ऑनलाइन पार्टी के लियें विदेश से आने की जरूरत नहीं पडती...
2 जून की रोटी आराम से मेहनत की खा लो...
दोस्तों, इन जैसे कोक्रोच को भारत मे चप्पल से मरते हसीन यहाँ के बच्चे, साबधान यें वीडियो उनके लिए जो कॉकरोच पार्टी के शिकार हैँ.. 👇🏻
हत्या के बाद आरोपियों ने मुजफ्फरनगर में जाकर पार्टी मनाई। यह बेफिक्री उस यकीन से आती है जो राजनीतिक संरक्षण पैदा करता है। यकीन कि सही जाति और सही संपर्क हों तो कानून ज़्यादा दूर तक नहीं आता।
UP पुलिस ने उस यकीन को गलत साबित किया। तीन शहरों में पीछा किया। एनकाउंटर हुआ।
यही फर्क है पुरानी UP और योगी वाली UP में। पहले वो यकीन काम करता था। आज नहीं करता। अतीक ने जाना। मुख्तार ने जाना। गाजीपुर के इस गैंग ने भी जाना।
और जो लोग अब जाति का शोर मचा रहे हैं, वो उसी पुराने यकीन को वापस लाना चाहते हैं। योगी सरकार वो नहीं होने देगी।
#ZeroToleranceOnCrime
जनता बार बार अपना फैसला सुना रही है लेकिन कुछ लोगों को अब भी लगता है कि वही पुरानी राजनीति चल जाएगी। कॉकरोच बनने के लिए सच में अलग ही किस्म का आत्मविश्वास चाहिए।
#IndiaRejectsCJP
गाजीपुर में जो एनकाउंटर हुआ वो अचानक नहीं हुआ।
उससे पहले एक गैंग था जो सालों से इलाके में आतंक मचाए था। उससे पहले एक आंतरिक विवाद था जिसने गैंग को दो दुश्मन धड़ों में बांट दिया। उससे पहले एक हत्या थी। उससे पहले तीन शहरों में फैली तलाश थी।
#ZeroToleranceOnCrime
गाजीपुर एनकाउंटर के बाद जो जाति का शोर उठा है, उसमें एक बात गायब है।
पीड़ित।
जिस दुकानदार से वसूली ली गई, वो नहीं है। जिस महिला को परेशान किया गया, वो नहीं है। जिसकी हत्या हुई और जिसकी वजह से पूरी पुलिस कार्रवाई शुरू हुई, उसका परिवार नहीं है।
#ZeroToleranceOnCrime
कुछ लोगों को गाजीपुर एनकाउंटर में जाति दिख रही है।
उन्हें यह नहीं दिख रहा कि जिस गैंग की बात हो रही है उसने किस-किस पर ज़ुल्म किया। दुकानदारों से वसूली ली। महिलाओं को परेशान किया। होटल पर फायरिंग की। और एक इंसान की जान ली।
योगी सरकार ने उन सबको इंसाफ दिया जो इस गैंग के शिकार थे। यह काम जाति देखकर नहीं, अपराध देखकर हुआ।
अतीक का नेटवर्क टूटा तो भी यही हुआ। मुख्तार के साथ भी यही हुआ। UP में जीरो टॉलरेंस का मतलब है हर अपराधी के लिए एक जैसा जवाब। गाजीपुर में भी वही जवाब मिला।
#ZeroToleranceOnCrime
The confidence with which the Ghazipur murder accused attended a birthday party in Muzaffarnagar after committing a killing is worth understanding.
That confidence does not come from nowhere. It comes from years of operating inside a system where the right political connections and the right caste identity meant the law kept its distance.
Yogi sarkar spent nine years dismantling that system. Making consequences real for people who had stopped believing in them. The manhunt that crossed three cities and ended in an encounter is exactly that dismantling in action.
The people now raising a caste narrative about this encounter are the same people whose political ecosystem reportedly provided that confidence to these criminals in the first place. They are not reacting to injustice. They are reacting to accountability.
