@bossladyshrqggk संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
मानसिक और शारीरिक जुड़ाव, सृष्टि और संतुलन महत्वपूर्ण हैं,
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@Shrutiswaroop संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@Sweetyjhaa संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@Malla746Poonam@srijushah संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@jhonsmithi7e8 संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@kajalp259 संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@Buntymeghwal18@Cute_Manisha_16 संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@dhivya173218 संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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@Nazneenzubair46 संतुष्टि प्रकृति ने सृष्टि के निर्माण और जीवन के आनंद में स्त्री को दिया है संभोग केवल हवाश का साधन नहीं, बल्कि आनंद का माध्यम भी है। यदि इसमें स्त्री की इच्छा और संतुष्टि को नजरअंदाज किया जाता है, तो वह क्रिया विकृती है,
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