अलीगंज अग्निकांड मामले में नया खुलासा: विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने शासन को गुमराह कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों को लगातार बचाते हुए नजर आ रहे हैं, उनके बयान देखें तो वह कभी कहते हैं कि उपभोक्ता की एनओसी से संबंधित संबंधित हमारे पास कोई अभिलेख नहीं है, कभी कहते हैं कि एनओसी ही फर्जी है, जबकि संबंधित उपभोक्ता द्वारा अपने 20 किलोवाट कमर्शियल संयोजन की विद्युत सुरक्षा से निरीक्षण कराने के लिए विद्युत सुरक्षा निदेशालय विभाग के मद में भारतीय स्टेट बैंक के चालान के रूप में ट्रेजरी में रुपए 1150 की धनराशि 23 जून 2016 को जमा कराई गई थी, उपरोक्त चालान की राशि जमा होने के उपरांत विद्युत सुरक्षा निदेश���लय का दायित्व होता है कि वह परिसर का निरीक्षण कर एनओसी जारी करें अब अगर विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा अगले दिन 24 जून 2016 को निरीक्षण कर एनओसी जारी की गई है तो फिर NOC फर्जी कहां से हुई और अगर NOC फर्जी है तो फिर चालान जमा होने के बाद परिसर का निरीक्षण किस अधिकारी ने किया और उस निरीक्षण के बाद NOC निर्गत क्यों नहीं की गई, जबकि शासन का नियम है कि यदि चालान फीस जमा होने के 7 दिन के अंदर एनओसी प्राप्त नहीं ह���ती है तो ऊर्जा निगम के अभियंता विद्युत संयोजन को ऊर्जीकृत क��� सकते हैं।
यदि किसी परिसर में विद्युत सुरक्षा मानकों का अनुपालन नहीं किया गया, विद्युत सुरक्षा ऑडिट नहीं हुआ, संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया गया, तो इन गंभीर लापरवाही की जिम्मेदारी निर्धारित कर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी। लेकिन विद्युत सुरक्षा निदेशालय लगातार अपने लापरवाह अधिकारियों को बचा रहा है, पहले जून 2016 फिर उसके बाद हर 3 साल अर्थात सन 2019, 2022, 2026 में परिसर का विद्युत सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी द्वारा विद्युत निरीक्षण करना चाहिए था लेकिन किसी ने निरीक्षण नहीं किया उनकी इस लापरवाही के कारण 15 निर्दोष बच्चों की जान चली गई, जो की अत्यंत दुखद एवं पीड़ादायक है इस दुखद घटना के बाद लगातार विद्युत सुरक्षा निदेशालय अपने 04 लापरवाह अधिकारियों को बचाने में लगा है और अभी तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
जबकि दूसरी ओर ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को ���नन-फानन में बिना किसी जांच के रात 12:00 बजे एमडी कार्यालय खुलवाकर निलंबन आदेश जारी किया गया।
अधिशा��ी अभियंता के निलंबन आदेश में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित परिसर में स्वीकृत भार (लोड) से अधिक विद्युत भार लगभग तीन माह से संचालित हो रहा था, जिस पर अधिशासी अभियंता द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह आरोप बिल्कुल निराधार एवं तथ्यों से परे है क्यों कि उपभोक्ता के संयोजन की अधिकतम डिमांड माह अप्रैल 2026 में 24.30 किलोवाट, मई में 28.66 किलोवाट तथा अभी इसी माह जून 2026 में 34.18 किलोवाट आई है। नियमानुसार तीन मा��� अनुबंधित भार से अधिक भार प्रयोग करने की दशा में अगले माह जुलाई 2026 में उपभोक्ता को भार वृद्वि हेतु नोटिस दिया जाना न्यायसंगत था, क्योंकि जून की बढ़ी हुई डिमांड जुलाई के मास्टर डेटा में प्रदर्शित होती है। जुलाई माह में प्राप्त डेटा के अनुसार ही अधिशासी अभियंता द्वारा अपने स्तर से भार वृद्धि की कार्यवाही की जा सकती है। जुलाई माह से पूर्व बढ़ी हुई डिमांड के आधार पर अधिशाषी अभियंता को निलंबित ��रना सरासर गलत एवं अवैधानिक है।
अतः उपरोक्त बेहद गंभीर मामले में माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से निवेदन है कि विद्युत सुरक्षा निदेशालय की लापरवाही को नजरअंदाज कर ऊर्जा निगम के निर्दोष अधिशाषी अभियंता का किया गया अन्यायपूर्ण निलंबन आदेश को निरस्त किया जाये तथा विद्युत सुरक्षा निदेशालय के लापरवाह अधिकारियों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए।
~इं• जितेंद्र सिंह गुर्जर
महासचिव उ• प्र• राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
निर्दोष मुख्य अभियंता इं• पंकज अग्रवाल जी का निलंबन बिल्कुल गलत एवं अन्यायपूर्ण है।
ऊर्जा प्रबंधन अपनी नीतियों और आरएमएस सहित तकनीकी सिस्टम की विफलता का ठीकरा ईमानदार और मेहनती अभियंताओं को निलंबित कर उनपर फोड़ रहा है,जो की कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
@myogiadityanath@UPPCLLKO
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को समाप्त कराने हेतु विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों और समस्त जनपदों और परियोजनाओं के संयोजकों/ सह संयोजकों की लखनऊ में 07 दिसम्बर, 2025 को हुई बैठक में सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय -
निजीकरण के विरोध में पूर्ववत आंदोलन जारी रहेगा। निजीकरण का एकतरफा टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आदांलन प्रारंभ कर दिया जाएगा।
निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में जनपदों और परियोजनाओं पर मोबिलाईजेशन हेतु व्यापक दौरे के कार्यक्रम बनाएं जाएंगे।
01 जनवरी 2026 को आंदोलन के 400 दिन पूरे होने पर सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत विरोध प्रदर्शन करेंगे।
01 जनवरी, 2026 से 08 जनवरी, 2026 तक सभी बिजली कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधेगें और कार्यालय समय के उपरांत सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
08 जनवरी को समस्त परियोजनाओं और डिस्कॉम मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन क��ये जाएंगे जिसमें संबंधित डिस्कॉम के अंतर्गत आने वाले सभी जनपदों के वितरण और ट्रांसमिशन के बिजली कर्मी और परियोजनाओं पर संबंधित परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे ।
08 जनवरी, 2026 से 21 जनवरी, 2026 तक समस्त बिजली कर्मी कार्यालय अवधि के उपरांत विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं करेंगे।
21 जनवरी, 2026 को लखनऊ में प्रांतव्यापी विशाल रैली होगी जिसमें आंदोलन के अगले कार्यक्रम घोषित किये जाएंगे।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@mlkhattar
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
