HumanityमानवताRationalismतथ्यतार्किकताIndianismभारतीयता
RT Not Endorsement
पुनर्ट्वीट सहमति नहीं
Never Give Up
प्रयास छोड़ना नहीं
हार मानना नहीं
We Support INDIA
@kiran_patniak साइकिल का बटन दबाने पर फूल की पर्ची निकल रही
पीठासीनको जिम्मेदार बताते अनेक मतदाताओंकी शिकायत
सरेआम लोकतंत्रकी हत्या
आयोग इसे मानने से भी करेगा इन्कार
अदालत कहेगी हम पीछे नहीं जा सकते
भले ही देश पीछे चला जाए?
#BanEVM_BringBallot
https://t.co/Kpzi3AvZsF
न्यूयार्क के मेयर का चुनाव ज़ोहरान ममदानी जीत गए हैं। इस अवसर पर कई लोग दिल्ली के मेयर का नाम जानना चाहते होंगे। राजा इक़बाल सिंह है। भारत के पर्यावरण मंत्री का नाम भूपेन्द्र यादव हैं। दिल्ली की हवा में ज़हर घुली हुई है। लेकिन इनमें से कोई सड़क पर उतर कर प्रदूषण दूर करने के लिए कुछ कर रहा है? बल्कि दिल्ली के मेयर राजा इक़बाल सिंह को न्यूयार्क के नए मेयर ज़ोहरान ममदानी को बधाई देनी चाहिए ताकि दिल्ली को पता चले कि यहाँ भी मेयर होता है।
बंदनवार सजाओ रे ..
जर्मनी में वह दौर था, जब हिटलर की लोकप्रियता ठाठें मारती थी। हर घर, हिटलर का मंदिर था।
राष्ट्रवाद के उत्सव के इस दौर में आम घरेलू जीवन पूरी तरह नाजी विचारधारा से रंग गया।
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राजनीति घरों की दीवारों तक उतर आई थी।
हर घर में स्वस्तिक झंडे लगाए जाते थे। सुबह उठते ही बच्चे हिटलर यूथ या बालिका लीग में शामिल होकर हेल हिटलर का नारा लगाते। माताएँ घर सजातीं, तो दीवारों पर हिटलर का बड़ा पोस्टर होता। मेज पर नाजी प्रतीक वाली मेजपोश होती।
रेडियो के मधुर संगीत के बीच, गोएबल्स के प्रचार प्रसारण चलाता। परिवार एकत्र होकर हिटलर की प्रशंसा में गीत गाते। बच्चे स्कूल से हिटलर की तारीफ वाली किताबें लेकर आते। रसोई में माँ मोहल्ले के नाजी दल की मीटिंग की तैयारी करती। जन्मदिन या त्योहारों पर हिटलर को समर्पित कार्ड बाँटे जाते। हिटलर जयंती को राष्ट्रीय अवकाश होता।
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प्रचार फिल्में जैसे ट्रायम्फ ऑफ द विल ने उसे हीरो बनाया।
1936 के बर्लिन ओलंपिक के दौरान यह भाव चरम पर थे। हिटलर को जर्मनी का उद्धारक माना जाता। बच्चे खिलौनों की जगह नाजी यूनिफॉर्म पहनते। नाजीवाद दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया था। सरकार हर माध्यम से इस प्रक्रिया को हवा दे रही थी।
नाजी दल का उदय हुआ, तो वह आम राजनीतिक दल थी। उसे कभी बहुमत नहीं मिला। हिटलर अल्पमत की गठबंधन सरकार में चांसलर बना। और फिर पूरा जर्मनी, उसके पर्सनालिटी कल्ट में बदल गया।
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फिल्में, पोस्टर और अखबार उसे देवतास्वरूप दिखाते। घरों में मीन काम्फ की प्रतियाँ रखी जातीं।
पार्टी सदस्यता अनिवार्य-सी हो गई थी। 1939 तक वह विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा कर सकती थी। उसके 50 लाख से अधिक सदस्य थे।
घरेलू उत्सवों में नाजी थीम होती। क्रिसमस पर स्वस्तिक सजे पेड़, ईस्टर पर हिटलर की तस्वीरें लगती। बच्चे हिटलर यूथ कैंप या कहें, शाखा में जाते, जहाँ राष्ट्रवाद सिखाया जाता। माताएँ मदर क्रॉस पातीं यदि वे अधिक बच्चे पैदा करतीं।
