यदि आप पूर्ण रूप से हिन्दुवादी हैं तो आप से सभी जाति के जातिवादी नाराज़ रहेंगे। यदि आपको अलग अलग मौकों पर अलग अलग वर्ग से गालियाँ मिल रही हैं तो आप समझ जाइए कि आप बिल्कुल सही राह पर हैं।
सभी जाति के जातिवादी एक साथ भाजपा और संघ विरोधी होने को श्रापित हैं। उदाहरण के लिए एक घनघोर जातिवादी यादव किसी ब्राह्मण को फूंटी आँख देखना नहीं चाहता, और एक घनघोर जातिवादी ब्राह्मण यादव को बर्दाश्त नहीं कर पाता, बावजूद इसके ये दोनों एक साथ संघ भाजपा विरोधी होते हैं और सपा/ कांग्रेस/ अविमुक्तेश्वर आदि अलग अलग नाम से एक गिरोह के सदस्य बन जाते हैं।
यह भारतीय राजनीति की विशेषता है कि जो अपने हिंदू पहचान को प्रथम रखता है वह अपने आप संघ भाजपा के साथ खड़ा हो जाता है जबकि जो जातिवादी मानसिकता का व्यक्ति होता है यदि उसके जाति का आप प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री भी बना दो तो वह उसे भी स्वीकार करने में दस बहाने बनाएगा
Over 20M people in China still practice open defecation, putting children at risk of disease and malnutrition.
Through @UNICEFChina-supported programs, schools now have clean toilets, hand washing stations, and safe spaces—giving children health, safety, and dignity.
AI that thinks in India's own languages.
IIT Bombay is proud to present BharatGen to the world: Open, multilingual AI for India's languages and people, at Bharat Innovates 2026 in Nice, France (14–16 June).
BharatGen is built at IIT Bombay's Department of Computer Science and Engineering, led by Prof. Ganesh Ramakrishnan, with Rishi Bal (CEO) and Dr. Maneesh Singh (VP, ML) with a consortium of 9 premier academic institutions. A team of 60+ researchers, engineers and linguists are building AI that includes all scheduled Indian languages, across text, speech and documents.
-> Param2, its foundational text model with reasoning, coding, and tool calling capabilities works across all 22 scheduled Indian languages
-> Shrutam2, for automatic multilingual speech recognition/ STT across Indian languages
-> Sooktam2, a text-to-speech models with zero-shot voice cloning across Indian languages
-> Patram, a document vision model built for understanding Indian-specific documentation
BharatGen powers services in governance, healthcare, education, insurance, finance, and cultural preservation.
A national effort backed by DST and the IndiaAI Mission, BharatGen is India's push for open, homegrown AI, built for 1.4 billion people.
For more information, visit https://t.co/bZul5Lr3yC
Bharat Innovates 2026 · 14 - 16 June · Nice, France
@BharatInnov2026@EduMinOfIndia
#BharatInnovates2026 #IITBombay #BharatGen #DeepTech
मोदी जब तक चाहेंगे तब तक देश पर राज करेंगे। जो मोदी के व्यक्तिगत विरोध में खङा होगा, वह अन्ततः कुंठित और परेशान रहेगा। मोदी को हटाने का बहुत तीव्र अभियान आज से दो दशक पहले चल चुका है, सब प्रकार की प्रताङना, अंध विरोध, आरोप और विद्वेष को मोदी झेलकर ही इतना आगे बढ़े हैं। वह उस गरीब मध्यम वर्ग के आशा और विश्वास के प्रतीक हैं जिसे भारत के कुलीन परिवारों ने सदैव उपेक्षित और उनके हाल पर जीने को मजबूर रखा।