आज से ठीक 3 साल पहले 3 दिसंबर 2022 को माननीय ऊर्जा मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा जी व माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी जी की अध्यक्षता में बिजली कर्मचारियों के साथ एक लिखित समझौता हुआ था, उस समझौते में बिजली क्षेत्र में निजीकरण नहीं किया जाएगा यह भी लिखा था तथा अन्य मांगे भी थी जिन पर सहमति बनी थी।
लेकिन द��र्भाग्य का विषय है कि आज 3 साल पूरे होने के बाद भी वह समझौता लागू नहीं किया जा रहा है और मनमाने तरीके से पूंजीपतियों के हित में बिजली के निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है।
अब माननीय मंत्री जी ही समझौते का पालन नहीं कराएगे, तो फिर जनता का लोकतंत्र से ही विश्वास उठ जाएगा।
माननीय ऊर्जा मंत्री श्री @aksharmaBharat जी से पुनः अनुरोध है कि आपके द्वारा 3 दिसंबर 2022 को बिजली कर्मचारियों के साथ किए गए समझौते का पालन कराये जाने की कृपा करें, जिससे कर्मचारियों व जनता का विश्वास आप पर बना रहे।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर सभी संवर्गो के हजारों पदों को समाप्त करने के विरोध में ��था निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 350वें दिन राजधानी लखनऊ के शक्ति भवन पर जोरदार तरीके से विरोध प्रदर्शन किया गया।
@narendramodi
@myogiadityanath
@aksharmaBharat
@UPPCLLKO
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ के लेसा में हजारों पदों को समाप्त किए जाने के विरोध में बिजली कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों बिजली कर्मियों ने शक्ति भवन मुख्यालय पर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर ���पना आक्रोश व्यक्त किया।
@narendramodi
@myogiadityanath
@UPPCLLKO
रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर लेसा में 5600 पद समाप्त किए जाने से हर वर्ग के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा : राजधानी की बिजली व्यवस्था बचाने के लिए बिजली कर्मियों की मुख्यमंत्री से गुहार: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी आंदोलन जारी*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर राजधानी लखनऊ की बिजली व्यवस्था ��र्बाद होने से बचाने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संघर्ष समिति ने कहा कि लखनऊ में बिजली व्यवस्था में लगातार गुणात्मक सुधार हो रहा है किन्तु निजीकरण के लिए मनमाना प्रयोग कर लखनऊ की बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने की कोशिश की जा रही है जिसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने बताया की नई व्यवस्था में लेसा में सभी वर्गों के मिलाकर कुल 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिससे बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी सुधार के प्रति हमेशा पॉजिटिव रुख रखते हैं किन्तु बिजली कर्मियो��� से बिना विचार विमर्श किए केवल निजीकरण की पृष्ठभूमि बनाने हेतु हजारों की तादाद में सभी वर्गों के पदों को समाप्त किया जा रहा है जिससे बिजली कर्मियों में भारी बेचैनी और उबाल है।
आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि सबसे बड़ी मार अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों पर पड़ने जा रही है। 15 मई 2017 के एक आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी होने चाहिए। यह आदेश आज भी प्रभावी है। वर्तमान में लेसा में 154 विद्युत उपकेंद्र है। प्रति उपकेंद्र पर 36 कर्मचारियों के हिसाब से संविदा के 5544 कर्मचारी होने चाहिए। रिस्ट्रक्चरिंग के आदेश के अनुसार लेसा के चारों क्षेत्र में मिलाकर कुल 616 गैंग ��ोंगे और 391 एस एस ओ होंगे। एक गैंग में तीन कर्मचारी काम करते हैं। इस प्रकार 616 गैंग में 1848 संविदा कर्मी काम करेंगे साथ ही 391 एस एस ओ काम करेंगे। इस नई व्यवस्था के हिसाब से 01 नवंबर से कुल 2239 संविदा कर्मी काम करेंगे जबकि 15 मई 2017 के आदेश के अनुसार 5544 संविदा कर्मियों को होना चाहिए । इस प्रकार 3305 संविदा कर्मी एक झटके में हटाए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने बताया की इसी प्रकार अधीक्षण अभियंता के चार पद, अधिशासी अभियंता के 17 पद, सहायक अभियंता के 36 पद, जूनियर इंजीनियर के 155 पद और टी जी 2 के 1517 पद समाप्त किए जा रहे हैं। अन्य संवर्गो के पदों में भी कमी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने बताया की लेसा में रिस्ट्रक्चरिंग के बाद इस प्रकार 5606 पद समाप्त किए जा रहे हैं जिसमें 3305 पद संविदा कर्मियों के और 2301 पद नियमित कर्मचारियों के हैं।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसान��ं के हितों के प्रति जागरूक हैं और इस हेतु सुधार के लिए सदैव तैयार है किंतु कथित सुधार के नाम पर किसी भी स्थिति में बिजली सेक्टर का निजीकरण नहीं होने देंगे। बिजली कर्मियों का संकल्प है कि जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 334वें दिन ��िजली कर्मियों ने प्रदेश भर में सभी जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@mlkhattar
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
निजीकरण की प्रक्रिया में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए निजीकरण का निर्णय निरस्त की मांग: संघर्ष समिति ने उठाए पांच सवाल: राज्य कर्मचारियों के साथ बिजली कर्मियों को भी बोनस दिया जाय
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के मामले में बड़े घोटाले की आशंका को देखते हुए विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष सम��ति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से निजीकरण के सारे प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि निजीकरण का निर्णय प्रदेश के व्यापक हित में तत्काल निरस्त किया जाए।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा दीपावाली के पूर्व 15 लाख राज्य कर्मचारियों को बोनस देने की घोषणा का स्वागत करते हुए संघर्ष समिति ने मांग की है कि दीपावली पर रिकॉर्ड बिजल�� आपूर्ति सुनिश्चित करने में लगे बिजली कर्मियों को भी दीपावली के पूर्व बोनस दिया जाय।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि निजीकरण के मामले में प्रारंभ में ही जिस प्रकार अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति की गई उससे बड़े घोटाले की आशंका बलवती हो गई थी।