पिता एसएस में शामिल होकर घर लौटते तो परिवार गर्व करता। यह समर्थन स्वैच्छिक भी था, लेकिन दबाव और प्रचार का मिश्रण भी था। नफरत ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई। लोगों ने बढ़-चढ़कर यहूदियों के बहिष्कार में भाग लिया, पड़ोसियों को रिपोर्ट किया।
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कुछ उसके कामों का असर भी था।
1933 में उसके सत्ता में आने के बाद बेरोजगारी 60 लाख से घटकर 1938 तक लगभग शून्य हो गई थी। ऑटोमोबाइल, हथियार कारखाने और सार्वजनिक निर्माण में जमकर रोजगार मिला। आम जीव समृद्ध हुआ।
महिलाएँ उसे पिता जैसा मानतीं। राइनलैंड पर कब्जा, ऑस्ट्रिया विलय ने जर्मन गर्व को हवा दी। राष्ट्र गौरव बढ़ाया। सर्वेक्षणों में, हालाँकि वे नियंत्रित थे, उसे 99 प्रतिशत समर्थन दिखता। लोकप्रियता इतनी कि विरोधी गायब हो गए, या करवा दिए गए।
हिटलर ही जर्मनी था, और जर्मनी ही हिटलर।
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नाजी रैलियाँ विशाल उत्सव थीं। न्यूरेम्बर्ग की रैली में 5 लाख से अधिक लोग इकट्ठे होते। सुबह से लाइनें लगतीं, ट्रेनें, बसें भरकर लोग आते। टिकट नहीं लगता था। हिटलर का भाषण सुनने को वे घंटों इंतजार करते।
बच्चे हिटलर यूथ परेड में, महिलाएँ फूल बिखेरतीं। 1936 रैली में तो 100 किमी लंबी लाइन लगी। लोग रात भर जागते, नारे लगाते कृ यह सामूहिक उन्माद था। युद्ध की शुरुआत में पोलैंड आक्रमण के दौरान, उत्साह चरम पर पहुँच गया। लोग रेडियो पर सुनकर नाचते।
फ्रांस विजय के बाद घरों में विजय उत्सव होता। बच्चे सैनिक बनने को उत्सुक थे। हर घर से एक दो व्यक्ति हिटलर के लिए वर्दी पहन, सीमा पर जाने को उतारू था।
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1941 में सोवियत आक्रमण के बाद से मोड़ आया।
1943 स्टालिनग्राद हार से दरारें पड़ीं।
बमबारी से शहर तबाह होने लगे। हैम्बर्ग, ड्रेसडेन में लाखों मरे। घरों में भूख का आलम था। अब लोग फुसफुसाते- यह पागलपन है।
लेकिन वक्त की चक्की महीन पीसती है। जर्मनों के नशे का पूरा इलाज होना था। 1944 तक थर्ड राइख तबाह हो चुका था। पूरा देश खंडहर में बदल चुका था। औरतें रोटी के बदले अस्मत का सौदा कर रही थीं।
सड़कों पर विदेशी बूट बज रहे थे। रूस में नाजियों ने इतने अत्याचार किए थे, कि वे प्रार्थना कर रहे थे, कि उन्हें अमेरिकी पहले कब्जा कर लें, रूसी नहीं।
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ईश्वर ने न सुनी। इसके बाद बर्लिन में हत्या, बलात्कार और लूट के जो गंदे खेल चले, इतिहास उन पर मौन रखता है। जर्मन भी बात नहीं करना चाहते।
30 अप्रैल 1945 को हिटलर उन्हें बर्बाद, अधर में छोड़कर मर गया।
बर्बाद जर्मनी ने 7 मई निशर्त समर्पण किया। न्यूरेम्बर्ग ट्रायल्स में तमाम बड़े नाजी नेता फाँसी चढ़े।
जो घर हिटलर का उत्सव मनाते थे, अब खंडहर थे। 60 लाख यहूदी मारे गए, 50 लाख जर्मन। राष्ट्रवाद का सपना होलोकॉस्ट और विनाश में बदल गया।
लोग पछता रहे थे, लेकिन देर हो चुकी थी। इस नाजीज्म के उत्सव का अंत युद्ध, मृत्यु और पतन और फिर देश के दो हिस्सों में विभाजन से हुआ।
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बारह साल पहले बंदनवार सजाती इस महिला ने नहीं सोचा होगा, कि वह मौत और बदकिस्मती का जश्न मना रही है।
मौत का बंदनवार सजा रही है।
Only in a fascist state, such an important story will be sunk by the mainstream media by propagating only the govt side without them investigating it.