मोदी ने समाज के उस वर्ग को यह विश्वास दिलाया की वह इस देश में पशुवत पङे रहने के लिये नहीं थे, बल्कि वह इस देश के असल मालिक हैं। कांग्रेस ने एम्स, आई आई टी और आई आई एम शुरु किया लेकिन उसे कभी बढ़ाया नहीं, इसके पीछे का कारण क्या था? कारण केवल एक की देश में एक कंट्रोल्ड एलीट क्लास बना रहे। उससे अधिक लोगों को यह समझ स्थापित न हो की दुनिया कहां से कहां पहुंच गयी है। बिलकुल इसे आप तमाम अफ्रीकन देशों के माॅडल से समझ सकते हैं। सन् 2000 की समाप्ति तक भी इस देश में गांव में सङक का मतलब था मिट्टी डाल देना और हाईवे का मतलब था दो लेन की सङक बनाकर बीच में लाईन खींच देना। भूख से मृत्यु की खबरे सामान्य थीं। लोगों के भीतर साफ सफाई का भाव और उसके प्रति जागरुकता शून्य।
क्या एम्स, आई आई टी, एन आई टी, आई आई एम की संख्या बढ़ाना इतना कठीन काम था? नहीं। कांग्रेस देश के कुलीन परिवारों का संगठन बन गया और इसलिए यह ध्यान रखा की देश में मध्यम वर्ग का उदय न होने पाये। मध्यमवर्गीय परिवारों का उदय मतलब आशा और उम्मीद का उदय। यह आशा और उम्मीद अपने साथ तमाम प्रश्न लेकर आती। इसलिए जैसे तैसे देश के बहुसंख्यक आबादी को जीवन के मूलभूत प्रश्नों रोटी कपङा और मकान में उलझाकर रखो ताकि प्रश्नों से बचा जा सके।
श्री अटल बिहारी बाजपेयी और फिर नरेंद्र मोदी जी ने देश के मध्यम वर्ग को उभारने का जो महत्वपूर्ण कार्य किया है उसी कारण हर पांच साल में इतने अधिक परिवर्तन हो जा रहे हैं की नये व्यक्ति को पुराने स्थान को पहचानने में समस्या हो रही है। मोदी जी की सबसे बङी उपलब्धि है निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग को रोटी, कपङा और मकान की चिंता से मुक्त कर उन्हें पशुवत जीवन से आजादी देकर स्वतंत्र चिंतन करने लायक मनुष्य बनाना। यह उपलब्धि इस देश का कोई कुलीन परिवार, परिवार समूह अथवा उनके चेले चमचे, मोदी जी से नहीं छीन सकते। वह इसी तरह मोदी जी से कुढ़ते रहें, और मोदी जी इसी प्रकार अनवरत राज करते रहें।
यदि चर्चाओं को सही माना जाये और टीएमसी के सांसद सच में एन डी ए का हिस्सा हो जायें तो ये अद्भुत संयोग बनेगा। एक ही पार्टी राज्य में भाजपा की विरोधी दल रहेगी और केंद्र में समर्थक। तृणमूल पार्टी, अब पार्टी नहीं एक मजाक बन चुकी है। अति का अंत कैसा होता है, ममता बनर्जी उसकी सटीक उदाहरण हैं।
मेरे एक मित्र हैं। उम्र तो बहुत नहीं है लेकिन देश में दलित चिंतन में उनका एक नाम है। उनसे आज बौध मत पर चर्चा हो रही थी। चर्चा आगे बढ़ते बढ़ते कॉकरोच जनता पार्टी पर चली गयी। उन महाशय ने बहुत बाते कहीं लेकिन एक बात सुनकर मुझे बहुत हंसी आई। उन्होंने कहा की भाई साहब ये नियम रहा है की हमेशा लेफ्ट वाले ही सबसे ज्यादा दलितों को बेवकूफ बनाते रहे हैं, लेकिन इस बार एक दलित ने लेफ्ट वालों का ठीक से काटा है।
कॉकरोच जनता पार्टी वाले उधर धूप से बेहाल होकर मैदान छोङकर भाग खङे हुए, वहीं लगभग हर प्रांत में सैकङों स्वयंसेवक बिना किसी सुविधा के इस घनघोर गर्मी में दो सप्ताह से अपने प्रशिक्षण में बिना किसी शिकायत के लगे हुए हैं।
फंडेड स्वार्थियों का समूह कुकुरमुत्ते की तरह हर साल दो साल में पैदा होते रहते है। संघ परिवार से इससे कोई फर्क नहीं पङता। वह बिना प्रतिक्रिया भाव के अपने काम में लगे रहते हैं।
अन्नामलाई वस्तुतः वहीं काम करने जा रहे हैं जो संघ का मूल काम है अर्थात व्यक्ति निर्माण एवं नेतृत्व का विकास। इसलिए अन्नामलाई के कार्यपद्धति से किसी प्रकार के विरोध का कोई प्रश्न नहीं है।