संघर्ष समिति ने आज ऐसे पांच बिंदुओं को सार्वजनिक करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से ��ांग की है कि उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नी��ि को देखते हुए निजीकरण के सारे मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराई जाए और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय ।
संघर्ष समिति ने कहा कि पहला बिंदु विगत वर्ष नवंबर में लखनऊ में विद्युत वितरण निगमों की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2024 का आयोजन है जिसमें निजी घरानों ने बड़ी संख्या में भागीदारी की थी और कार्यक्रम को स्पॉन्सर भी किया था। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की पृष्ठभूमि इसी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट में तैयार की गई थी।
इस मीटिंग में देश के इतिहास में पहली बार शीर्ष प्रबंधन द्वारा आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन बनाई गई। उप्र में निजीकरण को अंजाम देने के दृष्टिकोण से उप्र पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल को इसी मीटिंग में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोश��एशन का जनरल सेक्रेटरी बनाया गया और उप्र में ग्रेटर नोएडा में काम कर रही निजी कम्पनी एन पी सी एल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी आर कुमार की डिस्कॉम एसोशिएशन का ट्रेजरार बनाया गया।
दूसरा बिन्दु ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट की नियुक्ति में हितों के टकराव को शिथिलता देना है। इसके साथ ही झूठा शपथ पत्र देने और अमेरिका में पेनल्टी लगने की बात स्वीकार कर लेने के बाद भी ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन को नहीं हटाया गया और इसी कंसल्टेंट से निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार कराए गए।
तीसरी बात बिडिंग हेतु तैयार किए गए आर एफ पी डॉक्यूमेंट के लिए ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को आधार माना गया जो डॉक्यूमेंट आज तक पब्लिक डोमेन में ही नहीं है। इसके पूर्व सितं��र 2020 में ड्राफ्ट स्टैंडर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट जारी किया गया था जिस पर ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित कई संस्थानों की आपत्ति आई थी। इन आपत्तियों का आज तक निस्तारण नहीं किया गया है और गुपचुप ढंग से उत्तर प्रदेश में निजीकरण के पहले ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 जारी कर दिया गया। ड्राफ्ट बिडिंग डॉक्यूमेंट 2025 को न पब्लिक डोमेन में रखा गया है न इस पर किसी की आपत्ती मांग की गई है। उत्तर प्रद��श में निजीकरण करने के लिए यह सब मिली भगत का बड़ा खेल है।
चौथा बिंदु यह है कि निजीकरण के सारे प्रकरण में कॉर्पोरेट घरानों को विश्वास में लेकर पूरी कार्यवाही की जा रहा है। टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्��ा ने कई बार बयान देकर इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आर एफ पी डॉक्यूमेंट उनसे चर्चा करके बनाया गए हैं। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि उप्र में बिजली के निजीकरण को लेकर कार्पोरेट घरानों के बीच 'कार्टेल' बन गया है जो बहुत गम्भीर बात है।
पांचवा बिंदु यह है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचने के लिए इक्विटी को आधार मानकर बेचने की कोशिश की जा रही है। इक्विटी को लॉन्ग टर्म लोन में कन्वर्ट किए जाने के बाद 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था मनचाहे कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के दाम मिल जाएगी।
@narendramodi
@myogiadityanath
@aksharmaBharat
@mlkhattar
आगरा में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का लिया गया संकल्प : विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन और कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन की ऊर्जा मंत्री के साथ हुई बैठक के समाचार के बाद निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष का आह्वान
निजीकरण के विर��ध में आज आगरा में विद्युत अभियंताओं के चिन्तन मंथन शिविर के दौरान जब यह समाचार मिला कि आज ऊर्जा मंत्री ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने हेतु विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन के साथ मीटिंग की है तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा और अभियंताओं ने एक स्वर से संकल्प लिया कि निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आन्दोलन प्रारम्भ कर दिया जायेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार और प्रबन्धन की होगी।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में आगरा में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जा���ेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य ��क्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण ���रते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
ईस्टर्न इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन प्रशान्त चतुर्वेदी ने झारखण्ड में रांची और जमशेदपुर के फ्रेंचाइजीकरण के विरोध में किए गए संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये।
आगरा में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने पर कि आज ऊर्जा मंत्री ने जल निगम के संगम फील्ड हॉस्टल में विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविन्द कुमार, पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु अवैध ढंग से नियुक्त ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन से मीटिंग की है, तो अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा।
उप्र राज्य विद��युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य ��भियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आंदोलन: आन्दोलन के लगातार 300 दिन पूरा होने पर बिजली कर्मियों ने भरी हुंकार : प्रान्त भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन : आरएफपी डॉक्यूमेंट गोपनीय रखने के समाचार से बिजली कर्मियों में उबाल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने चेतावनी दी है कि ���दि जोर जबरदस्ती करके निजीकरण का टेंडर निकाला गया तो टेंडर निकलते ही बिजली कर्मी समस्त जनपदों में सामूहिक जेल भरो आंदोलन प्रारंभ कर देंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी ।
निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 300 दिन पूरा होने पर आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सामूहिक जेल भरो सत्याग्रह प्रारम्भ करने का संकल्प लिया।
राजधानी लख��ऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश और राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज शक्ति भवन मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कहा कि बिजली कर्मी घाटे के झूठे आंकड़े,दमन और उत्पीड़न के नाम पर किसी भी स्थिति में निजीकरण की साजिश कामयाब नहीं होने देंगे।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि यह विदित हुआ ��ै कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच यह तय हुआ है कि टेंडर ��ी पूरी प्रक्रिया गोपनीय रखी जाय। इसके अंतर्गत पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के पांच निगम बनाकर पांच अलग अलग टेंडर निकाले जाएंगे जिनमें एक लिंक दी जाएगी। लिंक तभी खुलेगी जब टेंडर डालने वाली निजी कंपनी पांच लाख रुपए का भुगतान करें साथ में यह शपथ पत्र भी देना होगा की लिंक खुलने के बाद आरएफपी डॉक्यूमेंट को कोई कंपनी सार्वजनिक नहीं करेगी।
संघर्ष समिति ने कहा कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ नियमित मुलाकात हो रही है और डिस्कॉम एसोशिएशन निजीकरण के मामले में बिचौलिए की भूमिका का निर्वाह कर रही है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के बीच में आ जाने के बाद से निजीकरण के मामले में लेन देन की चर्चा भी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश की सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है।ऐसे में टेंडर की पूरी प्रक्��िया और आरएफपी डॉक्यूमेंट को गोपनीय रखना बहुत गंभीर बात है और इस तरह सारी प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार की बू आ रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो संभवत: यह देश के इतिहास में पहली बार होगा की लाखों करोड़ रुपए की परिसंपत्तियों को इतने गुपचुप ढंग से बेचा जा रहा है। संघर्ष समिति ने कहा कि आरएफपी डॉक्यूमेंट को छिपाना बहुत ही गंभीर मामला है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्ष��णांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में विगत 28 नवंबर से लगातार चल रहे आंदोलन के आज 300 दिन पूरे होने पर बिजली कर्मियों,संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर संकल्प लिया कि वे किसानों और उपभोक्ताओं को साथ लेकर निजीकरण के विरोध में अपना आन्दोलन तब तक जारी रखेंगे जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
राजधानी लखनऊ में हुई विरोध सभा को शैलेन्द्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, अजय कुमार, बलबीर सिंह यादव, महेन्द्र राय, पी के दीक्षित, सुहेल आबिद,श्री चन्द ,दीपक चक्रवर्ती, मोहम्मद इलियास , प्रेम नाथ राय, सरजू त्रिवेदी ने मुख्यतया सम्बोधित किया।
राजधानी लखनऊ के अलावा वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
मेरठ में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में मेरठ में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।
चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर का���पोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
पूर्व दिल्ली विद्युत बोर्ड के इ सत्यपाल और इ यशपाल शर्मा जो ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के संरक्षक और सेक्रेटरी (मुख्यालय) है, ने निजीकरण के बाद दिल्ली में बिजली कर्मियों और अभियंताओं की हो रही दुर्दशा के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि निजीकरण बहुत ही भयावह है अतः पूरी शक्ति से संघर्ष की तैयारी करिये।
मेरठ में शिविर के दौरा�� ही यह जानकारी मिलने से कि, पश्चिमांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जानकारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभ��� शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा।
उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष कृष्णा सारस्वत, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संयुक्त सचिव आलोक श्रीवास्तव, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव निखिल कुमार, संघर्ष समिति पश्चिमांचल के संघर्ष समिति के संयोजक सी पी सिंह ने शिविर को संबोधित किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा - विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण : मुंबई में होने वाली मीट के आयोजक , होस्ट और समर्थक संगठनों में निजी घरानों का प्रभुत्व: ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजीकरण में मुख्य भूमिका के चलते उप्र में कांफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का मामला: निजीकरण के विरोध में प्रान्त व्यापी विरोध प्रदर्शन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने बताया कि आगामी 04 एवं 05 नवम्बर को मुम्बई में ह��� रही डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का मुख्य एजेंडा ही विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण है। ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन और निजी घरानों का इस मीट में प्रभुत्व खुलकर दिखाइ दे रहा है।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के लिए जारी किए गए एजेंडा से बिल्कुल साफ हो जाता है कि ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की निजी घरानों के साथ मिली भगत है और निजीकरण में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की सबसे प्रमुख भूमिका है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का आयोजक इंडियन स्मार्ट ग्रिड फोरम है जो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर्ड एक निजी संस्था है। इस संस्था के वेब साइट पर जाने से पता चलता है कि इसका मुख्य उद्देश्य ही निजीकरण की पहल है।
