Hello @Cockroachisback@abhijeet_dipke!
We know you are in Pune today. Do yourselves a favour and request for a copy of “Waiting for a Visa” from VBA karyakartas while you are here.
You picked up the copy of the “so-called autobiography of Babasaheb” at an airport bookstore for a PR photo-op and then repeated the same faux pas at Jantar Mantar.
If you are going to use Ambedkarite symbolism as a performative PR stunt, like the BJP and Congress, at least do it properly.
Anyway.
VBA supports the nationwide demand for the resignation of Dharmendra Pradhan, who has jeopardised the careers and future of 23 lakh NEET students! VBA has organised a student-led agitation tomorrow, June 12, in Mumbai, to demand the resignation of Dharmendra Pradhan.
Jai Bhim!
कल्याण, वालधुनी येथील बुद्धभूमी येथे अतिक्रमणाच्या नावाखाली सरकार, प्रशासनाकडून त्या परिसरात असलेल्या बौद्ध धम्मातील प्रतिकांची, स्मारकाची विटंबना आणि अनेक झाडांची कत्तल करण्यात आली. याला विरोध करणाऱ्या भन्तेजींसोबत अरेरावी करण्यात आल्याचे समजले.
याप्रकरणी भन्तेजीं सोबत मी फोनवर बोललो. तसेच या प्रकरणी वंचित बहुजन आघाडी या प्रकरणात लक्ष घालणार असल्याचे सांगितले.
#VBAForIndia #kalyan
अकोला शहरातील तारफैल परिसरात रेल्वे प्रशासनाने कुठलेही पुनर्वसन न करता सुमारे 150 अतिक्रमित घरांवर बुलडोझर कारवाई केली. या प्रकरणी आज पीडित नागरिकांसोबत अकोला जिल्हाधिकारी वर्षा मिना यांची भेट घेऊन पीडितांना तात्काळ पुनर्वसन व घरांचा लाभ देण्याची मागणी केली.
यावेळी जिल्हाधिकाऱ्यांनी सकारात्मक चर्चा करत लवकरात लवकर घरे देण्याचे आश्वासन दिले.
#Akola #VBAForIndia
नागपूरच्या दीक्षाभूमीवर काँग्रेसने त्यांच्या कॅम्पेनमध्ये हिंदुत्ववादी भगवा झेंडा फडकावला, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांचा डावा हात वरती दाखवला. या विरोधात वंचित बहुजन आघाडी नागपूर कमिटीने आक्रमक भूमिका घेत पोलिसांत गुन्हा दाखल केला तसेच दीक्षाभूमी स्मारक समिती आणि तिचा पदाधिकारी असलेला राजेंद्र गवई याला जाब विचारला असता त्यांनी पळ काढला.
🔹VBA कार्यकर्ता : दीक्षाभूमी, बाबासाहेबांचा एवढा अपमान होत असताना स्मारक समिती गप्प का?
🔸राजेंद्र गवई : फोटो पाठवा, बघतो.
🔹VBA कार्यकर्ता : त्या फोटोत बाबासाहेबांचा हाथ चुकीचा दाखवला आहे.
🔸राजेंद्र गवई : मी मुंबईत आहे. तुम्ही मुंबईला कधी येणार?
🔹VBA कार्यकर्ता : दीक्षाभूमी समिती, तुमच्या लोकांनी काहीच कारवाई का केली नाहीये?
🔸राजेंद्र गवई : भन्ते ससाई मला काम करू देत नाही.
🔹VBA कार्यकर्ता : आरोपींवर अट्रोसिटी गुन्हा दाखल करण्यासाठी आमच्यासोबत पोलीस ठाण्यात चला.
🔸राजेंद्र गवई : तुम्ही धरम पेठ पोलिस स्टेशनला जाऊन या.
🔹VBA कार्यकर्ता : आम्ही तुमच्या दीक्षाभूमी स्मारक समितीमध्ये बसून आहोत. तुमचे लोकं आमच्या सोबत पाठवा. तुम्ही भूमिका घ्या.
🔸राजेंद्र गवई : गोलमोल उत्तरं
🔹VBA कार्यकर्ता : बाबासाहेबांचा अपमान होता असतांना तुम्ही, गप्प बसत असाल तर खुर्च्या खाली करा.
🔸राजेंद्र गवई : 5 मिनिटांत फोन करतो. 5 मिनिटात फोन करतो....🏃🏃🏃
पळपुटा राजेंद्र गवई, RSS च्या दीक्षाभूमी स्मारक समितीचा निषेध❗️
#Dikshabhoomi #दीक्षाभूमी
#VBAForIndia #Nagpur #Congress
What idioticity is this!? Seriously!
