SBI और इलेक्टोरल बॉन्ड पर कोर्ट के आदेश से स्पष्ट है कि जिस दिन न्यायालय में जज के चयन में कॉलेजियम सिस्टम में किसी भी पार्टी की सरकार किसी भी प्रकार से कोई लूप होल बनाकर अगर अपने एजेंट के तौर पर एक भी जज बना ले गई तो भारत का लोकतंत्र खत्म होने से कोई रोक नहीं सकता !!
परिवार के मुखिया ने परिवार के हर सदस्य का ध्यान रखा है। कुटुंब में कोई भी ऐसा नहीं है जिसके नाम 5 एकड़ जमीन ना हो। सूत्रों ने बतलाया है कि पूरी तरह कानूनी तरक्की की है परिवार ने। ऐसी सुंदर भारतीय ज्वाइंट फैमिली देखकर मन को बहुत खुशी होती है। डीप स्टेट और जार्ज सोरोस की भारतीय परिवारों को तोड़ने की साज़िश ऐसी ही ज्वाइंट फैमिली विफल कर सकती है।
शम्भावी पीठ हरिद्वार के पूज्य महाराज जी ने अमर शहीद भरत भूषण तिवारी जी की माता जी से मुलाकात कर उनकी न्यायपूर्ण मांगों का समर्थन किया।
जनता की प्रमुख मांगें:
▪️ बिलौटी गांव को पुनः बसाया जाए।
▪️ प्रस्तावित गांव का नाम "भरत तिवारी नगर" रखा जाए।
▪️ स्मारक निर्माण के साथ वहां बसने वाले सभी परिवारों को सरकार द्वारा पक्के मकान दिए जाएं।
▪️ शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
▪️ परिवार को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
▪️ दोषियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाए।
अमर शहीद भरत भूषण तिवारी जी को विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र उनके बलिदान को सदैव याद रखेगा।
🇮🇳 जय हिंद 🇮🇳
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नाम : मीसा भारती
पद : बस बन गयीं सांसद
योग्यता : पापा की परी
काम :कुछ नहीं करना
असली काम : केवल सांसद की सैलरी की रबड़ी खाना
इनके MPLADS को 6 महीने पहले EXPOSE किया लेकिन 2.5 साल बाद भी मैडम ने कुछ नहीं किया।
मुख्यमंत्री के परिवार का रियल एस्टेट के कारोबार में होना और उनकी ही सरकार के निर्णयों के तारों का उससे जुड़ना , एक गंभीर नैतिक संकट है ---- मोहन यादव लगातार भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं -------
चाहे पप्पू यादव हो या कोई अन्य, जो भी पैसा देते हुए ऐसे वीडियो बनाता है, वो केवल अपनी ब्रांडिंग के लिए ऐसा करता है। तुम सेलिब्रिटी हो तो फंड रेजिंग करो, कम से कम 20-25 लाख टाइप का। 25-50 हजार दे कर साले अपना फोटो खिंचाएँगे।
The Naxal movement itself was started by two Brahmins, one of whom later died in police custody.
This fact alone dismantles the false narrative that only Dalits or Adivasis are labeled as Naxals and targeted.
It reveals a fierce, deeply rooted fire within the Brahmin spirit to stand defiant against absolute power, an unwavering devotion to the truth that no political force or shifting titles can ever silence.
इधर मोहन यादव का Paid whitewashing चल रहा है, उधर मध्यप्रदेश में 73% आरक्षण का नतीजा सामने आ रहा है👇
MPPSC के FSO परीक्षा में 22 सीट अनारक्षित (UR) थीं! उसमें से सिर्फ 2 सीट पर GC उम्मीदवार चुने गए!
मतलब open seats में 91% सीट भी OBC ले गए!
तो सवाल ये कि फिर 73% आरक्षण क्यों?
भरत भूषण तिवारी फर्जी एनकाउंटर पर क्या बोले प्रशांत किशोर?
हमें गर्व है कि हमने प्रशांत जी जैसे निर्भीक नेता को चुना है, जो सातवीं फेल और सात लोगों की हत्या के आरोपी बिहार के वर्तमान राजा से डरते नहीं हैं।
Bhagwant Mann: What will you do with Rs 1,000 you get from government this month?
Woman voter : I’ll buy suits
Bhagwant Mann: And what about Rs 1,000 next month?
Woman voter : I’ll buy makeup
This is neither empowerment nor welfare.
It’s an insult to honest taxpayers !
भरत तिवारी का फेक एनकाउंटर हुआ है, सम्राट चौधरी को माफ़ी माँगनी चाहिए और तो और भरत के माता-पिता पर कैसे FIR किया कर दिया, ये कैसा न्याय है:- तेजस्वी यादव (RJD नेता)
तेजस्वी यादव को आज रात या कल ही भरत तिवारी के घर जाना चाहिए।
जाति के जंजाल को तोड़ते हुए एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए पूरे बिहार में आरोपियों पर कार्रवाई के लिए प्रदर्शन करना चाहिए।
भरत तिवारी के पिता और भाई पर भी FIR हो गई है।
जिन अपराधियों पर केस चल रहे हैं, वे चुनाव लड़ रहे हैं, संसद में बैठे हैं।
लेकिन भरत तिवारी ने सरेंडर किया, उसका एनकाउंटर कर दिया गया।
अगर यह तानाशाही नहीं है, तो और क्या है?