#ZeroToleranceOnCrime
UP में जाति के नाम पर अपराधियों को बचाने का खेल दशकों से चला है।
पहले काम करता था। क्योंकि सरकारें उसी जातीय समीकरण में निवेशित थीं जो अपराधियों को सुरक्षा देता था।
योगी आदित्यनाथ ने वो खेल बंद किया। 9 साल में एक-एक करके। अतीक। मुख्तार। हर ज़िले के गैंग। किसी की जाति ने उन्हें नहीं बचाया।
गाजीपुर में भी नहीं बचाया। एक गैंग जो रंगदारी, हत्या और हिंसा में डूबा था, कानून की पकड़ में आया। एनकाउंटर हुआ।
और अब वही पुराना खेल फिर से खेला जा रहा है। जाति का शोर। लेकिन अब UP की जनता उस खेल को पहचानती है। और 9 साल का रिकॉर्ड उस शोर का सबसे मज़बूत जवाब है।
#ZeroToleranceOnCrime
गाजीपुर के इस मामले की पूरी कहानी एक सीधी लकीर में चलती है।
आपराधिक गैंग। सालों की रंगदारी और हिंसा। मुख्तार नेटवर्क से कथित जुड़ाव। राजनीतिक संरक्षण। गैंग में आपसी झगड़ा। महीनों की हिंसा। हत्या। तीन शहरों में भागे आरोपी। UP पुलिस का पीछा। एनकाउंटर।
यह लकीर साफ है।
लेकिन जो लोग जाति की राजनीति करना चाहते हैं वो आपको सिर्फ आखिरी बिंदु दिखाते हैं। बाकी सब छुपा लेते हैं। क्योंकि पूरी लकीर दिखाने पर उनका एजेंडा काम नहीं करता। योगी सरकार ने पूरी लकीर के साथ काम किया। संदर्भ के साथ। सबूत के साथ।
#ZeroToleranceOnCrime
कॉकरोच को जितनी बार हटाओ वह फिर लौट आता है। कुछ राजनीतिक विचारधाराएं भी शायद इसी सिद्धांत पर चलती हैं। जनता का संदेश साफ होने के बाद भी बने रहना अलग ही तरह का कॉन्फिडेंस मांगता है।
#IndiaRejectsCJP
They went full woke and forgot what ordinary Indians actually care about. Never go full woke not even 0.1% because when ideology replaces common sense you end up completely disconnected from reality. #IndiaRejectsCJP
केजरीवाल जी, हर समस्या का समाधान तथ्यों और काम से निकलता है, आरोपों और अफवाहों से नहीं। दिल्ली की जनता अब जवाब नहीं, परिणाम चाहती है। भाजपा सरकार जल प्रबंधन को मजबूत करने में जुटी है, जबकि आप अभी भी राजनीति में व्यस्त हैं।
झूठ और आरोपों की राजनीति की एक सीमा होती है। दिल्ली की जनता समझदार है और सच जानती है। पानी की समस्या का समाधान प्रशासनिक प्रयासों से होगा, न कि रोज़ नए आरोप लगाने से।
दिल्लीवासियों को पानी मिले, इसके लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन हर मुद्दे पर साजिश का नैरेटिव बनाना समस्या का समाधान नहीं है। अब समय है कि राजनीति से ऊपर उठकर जनता के हित में काम किया जाए।
भीषण गर्मी में पानी का वाष्पीकरण बढ़ना एक वैज्ञानिक तथ्य है, कोई राजनीतिक षड्यंत्र नहीं। जनता को भ्रमित करने के बजाय वास्तविक चुनौतियों और उनके समाधान पर बात होनी चाहिए। दिल्ली को विकास चाहिए, बहाने नहीं।
केजरीवाल जी, हर समस्या का समाधान आरोप नहीं होता।
दिल्ली की भाजपा सरकार पानी, बिजली और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है, जबकि आप हर मुद्दे पर भ्रम फैलाने में लगे हैं। दिल्ली की जनता अब बहानों से नहीं, काम से जवाब चाहती है।
दिल्ली को विकास चाहिए, विवाद नहीं।
जब भाजपा सरकार जनता की समस्याओं के समाधान में जुटी है, तब केजरीवाल जी हर विषय को राजनीतिक रंग देने में व्यस्त हैं। जनता अब सच और प्रदर्शन के बीच का फर्क अच्छी तरह समझती है।
"केजरीवाल जी, अफवाहों से दिल्ली की प्यास नहीं बुझेगी! भाजपा सरकार पानी के समाधान पर काम कर रही है और आप हर बात में साजिश ढूंढ रहे हैं। गर्मी में वाष्पीकरण बढ़ता है ये फिजिक्स है, राजनीति नहीं। जनता अब बहाने नहीं, नल से पानी चाहती है।"
जब मुख्यमंत्री थीं तब Evaporation को Water Loss का कारण बताती थीं, और आज उसी तथ्य को नकारकर राजनीति की जा रही है। आखिर सच बदला है या सिर्फ़ कुर्सी बदल गई है?
जनता सब देख रही है। जब खुद सरकार में थे तब पानी के नुकसान के लिए Evaporation का हवाला देते थे, आज उसी बात पर हंगामा कर रहे हैं। यह विरोधाभास नहीं तो और क्या है?