संघर्ष समिति कहा कि यह बहुत ही आपत्तिजनक बात है की उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आशीष गोयल अध्यक्ष की हैसियत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण में लगे हुए हैं वहीं दूसरी ओर ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में आशीष गोयल की ��िजी घरानों के साथ मिली भगत है। संघर्ष समिति ने कहा कि यह सीधे-सीधे कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट (हितों के टकराव) का मामला है जो बहुत गम्भीर बात है ।
डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट के मेजबान टाटा पावर और सह मेजबान बीएसईएस राजधानी पावर और बीएसईएस यमुना पावर हैं जो रिलायंस पावर की विद्युत वितरण कंपनियां है। ध्यान देने योग्य बात है कि मुख्य मेजबान टाटा पावर के सीईओ कई बार ऐलान कर चुके हैं कि टाटा पाव�� उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम को खरीदने की लिए बेताब है।
संघर्ष समिति ने कहा कि ध्यान देने योग्य बात यह है कि इसी प्रकार की डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट नवंबर 2024 में लखनऊ में हुई थी। इसी मीट में ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन का गठन किया गया था जिसमें महाराष्ट्र विद्युत वितरण निगम के सीएमडी लोकेश चंद्र को अध्यक्ष बनाया गया, उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन ��े अध्यक्ष आशीष गोयल को महामंत्री बनाया गया और नोएडा पावर कंपनी के पी आर कुमार को कोषाध्यक्ष बनाया गया। लखनऊ में हुई मीट के कुछ दिन बाद ही पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की घोषणा कर दीगई थी।
संघर्ष समिति ने कहा डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 के एजेंडा से बिल्कुल साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया तेज की जा रही है और इसके बाद महाराष्ट्र ���ें बिजली के निजीकरण की पूरी तैयारी है। ऐसे में संघर्ष समिति ने महाराष्ट्र के बिजली कर्मियों से अपील की है कि वे चार-पांच नवंबर को मुंबई में होने वाली डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट 2025 का पुरजोर विरोध करें।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 296वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रांत भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया।
आज म��ख्यतया वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण नि���मों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।
संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन ���े महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।
बिजली के निजीकरण का विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, एटा, झांसी, बांदा, बरेली, देवीपाटन, अयोध्या, सुल्तानपुर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद में बड़ी सभाएं कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
बिजली व्यवस्था में अप्रत्याशित सुधार के दृष्टिगत बिजली के निजीकरण निरस्त करने की मांग:बिजली के निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में ध्यानाकर्षण कार्यक्रम जारी:
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने आज यहां कहा कि कल दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री जी की अध्यक्षता में आयोजित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था में हुए अप्रत्याशित सुधार की चर्चा की गई । मीटिंग में बिजली की तकनीकी और वाणिज्यिक हानि में निरंत�� कमी की सराहना की गयी है जिसकी पुष्टि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री मा अरविन्द कुमार शर्मा जी द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से स्वयं की गई है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि जब सार्वजनिक क्षेत्र में रहते हुए एटीएंडसी हानियों में काफी गुणात्मक कमी हुई है और प्रदेश में पूर्व में हुए आगरा और ग्रेटर नोएडा ��ा निजीकरण का प्रयोग विफल हो गया है तथा निजीकरण में हुए घोटाले व देश में अन्य जगहों पर निजीकरण के विफल प्रयोग को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जानी चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन कथित घाटे का हवाला देते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की दलील दे रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन का प्रबंधन घाटे को लेकर इतना संवेदनशील है तो उसे सबसे पहले आगरा का फ्रेंचाइजी करार तत्काल रद्द कर देना चाहिए,जिसके चलते पावर कारपोरेशन को प्रति वर्ष 1000 करोड रुपए का नुकसान हो रहा है । संघर्ष समिति ने कहा कि ए टी एंड डी हानियां के गलत आंकड़ों के कारण से टोरेंट पावर को बहुत सस्ती दरों पर पॉवर कॉरपोरेशन बिजली दे रहा जिससे विगत 14 वर्षों में 3432 करोड रुपए की हानि हो चुकी है।
विद्युत क���्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काम करने के बावजूद बिजली कर्मचारियों को लगातार तीन माह तक वेतन नहीं दिया जाना यह बहुत ही गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्यवाही है और पूरी तरह अमानवीय है। संविदा कर्मियों को बड़े पैमाने पर हटाए जाने से विभिन्न जनपदों में प्रदेश की बिजली व्यवस्था ��र इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।निजीकरण किये जाने हेतु बिजली कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के वापस न लिये जाने से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में आज लगातार 293 वें दिन बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और संकल्प व्यक्त किया कि जब तक निजीकरण का फैसला निरस्त नहीं किया जाता और समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस नहीं ली जाती तब तक बिजली कर्मी लगातार आंदोलन जारी रखेंगे।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
'अभियन्ता दिवस’ पर बिजली अभियन्ताओं ने ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया जी को याद किया:बिजली व्यवस्था में लगातार हुए सुधार को देखते हुए पूर्वांचल एवं ��क्षिणांचल वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त करने की मांग: विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं को तैनात किये जाने की मांग:
