'अदालतों' की जिम्मेदारी 'संविधान' बचाने की थी, नागरिकों के 'मौलिक अधिकारों' की रक्षा की थी, आजकल अदालतें केवल 'सरकार' को बचाने का काम कर रहीं हैं !
: प्रभाकर कुमार मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
दिल्ली के जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक जी का आमरण अनशन हो या मध्यप्रदेश के छतरपुर का फांसी सत्याग्रह, हर मोर्चे पर आदिवासी समाज लोकतंत्र, संविधान, जल-जंगल-जमीन, शिक्षा और देश के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है।
बीजेपी वाले देश के लिए सफेद चादर का कफ़न लेकर आए हैं।
जब शांतिपूर्ण आवाज़ों को दबाया जाता है, तो संविधान और लोकतंत्र भी आहत होते हैं।
सोनम वांगचुक जैसे लोगों की आवाज़ दबाना, देश की आत्मा को दबाना है।
आज सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके और ये सारे युवा आपके बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं।
अब घर बैठने से काम नहीं चलेगा। अब सबको एक होकर सड़कों पर उतरना होगा। तभी इस देश में कुछ बदलेगा।
उठो, चलो जंतर मंतर।
जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस अस्पताल ले गई. जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने दिल्ली पुलिस पर "Contempt of court" का आरोप लगाया.
CJP | Sonam Wangchuk | Protest
दिल्ली : सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टर से भिड़ गईं सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो
◆ अनशन के 20 दिन बाद दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई
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सोनम वांगचुक के साथ एक और लड़की जिंदगी और मौत के साथ संघर्ष कर रही है।
मैं बात कर रहा हूं नेहा की जो JNU की PhD छात्रा हैं और सोशल एक्टिविस्ट भी।
सोनम वांगचुक के साथ ही पिछले 20 दिनों से नेहा भी भूख हड़ताल पर हैं, इनका भी लगातार स्वास्थ्य गिर रहा है।
लेकिन सोनम वांगचुक के लाइम लाइट में यह लड़की खो सी गई है।
कुर्बानी जो कोई भी दे रहा है चर्चा सबकी होनी चाहिए।
केवल सोनम वांगचुक अनशन नही कर रहे हैं, JNU की स्कॉलर Neha भी अनशन कर रही है. आरक्षण, जाति जनगणना, पिछड़ा दलित और आदिवासियों के मुद्दे पर Neha एक मुखर आवाज हैं.