जब तक वह भारतीय राष्ट्रवाद को लेकर अपने उस विचार पर खङे रहते हैं की तमिल पहचान और भारतीय राष्ट्रीयता एक दूसरे में इस तरह से गुंथे हुए हैं की उनको एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता, तब तक उनका अनावश्यक विरोध करना मूर्खतापूर्ण होगा।
अन्नामलाई के पास अभी बहुत समय है, यह बात सही है की उनके पास धनबल नहीं है, लेकिन उनका जन बल सब प्रकार के बलों पर तब तक भारी पङता रहेगा जब तक की वह अपने एकात्मता के विचार पर कायम रहेंगे। राजनीति में दूरदृष्टी से नैतिक बल ही सबसे बङी पूंजी होती है, फिलहाल अन्नामलाई के पास इसकी भरमार है। उनके नये लीडरशिप प्रोग्राम पर उन्हें बहुत बहुत बधाई।
@annamalai_k
भारत के जाने माने संविधान विशेषज्ञ, पद्मभूषण पुरस्कार से पुरस्कृत, अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखक श्री सुभाष कश्यप जी का आज 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
मेरा उनसे कभी भी मिलना नहीं हो पाया, लेकिन इस बात का मुझे सदैव गर्व रहेगा की न केवल मेरी पुस्तक उनके व्यक्तिगत लाइब्रेरी में उपलब्ध थी बल्कि वह उसके प्रशंसक भी थे।
श्री सुभाष कश्यप जी को हार्दिक श्रद्धांजलि।
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पुज्य महाराज जी से आज सुखद मुलाकात रही। श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के कार्यों के विषय में महाराज जी से विस्तृत चर्चा हुई और उनके आशीर्वाद एवं सहयोग के लिए धन्यवाद अर्पित किया।
महाराज जी भी आज खूब बात करने के मूड में थे, विभिन्न विषयों पर उन्होंने अपने मार्गदर्शन दिया। कल उनका जन्मदिन आने वाला है, इस अवसर पर न्यास की तरफ से माननीय अध्यक्ष प्रो एम एल बी भट्ट जी ने उन्हें बधाई दी।
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डाॅ भूपेन्द्र सिंह
महासचिव - श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास
मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज से आज लखनऊ में श्री गुरु गोरखनाथ सेवा न्यास के संरक्षक श्री एम.एल.बी. भट्ट जी एवं महासचिव डॉ. भूपेंद्र जी ने शिष्टाचार भेंट की।
AI and other technologies will make physical labor and hard work optional in the next hundred years. All basic human needs will begin to be fulfilled without toil. In the last two hundred years, human physical labor has already reduced by more than half, while production has increased manyfold. The change coming in the next hundred years will be even greater than what we have seen in the past two centuries. Human civilization has not yet reached even a quarter of its true potential and glory. The ultimate prosperity of human civilization will arrive when humans begin to live on more than one planet. We will no longer depend on Earth for energy. Our energy reserves will be found elsewhere. We will be able to easily convert one element into another. By understanding the genetics of most diseases, we will directly work on gene therapy. Instead of manufacturing new antibiotics daily to fight bacteria, we will create special bacteria that will enter the bloodstream and directly combat the disease-causing bacteria. As they defeat the enemy bacteria, their own ability to divide will gradually exhaust, and they will automatically die off. The struggle for food, clothing, and shelter will end. Human aesthetic sense and appreciation of beauty will keep