प्रदेश के बिजली अभियन्ताओं ने अभियंता दिवस के अवसर पर मा. मुख्यमंत्री जी से मांग की है कि उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था में लगातार हो रहे सुधार को देखते हुए पूर्वांचल विद्युत व��तरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। विकसित भारत के संकल्प को सफल बनाने के लिए ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ अभियन्ताओं की ही तैनाती की जाये। इससे प्रदेश की जनता को निर्बाध सस्ती बिजली मिल सकेगी एवं ऊर्जा निगमों के बढ़ते घाटे पर अंकुश लग सकेगा। अभियन्ताओं ने यह मांग आज ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया के 164वें जन्म दिवस पर अभियन्ता संघ द्वारा हाईडिल फील्ड हॉस्टल में आयोजित परि��र्चा कार्यक्रम में की गयी।
‘अभियन्ता दिवस’ समारोह में ‘भारत रत्न’ सर एम0 विश्वेश्वरैया एवं अन्य महान अभियन्ताओं के सराहनीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने बताया कि देश में सबसे पहले 400के0वी0 पारेषण लाइन व उपकेन्द्र की परिकल्पना, निर्माण व संचालन का यशस्वी कार्य, 100 मेगावाट एवं 200 मेगावाट की तापीय इकाईयाँ डिजाइन करने व सफलतापूर्वक संचाल���त करने वाला अग्रणी उ0प्र0 बिजली बोर्ड ही है। विगत जून माह में 31486 मे0वा0 से अधिक बिजली का सफलतापूर्वक पारेषण व वितरण किया गया है जो अब तक का एक रिकॉर्ड है। हाल ही में पारेषण निगम को राष्ट्र स्तर पर स्टेट ट्रांसमिशन कम्पनी ऑफ द इयर का अवॉर्ड भी मिला है जो कि बिजली व्यवस्था में हुए गुणात्मक सुधार का उदाहरण है।
विद्युत अभियन्ता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने आगे बताया कि वर्तमान में प्रदेश में बिजली के 09 निगम हैं तथा इन सभी निगमों के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आईएएस हैं। कई विकसित देशों में तकनीकी विभागों का नेतृत्व उन्हीं तकनीकी विशेषज्ञों को दिया जाता है जिन्होंने उस क��षेत्र में कार्य किया हो। देश की नवरत्न एवं महानवरत्न कंपनियों की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कामयाब प्रतिद्वंदिता का सबसे बड़ा राज यही है कि इन सब में प्रबंध के शीर्ष पद पर विशेषज्ञ हैं। इससे नीति बनाने और उसके क्रियान्वयन में संतुलन रहता है। अतः ऊर्जा निगमों व अभियन्ताओं की दिशा व दशा सुधारने हेतु प्रदेश सरकार प्रदेश हित में ऊर्जा निगमों में चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशकों के पदों पर विशेषज्ञ ���भियन्ताओं की तैनाती किये जाने के सम्बन्ध मेंं कदम उठायें।
पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली कर्मियों का मुख्य उद्देश्य हर घर हर गांव तक सस्ती बिजली पहुंचाना है। बिजली कर्मी सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तर प्रदेश के 3 करोड़ 63 लाख उपभोक्ताओं तक निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य कर रहे हैं। विगत 08 वर्षों में एटी एण्ड सी हानियां 42 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत पर आ गयी हैं जो राष्ट्रीय मापदण्ड है। एटी एण्�� सी हानियों में चालू वित्तीय वर्ष में और कमी आने की सम्भावना है। सार्वजनिक क्षेत्र में उप्र में बिजली व्यवस्था में लगातार सुधार हो रहा है तब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि निजीकरण के पीछे मुख्य कारण घाटा बताया जा रहा है जो पूरी तरह गलत है और पॉवर क���रपोरेशन झूठे आकड़ों के आधार पर घाटा बता रहा है। इसके अतिरिक्त किसानों, बुनकरों आदि को मिलने वाली सब्सिडी और सरकारी विभागों के राजस्व बकाये को भी पॉवर कारपोरेशन घाटे में जोड़कर दिखा रहा है।
विकसित भारत के लिए सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर बनाये रखना जरूरी है। मा0 मुख्यमंत्री जी से अपील की कि प्रदेश की जनता को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के संकल्प को पूरा करने के लिए अनपरा व ओबरा में प्रस��तावित 800-800 मेगावाट की परियोजना को प्रदेश के ही उत्कृष्ट अभियन्ताओं द्वारा उ0प्र0 राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पूर्ण स्वामित्व में स्थापित की जाये। पारेषण में टैरिफ बेस्ड कंपीटीटिव बिडिंग (टीबीसीबी) को बंद कर नई बनने वाली पारेषण की सभी परियोजनाओं, सब स्टेशन और लाईनों को यूपी ट्रांसकों को देने की भी मांग की गई।
लखनऊ में आयोजित अभियंता दिवस समारोह में उपस्थित अभियन्ताओं नें भारत रत्न सर एम0 ���िश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
'अभियन्ता दिवस' पर बिजली कर्मी और अभियन्ता मुख्यमंत्री जी से ऊर्जा निगमों में अभियन्ता प्रबन्धन और निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की अपील करेंगे : शिक्षक दिवस की तरह बिजली कर्मियों को भी अभियन्ता दिवस पर तोहफे की उम्मीद*
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्र��ेश 15 सितम्बर को अभियन्ता दिवस' के अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से अपील करती है कि वे उप्र राज्य विद्युत परिषद की तरह प्रदेश के ऊर्जा निगमों में विशेषज्ञ बिजली इंजीनियरों को शीर्ष प्रबंधन के पदों पर तैनात करने की घोषणा कर विद्युत परिषद के समय के स्वर्णिम काल को वापस करें।
संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि बिजली कर्मी और अभियंता मुख्यम��त्री जी से उम्मीद करते हैं कि वे अभियन्ता दिवस के अवसर पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने का तोहफा बिजली कर्मियों को देंगे जिससे बिजली कर्मी उनके अत्यन्त कुशल नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार कर 2047 में समर्थ उत्तर प्रदेश - विकसित उत्तर प्रदेश का सपना साकार करने में पूरी एकाग्रता से जुट जाएं।
उल्लेखनीय है कि 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री जी ने शिक्षकों को कैशलैस इलाज का तोहफा देकर सुखद आश्चर्य दिया था। इसी क्रम में बिजली कर्मी और अभियन्ता सरकारी क्षेत्र में बने रहने के तोहफे की उम्मीद लगाए हुए हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली कर्मी किसी भी चुनौती के समय सदा ही कसौटी पर खरे उतरे हैं। चाहे महाकुंभ में निर्बाध बिजली आपूर्ति की बात हो या भीषण गर्मी में देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का नया कीर्तिमान बनाने की बात।