If the Air Force is needed to transport NEET examination papers, it is not a sign of “strong security” but rather reverberates a strong exhibit of a failed examination system.
NEET paper leaks are not happening because trucks are unsafe. They happen because of deep-rooted corruption, insider involvement, lack of accountability in the administration and system.
Using the Air Force for NEET exam management is a dramatic distraction from the real issue. I can imagine how this idioticity would strongly resonate with the BJP bhakts and in certain newsrooms.
The Indian Air Force exists to protect national security, not to compensate for BJP’s incompetence and deep-rooted corruption in the Ministry of Education!
Dharmendra Pradhan, should be ashamed of himself. Instead of resigning for ruining the future and careers of 23 lakh students, he is indulging in to idiotic tactics to divert the attention from the real issue!
Absolutely shameful!
इटली की मिटेनी नामक केमिकल फैक्ट्री है। उस केमिकल का नाम पीएफएएस है। इस केमिकल को नष्ट नहीं किया जा सकता। इटली की सरकार ने इसे बैन कर दिया है और इस कंपनी के सभी लोग जेल में हैं। इस कंपनी को एक भारतीय कंपनी, विवा लाईफ सायन्स लिमिटेड ने दोबारा खरीदा है और महाराष्ट्र के रत्नागिरी में इसका निर्माण होने वाला है।
भारत की ओर से इजरायल को जो मिलिट्री ग्रेडेड स्टील दिया जा रहा है, उसमें लक्ष्मी ऑरगॅनिक इंडस्ट्रीज इस कंपनी की सब्सिडी है।
प्रधानमंत्री मोदी की जो नीति है और उनकी जो छवि बनी है, उससे भारत की आज कि परिस्थिति खराब हुई है। भाजपा वालों से मैं पूछना चाहता हूं, क्या आप यह कबूल करेंगे कि मोदी दिक्कत में आ चुके हैं? इसी वजह से उन पर दबाव डाला जा रहा है।
मिटेनी केस के पेपर किसी भी भारतीय के हाथ में न लगें, इसकी पैरवी करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी इटली गए थे। चोरी-छिपे इजरायल को मिलिट्री ग्रेडेड स्टील भेजा जा रहा था। उसे छुपाने के लिए और लक्ष्मी ऑरगॅनिक इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने जो कंपनी खरीदी है और रत्नागिरी में जो प्लांट खुलने जा रहा है, उसके पेपर किसी भी भारतीय को न मिलें, यही मोदी का सीधा मकसद था। इसीलिए वे इटली दौरे पर गए थे।
#ItalyVisit #MujaraModi
प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा इटली के लिए था।
इटली जाने का मकसद यह है कि इटली ने भारत से इटली गये हुवे 4 जहाज़ों को रोक दिया है। इन जहाज़ों में करीब 800 टन मिलिट्री-ग्रेड स्टील है। यह स्टील इज़राइल जा रहा है। अगर यह कार्गो इज़राइल जाता है, तो इससे करीब 17 हज़ार गोले बनेंगे, जिनका इस्तेमाल गाज़ा पट्टी में किया जाएगा।
इटली की सरकार पर वहाँ के पोर्ट पर लेबर यूनियनों ने दबाव डालकर इन जहाज़ों को रोक दिया है। यह मिलिट्री स्टील भारत से इज़राइल ले जाया जा रहा है।
जब ईरान को इस बात का एहसास हुआ, तो उसने भारत को अपनी तेल सप्लाई कम कर दी। प्रधानमंत्री मोदी इटली इसलिए गए हैं ताकि दुनिया को इस बारे में पता न चले।
एपस्टीन फ़ाइल में प्रधानमंत्री मोदी का नाम आने के बाद हर देश उन पर दबाव बना रहा है।
#MujaraModi #ItalyVisit
#Modi
📍पुणे, पत्रकार परिषद
प्रधानमंत्री मोदी का विदेश दौरा इटली के लिए था।
इटली जाने का मकसद यह है कि इटली ने भारत से इटली गये हुवे 4 जहाज़ों को रोक दिया है। इन जहाज़ों में करीब 800 टन मिलिट्री-ग्रेड स्टील है। यह स्टील इज़राइल जा रहा है। अगर यह कार्गो इज़राइल जाता है, तो इससे करीब 17 हज़ार गोले बनेंगे, जिनका इस्तेमाल गाज़ा पट्टी में किया जाएगा।
इटली की सरकार पर वहाँ के पोर्ट पर लेबर यूनियनों ने दबाव डालकर इन जहाज़ों को रोक दिया है। यह मिलिट्री स्टील भारत से इज़राइल ले जाया जा रहा है।
जब ईरान को इस बात का एहसास हुआ, तो उसने भारत को अपनी तेल सप्लाई कम कर दी। प्रधानमंत्री मोदी इटली इसलिए गए हैं ताकि दुनिया को इस बारे में पता न चले।
एपस्टीन फ़ाइल में प्रधानमंत्री मोदी का नाम आने के बाद हर देश उन पर दबाव बना रहा है।
: ॲड. प्रकाश आंबेडकर
राष्ट्रीय अध्यक्ष, वंचित बहुजन आघाडी
#VBAForIndia
लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछना चाहिए कि आपने देश की विदेश नीति क्यों बदली? और एक सवाल यह पूछा जाना चाहिए कि क्या एपस्टीन फ़ाइल में आपके नाम के अलावा कुछ और भी है क्या?