No mainstream newspapers/news channels have the guts to dig deeper, and bet me, they won't.
Any doubt?
https://t.co/VdXovjQ1OR
टैरिफ की मार के चलते सभी के काम धाम घाटे में हैं,सिर्फ़ एक ही लुच्चा फायदे में है,
मनी लॉंड्रिंग,बैंक फ्रॉड,घूसखोरी,शैल कंपनियों का निर्माण,शेयरों की कीमतों में हेर-फेर जैसे मामले में जिस गौतम अडानी को जेल में होना चाहिए था वो देश को बेच कर ऐश कर रहा है।
नोट:गौतम अडानी हिंदू नहीं है।
भारत के लिए गौरव का क्षण 🇮🇳✌️
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UNO ने इन दो जोक्स को 'जोक ऑफ द सेंचुरी' का अवॉर्ड दिया है। इस अवॉर्ड की शर्त ये थी कि जोक ऐसा होना चाहिए, जिस पे इंसान ही नहीं जंगल के जानवर भी हँस पड़ें।
फाइनल राउंड में इन दोनों जोक्स पर टाई हो गया। जज भी तय नहीं कर पाए कि दोनों में से बेस्ट कौन सा है तो दोनों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित कर दिया गया।
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उसे अपनी डिग्री दिखाने से डर नही लगता सर.
राहुल की बाते साइंटिफिक होती है। फिलॉसफिकल, इकॉनमिक इनसाइट, हिस्टोरिकल पर्सपेक्टिव के तारतम्य में होती है। जातिगत, धार्मिक, रेसियल नफरत की बात नही करता।
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और अंग्रेजी में वो सहज है। अंग्रेजी स्कूलों में पढ़े होने के कारण, दिमाग अग्रेजी में सोचता है। हिंदी भाषी प्रदेशो में यह एक नुकसान की बात है, लेकिन शेष भारत, या विश्व मे लाभ की।
विश्व मे फासिज्म फिर से उभार में है। और राहुल उस फासिज्म के विरुद्ध ग्राउंड जीरो पर लड़ता हुआ एक नामचीन शख्स है। सबसे बड़े लोकतंत्र(?) में नेता विपक्ष है।
यह उसकी स्टैंडिंग है।
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राहुल बिना टेलीप्रॉम्प्टर के घण्टे भर किसी भी विषय पर बोल सकता है। बीच मे अचानक, लोग खड़े होकर कुछ भी पूछ लें, जवाब देता है।
और ये कोई अजब बात नही। यह किसी भी ठीक ठाक कॉमन स्पीकर के गुण है। इसलिए इसलिए बुला लिया जाता है। इन सबके साथ एक और गुण है।
उसे अपनी डिग्री दिखाने से डर नही लगता सर.
