क्या सिर्फ CEC का इस्तीफा मांगने से सिस्टम सुधरेगा?
BJP ने भी अतीत में चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
सवाल नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता, संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही का है।
व्यवस्था में सुधार जरूरी है
#ElectionCommission#SystemReform#JantarMantar
LoP Shri @RahulGandhi and Congress General Secretary Smt. @priyankagandhi ji met students of the Vision IAS coaching institute.
The students raised serious concerns about a sharp decline in the quality of teaching, mentorship and study materials at the institute. They also said the management had been unresponsive to their demands for fee refunds.
📍 New Delhi
नाम है Tribal Army लेकिन कहीं भी आदिवासियों के लिए ना कोई पोस्ट दिखता है और ना कोई काम
@grok , इनके posts का विश्लेषण करके बताओ कि ये ट्राइबल के लिए कितना लिखते/करते है, 100 में से भी बताओ
गांधीजी की हत्या के बाद सरदार पटेल ने RSS पर प्रतिबंध लगाया था। पटेल ने स्वयं लिखा था कि RSS की गतिविधियों ने देश में ऐसा माहौल बनाया, जिसमें गांधीजी की हत्या जैसी भयावह घटना संभव हुई। इतिहास के इन तथ्यों को याद रखना जरूरी है, ताकि नफरत और हिंसा की राजनीति को बेनकाब किया जा सके।
@milindkhandekar .
जनप्रतिनिधि कोई एक व्यक्ति थोड़े होता है, पूरा सिस्टम होता है
स्थानीय स्तर पर अलग (ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधान से ले करके क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत तक व शहर में सभासद/पार्षद आदि) फिर विधानसभा क्षेत्र पर विधायक, फिर लोकसभा सांसद
परिसीमन से देश या जनता को कोई लाभ नहीं होगा
BJP के Face चेहरा मोदी विदेश जाते है तो पीछे से शाह व पूरी टीम BJP के कामो के लिए लगी रहती है और मोदी कभी बिना बताए विदेश नहीं जाते
लेकिन कांग्रेस में संगठनकर्ता कौन है? कांग्रेस एक NGO नहीं है। बिना चुनाव जीते सब बेकार है
और @RahulGandhi चोरों के तरह विदेश क्यो जाते है?
@priyankac19 .
पहले कांग्रेस में थी फिर शिव सेना में गयी
RS MP बनी, अभी तक सरकारी बंगला खाली नहीं किया गया है
सुष्मिता देव, प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नेताओं ने भारतीय व्यवस्था को पंगु बना दिया है
ये अब सोच रही है कि BJP से ऑफर मिले लेकिन पता नहीं क्यो इन्हें BJP घास क्यो नहीं डाल रही
@priyankac19 .
पहले कांग्रेस में थी फिर शिव सेना में गयी
RS MP बनी, अभी तक सरकारी बंगला खाली नहीं किया गया है
सुष्मिता देव, प्रियंका चतुर्वेदी जैसे नेताओं ने भारतीय व्यवस्था को पंगु बना दिया है
ये अब सोच रही है कि BJP से ऑफर मिले लेकिन पता नहीं क्यो इन्हें BJP घास क्यो नहीं डाल रही
कांग्रेस के तमाम MPs व नेताओं के पूरे प्रोफाइल पर कहीं भी INC नहीं लिखा होता है, आखिर ऐसा क्यों?
मनीष तिवारी को प्रोफाइल/Bio में INC लिखने या फिर हाथ का पंजा लगाने से क्या समस्या है?