: ॲड. प्रकाश आंबेडकर
राष्ट्रीय अध्यक्ष, वंचित बहुजन आघाडी
#MujraModi#NarendraSurrender#VBAForIndia
Both the BJP and Congress in their formerly and presently-administered states have frequently weaponised the draconian UAPA to criminalise dissent and suppress Dalit, Adivasi and Muslim voices advocating for equal, indigenous and minority rights. In fact, the Congress had legislatively supported and voted for the amendments brought by the BJP in 2019. (Do an internet search on how the Congress invoked UAPA in Chhattisgarh and very recently in Telangana.
I have been legally contesting against the UAPA in the Bombay High Court since 2022. Preventive detention in India is not meant to be criminal punishment; it is a precautionary power used only in specific situations where the State believes a person’s future actions may threaten public order or national security.
In 1978, the Janata Party-led government had amended Article 22, related to Preventive Detention, via the Constitution (Forty-fourth Amendment) Act, 1978. The Janata Party government notified all the other section mentioned in the amendment except the Section 3, which sought to amend Article 22 of the Constitution dealing with preventive detention. To this day, that specific amendment to Article 22 has not been brought into force through notification.
In the absence of the notification, Article 22 has become dormant. But in A. K. Roy, Etc vs Union of India & Anr on 28 December, 1981, the five-judges bench of the Supreme Court, ruled that in the absence of notification, the unamended Article 22(4) will still continue. This observation of Judiciary demonstrated that Judiciary has taken over the role of the Parliament by directing that the unamended article will continue till the new amendment is notified. This was a strange judgement which does not hold grounds looking into the various judgments on amendment.
My argument is that since the amendment was not notified, Article 22 of the Constitution dealing with preventive detention is dormant, raising the further question of whether preventive detention laws can be validly sustained under such a constitutional gap, and more importantly, can preventive detention be treated as criminal punishment.
नुकतंच 'भूमिका' नावाच्या नाटकाचा प्रयोग पाहिला. क्षितिज पटवर्धन लिखित, चंद्रकांत कुलकर्णी दिग्दर्शित, श्रीपाद पद्माकर निर्मित आणि सचिन खेडेकर यांनी अभिनय केलेलं हे नाटक.
संविधान, संविधानिक मूल्य, विविध विचार प्रवाहांचा पगडा असणाऱ्या व्यक्तीं सोबतचा (अगदी झेन जी पिढी सोबतचा) सजग परंतु, त्यांना न दुखवता विचार करायला लावणारा संवाद. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरांना जाती, धर्माच्या, प्रतिमा पूजनाच्या पलीकडे घेऊन जाऊन त्यांच्या माणूसपणाच्या व्यापक विचारांची मांडणी हे नाटक करते. आताच्या सर्वच सामाजिक, सांस्कृतिक, राजकीय गुंतागुंतीमुळे कार्यकर्त्यांमध्ये आलेले वैचारिक भंजाळलेपण थोडे तरी दूर करण्याचा प्रयत्न हे नाटक करते. क्षितिज पटवर्धन सारख्या एका तिशी ओलांडलेल्या तरुणाने हा अत्यंत गुंतागुंतीचा विषय चार वर्षांचा अभ्यास करून अडीच तासांमध्ये मांडण्याचा कष्टपूर्वक प्रयत्न केला आहे.
