उपनिषदों, वेदों का संदेश है कि समस्त मानवता एक ही चेतना की अभिव्यक्ति है, काला व गोरा होना प्रकृति की विविधता का भाग है। जैसे फूलों के रंग, अलग-अलग होते हैं, वैसे ही मनुष्यों की त्वचा के रंग भी अलग - अलग हैं।मनुष्य की वास्तविक पहचान तो,उसके विचार,कर्म, ज्ञान और मानवता से होती है।
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼जागरूकता अनिवार्य विषय है,
अपने लिए, अपने परिवार के लिए
और अपने सनातन समाज के
साथ ही अपने प्रिय देश भारत
के लिए भी. जागरूक नागरिकता
की सतत आवश्यकता रहती है॥
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उपनिषदों, वेदों का संदेश है कि समस्त मानवता एक ही चेतना की अभिव्यक्ति है, काला व गोरा होना प्रकृति की विविधता का भाग है। जैसे फूलों के रंग, अलग-अलग होते हैं, वैसे ही मनुष्यों की त्वचा के रंग भी अलग - अलग हैं।मनुष्य की वास्तविक पहचान तो,उसके विचार,कर्म, ज्ञान और मानवता से होती है।
🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼जागरूकता अनिवार्य विषय है,
अपने लिए, अपने परिवार के लिए
और अपने सनातन समाज के
साथ ही अपने प्रिय देश भारत
के लिए भी. जागरूक नागरिकता
की सतत आवश्यकता रहती है॥
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🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼जागरूकता अनिवार्य विषय है,
अपने लिए, अपने परिवार के लिए
और अपने सनातन समाज के
साथ ही अपने प्रिय देश भारत
के लिए भी. जागरूक नागरिकता
की सतत आवश्यकता रहती है॥
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🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼जागरूकता अनिवार्य विषय है,
अपने लिए, अपने परिवार के लिए
और अपने सनातन समाज के
साथ ही अपने प्रिय देश भारत
के लिए भी. जागरूक नागरिकता
की सतत आवश्यकता रहती है॥
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हिंदुओं के पास
बड़े बड़े मकान हैं
बड़ी बड़ी दुकान है
बड़ी बड़ी फेक्ट्री है
बड़ी बड़ी बिल्डिंग है
बड़े-बड़े फार्महाउस है
बड़ी-बड़ी गाड़ियां हैं
बड़े बड़े मंदिर है
बड़े बड़े शोपिंग मॉल है
हिंदुओं के पास सब कुछ है लेकिन खुद का अपना कोई देश नहीं है,