान और इन्सानियत याद रखती है!
दुआ करें कि खुदा किसी की मदद की तौफीक दे, क्योंकि ये इन्सानियत की सबसे ऊँची और आला तरीन दर्ज़ा है!
(William Thomas की यादगार पोस्ट
(पोस्ट साभार - सोशल मीडिया)