❤️🙏
शराबी निठल्ला बेटा अपने बाप दादा का बनाया मकान दुकान/खेत खलियान बेच कर नई स्कॉर्पियो खरीदता है और रात को मुहल्ले के चबूतरे में बैठ कर गरियाता है “मेरे बाप दादा ने मेरे लिए कुछ नहीं किया है।” जरा ध्यान से एक एक पॉइंट को पढ़िए और जानिये क्या किया है नेहरू ने अंग्रेजों द्वारा 200 बरस तक लूटे गए उस देश के लिए जिसके चलते हम आधुनिक भारत का निर्माण कर पाये और आर्थिक प्रगति की रफ्तार पकड़ी।
“नेहरू-महालनोबिस मॉडल” (या द्वितीय पंचवर्षीय योजना का औद्योगिकरण मॉडल) भारत के आर्थिक आधुनिकरण की नींव था। यह मॉडल पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रो. पी.सी. महालनोबिस के विचारों पर आधारित था।
इसने भारत को कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था से औद्योगिक राष्ट्र बनाने की दिशा दी।
यहाँ 5 प्रमुख बिंदु हैं जिनसे भारत ने प्रगति और आधुनिकरण की रफ़्तार पकड़ी 👇
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🧩 1. भारी उद्योगों को प्राथमिकता (Heavy Industry Priority)
•स्टील, मशीन टूल्स, कोयला, बिजली, इंजीनियरिंग जैसे बुनियादी उद्योगों को बढ़ावा दिया गया।
•उद्देश्य था कि भारत आत्मनिर्भर बने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटे।
•परिणामस्वरूप भिलाई, दुर्गापुर, राउरकेला जैसे इस्पात संयंत्र स्थापित हुए।
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🏭 2. सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार (Public Sector Expansion)
•“राज्य को अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका” देने की नीति अपनाई गई।
•नेशनल प्रोजेक्ट्स (डैम, पावर प्लांट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर) शुरू किए गए।
•इससे आधारभूत ढाँचा और रोज़गार दोनों बढ़े।
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📊 3. योजनाबद्ध विकास की अवधारणा (Planned Development Concept)
•प्लानिंग कमीशन के माध्यम से योजनाबद्ध विकास का ढाँचा बनाया गया।
•संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग और प्राथमिकताओं का निर्धारण किया गया।
•इससे विकास में “दिशा और अनुशासन” आया।
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🎓 4. तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा पर बल (Focus on Science & Technology)
•IITs, IISc, IIMs जैसी संस्थाओं की स्थापना इसी दौर में हुई।
•उद्देश्य: तकनीकी दक्षता और वैज्ञानिक मानसिकता का विकास।
•यह भारत के आधुनिक ज्ञान-विज्ञान युग की नींव बना।
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🌾 5. कृषि और उद्योग में संतुलन (Agriculture–Industry Balance)
•कृषि की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई, खाद, ट्रैक्टर आदि में निवेश।
•साथ ही कृषि को उद्योग से जोड़ने का प्रयास — ताकि ग्रामीण भारत भी औद्योगिक विकास से लाभान्वित हो।
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🔹 निष्कर्ष:
नेहरू-महालनोबिस फार्मूले ने भारत को औद्योगिक आत्मनिर्भरता, वैज्ञानिक सोच, और आधुनिक संस्थागत ढाँचे की दिशा में आगे बढ़ाया।
यही भारत के “मॉडर्न नेशन बिल्डिंग” का वास्तविक आरंभ था। 🇮🇳
अगर देश का सीजेआई चाहे तो निचली अदालतों को अपना रवैया बदलना होगा लेकिन देश में उल्टी गंगा बह रही है। अदालतों ने भी नफरत के इस दौर में खूब हवन किया है।
यह दो मामले देखिए। छोटी बहन नेहा सिंह राठौर @nehafolksinger के जमानत की याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया गया कि उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है।
उसी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति को जमानत दे दी जिसने मॉर्फ्ड तस्वीर के साथ यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव @yadavakhilesh को जासूसी के केस में शामिल एक अभियुक्त के साथ दिखाया था।
100s of Crores of Electoral bonds were given to the BJP by pharmaceutical companies to prevent food regulators from banning harmful products that they were selling.
