महीनों के शोर-शराबे के बाद घर को आना ठीक वैसा ही है जैसे मीलों दूर की यात्रा के बाद पँछी अपने घोंसलें में लौट आता है ...
तुम्हें नही लगता कि ईश्वर ने " घर " सुकून के लिए ही बनाया है ? ♥️🍃
#Ajeetrajhere#घर
हम इतनी हिम्मत क्यूँ नही जुटा पाते कि जाने वालो को रोक कर कह सके ... " तुम्हारा जाना खलेगा , हो सके तो रुक जाओ ... मत जाओ 🌻"
या शायद हमारा प्रेम हमे ये कह कर रोक देता है " कि पीछे से किसी को आवाज़ नही दी जाती , अशुभ होता है " ❤️
#शायद
एक मुद्दत से पुकारा नही तुमने मुझको
ऐसा लगता है मेरा नाम नही है कोई ...
बस इसी एक बात पर उकताया हुआ फिरता हूँ ,
तुम हो मशरूफ़ , मुझे काम नहीं है कोई ❤️
" तुम्हारी कब्र में मैं दफ़न हूँ ... तुम मुझमें ज़िंदा हो ,
जब भी तुमको वक़्त मिले , फ़ातेहा पढ़ने चले आना "
- निदा फ़ाज़ली साहब की पिता के संदर्भ में पढ़ी गयी एक नज्म की पंक्तियां 💫
माँ आज तीन बरस हो गऐ हैं तेरा हाथ चूमें, तेरा आँचल थामे, तुझे कस कर गले लगाए.. आज ही कि तो बात है जब डॉक्टर ख़बर सुना रहा था और मैं निःशब्द बिन माँ के बच्चे सी तुझे ढूँढ रही थी…
सब कह रहे थे माँ चली गई.. इस बात से अनजान कि तू तो मुझमें समा रही थी..अपनी आँखें बंद कर..मेरी आँखें खोल रही थी।
तू हाज़िर है मुझमें आज भी.. अपनी परवरिश से, उसूलों से, हौसलों से, नीयत से, ताक़त से, मुहब्बत से.. @DrLiyaquat I love you ❤️🩹 माँ