सैकड़ों बिजली कर्मियों ने निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर पावर कारपोरेशन में सरकारी क्षेत्र की नौकरी ज्वाइन की थी। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के सरकारी क्षेत्र में बने रहते हुए उन्हें सेवा पूरी करने का अवसर मिले यही आकांक्षा है।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
पावर कॉरपोरेशन ने 25 मार्च 2025 को Grant thornton जो ब्रिटिश कंपनी है उसको बिजली का निजीकरण करने के लिए सलाहकार के रूप में काम करने के लिए 2.39 करोड़ का टेन्डर दिया गया।
टेंडर देने से पहले यह मानक तय किए गए की जो भी कंपनी टेंडर में हिस्सा लेगी उसका कम से कम 3 साल का एवरेज टर्नओवर 500 करोड़ का होना चाहिए कंपनी में कम से कम 500 कर्मचारी होने चाहिए और कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट के दायरे में कोई भी कंपनी नहीं आनी चाहिए।
उसके बाद कंपनियों के हित में काम किया गया और 500 करोड़ के टर्नओवर की लिमिट को घटाकर 200 करोड़ कर दिया गया, 500 कर्मचारियों के बाध्यता को घटाकर 200 कर्मचारी कर दिए गए और कनफ्लिक्ट आफ इंटरेस्ट के प्रावधान को पूरा शिथिल कर दिया गया। क्योंकि जितनी भी कंपनियां सलाहकार के टेंडर में प्रतिभाग कर रही थी वह सभी कंपनिया या तो पावर कारपोरेशन के साथ या उत्तर प्रदेश सरकार के सा�� या जो निजी घराने निजीकरण की बिल्डिंग में प्रतिभाग करेंगे उनके साथ प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से पहले से ही काम कर रही थी।
उसके बाद जब Grant thornton को टेंडर मिलता है तो टेंडर लेते वक्त इस कंपनी के द्वारा शपथ पत्र दिया गया कि पिछले 3 साल में मेरे ऊपर कोई पेनल्टी नहीं लगी है। लेकिन बाद में जब पता चला कि अमेरिका के रेगुलेटर "पब्लिक कंपनी अकाउंटिंग आवर साइड बोर्ड" ने 20 फरवरी 2024 में GT पर 40000 US doller की पेनल्टी लगाई थी।
अमेरिका में लगी पेनल्टी का ऑर्डर सामने आने के बाद फ्रॉड और धोखाधड़ी के मामले में क���पनी पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, ब्लैक लिस्ट होनी चाहिए थी और उसके द्वारा तैयार किए गए निजीकरण के डॉक्यूमेंट को निरस्त किया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ पूरा मामला दबा दिया गया है आज भी वह कंपनी निजीकरण के लिए डॉक्यूमेंट तैयार करने का काम कर रही है जिस इंजीनियर इन कांट्रैक्ट के द्वारा पारदर्शिता के साथ काम करने का प्रयास किया उसे ट्रांसफर कर दिया गया।
यह मामला सिर्फ भ्रष्टाचार न��ीं बल्कि भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मामला संज्ञान में आने के बाद भी कोई कार्रवाई न करना, पूरे मामले को दवा देना, महाभ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
मेरा आप सभी से यही प्रश्न है कि क्या यही उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है ?
हमें पूर्ण विश्वास है कि जब भी निजीकरण की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाएगी बड़े-बड़े लोग भ्रष्टाचार के मामले में जेल जाएंगे।
पावर कारपोरेशन का ���्रबंधन पूंजीपतियों के साथ मिलकर खुलेआम विभाग की सरकारी संपत्तियों को कौड़ियों के भाव चुनिंदा पूंजीपतियों को बेच��े का प्रयास कर रहा हैं। इसके विरोध में बिजली कर्मचारी पिछले 9 महीने से लगातार आम उपभोक्ता और किसानों के साथ मिलकर सड़कों पर पुरजोर संघर्ष कर रहे हैं।
देश की सरकारी संपत्तियों का संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है जब सरकारी विभाग ही नहीं रहेंगे तो सरकारी नौकरी कहां से मिलेगी और जब सरकारी नौकरी ही नहीं रहेगी तो फिर आरक्षण का क्या होगा। हम सभी को सरकारी संपत्तियों को बचाने का प्रयास करना चाहिए।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से अनुरोध है कृपया झूठा शपथ पत्र देने वाली कंपनी जिस पर अमेरिका में 40000 US डॉलर की पेनल्टी लगी हो, उसको निजीकरण के डॉक्यूमेंट तैयार करने के लिए ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट के रूप में पावर कार्पोरेशन प्रबंधन की मिली भगत के तहत रखा गया है कृपया उपरोक्त कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा जो लोग इस प्रकरण को दबाने में लगे हैं उनकी भी स्पष्ट जांच कराये जाने की कृपा करें।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
निजीकरण के पहले वर्टिकल सिस्टम के नाम पर हजारों पदों को समाप्त कर बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने की साजिश : केवल लेसा में लगभग 8000 पद समाप्त करने के निर्णय से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि प���वर कारपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण के नाम पर वर्टिकल सिस्टम लागू कर रहा है और इसके बहाने बिजली कर्मियों के हजारों पद समाप्त किया जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अकेले लेसा में ही 8000 से अधिक पद समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह मनमाने ढंग से हजारों पदों को समाप्त करने के मामले में तत्काल प्रभावी हस्तक्षेप करें अन्यथा पावर कार्प���रेशन प्रबंधन उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था ध्वस्त कर देने पर आमादा है।
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि लेसा में 2055 नियमित पद और लगभग 6000 संविदा कर्मियों के पद मनमाने ढंग से समाप्त पर पॉवर कॉरपोरेशन प्रबन्धन प्रदेश की राजधानी की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने का काम कर रहा है जिसका उपभोक्ता सेवा पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ने जा रहा है।
संघर्ष समिति ने बताया की वर्तमान में लेसा में अधीक्षण अभियंता स्तर के 12 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर आठ किया जा रहा है, अधिशासी अभियंता स्तर के 50 पद स्वीकृत है उन्हें घटाकर 35 किया जा रहा है, सहायक अभियंता स्तर के 109 पद स्वीकृत उन्हें घटाकर 86 किया जा रहा है, अवर अभियंता स्तर के 287 पर स्वीकृत है उन्हें घटाकर 142 किया जा रहा है और टीजी 2 के 1852 पर स्वीकृति उन्हें घटाकर 503 किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त लेखा संवर्ग में अकाउंटेंट के 104 पद हैं उन्हें घटाकर 53 किया जा रहा है, एग्जीक्यूटिव अस्सिटेंट के 686 पद हैं उन्हें घटाकर 280 किया जा रहा है और कैंप असिस्टेंट के 74 पद हैं उन्हें लगभग समाप्त कर 12 किया जा रहा है ।