rising. Every day, we will create even more beautiful and refined things. Humans will no longer go to fight wars — machines will handle that too. With increasing comfort and abundance, humans will become even lazier. Raising and nurturing children will then seem like the hardest and most difficult task. Taking advantage of this situation, the leftist camp will tell humanity: “Even if humans become extinct, what difference will it make?” and will discourage people from having children. In the future, the single biggest philosophical question before humanity will be: Should we have children or not? Once basic problems are solved, crime will decrease dramatically. However, when everything becomes easily available, loneliness in humans is inevitable. To overcome this loneliness, humanity will have to take up one more challenge. That challenge will be to reach anywhere in the universe merely by wishing or thinking. So far, no significant work has been done in this direction, but humans must fulfill this dream — that by mere thought, they can arrive at any place. Today, 3D technology provides a temporary and partial solution, but it must be perfected. The next hundred years will take humanity to its ultimate prosperity. What were once mere fantasies will become reality. Most of them have already become true. Many new dreams will have to be dreamed. Whatever humans have invented so far — be it fire, the wheel, the steam engine, petroleum, electricity, antibiotics, rockets, or satellites — we have always gone far beyond it. With AI and other technologies, humanity is going to advance much further. We must stop fearing it.
कल मुझे "माॅय होम इंडिया" संस्था द्वारा सम्मानित किया गया। इस संस्था और इसके संयोजक श्री सुनील देवधर जी से मेरा दशकों पुराना परिचय रहा है और आज से डेढ़ दशक पुर्व श्री सुनील जी का मेरे हास्टल में भी कई बार आना जाना हो चुका है। श्री शतरुद्र प्रताप जी जब लखनऊ में संघ के महानगर प्रचारक और सायं विभाग प्रचारक रहे तो उन्होंने ही सर्वप्रथम इस विचार से मेरा परिचय कराया। नार्थ ईस्ट के प्रति मेरा सेंसेटाईजेशन तभी से हुआ। 2012 में आसाम में जब दंगे शुरु हुए तो देश भर में नाॅर्थ ईस्ट के लोगों पर हमले शुरु हो गये, लखनऊ में ऐसे विद्यार्थी बङी संख्या में थे और उन दंगों की आंच यहां भी थोङी सी पहुंची थी, तब उन लोगों के सुरक्षित आवास की व्यवस्था संघ की तरफ से बनाई गयी और उन लोगों से संवाद का काम मैंने किया। इसी प्रकार जब न्याय दर्शन पर अपनी पुस्तक "द काॅमन सेंस" मैंने पुर्ण किया तो उसका लोकार्पण नागालैंड के तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और वर्तमान में वहां के कैबिनेट मंत्री श्री तेमजेन इमना एलांग जी के कर कमलों से कराया। गोरखपुर में भी कुछ महीने पूर्व जब नाॅर्थ ईस्ट के एक महिला चिकित्सक के साथ अभद्रता हुई तो मैंने स्वयं को सक्रिय किया और इसको जिम्मेदारी मानते हुए इसमें त्वरित कार्रवाई के लिये भरसक प्रयास किया।
ऐसे में नार्थ ईस्ट से जुङी संस्था द्वारा मुझे सम्मानित करना, मेरे लिये गौरव का विषय है। इस कार्यक्रम में श्री राम प्रताप सिंह जी द्वारा मुझे आमंत्रित किया गया और इसका हिस्सा बनाया गया, इसके लिये उन्हें हृदय से आभार।