186 पदों के लिए 2.5 लाख लोगों ने आवेदन किया था। जब नौकरी लगी तो पता चला कि लगभग हर पांचवें व्यक्ति को नौकरी सिर्फ इसलिए मिली क्योंकि वह किसी प्रभावशाली व्यक्ति से संबंधित था।
जो किसान और मज़दूर घर के हैं, उनके हिस्से हमेशा संघर्ष और धोखा आता है।
हाल में नारा आया: बटेंगे तो कटेंगे
लेकिन UP सरकार में नौकरी का कद्दू कटा और अधिकारी-नेताओं में बंट गया।
UP विधानसभा-विधान परिषद में 186 पदों पर नियुक्ति के लिए परीक्षा हुई।
हैरानी की बात ये है कि: 👇🏽
इसमें हर 5 में से 1 नौकरी अधिकारी और नेताओं के रिश्तेदारों को मिली।
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