संघर्ष समिति ने बताया कि पद समाप्त करने और छटनी के मामले में सबसे बड़ी मार संविदा कर्मियों पर पड़ रही है। संविदा कर्मियों के छह हजार से अधिक पद समाप्त किए जा रहे हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिस प्रकार मध्यांचल में,लेसा और केस्को में और पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में हजारों मत समाप्त किये जा रहे हैं उससे बिजली कर्मियों की यह आशंका और बलवती हो गई है की संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण किया जा जाने वाला है। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम तो शुरुआत मात्र है। इससे बिजली कर्मियों का गुस्सा और बढ़ गया है।
निजीकरण हेतु किये जा रहे उत्पीड़न और पदों को समाप्त करने की कार्यवाही के विरोध में आज प्रदेश के समस्त जनपदों पर बिजली कर्मचारियों ने ��ोरदार प्रद��्शन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया।
#stop_privatization_of_uppcl
@narendramodi
@myogiadityanath
@myogioffice
@aksharmaBharat
@ChiefSecyUP
@spgoyal
@UPGovt
@UPPCLLKO
@chairmanuppcl
@yadavakhilesh
@RahulGandhi
@Mayawati
@aajtak
@ABPNews
@ZeeNews
@News18India
@ndtv
@timesofindia
@IndianExpress
@TheEconomist
@EconomicTimes
मध्य प्रदेश में अमरकंटक की तरह उप्र में भी ओबरा और अनपरा में ज्वाइंट वेंचर समाप्त कर उत्पादन निगम को परियोजनायें देने की मांग : राज्य के उत्पादन निगम को देने से 35-40 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती मिलेगी बिजली
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मा० @myogiadityanath जी से मांग की है कि ओबरा और अनपरा में लग रही नई बिजली इकाइयों को ज्वाइंट वेंचर के स्थान पर प्रदेश के व्यापक हित में राज्य विद्युत उत्पादन निगम को दिया जाय।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विगत सप्ताह लिए गए कैब��नेट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने अमरकंटक बिजली घर में जॉइंट वेंचर समाप्त कर नई बनने वाली इकाई मध्य प्रदेश के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।
संघर्ष समिति ने कहा है कि मध्य प्रदेश की कैबिनेट द्वारा लिया गया निर्णय तकनीकी दृष्टि से सर्वथा उपयुक्त और उचित है। उत्तर प्रदेश में भी जॉइंट वेंचर समाप्त कर राज्य के उत्पादन निगम को ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं को सौंपा जाये तो बिजली की उत्पादन लागत 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट तक कम हो जाएगी।
संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां बताया कि मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 28 मार्च 2023 को यह निर्णय लिया था कि अमरकंटक ताप बिजली घर में 660 मेगावाट की नई बिजली इकाई ज्वाइंट वेंचर में एस ई सी एल (कोल इंडिया लिमिटेड) के साथ लगाई जाएगी।
संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार के आदेश की प्रति जारी करते हुए बताया कि मध्य प्रदेश के बिजली कर्मचारियों की संघर्ष समिति ने इसका विरोध किया था और अंततः ढाई साल के बाद मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने अपने ही निर्णय को संशोधित करते हुए अब यह निर्णय लिया है कि अमरकंटक ताप बिजली घर की नई इकाई ज्वाइंट वेंचर में नहीं लगाई जाएगी और इसे मध्य प्रदेश का विद्युत उत्पादन निगम लगाएगा।
उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की तरह उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 27 जुलाई 2023 को यह निर्णय लिया था कि 2×800 ओबरा डी और 2×800 अनपरा ई ताप बिजली परियोजनाओं को ज्वाइंट व��ंचर में एनटीपीसी के साथ लगाया जाएगा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में एक बात समान थी कि राज्य के उत्पादन गृह में पहले से चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर को अनुमति दी गई थी जो विवाद का मुख्य कारण है। राज्य के उत्पादन निगम की चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर में नई परियोजना लगाने का निर्णय पूरे देश में और कहीं नहीं लिया गया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यतः 6 बिं���ुओं को आधार मानते हुए जॉइंट वेंचर का अपना दो साल से अधिक पुराना निर्णय संशोधित कर नई इकाई जॉइंट वेंचर की जगह राज्य के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।
समिति ने बताया कि छह बिंदुओं में सबसे बड़ा बिंदु यह है कि राज्य का उत्पादन निगम यदि एक्सटेंशन प्रोजेक्ट बनाएगा तो परियोजना की कई कामन फैसेलिटीज को देखते हुए बिजली की उत्पादन लागत ज्वाइंट वेंचर की तुलना में 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट कम हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त एक ही परिसर में उत्पादन निगम और ज्वाइंट वेंचर की परियोजनाएं रहने से कई प्रकार की परिचालकीय दि��्कतें उत्पन्न होने की संभावना व्यक्ति की गई थी। एक ही परिसर में दो स्वामित्व की परियोजनाएं रहने से भविष्य में अनेक प्रकार के कानूनी विवाद खड़े होने की स्थित आ सकती है।
ऑपरेशनल डिफिकल्टीज में सबसे बड़ी समस्या रेलवे से कोल् ट्रांसपोर्टेशन की और ऐश डिस्पोजल की सामने आने वाली है। एक ही रेलवे ट्रैक होने से कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि परियोजना के लिए कोयला अनलोड करने में अनावश्यक विलंब होगा।
संघर्ष समिति ने कहा कि ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं के लिए कोयला खदान के मुहाने से (coal pit head ) कोयला लिंकेज नहीं मिल पाया है और 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने के कारण ज्वाइंट वेंचर में बिजली की उत्पादन लागत बहुत अधिक बढ़ने की संभावना है।
राख का डिस्पोजल एक बड़ी समस्या होने जा रही है। सामान्यत: एक ही ऐश पौंड होने से बहुत ही दुरूह स्थिति उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की गई है।
संघर्ष समिति ने बताया कि इन मुख्य बातों को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश की कैबिनेट ने जॉइंट वेंचर का प्रस्ताव निरस्त कर दिया है और परियोजना राज्य के उत्पादन निगम को दे दी है।
संघर्ष समिति ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने जिन बातों की आशंका व्यक्त करते हुए ज्वाइंट वेंचर को निरस्त करने का निर्णय ढाई साल के बाद लिया लगभग वही परिस्थितियां उत्तर प्रदेश में भी ओबरा और अनपरा में है
@narendramodi