आपल्याला मानवीय संविधानिक मूल्यांच्या आधारावर बदल हवाय तर "भूमिका" घेणे महत्त्वाची आहे. भूमिका घेतल्याने काय सोडावे लागते? कशाचा आग्रह धरावा लागतो? त्यामुळे काय सोसावे लागते? त्यासाठी प्रत्येकाचा कसा कस लागतो? परिस्थिती समोर शरणागती कशी घेतो? या सर्वातून जेव्हा माणूस तगतो तेव्हा काय होते? याची मांडणी कमालीच्या ताकदीने क्षितिजने केली आहे. तर चंद्रकांत कुलकर्णी सारख्या मराठी रंगभूमीवर गेली २५ वर्षे त्या-त्या काळातील सामाजिक नाटके देणाऱ्या दिग्दर्शकाने हे नाटक आताचा काळ लक्षात घेऊन उभे केले आहे. सचिन खेडेकर सारख्या सामाजिक भान असलेल्या उत्तम नटाने ही भूमिका वैचारिक, भावनिक तसेच राजकीय अर्थ नव्हे भावार्थ लक्षात ठेवून उठवली आहे. यात त्यांच्या अभिनयाचा ठसा नव्हे तर एका भारतीय नागरिकत्वाचा ठसा त्यांनी उठवलेला आहे. आणि म्हणूनच त्यांच्या अभिनयात कुठलाही अभिनिवेश नव्हता, तर ते तुम्ही-आम्ही आहोत असेच वाटते.
हे आम्हाला काय सांगणार? असे ज्यांना वाटते, त्यांनी हे नाटक आधी आवर्जून पाहायला हवे आणि नंतरच त्यावर भाष्य करायला हवे. अर्थात दोन तासांत बाबासाहेबांच्या विचारांचा आणि त्याच्या प्रभावाचा इतका मोठा पट उलगडणे शक्य नाहीय. पण तरीही एका सोप्या कथानकामध्ये याची गुंफण केल्याने त्यावरून मोठा पट उलगडतो तो प्रत्येकाच्या डोक्यात आणि मनात !!!
खूप न हसवणारे मात्र मनातल्या मनात एक प्रकारच्या गुदगुल्या करणाऱ्या या नाटकाचा १२६ वा प्रयोग होता. या प्रयोगाला येण्याचा आग्रह नाटकाचे निर्माते श्रीपाद पद्माकर यांनी केला त्याबद्दल त्यांचे विशेष आभार !
सर्वांनी आवर्जून हे नाटक बघावे!
@SachinSKhedekar@Kshitij_P
#bhumika #भूमिका #मराठी_नाटक
📚 प्रबुद्ध भारत मीडिया हाऊस प्रकाशित आणि फारुख अहमद लिखित ✍
'खौफ़ और नफ़रत के दौर में'....
'मुसलमानों का सियासी अजेंडा' हे महत्त्वपूर्ण पुस्तकं येत्या ९ मे २०२६ रोजी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर भवन, दादर (पूर्व), मुंबई येथे प्रकाशित होणार आहे.
प्रमुख उपस्थिती ―
ॲड. प्रकाश आंबेडकर (संपादक प्रबुद्ध भारत)
📍ठिकाण : डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर भवन, गोकुळदास पास्ता लेन, दादर, पूर्व, मुंबई
दिनांक : ९ मे २०२६
वेळ : दुपारी १२.३० वा.
आपण सर्वांनी या पुस्तक प्रकाशन सोहळ्याला उपस्थित राहावे.
― टीम प्रबुद्ध भारत
#PrabuddhBharat #NewBook #BookLaunch
कॉ. गोविंद पानसरे यांनी लिहिलेले 'शिवाजी कोण होता?' हे पुस्तक हे 'कुलवाडी भूषण, बहुजन प्रतिपालक, क्रांतीवीर छत्रपती' ही शिवाजी महाराजांची खरी प्रतिमा लोकांना समजू नये, असे आरएसएसला वाटते.
आरएसएस छावणीतील हिंदुत्ववाद्यांनी स्वतःच्या सोयीची छत्रपती शिवाजी महाराजांची प्रतिमा लोकांसमोर मांडण्याचे षडयंत्र रचले होते, ते षडयंत्र उद्ध्वस्त करण्याचे काम 'शिवाजी कोण होता?' या पुस्तकाने केले आहे.
“शिवाजी कोण होता?” या पुस्तकाच्या सामूहिक वाचनाची चर्चा आयोजित करावी, असे आवाहन वंचित बहुजन आघाडीच्या सर्व जिल्हा, तालुका आणि महानगर समित्यांना करण्यात येत आहे.