You cannot imagine how many harmful medicines are being allowed
एक स्वादिष्ट पोस्ट 😋
जब आप ये लोकप्रिय भारतीय व्यंजन खाते हैं, तो इनके असली मूल (origin) को याद रखें और इस अद्भुत ‘सांस्कृतिक संगम’ (Syncretic Cuisine) का आनंद लें।
बाहर से आए और भारत में बसे:
1. पाव (Pao Bread): पुर्तगाल से, 16वीं–17वीं सदी में। पहले गोवा और फिर बॉम्बे की बेकरीज़ से फैला।
2. आलू (Potato): पेरू और बोलिविया से, 1610 के आसपास पुर्तगालियों के जरिए गोवा तक। भारत में बड़े पैमाने पर ब्रिटिश राज में (1800s) लोकप्रिय हुआ।
3. टमाटर (Tomato): मैक्सिको से, 1600s में पुर्तगालियों के जरिए गोवा तक। बाद में मुग़लों और अंग्रेजों के दौर में फैला।
4. मिर्च (Chili Pepper): मैक्सिको और मध्य अमेरिका से आई, 1510 के आसपास। पुर्तगाली समुद्री व्यापार के जरिए पश्चिमी तट पर पहुँची।
5. मूंगफली (Peanut): दक्षिण अमेरिका से आई, 1500s–1600s में पुर्तगालियों द्वारा पश्चिमी भारत में।
6. राजमा / फ्रेंच बीन्स (Common Bean): मेसोअमेरिका और ऐंडीज़ से, 1500s–1600s में पुर्तगालियों के जरिए आया और बाद में उत्तर भारत में लोकप्रिय हुआ।
7. मकई / कॉर्न (Maize): मैक्सिको से, 1500s की शुरुआत में पुर्तगाली और स्पेनिश व्यापारियों के जरिए आया।
8. समोसा (Samosa): फारस से, 13वीं–14वीं सदी में दिल्ली सल्तनत के दरबारों के जरिए। मूल रूप से मांस समोसा (meat samosa) था। बाद में आलू आने के बाद ‘आलू समोसा’ बन गया!
9. जलेबी (Jalebi): अरब से, 15वीं सदी में पश्चिम एशियाई व्यापार मार्गों के जरिए उत्तर भारत में पहुंचा।
10. फूलगोभी (Cauliflower): भूमध्यसागरीय क्षेत्र से, 1820s में ब्रिटिश बॉटैनिकल गार्डन (कलकत्ता) के जरिए आई।
11. पत्ता गोभी (Cabbage): यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्र से, 1700s–1800s में अंग्रेज़ों द्वारा लाई गयी।
12. अनानास (Pineapple): दक्षिण अमेरिका से, 1500s के मध्य में पुर्तगालियों द्वारा (गोवा/मालाबार) के रास्ते।
13. पपीता (Papaya): मध्य अमेरिका से, 1500s के मध्य में पुर्तगालियों द्वारा (पश्चिमी तट) पर लाया गया।
14. अमरूद (Guava): मध्य अमेरिका से, 1600s में पुर्तगालियों द्वारा (गोवा/दक्कन) लाया गया।
15. शिमला मिर्च (Bell Pepper): मैक्सिको से, 1500s में पुर्तगालियों द्वारा (मिर्च के साथ ही) लाई गई।
और भी दिलचस्प किस्से:
बिरयानी – फारस से.
काजू (Cashew) – ब्राज़ील से.
कोकोआ (Cocoa) – मेसोअमेरिका से.
सीताफल (Custard Apple) – ट्रॉपिकल अमेरिका से.
चीकू (Sapodilla/Chikoo) – मैक्सिको से.
कृपया और नाम कमेंट में जोड़ें।
साथ ही वो भारतीय मूल के व्यंजन/फल भी लिखें जो पूरी दुनिया में मशहूर हुए।
🇮🇳 भारत का असली स्वाद = देसी + विदेशी का अनोखा संगम! ✨
क्या यह अखबार समूह सांप्रदायिक है?
धर्मविशेषकी आबादी बढ़नेकी खबर ऐसे दिखाया कि पढ़कर कोईभी हिंदुकट्टरपंथी गुस्सेमें आ जाए?
पहले नहीं कहता कि पूरे विश्वकी जनसंख्याकी बात है, भारतकी नहीं
किसने पूछा था?
अगर खुद ही बता रहा है तो हेडलाईनमें क्यों नहीं बताया?
https://t.co/maP44LGufk
"धर्म पूछकर गोली मारना आतंकवाद है.
और धर्म पूछकर लिंच करना,
धर्म पूछकर नौकरी से निकालना,
धर्म पूछकर घर न देना,
धर्म पूछकर घर बुलडोज़ करना, वगैरह वगैरह भी आतंकवाद है.
असली आतंकी को पहचानो."
#EVM_हटाओ_संघी_भगाओ#BanEVM_BanRSS
https://t.co/B4Pb93vXAI