@myogioffice@myogiadityanath महिला पत्रकार से क्यों डरते हो सामना क्यों नहीं करते सुना जवाब भी देना जानते हो कितने यूनिवर्सिटी बनवाए 56000 स्कूल बंद करवा दिए
रोहिणी घावरी बोल रही की चंद्र शेखर आजाद के साथ कोई नहीं है सिर्फ उसके जात के 10% लोग उसके साथ है..!!
लेकिन अंधभक्तों की बहन रोहिणी मैं तुम्हें बता दूँ मैं ‘पासवान ‘ हूँ और अपना कतरा-कतरा बड़े भाई चंद्र शेखर आजाद भाई के लिए बहाने को तैयार हूँ..!!!
@BhimArmyChief
मेरी एक वीडियो वायरल की जा रही है जिसमें मैं सरस्वती को लेकर सवाल कर रही हूं, यह वीडियो गंदी मानसिकता रखने वाले लोगों को बहुत बुरी लगी है आखिर मैंने क्या गलत बोला??.. मैंने बस सवाल किया ..और अगर जवाब है तो बिना आहत हुए जवाब जरूर दीजिए इसमें कुछ भी गलत नहीं है।..
सामाजिक परिवर्तन की महानायिका, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की 4 बार रहीं पूर्व मुख्यमंत्री, आयरन लेडी माननीया बहन कुमारी मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ व ढेरों बधाईयाँ ।
#HappyBirthdayBehenJi#जनकल्याणकारी_दिवस
बहन कुo मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ, प्रकृति से प्रार्थना करता हूँ कि आप सदैव स्वस्थ रहें और दीर्घायु हों। आपको सादर जय भीम, जय भारत, जय संविधान।
@dgpup महोदय द्वारा पुलिस परेड ग्राउंड के अनधिकृत उपयोग पर संज्ञान लेना केवल एक रस्म अदा करने वाली प्रतिक्रिया है, लेकिन यह बयान मूल और गंभीर प्रश्न से साफ़ तौर पर बचता है—Guard of Honour दिया ही क्यों गया?
मुद्दा किसी स्थान के उपयोग का नहीं बल्कि मूल सवाल तो ये है कि संवैधानिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए किस अधिकार, किस कानून और किस प्रोटोकॉल के तहत एक धार्मिक कथावाचक को Guard of Honour दिया गया?
Guard of Honour धर्म और आस्था का विषय नहीं बल्कि राज्य की संप्रभु शक्ति और संवैधानिक सम्मान का प्रतीक है।
DGP महोदय भूल गए लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री @myogiadityanath कैसे भूल गए कि भारत में Guard of Honour
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायपालिका, सेना के सर्वोच्च पद, किसी शहीद जवान या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए होता है। किसी धार्मिक कथावाचक के लिए नहीं।
किसी धार्मिक व्यक्ति को सलामी देना धर्मनिरपेक्षता की हत्या है, राज्य शक्ति का खुला दुरुपयोग है, संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 27 का सीधा उल्लंघन है।
मुख्यमंत्री जी क्या इस तथाकथित रामराज्य में राजकाज संविधान और कानून से नहीं, बल्कि कथाओं और कथावाचकों से चलेगा?
भारत कोई मठ नहीं, बल्कि एक संवैधानिक गणराज्य है। और राज्य किसी धर्म-विशेष की जागीर नहीं।
इस स्पष्ट उल्लेख के बावजूद एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी (Guard of Honour) दी जाती है—यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है।
सलामी और परेड राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक होती है। यह सम्मान संविधान, राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दिया जाता है।किसी कथावाचक, बाबा या धर्मगुरु का रुतबा बढ़ाने के लिए नहीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि—आस्था को संविधान से ऊपर,धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है।
यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है। यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहाँ राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है।
सवाल उठते है— पुंडरीक गोस्वामी हैं कौन?, वे कौन-सा संवैधानिक पद धारण करते हैं?, किस कानून या प्रोटोकॉल के तहत उन्हें Guard of Honour दिया गया?, क्या अब उत्तर प्रदेश में धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है?
मुख्यमंत्री @myogiadityanath को याद दिलाना ज़रूरी है—
1. संविधान की प्रस्तावना भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करती है, किसी एक धर्म का सेवक नहीं।
2. अनुच्छेद 15: धर्म के आधार पर विशेषाधिकार देना असंवैधानिक है।
3. अनुच्छेद 25–28: राज्य धर्म से दूरी बनाए रखेगा, चरणवंदना नहीं करेगा।
इसका साफ़ मतलब है—संविधान सर्वोच्च है—कोई धर्म नहीं। राज्य का कोई धर्म नहीं होता।
जय भीम,जय भारत,जय संविधान,जय विज्ञान
@UPGovt@CMOfficeUP@dgpup
उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति छात्रावासों की मूल आरक्षित व्यवस्था बहाल करने के संबंध में समाज कल्याण एवं अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री @asim_arun जी को पत्र लिखा।
@UPGovt