"अब नही आउंगा दोस्त''! ये शब्द है सुरत (गुजरात) मैं काम करनेवाले मजदूर के। खुद को विश्वगुरु केहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खुद के राज्य का ये हाल है।
गुजरात मैं गॅस सिलेंडर कि भारी किल्लत से अब तक करीब-करीब 3 लाख मजदूर अपने गांव वापस चले गये है। मुजरा मोदी कि वजह से पुरे देश मैं रिव्हर्स मायग्रेशन बढ रहा है। जानलेवा धूप मैं चोबीस घंटे कतार मैं लगने के बाद भी लोगो को ट्रेन मैं बैठने कि जगाह नही मिल रही है।
प्रचार मोदी चुनावी रॅली मैं बिझी है और आम जनता भूख से मर रही है।
मुजरा मोदी के डान्स की किमत देश चुका रहा है।
#मुजरा_मोदी #EpsteinModi
#MujaraModi #Gujrat
पंतप्रधान मोदीने अमेरिकेसोबत व्यापारी करार केलाय. त्यामुळे भारतीय शेतकऱ्यांसाठी असलेली बाजारपेठ अमेरिकेतील शेतकऱ्यांना खुली होईल. यातून मोठी स्पर्धा होईल.
ब्राझीलची स्वस्त साखर भारतात आल्यावर व्यापारी लोकं त्या साखरेला प्राधान्य देतील अन त्यामुळे भारतीय साखरेला भाव मिळणार नाही.
ज्याप्रमाणे विदर्भातील कापूस उत्पादक शेतकरी आत्महत्या करत होता. कारण, परदेशातील कापूस भारतात येत होता, त्याच्याशी स्पर्धा भारतीय शेतकरी करू शकला नाही, त्यामुळे त्याने आत्महत्या केली. तशीच परिस्थिती ऊस उत्पादक शेतकऱ्यांवर येईल.
एपस्टिन फाईलमध्ये नाव आल्यामुळे पंतप्रधान मोदीने अमेरिकेसोबत करार केला आहे, ज्यामुळे इथला शेतकरी देशोधडीला लागणार आहे.
#TradeDeal #शेतकरी #EpsteinModi
#Farmers
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या जयंतीनिमित्त सर्वांना हार्दिक शुभेच्छा!
आज चैत्यभूमी येथे डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर यांच्या स्मृतीस अभिवादन केले.
#BhimJayanti
Modi has sold India’s sovereignty to foreign powers!
In my statement on January 8, 2025, I had called attention to the delay in production of the indigenous Tejas on time because of a 2-year import delay of its engines from the US.
I had emphasised that the import delay is by design by the US.
A few days ago, Hindustan Aeronautics Limited (HAL) imposed penalties on GE Aerospace for delays in delivering engines for the Tejas. HAL had placed an order for a total of 99 engines but, only 6 of the 99 engines have been delivered so far.
In my another statement on February 20, 2026, I highlighted how the US government has gained a 'backdoor' influence in future procurement in parts to be manufactured for Rafale and exported to India.
Before the Rafale deal, US-based Loar Group acquired France’s LMB Aerospace, which makes critical cooling fans and motors for the Rafale’s electronics and radar. Earlier, as a French firm, its exports didn’t require US approval. Now, under US ownership, these parts could fall under US export controls, giving the US potential influence over Rafale spare parts and repairs.
The “intentional” delay by the US in engine supply for the Tejas jets could be very well be repeated for Rafale as well.
Yesterday, UAE walked from funding around €3.5 billion to the development of the F5 variant of Rafale because France denied access to Rafale fighter jet technologies to UAE.
But, Modi made a ₹3.25 lakh crore deal to buy 114 Rafale fighter jets deal with France, without Rafale’s source code!
UAE did not comprise but Modi did!
In my statement on February 19, 2026, I had warned that Indian Air Force’s lack of access to Rafale’s source code means that it cannot independently update the Rafale’s threat libraries to include new Pakistani or Chinese radar signatures, which was a serious tactical disadvantage against Pakistan in the recent Indo-Pak conflict.
All this means that India, which till now has been making its own security decisions, having foreign nations hold the keys (engines, major parts, source code) to its fighter jets is a major risk to operations autonomy, national security, independence, and sovereignty!
I reiterate my question — why Modi is buying Rafale and not the Russian Su-57E!
Modi has sold himself to the US!
Modi has sold India’s sovereignty to foreign powers!