कौन कहता है कि बिहार में सबसे अधिक जातिवाद है…..?
भरत तिवारी के एनकाउंटर पर
- पासवान समाज के लोग रो रहे हैं
- भुइयां-मुसहर सहनी के घर में मातम है
- यादव समाज के लोग न्याय के लिए सड़कों पर हैं
- सामान्य वर्ग पूर्णतः इसे अत्याचार बता रहा है
ये चाचा पासवान समाज के हैं। देखिए कैसे कैमरे पर रोने लगे।
आठ वर्ष पूर्व हमारें यहाँ एक भूमिहार RTI एक्टिविस्ट की हत्या हुई थी। जब RTI एक्टिविज्म पीक पर था तब वह सरकारी कार्यों पर RTI डाला करते थे। कोई पुत्र नहीं था , सामाजिक और गर्म मिज़ाज आदमी थे। ख़ुद के भाई से भी ज़मीनी विवाद था।
हालाँकि एक अफ़वाह यह भी थी कि RTI डाल के बाद में वह पचास हज़ार - लाख रुपये में डील कर लेते हैं। मगर फिर भी वह पचास के आसपास जनकार्यों के मुकदमे लड़ रहे थे।
उनके RTI के वजह से प्रखंड के शिक्षा विभाग में उथल-पुथल मचा हुआ था। कई सारे नियुक्त शिक्षकों को नौकरी गंवानी पड़ी थी। कई राशन डीलरों के लाइसेंस कैंसिल हुए थे।प्रखंड के ढेर सारे मुखिया सब के ऊपर भी उन्होंने RTI डाला हुआ था।
मृत्यु के पंद्रह दिन पहले उनके भाई से झगड़ा हुआ और भाई घर में घुसकर उनके कागजातों की सारी फाइल्स लेकर भाग आया। वह FIR का प्रयास करते रहे लेकिन थानाध्यक्ष और डीएसपी पंचायती बैठा के मामला को हल कर पर अड़े रहे। अंततः उन्हें फाइल नहीं मिली।
फाइल नहीं मिला तो उन्हें खतरे का अंदेशा होने लगा। एक नेवता में घबराये हुए लग रहे थे तो कुछ करीबी लोगों ने कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि मेरा हथियार ले लिया है सब, अब कभी भी मेरी हत्या हो सकती है।
उसी शादी के न्योता से लौटते हुए अगले दिन उनकी हत्या हो गई। पत्नी ने कहा कि हत्या सुनियोजित ढंग से हुई इसमें पहले थानाध्यक्ष की मिलीभगत से घर से फाइल निकलवाया गया और बाद में गोली मरवा दी गई।
मरने पर हंगामा हुआ , कई लोगों पर नामजद FIR हुआ। उनकी मूर्ति उनके ही ज़मीन में बना दी गई। आज वे सभी नामज़द अभियुक्त जेल से बाहर हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं। थानाध्यक्ष - डीएसपी भी किसी और जगह बैठकर ऐश कर रहे होंगे।
भोजपुर की घटना पर पूर्व विधायक राजन तिवारी ने सिटी लाइव पे कहा है कि भरत तिवारी जब एसडीएम के यहाँ जब अपने गांव की माँग को लेकर पहुंचा तो एसडीएम ने उससे अभद्र व्यवहार किया। उसके बाद उसने ईगो में आकर असलहा ख़रीदा।
लोग सही बता रहे हैं कि उसका असलहा ख़रीदना , पुलिस पर फायर खोलना ग़ैर-क़ानूनी कृत्य है। मगर एसडीएम का जनता से दुर्व्यहवार करना कौन सा संवैधानिक कृत्य है? अगर वह उनके ऑफिस की मर्यादा ही तोड़ रहा था तो संवैधानिक रास्ते तो यही बताता है कि एसडीएम को FIR दर्ज कराना चाहिए था बजाय उसके साथ अभद्रता करने।
दरअसल यूपीएससी और पीएससी के परिणाम के जश्न के नाम पर हम हर साल संविधान पढ़के देश को दीमक के तरह चूसने वाले गुंडे पैदा कर रहे हैं। जबतक इन दीमकों का स्थाई इलाज नहीं होता तबतक कहीं से कोई युवा फ्रस्ट्रेट होकर भरत तिवारी बनने को निकलता रहेगा। अपनी आवाज अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारियों में ढूंढता रहेगा। इस को रोकना है तो स्टेट को किसी भरत तिवारी से नहीं ऐसे दीमकों से बचने का उपाय ढूँढना पड़ेगा।
आज़ादी के पचहत्तर वर्ष हो गए, अब तो नागरिक को नागरिक समझों सालों। तुम्हारे पास पॉवर है तो ईगो दिखाओगे और जिस दिन पॉवरलेस आदमी अपना ईगो दिखाने लगेगा। वह तुम्हें सनकी लगने लगेगा।
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले का सुप्रीम कोर्ट से स्वतः.संज्ञान लेने की मांग। सुप्रीम कोर्ट के वकील नरेन्द्र मिश्रा ने CJI को पत्र लिखा है।
दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR, मामले की स्वतंत्र जांच, पीडित परिवार और गवाहों को सुरक्षा दिए जाने की मांग की गई है।