@official_aicvc@priyankagandhi
हम से कोई नहीं चाहता है कि भारत में गृह युद्ध हो या फिर हिंसक प्रदर्शन हो
इसीलिए सरकारों को बातचीत के टेबल पर आना होगा
संवाद का रास्ता दिखाना होगा
ऐसे प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए, जहाँ सरकार व विपक्ष के बीच सीधे सवाल जवाब हो सके
लोकतंत्र का सम्मान करो सभी 🙏
आज जो गोदी मीडिया कर रहा है, ये लोग जब बड़े बड़े पदों पर थे, तब ये लोग भी थोड़े बहुत अंतर के साथ यही सब करते थे
भारत में पद से हटने के बाद ही लोगो को नैतिकता आदि याद आता है, पद पर रहते नैतिकता याद आया तो पद से हटना तय होता है
अजित अंजुम का हाल देखिए।
नेहा राठौड़ और ABP के मुद्दे पर जमकर views बटोरना है,
मगर उनके हक़ में एक लफ्ज़ भी नहीं बोलना है क्योंकि बात ABP वाले मित्र रजनीश आहूजा पर आ जाएगी।
अजित अंजुम ने नेहा राठौड़ के मुद्दे पर उनके हक में ‘खुद से’ एक शब्द तक नहीं बोला,
न अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर और न ही अपने यूट्यूब चैनल पर।
मगर नेहा राठौड़ का ABP न्यूज़ को कठघरे में खड़ा करता बयान झट से अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड कर दिया,
क्योंकि नेहा राठौड़ इस वक्त की सबसे बड़ी ख़बर हैं और उस पर जमकर व्यूज़ लेने हैं।
व्यूज़ आ भी गए।
अजित अंजुम के चैनल पर नेहा राठौड़ के ABP News वाले दोनो ही shorts, 1 मिलियन टच करने की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
निश्चित तौर पर इन दोनों ही views ने धनराशि के डालर्स भी बढ़ा दिए होंगे।
दीगर बात है कि अजित अंजुम नेहा राठौड़ से दूसरे तमाम मुद्दों पर खूब इंटरव्यू करते रहे हैं।
मोदी से लेकर पर्सनल सवालों तक!
मगर जब बात अपने मित्र रजनीश आहूजा और उनके चैनल की आई,
तो वे उसी तरह खामोश हो गए जैसे गुलज़ार द्वारा निर्देशित फिल्म ‘कोशिश’ का मूक बधिर किरदार संजीव कुमार!!
बात बात में पीड़ितों को अपने चैनल पर लाइव बिठाने वाले अजित अंजुम की लाइव स्टोरी,
नेहा सिंह राठौड़ के मामले में मुरादाबाद की मार्केट में गुम हुई पीतल की कटोरी क्यों बन गई?
अजित अंजुम जी, नेहा सिंह राठौड़ कौन हैं?
स्त्री अस्मिता का स्वाभिमान हैं?
मित्र को बचाने की खातिर चुप्पी का इमकान हैं,
या फिर views बटोरने के जुनून में डूबी देह का प्राण हैं?
(Screenshots attached)
@INCIndia के पास चेहरा के रूप में @RahulGandhi हो सकते है लेकिन कोई संगठनकर्ता नहीं है
इन्हें समझना होगा कि INC कोई NGO नहीं है बल्कि एक राजनीतिक दल है
और बिना चुनाव जीते या फिर बिना सदन में परफॉर्मेंस किए, कुछ भी नहीं होने वाला है
कोई सीरियस नहीं है? @kharge
सदन का सत्र सिर्फ बजट पास करने तक ही सीमित कर दिया गया है।
27 और 28 अक्टूबर- इन दो दिनों के सत्र में दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और फिर बजट पास कर दिया जाएगा।
हम चाहते हैं कि सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो, लेकिन हमें वहां अवसर नहीं मिलता है। सारे नियमों को दरकिनार कर दिया जाता है।
: उत्तराखंड के नेता प्रतिपक्ष @IamYashpalArya जी
📍 दिल्ली
@grok फिर गड़बड़ी 🤦♂️ One Person - One Vote तो आज भी है।
महिला आरक्षण बिना परिसीमन के भी दिया जा सकता है
बिना आन्तरिक लोकतंत्र के बेहतर पहुँच की बात बेईमानी है
विश्व के मानक क्या है?
भारत में इसको ले करके कोई सर्वे या अध्ययन? आयोग? @grok
परिसीमन को दलगत राजनीति से हट करके देखने की जरूरत है -
सदनों में अभी भी तमाम सांसदों को बोलने तक का समय नहीं मिल पाता है तो फिर अगर MPs/MLAs की संख्या बढ़ जाएगी तो क्या व्यवस्था होगी?
आंतरिक लोकतंत्र के अभाव में ये सब MPs केवल हाथ उठाने के लिए ही होंगे?